आजकल डिशवौशर यानी बरतन धोने की मशीन का चलन बढ़ने लगा है. अगर आप की कामवाली न आए या आप के पास कामवाली न हो तो दोनों ही स्थितियों में यह बड़े काम की चीज है. कितनी तरह के डिशवौशर मुख्य रूप से 2 तरह के होते हैं- पहला फ्री स्टैंडिंग जिसे स्वतंत्र रूप से अलग से लगा सकते हैं और दूसरा- बिल्ट इन जिसे किचन काउंटर के नीचे स्थाई रूप से लगा सकते हैं. बिल्ट इन डिशवौशर लगाना ज्यादा सुविधाजनक रहता है.

आमतौर पर डिशवौशर 12 से 16 प्लेस सैटिंग के होते हैं. भारत में ज्यादातर 12 प्लेस सैटिंग वाली मशीनें मिलती हैं. एक प्लेस सैटिंग का मतलब 1-1 बड़ी डिनर प्लेट व नाश्ता प्लेट, बाउल, गिलास, चाय या कौफी कप व प्लेट, छुरी, फोर्क और 2-2 चम्मच और सलाद फोर्क लोड कर सकते हैं. इस के अलावा कुछ खाली जगह होती है, जिस में कुकिंग पौट्स भी रख सकते हैं.

भारतीय बाजार में डिशवौशर

भारत में सीमेंस, व्हर्लपूल, एलजी और आईएफबी ब्रैंड के डिशवौशर उपलब्ध हैं, जिन की कीमत लगभग ₹26 हजार से ₹40 हजार के बीच है. फिलहाल आईएफबी ब्रैंड का मार्केट शेयर सर्वाधिक है और इस की कीमत भी औरों से कम है. 2017 में डिशवौशर की मार्केट 300 लाख डौलर की थी यानी करीब ₹210 करोड़ की.

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डिशवौशर लगाने से पहले

डिशवौशर की 4 आवश्यकताएं हैं- रखने की जगह, बिजली की उपलब्धता, पानी की सप्लाई और निकास की व्यवस्था. आमतौर पर डिशवौशर 24’×24’ का होता है और इस की ऊंचाई 35 इंच होती है और इस में एडजस्टेबल लैग्स होती हैं.

आजकल मौड्यूलर किचन का चलन बढ़ रहा है और इस में बिल्ट इन डिशवौशर आसानी से लगाया जा सकता है. जिन का अपना घर है या जो नया बनवा रहे हैं उन के लिए बिल्ट इन मौडल उत्तम है. जब आप को घर छोड़ना होता है तो फ्री स्टैंडिंग डिशवौशर को आसानी से अपने साथ ले जा सकते हैं और लगाने या हटाने में तोड़फोड़ की भी जरूरत नहीं पड़ती है. पुरानी किचन में डिशवौशर लगाने के लिए कुछ तोड़फोड़ करनी पड़ेगी. काउंटर के नीचे पर्याप्त जगह बना कर वहां तक पानी की सप्लाई और निकासी की व्यवस्था करनी होगी.

डिशवौशर के बारे में गलतफहमी

डिशवौशर के बारे में लोगों में जागरूकता की कमी है. मिथ है कि इस में बिजली और पानी ज्यादा खर्च होता है, जबकि ऐसा नहीं है. हां, शुरू में खर्च कुछ ज्यादा होगा. आम धारणा है कि इस के लिए विशेष किचन प्लान चाहिए पर आजकल जो अपार्टमैंट्स बन रहे हैं उन में मौड्यूलर किचन होती हैं और उन में डिशवौशर आराम से लग सकता है. इस में सिर्फ डिश ही नहीं धुलती हैं, बल्कि अलगअलग तरह के कुकिंग पौट्स भी धुलते हैं.

सैटिंग्स

आप का डिशवौशर औटोमैटिक है. एक बार बरतन सजा कर अपना साइकिल चुन कर औन करने पर यह बरतनों की सफाई के बाद स्वयं बंद हो जाएगा. आमतौर पर 4 वाश प्रोग्राम होते हैं. इन में डिलेड स्टार्ट की सुविधा भी है यानी आप चाहें तो इसे अपनी सुविधा के अनुसार 2, 4 घंटे या इस से ज्यादा समय बाद भी औन होने वाला प्रोग्राम चुन सकते हैं. इस में चाइल्ड सेफ्टी लौक का भी प्रावधान है.

कुछ मौडल्स में ऐक्वा और लोड सैंसर्स भी होते हैं, जो पानी और बिजली की बचत करते हैं. ऐक्वा सैंसर बरतनों में लगी गंदगी के अनुसार पानी लेता है. लोेड सैंसर मशीन के लोड के अनुसार पानी का तापमान और वाशिंग टाइम चुनता है.

