कोरोना संक्रमित लोग हमारे आसपास घूम रहे हैं और हमें पता ही नहीं है. वायरस हर इंसान की इम्यूनिटी पावर को देख कर हमला कर रहा है, किसी को कम तो किसी को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है. इसलिए लौकडाउन भले खत्म हो गया हो, औफिस जाना शुरू हो गया हो, मैट्रो, ट्रेन, बसों ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी हो, मगर ठंड के मौसम में कोरोना को ले कर हमें और ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है.

दिल्ली में कोविड महामारी की तीसरी लहर चल रही है. डाक्टर सुगंधा गुप्ता, संस्थापक व वरिष्ठ मनोचिकित्सक दिल्ली माइंड क्लीनिक, करोल बाग, हमें पोस्ट कोविड के बारे में पूरी जानकारी दे रही हैं:

क्या है कोविड की तीसरी लहर का कारण

– मौसम में बदलाव और प्रदूषण में बढ़ोतरी.

– लौकडाउन के बाद धीरेधीरे खुलते व्यवसाय और बाजार.

– त्योहारों और शादियों का समय.

– लंबे समय से नियमों में बंधे लोगों को छूट मिलने पर लापरवाही.

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इन बढ़ते आंकड़ों के साथ एक चीज सम?ानी बहुत जरूरी है और वह यह कि हम में से 60-70% लोग या तो कोविड से ग्रस्त हो चुके हैं या फिर किसी कोविड पेसैंट के संपर्क में आ चुके हैं. जहां कई लोग हलकेफुलके लक्षण आने पर भी बारबार टैस्ट करा रहे हैं, वहीं कुछ मरीज ज्यादा बीमार होने के बावजूद सामाजिक बायकाट के डर से टैस्ट कराने से कतरा रहे हैं, तो कई लोग बिना डाक्टर की सलाह के ही कोविड पौजिटिव पेसैंट की परची से दवा खरीद कर खा रहे हैं, जिस का शरीर पर साइड इफैक्ट देखने को मिल रहा है. आप की रिपोर्ट पौजिटिव आई हो या नैगेटिव, चाहे आप हौस्पीटल रह कर आए हों या होम क्वारंटीन में रहे हों, इन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है:

पोस्ट कोविड केयर

– पौष्टिक, घर का बना आहार. तेल, चिकन, मीठा कम, प्रोटीन, फल, सलाद, जूस ज्यादा.

ओमेगा फैटी ऐसिड आप की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

– पूरी तरह से रिकवरी के लिए 6-7 घंटे की नींद जरूरी है.

– व्यायाम करना बेहद जरूरी है. चाहे 15 मिनट की सूर्य की रोशनी में सैर हो या कमरे में ऐरोबिक्स. कसरत आप की मांसपेशियों में रक्तसंचार बढ़ाने के साथ ही हड्डियों में कैल्सियम, विटामिन डी के प्रवाह को भी बढ़ाती है, जिस से बौडी का स्टैमिना बढ़ने में मदद मिलती है.

पिछले 3-4 महीने में कई ऐसे मरीज हमारे पास आए जिन की कोविड रिपोर्ट नैगेटिव हुए

1 महीने से ज्यादा का समय हो गया है या फिर उन के परिवार में कोई पौजिटिव था, लेकिन वे नैगेटिव थे इस के बावजूद ये लोग भय के कारण मानसिक रोग के साथ सामने आ रहे हैं.

इन में से प्रमुख हैं:

पैनिक डिसऔर्डर: अचानक बहुत तेज घबराहट होना, जिस में छाती में दर्द, सांस फूलना, धड़कन बढ़ना, चक्कर, उलटी, बेहोशी जैसा महसूस करना, लेकिन सभी जांचें नौर्मल आती हैं.

इंसोम्निया: नींद न आना, सोने से डर लगना कि कहीं नींद में कुछ हो न जाए, सोतेसोते डर कर नींद का खुल जाना, धड़कनें बढ़ाना, पसीना आना जैसे लक्षण होते हैं.

सोमेटाइजेशन डिसऔर्डर: मन में बारबार बीमारी का वहम आना, छोटेछोटे मामूली लक्षण पर भी डर जाना, ज्यादा चिंता करना, गूगल पर बीमारी के लक्षण ढूंढ़ना, बारबार डाक्टर से परामर्श लेना और टैस्ट कराना, रिपोर्ट नौर्मल आने पर भी तसल्ली न मिल पाना.

डिप्रैशन: तनाव की वजह से उदासी, मायूसी, नकारात्मक विचार आना, काम की इच्छा न करना, जल्दी थक जाना, चिड़चिड़ा रहना आदि.

इन के अलावा कोविड ने कई और तरह की भी भावनात्मक और मानसिक तकलीफों को जन्म दिया है.

मानसिक स्वास्थ्य के लिए पोस्ट कोविड केयर

– शारीरिक दूरी को सामाजिक दूरी न सम?ों.

– 6 फुट दूर से पड़ोसी, सब्जी वाले से बात करें.

– सोशल मीडिया का सही उपयोग करते हुए अपने परिवार और रिश्तेदारों से जुड़े रहें.

– आइसोलेटेड, अकेले न रहें.

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हर 15 मिनट में औक्सीमीटर पर औक्सीजन नापना, हर आधे घंटे में बुखार चैक करना, गूगल पर कोविड के बारे में लगातार पढ़ते रहना, इस से संबंधित न्यूज देखना, ये सब करने से बचें. अपनी दिनचर्या व्यस्त रखें.

इस बीच एक अच्छी खबर यह भी है कि फाइजर कंपनी की वैक्सीन शोध में 90% कारगर पाई गई है, जो जल्द ही मार्केट में उपलब्ध होगी. इसलिए सकारात्मक रहें और अपना खयाल रखें.

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