प्रैग्नेंट होना किसी भी महिला के जीवन में सबसे सुखद क्षणों में से एक होता है, क्योंकि वह अब अपने अंदर एक और धड़कन को महसूस करती है. आने वाले मेहमान को लेकर सपने संजोती है. अगर आप अपने परिवार की प्लानिंग करने जा रही है तो ये सुनिश्चिैत कर लेना बहुत जरूरी है कि मां बनने के लिए आप शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार है या नही.
क्योंकि प्रैग्नेंसी किसी भी महिला के लिए अनमोल पल होता है. इस दौरान प्रैग्नेंट महिलाओं को सभी से तरह-तरह की सलाह भी मिलती रहती हैं, जैसे ये मत खाओ, वो मत खाओ, यहां मत जाओ, ऐसे में मत उठो और पता नहीं क्या-क्या. वैसे राय देना गलत नहीं है, लेकिन कई बार अलग-अलग राय के चक्कर में प्रैग्नेंट महिला उलझन में आ जाती हैं. खासतौर से वो महिलाएं, जो पहली बार मां बनने जा रही हैं.
लेकिन कुछ बातों की जानकारी एक प्रैग्नेंट महिला को भी पता होनी चाहिए ताकि किसी के ना होने पर वह अपना सही से ध्यान रख सके और उसका सही से पालन कर सके नही तो आप सुखद क्षण को आप परेशानी में भी बदल सकती है. इसलिए इस लेख में जानिए कि प्रैग्नेंसी में क्या करना चाहिए क्या नही, साथ ही अपने आहार में किन चीजों को सम्मलित करना चाहिए और किन चीजों को नही.
प्रैग्नेंट होने पर क्या ना करें-
प्रैग्नेंट महिलाओं को कुछ उठते बैठते चलते फिरते वक्त बहुत चीजों का ध्यान रखना पड़ता है.
प्रैग्नेंसी में ज्यादा ना झुकें –
प्रैग्नेंसी के दौरान ज्यादा न झुकें क्योंकि यह गर्भ में पल रहें शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है.
इसके लिए चाहे आपकी पहली, दूसरी या तीसरी तिमाही ही क्यों ना हो आप ध्यान रखें कि आप ज्यादा न झुकें. ऐसा करने से गर्भपात, वक्त से पहले प्रसव या फिर गर्भ में पल रहे शिशु को हानि पहुंच सकती है. अगर आप झुक भी रही हैं, तो झटके से न झुके.
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प्रैग्नेंसी ने ज्यादा देर तक खड़ी ना रहे –
प्रैग्नेंसी के दौरान ज्यादा देर तक या एक ही स्थिति में खड़े न रहें, ऐसा करने से परेशानी हो सकती है. क्योंकि ऐसा करने से आपके पैरों में सूजन आ सकती है.
साथ ही ज्यादा देर तक खड़े रहने से प्रैग्नेंसी में समस्या, वक्त से पहले प्रसव या फिर गर्भ में ही शिशु की मृत्यु हो सकती है.
भारी चीजें न उठाएं – प्रैग्नेंसी के दौरान भारी चीजें उठाने से जितना हो सके उतना बचें. क्योंकि प्रैग्नेंसी के दौरान भारी चीजों को उठाने से गर्भपात का खतरा हो सकता है.
प्रैग्नेंसी में अपने आहार में किन चीजों को शामिल करें.
लगभग हर प्रैग्नेंट महिला यही चाहती है कि जन्म के समय उसका बच्चा स्वस्थ और तंदुरुस्त हो. इसलिए प्रैग्नेंट महिलाएं अपने आहार में कई तरह के नई चीजों को शामिल करती हैं. इस लेख में हम प्रैग्नेंसी के दौरान खान-पान के संबंध में जानकारी दे रहे हैं.