डिशवौशर से लाभ

1. सुविधाजनक

डिशवौशर की सब से बड़ी खासीयत यह है कि यह सुविधाजनक है और इस में समय की बचत है. बरतनों की सफाई के लिए ज्यादा समय तक सिंक के पास खड़े रहने की जरूरत नहीं है. फिर किचन ऐलिगैंट भी दिखेगी.

अगर कामवाली पर निर्भर न रहना हो और उस के नखरों से बचना है तो यह बहुत अच्छा है. वैसे भी शहरों में और गेटेड अपार्टमैंट्स में काम करने वाली बाइयों का रेट दिनबदिन बढ़ता जा रहा है. ऐसे में डिशवौशर में इनवैस्ट करना ठीक होगा.

2. बिजली और पानी

आजकल के डिशवौशर पानी और बिजली की खपत के मामले में इकोनौमिकल होते हैं. साधारणतया एक इकोनौमिक वाश साइकिल में करीब 1 यूनिट बिजली की खपत होती है. अगर बरतन जल्दी सुखाने के लिए हीटर चलाएंगे तो 2 यूनिट प्रति वाश खपत हो सकती हैं यानी खपत भी 8-10 लिटर प्रति वाश साइकिल होती है, जबकि हैंड वाश करने से इस से बहुत ज्यादा पानी खर्च होता है.

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3. सिर्फ डिशेज ही नहीं धोता

डिशवौशर सिर्फ डिश ही नहीं धोता. इस में आप किचन में काम आने वाले लगभग सभी बरतन धो सकते हैं. ध्यान रखें कि आप के प्लास्टिक, शीशे और चीनीमिट्टी के बरतन डिशवौशर सेफ हों. अकसर ऐसे बरतन बनाने वाली कंपनियां अपने प्रोडक्ट पर ऐसा लिख देती हैं.

4. डिशवौशर की लोडिंग

डिशवौशर निर्माता अपनी पुस्तिका में वाशर को लोड करने का सही तरीका सचित्र समझा देते हैं. उन के निर्देश के अनुसार बरतनों को लोड करने से समय की बचत और लोडिंग एवं अनलोडिंग में सुविधा होगी. डिश व अन्य बरतनों को उलट कर रखें ताकि पानी की तेज धार गंदी सतह पर पड़े और बरतन अच्छी तरह साफ हों.

5. गरम पानी का इस्तेमाल

अगर गरम पानी उपलब्ध है तो आप के पास हौट वाटर का विकल्प है. वाशर चलाने से पहले अपने किचन सिंक में गरम पानी का नल खोल दें. जब गरम पानी आने लगे तो फिर उसे बंद कर दें. इस के बाद वाशर में गरम पानी जाने दें. ऐसा करने से वाशर ठंडे पानी से धोना न स्टार्ट कर सीधे गरम पानी से धोएगा.

6. प्रीवाश जरूरी नहीं

अकसर निर्माता प्रीवाश करने की सलाह देते हैं पर ऐसा करना जरूरी नहीं है. इस में समय, बिजली और पानी की बरबादी होती है. वाशर को लोड कर रिंस ओनली साइकिल चुन सकते हैं.

7. सफाई

डिशवौशर की समयसमय पर सफाई करनी चाहिए. ऊपरी रैक के मध्य में एक कप में आधा कप सफेद सिरका डाल कर मशीन चलाने से मशीन साफ होगी और बदबू भी दूर होगी. इस के अलावा वाशर के फिल्टर की सफाई करते रहना चाहिए ताकि ड्रेन लाइन चोक न हो.

8. कुछ बरतन हाथ से धोएं

जो बरतन डिशवौशर सेफ न हों उन्हें हाथ से ही धोएं. इस के अलावा कौपर और ऐल्यूमिनियम के बरतनों का रंग खराब हो सकता है. लकड़ी के बरतनों के क्रैक होने की संभावना रहती है.

फुली इंटेग्रीटेड डिशवौशर लगाएं: आप का डिशवौशर स्टैंड अलोन भी हो सकता है

पर इंटेग्रीटेड वाशर ही बेहतर होता है. यह

आप के किचन स्लैब के नीचे एक लैवल में

होगा और उस का औपरेटिंग पैनल आप के

सामने होगा. वाशर का डे्रन किचन के ड्रेन से मिला होगा.

9. डिशवौशर की कुछ कमियां

– डिशवौशर के चलते समय कुछ शोर होता है.

– सभी प्रकार के बरतनों को नहीं धोता. सिर्फ उन्हीं बरतनों को धो सकता है जो डिशवौशर सेफ हों.

– इस के लिए खास तरह के डिटर्जैंट का इस्तेमाल करना होता है.

– खाना पकाने या खाने के बाद ज्यादा सूखे बरतन डालने पर यह उन्हें ठीक से साफ नहीं कर पाता है.

– इस में बरतन रखते समय सावधानी बरतनी होती है अन्यथा शीशे के बरतन टूट सकते हैं.

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