एक प्यारी सी मुसकान सामने वाले के दिल में आप के लिए जगह बना सकती है और इस मुसकान को कायम रखने के लिए जरूरी है स्वस्थ, साफ और चमकते दांत. जिस तरह हम अपने शरीर को साफसुथरा रखते हैं ठीक वैसे ही अगर अपने मुंह की सफाई का भी खयाल नहीं रखेंगे तो दांतों व मसूढ़ों से संबंधित कई तरह के संक्रमणों के होने का खतरा बढ़ सकता है.

दांतों में सड़न, दर्द, बैक्टीरियल संक्रमण, सांस की बदबू जैसी परेशानियों के साथ ही शरीर के दूसरे हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं.

दूसरी गंभीर बीमारियों की वजह

दांतों में होने वाली परेशानियां कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं. अगर दांतों की परेशानी लंबे वक्त से चल रही है तो उसे अनदेखा न करें. ‘नैशनल सैंटर फौर बायोटैक्नोलौजी इनफौर्मेशन’ के अनुसार दांतों में होने वाली बीमारी की वजह से दिल और दिमाग से जुड़ी और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप ओरल हाइजीन का खयाल रखें.

हार्ट अटैक का खतरा होता है कम

‘अमेरिकन कालेज औफ कार्डियोलौजी’ के अनुसार जहां मसूढ़ों के रोग होने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा लगभग 50% तक बढ़ सकता है, वहीं ओरल हाइजीन मेंटेन करने से दिल की बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है.

‘सैंटर औफ डिजीज कंट्रोल’ के अनुसार जो लोग मुंह की सफाई का ध्यान नहीं रखते उन में दिल से संबंधित बीमारियां होने की संभावना 70% से भी ज्यादा होती?है. दरअसल, मुंह की सफाई ठीक से नहीं की जाए तो मुंह के बैक्टीरिया खून में मिल कर दिल तक पहुंच जाते हैं और उसे नुकसान पहुंचाने लगते हैं.

बढ़ता है कैंसर का खतरा

मुंह के कैंसर का खतरा तब सब से ज्यादा बढ़ जाता है जब लोग शराब, पान और गुटका जैसी चीजों का सेवन अधिक करते हैं और ओरल हैल्थ का खयाल नहीं रखते. ओरल प्रौब्लम्स सिर्फ मुंह के कैंसर के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य प्रकार के कैंसर की भी कारण बन सकती हैं.

कई बार मसूढ़ों की बीमारी के कारण गुरदे के कैंसर, अग्नाशय का कैंसर और ब्लड कैंसर का जोखिम भी अधिक बढ़ जाता है.

ओरल हाइजीन और लंग्स

ओरल केयर न करने से मुंह में पनपने वाले बैक्टीरिया की वजह से मसूढ़ों की बीमारी और संक्रमण हो सकता है. ये बैक्टीरिया सांस के द्वारा फेफड़ों में प्रवेश कर सकते हैं. इस से श्वसन संबंधी संक्रमण जैसे क्रोनिक औब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है.

बच्चे का वजन सामान्य से कम होना

गर्भावस्था के दौरान कई बार गर्भवती महिला को मुंह में छाले हो जाते हैं. ऐसे में गर्भवती महिलाएं ठीक से आहार नहीं ले पाती है, जिस का असर मां और शिशु दोनों पर ही पड़ता है. जाहिर है ओरल हाइजीन के साथ हमारी सेहत के तार जुड़े होते हैं, जिस का असर मां और शिशु दोनों पर ही पड़ता है. ऐसे में मुंह और दांतों की सफाई का खयाल रखना शुरू करें ताकि लंबे समय तक हर तरह से स्वस्थ बने रह सकें.

कैसे रखें ओरल हाइजीन का खयाल

चुनें सही टूथपेस्ट: फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें. इस से दांतों की बाहरी परत इनैमल को मजबूती मिलती है और दांतों को सड़न से बचाने में भी मदद मिलती है.

टूथब्रश हो मुलायम: इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आप का टूथब्रश मुलायम हो ताकि दांतों की बेहतर सफाई भी हो जाए और मसूढ़ों को भी कोई नुकसान न पहुंचे. दांतों की सफाई में जहां टूथपेस्ट 10% भूमिका निभाता है वहीं 80 से 95% काम हमारा ब्रश ही करता है.

दिन में 2 बार ब्रश करें: दांतों को दिन में

2-3 मिनट तक ब्रश करें. इस से प्लाक के जमने की संभावना कम हो जाती है. प्लाक दांतों और मसूढ़ों के बीच जमने वाली एक चिपचिपी परत होती है, जो दांतों की तकलीफ की वजह बनती है. अत: कुछ भी खाने के बाद अच्छे से कुल्ला जरूर करें.

ब्रश करने का सही तरीका:

यह भी जरूरी है कि आप के ब्रश करने का तरीका सही हो. अपने ब्रश को दांतों के ऊपर से नीचे और दाएं से बाएं करते हुए साफ करें. वहीं ब्रश करने के दौरान जीभ की सफाई करना भी बेहद जरूरी है, लेकिन जीभ पर ब्रश बहुत तेजी से न रगड़ें.

माउथवाश भी जरूरी:

दिन में कम से कम 2 बार अपने मुंह को साफ करने के लिए एक अच्छे ऐंटीसैप्टिक माउथवाश का इस्तेमाल करें. माउथवाश ओरल हैल्थ को बनाए रखने में मदद करता है, क्योंकि यह उन हिस्सों तक पहुंच जाता है जो ब्रशिंग और फ्लासिंग से छूट जाते हैं.

डाइट पर भी दें ध्यान:

दांतों और मसूढ़ों  की देखभाल के लिए अपने आहार पर ध्यान देना भी जरूरी. फास्ट फूड के बजाय पौष्टिक भोजन करें. कौफी या सोडा ड्रिंक से बचें. ये आप के दांतों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. शुगर की मात्रा कम करें.

खाने में जितना हो सके सलाद, सब्जियां, कच्चे फल आदि शामिल करें. प्रोबायोटिक्स जैसे पनीर, दही आदि मुंह के बैड बैक्टीरिया को गुड बैक्टीरिया में बदलते हैं. इस से दांत और मसूढ़े सेहतमंद रहते हैं.

अपनी डाइट में फ्लोरीन, कैल्सियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम आदि को भी खाद्यपदार्थों के रूप में शामिल करें. ये मिनरल्स दांतों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं. अधिक से अधिक ऐंटीऔक्सीडैंट का सेवन करें. ऐंटीऔक्सीडैंट मुंह में कोलेजन का बनना बढ़ा कर इसे इन्फैक्शन से ज्यादा सुरक्षित बनाते हैं.

ओरल पियसिंग से बचें

जितना हो सके ओरल पियसिंग और ओरल टैटू से बचें, क्योंकि ये दोनों आप की ओरल हैल्थ के लिए खराब साबित हो सकते हैं. इन से आप के मुंह में बैक्टीरिया ट्रांसफर हो सकते हैं.

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