डेयरी उत्पादों का सेवन करें-
शिशु के विकास के लिए ज्यादा मात्रा में प्रोटीन और कैल्शियम की जरूरत होगी. एक प्रैग्नेंट महिला के शरीर को रोजाना 1,000mg कैल्शियम की जरूरत होती है इसलिए, आप अपने खान-पान में डेयरी उत्पादों को जरूर शामिल करें. इसके लिए आप डाइट में दही, छाछ व दूध आदि जैसे डेयरी उत्पाद को शामिल करें.
क्योंकि यह प्रैग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए फायदेमंद होते हैं. साथ ही यह ध्यान रखें कि आप सिर्फ पॉश्चरीकृत डेयरी उत्पादों का ही इस्तेमाल करें.
ब्रोकली और हरी पत्तेदार सब्जियां का सेवन करें-
प्रैग्नेंट महिलाओं को अपने खान-पान में हरी पत्तेदार सब्जियां जरूर शामिल करनी चाहिए. इसलिए आप अपने डाइट में पालक, पत्तागोभी, ब्रोकली (एक प्रकार की गोभी), आदि सब्जियां जरूर खाएं. पालक में मौजूद आयरन प्रैग्नेंसी के दौरान खून की कमी को दूर करता है.
सूखे मेवों का सेवन करें-
प्रैग्नेंसी में सूखे मेवों को भी अपने खान-पान में जरूर शामिल करें.
क्योंकि मेवों में उपस्थित कई तरह के विटामिन, कैलोरी, फाइबर व ओमेगा 3 फैटी एसिड आदि पाए जाते है जो प्रैग्नेंसी अवस्था के लिए अच्छे होते हैं.
अगर आपको एलर्जी नहीं है, तो अपने खान-पान में काजू, बादाम व अखरोट आदि को शामिल करें.
अखरोट में भरपूर मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है. इसके अलावा, बादाम और काजू भी प्रैग्नेंसी में फायदा पहुंचा सकते हैं. अगर आपको एलर्जी हो तो काजू बादाम व अखरोट ना खाएं.
साबूत अनाज का सेवन करें-
प्रैग्नेंसी के दौरान साबूत अनाज को अपने आहार में जरूर शामिल करें. खासतौर के तब जब आप प्रैग्नेंसी की दूसरी और तीसरी तिमाही में ही क्योंकि की इस दौरान साबूत अनाजों का सेवन फायदेमंद होता है. इससे आपको भरपूर कैलोरी मिलती है, जो गर्भ में शिशु के विकास में मदद करती है. आप साबूत अनाज के तौर पर ओट्स, किनोआ व भूरे चावल आदि को अपने आहार में शामिल कर सकती हैं. इन अनाजों में प्रोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है. इसके अलावा, इनमें फाइबर, विटामिन-बी और मैग्नीशियम भी मौजूद होता है, जो प्रैग्नेंसी में फायदा पहुँचतें है.
फलों के जूस और फल का सेवन करें-
प्रैग्नेंसी में महिला को तरह-तरह के मौसमी फलखाने चाहिए. हो सके तो उन्हें संतरा, तरबूज व नाशपाती आदि जैसे फलों को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए. इसके अलावा आप इन फलों का जूस भी पी सकती हैं.
दरअसल एक प्रैग्नेंट महिला को अलग-अलग तरह के चार रंगों के फल खाने की सलाह दी जाती है .
वसा और कैलोरी में उच्च खाद्य पदार्थों की जगह रोज फल व सब्जियों के कम से कम पांच हिस्से खाएं. साथ ही पैकेड फ्रूट जूस का सेवन बिल्कुल ना करें.
प्रैग्नेंसी में हमें अपने आहार में क्या शामिल नही करना चाहिए.
कई सारी ऐसी चीजें हैं, जिनका सेवन प्रैग्नेंट महिलाओं को कतई नहीं करना चाहिए. क्योंकि ऐसी चीजों को खाने से प्रैग्नेंट महिलाओं को नुकसान हो सकता इसलिए इन चीजों से परहेज करना चाहिए.
