बारिश के बाद जगह-जगह सड़कों, गलियों, छतों पर रखे बर्तनों आदि में पानी भर जाता है. इस पानी में मच्छरों का लारवा जन्म लेता है. जल्द ही मच्छर पैदा होने लगते हैं. मच्छर के काटने से भयंकर बीमारियां होती हैं. कुछ मच्छर जनित बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनके लक्षण जल्दी दिखाई नहीं देते, कुछ समय बाद दिखाई देते हैं. तब तक बीमारी अधिक बढ़ चुकी होती है. मच्छर दिखने में छोटा-सा होता है, लेकिन यह छोटा-सा जीव आपकी जान ले सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल लाखों लोगों की मौत मच्छर के काटने से होती है. मच्छर जनित बीमारियां संक्रमण से फैलती हैं. इसलिए इनसे बचना और सावधानी बरतना दोनों ही आवश्यक है. आइए जानते हैं मच्छर के काटने से कौन-सी बीमारियां होती हैं. और इनसे कैसे बचा जा सकता है.
मलेरिया : मलेरिया खराब उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक तेजी से फैल रहा है. इन क्षेत्रों में यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अधिक प्रभावित कर रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वर्ष 2015 में सिर्फ मलेरिया से चार लाख अड़तीस हजार मौतें हुर्इं. मलेरिया प्लाजमोडियम परजीवी द्वारा फैलता और एनोफिलेस मच्छर के काटने से होता है. प्लाजमोडियम परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं पर असर डालता है. मलेरिया होने पर बुखार, सिर दर्द और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. अगर समय रहते इसका इलाज नहीं कराया गया तो जानलेवा हो सकता है.
चिकनगुनिया : चिकनगुनिया एक विषाणुजनित बीमारी है, जो कि संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है. इसके कारण सिर दर्द, जोड़ों में दर्द और तेज बुखार की समस्या झेलनी पड़ती है. चिकनगुनिया इतना खतरनाक होता है कि जिसे यह होता है उसके शरीर में लंबे समय तक दर्द बना रहता है. इस बीमारी का विशेष इलाज नहीं है. चिकनगुनिया से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर व्यायाम और तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं.
डेंगू बुखार : डेंगू बुखार वायरस के कारण फैलता है. यह मादा मच्छर एडीज के काटने से होता है. तेज बुखार, सिर दर्द, जोड़ों तथा हड्डियों में दर्द और नाक तथा मसूड़ों से रक्तस्त्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं.
जीका वायरस : जीका वायरस तेजी से फैलने वाला विषाणु है. यह संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से होता है. इसके लक्षणों में हल्का बुखार, जोड़ों में दर्द, शरीर पर चकत्ते पड़ना दिखाई देते हैं. हालांकि इस वायरस की रुकावट के लिए टीका नहीं बना है. शुरुआत में यह दक्षिण अफ्रिका में अधिक फैला, अब धीरे-धीरे पूरे विश्व में फैल रहा है.
जापानी मस्तिष्ककोप : जापानी मस्तिष्ककोप का वायरस जलप्लावित चावल के खेतों, दलदल और पौधों के आसपास जमा पानी में पैदा होता है. यह वायरस तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क और मेरुरज्जु पर हमला करता है. इसे खत्म करने के लिए टीका बनाया गया है.
बचाव
पंखा चलाएं : मच्छरों को हवा से दिक्कत होती है. हवा के कारण वे किसी एक जगह रुक नहीं पाते. तो मच्छरों के काटने से बचना है तो अपने घर में पंखा या एअरकंडीशनर चालू करके रखें.
पानी जमा न होने दें : जिस जगह आप रहते हैं वहां आसपास पानी जमा न होने दें. पानी जमा होने से मच्छर पनपने लगते हैं. इससे बड़ी संख्या में मच्छर पैदा होते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं. अगर कहीं पानी जमा है, तो उसमें मिट्टी का तेल डाल दें. इससे मच्छर पैदा नहीं होंगे और आप भी सुरक्षित रहेंगे.
कीटनाशकों का प्रयोग : मच्छरों को मारने का सबसे अच्छा तरीका होता है कीटनाशकों का प्रयोग. इन्हें उस जगह छिड़कना चाहिए जिस जगह मच्छर हों. इसके अलावा मच्छर को मारने वाली अगरबत्ती का भी प्रयोग किया जा सकता है. मच्छरों को बांझ बनाकर भी उन्हें रोका जा सकता है.
पीने का पानी : पीने का पानी छान कर, उबाल कर और फिल्टर करके पीएं. साफ पानी पीने से बहुत-सी बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है.
लंबी बाजू वाले कपड़े : जब भी घर से बाहर निकलें तो लंबी बाजू या पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें.