गुंजन आजकल काफी परेशान है क्योंकि दिन प्रतिदिन उसके हाथ पैरों में सूजन बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से वह ठीक से काम नहीं कर पाती और जल्दी थक भी जाती है। उसने डॉक्टर से सलाह लेने की सोची। डॉक्टर ने चेकअप के बाद बताया कि यह नेफ्रोटिक सिंड्रोम की वजह से ऐसा हो रहा है, तो गुंजन हैरान हो गई।  हैरानी के साथ गुंजन ने नेफ्रोटिक सिंड्रोम के विषय में जानना चाहा, क्योंकि वह तो अपनी हेल्थ का बहुत ध्यान रखती है। इस बीमारी के विषय में डॉक्टर ने जो भी जानकारी दी वह आपसे साझा करने जा रही हूं।

नेफ्रोटिक सिंड्रोम, सिम्पटम्स का एक ग्रुप होता है जो इस बात का संकेत हैं कि हमारी किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है. एक अन्य शब्दों से कहा जाए तो यह सिंड्रोम एक किडनी डिसऑर्डर है जो हमारे यूरिन में बहुत अधिक प्रोटीन पास करने का कारण बनता है. यह समस्या आमतौर पर किडनी में उन स्मॉल ब्लड वेसल्स के ग्रुप को नुकसान होने की वजह से होती है, जो ब्लड से वेस्ट और एक्सेस वॉटर को फिल्टर करते हैं. नेफ्रोटिक सिंड्रोम किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है. आइए जानें इस बीमारी के बारे में और अधिक.

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण कौन से हैं?

नेफ्रोटिक सिंड्रोम के चार मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • -यूरिन में बहुत अधिक प्रोटीन होना, जिसे डॉक्टर प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है.
  • -ब्लड में फैट और कोलेस्ट्रॉल लेवल का बढ़ना. इसे मेडिकल टर्म में हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया के रूप में जाना जाता है.
  • -टांगों, पैरों और एड़ियों में सूजन. यह सूजन कई बार हाथों और पैरों में भी हो सकती है. इसे एडेमा कहा जाता है.
  • -ब्लड में एल्बुमिन का लो लेवल होना. इसे मेडिकल टर्म में हाइपोएल्ब्यूमिनमिया के नाम से जानता है.

नेफ्रोटिक सिंड्रोम का उपचार

नेफ्रोटिक सिंड्रोम का उपचार इस समस्या के कारणों पर निर्भर करता है. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने से इसकी गंभीरता को कम किया जा सकता है. इस स्थिति में निम्नलिखित दवाईयों की सलाह दी जा सकती है:

  • -ब्लड प्रेशर मेडिकेशन्स जैसे एसीइ इन्हिबिटर्स आदि. इससे ब्लड प्रेशर को सही बनाए रखने में यूरिन में प्रोटीन की मात्रा को कम करने में मदद मिलती है
  • -ड्यूरेटिक्स यानि वॉटर पिल्स ताकि सूजन कम की जा सके
  • -कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवाईयां
  • -ब्लड थिनर्स ताकि आसानी से ब्लड क्लॉट्स बन सकें
  • -इम्यून सिस्टम को सप्रेस करने के लिए मेडिकेशन्स जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स

इसके साथ ही डॉक्टर रोगी को सूजन कम करने के लिए कम नमक लेने की सलाह देंगे. यहीं नहीं, इस स्थिति में रोगी को कम सैचुरेटेड फैट्स और कोलेस्ट्रॉल युक्त डाइट लेनी चाहिए. अगर नेफ्रोटिक सिंड्रोम इन ट्रीटमेंट्स से बेहतर न हो, तो रोगी को डायलिसिस की आवश्यकता हो सकती है.

इस समस्या से बचाव के लिए रोगी को अपना ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को कंट्रोल में रखना जरूरी है. कॉमन इंफेक्शंस के लिए वैक्सीन्स लेने की भी राय दी जाती है. अगर आपके डॉक्टर ने एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह दी है, तो सही से उन्हें लें. आप बेहतर महसूस कर रहे हैं, तब भी इन दवाईयों को अपनी मर्जी से लेना बंद न करें.

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