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कच्चे अंडे का सेवन ना करें-
प्रैग्नेंट महिलाओं को कभी भी अधपके व कच्चे अंडे का सेवन नही करना चाहिए क्योंकि इससे सालमोनेला संक्रमण का खतरा हो सकता है. इस संक्रमण से प्रैग्नेंट महिला को उल्टी और दस्त की समस्या उत्तपन्न हो सकती है.
शराब व धूम्रपान के सेवन से बनाएं दूरी-
स्वास्थ्य के लिए नशीली चीजों का सेवन हानिकारक होता है.
खास कर प्रैग्नेंट महिलाओं को नशीली चीजों से दूरी बना कर रखना चाहिए. प्रैग्नेंट महिलाओं को शराब व धूम्रपान नहीं करना चाहिए दरअसल इसका प्रभाव सीधे गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है.
शराब व धूम्रपान के सेवन से भ्रूण के दिमागी और शारीरिक विकास में बाधा आती है, साथ ही गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
कैफीनयुक्त चीजों का सेवन न करें-
प्रैग्नेंसी में चाय, कॉफी और चॉकलेट जैसी चीजों में कैफीन पाया जाता है, इसलिए इन चीजों के सेवन से बचना चाहिए साथ ही डॉक्टर भी बहुत कम मात्रा में कैफीन लेने की सलाह देते हैं.
क्योंकि ज्यादा मात्रा में कैफीन लेने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है तथा जन्म के समय शिशु का वजन भी कम रह सकता है. हालांकि, प्रैग्नेंसी के दौरान रोजाना 200 मिलिग्राम तक कैफीन के सेवन को सुरक्षित माना जाता है पर इससे ज्यादा मात्रा में सेवन करने से स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
उच्च स्तर के पारे वाली मछली व कच्चे मांस का सेवन ना करें-
प्रैग्नेंसी में मछली खाना फायदेमंद होता है, लेकिन प्रैग्नेंट महिलाओं को ऐसी मछलियों को खाने से बचना चाहिए, जिन मछलियों के शरीर में पारे का स्तर अधिक होता है. जैसे कि स्पेनिश मेकरल, मार्लिन या शार्क, किंग मकरल और टिलेफिश जैसी मछलियों में पारे का स्तर ज्यादा होता है, इसलिए मछलियों को सेवन से भ्रूण के विकास में बाधा आ सकती है. कच्चे मांस के सेवन करने से टॉक्सोपलॉस्मोसिस से संक्रमित कर हो सकती है. जिससे कि गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए कभी भी कच्चे मांस का सेवन ना करें अच्छे से पका कर मांस को खाये.
प्रैग्नेंसी में कच्चा पपीता व कच्ची अंकुरित चीजों का सेवन नही करना चाहिए-
प्रैग्नेंसी में कच्चा पपीता खाना असुरक्षित होता है. कच्चे पपीते में ऐसा केमिकल पाया गया है, जिससे कि भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए, प्रैग्नेंसी में कच्चा पपीता खाने से बचें.
साथ ही कच्ची अंकुरित दालों में साल्मोनेला, लिस्टेरिया और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है. इसके कारण प्रैग्नेंट महिला को उल्टी और दस्त की शिकायत हो सकती है.
क्रीम दूध से बनी पनीर का सेवन ना करें-
प्रैग्नेंट महिला को क्रीम दूध से बनी हुई पनीर का सेवन नही करना चाहिए.
दरअसल इस तरह के पनीर को बनाने में पॉश्चरीकृत दूध का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, क्रीम दूध में लिस्टेरिया नाम का बैक्टीरिया मौजूद होता है. इस बैक्टीरिया की वजह से गर्भपात व समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ जाता है.
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बिना धुली हुई सब्जियां और फलों के सेवन से बचना चाहिए-
प्रैग्नेंट महिलाओं की किसी भी फल और सब्जी को खाने से पहले उसे अच्छी तरह धोना चाहिए क्योंकि बिना धुली हुई सब्जी और फल में टॉक्सोप्लाज्मा नाम का बैक्टीरिया मौजूद होता है, जिससे शिशु के विकास में बाधा आ सकती.