फैशन जगत में झुमके चाहे बरेली के हों या कहीं और के, इन का अंदाज ही अलग होता है. झुमकों को शृंगार से ले कर विरह तक के वर्णन का बहाना बना दिया गया. हालांकि झुमके कानों में पहने जाने वाले आभूषणों की एक किस्म हैं. इस के अलावा टौप्स, इयररिंग्स आदि आभूषण भी इसी कड़ी में आते हैं. फैशन जगत में भी झुमकों को ले कर कई तरह के प्रयोग होते रहते हैं. फिर चाहे वे भारीभरकम राजसी वैभव वाले कुंदन के झुमके हों, हीरे से जड़े नन्हे दमकते कर्णफूल या फिर आज के ट्रैंडी स्टाइल के बने कलरफुल पंखों के इयररिंग्स, ये सभी महिलाओं, खासकर कालेज में पढ़ रही युवतियों को लुभाते हैं. पर आजकल भारीभरकम गहने केवल शादीब्याह तक सिमट कर रह गए हैं.

नए तरह के क्रिस्टल स्टोन, वाइट मैटल, फैदर, डायमंड तथा स्टील के खूबसूरत इयररिंग्स का आजकल फैशन है. वहीं पूरे कान को सजाने के लिए कान के बाहरी हिस्से पर 3-4 जगह छेद करा कर छोटीछोटी बालियां या नग के टौप्स भी पहने जाते हैं. यदि आप ज्यादा दर्द सहने के मूड में न हों तो ‘पै्रस’ कर के पहने जाने वाले गहने भी एक अच्छा विकल्प हैं.

टैंडी स्टाइल के झुमके

वैस्टर्न डै्रसेज के ट्रैंड के चलते आज कानों में पहने जाने वाले आभूषणों की बनावट को ले कर कई प्रयोग हुए हैं. अब युवतियां या महिलाएं केवल झुमकियां या साधारण बालियों के बजाय बड़े हीरे से सजे कर्णफूल, भारीभरकम शैंडेलियर्स तथा अलग सी आकृतियों से सजी लटकन पहनना भी पसंद करती हैं. वैसे भी आजकल सोनेचांदी के दामों में हो रही बढ़ोतरी तथा लूट की घटनाओं के चलते आम महिलाएं भी आर्टिफिशियल ज्वैलरी पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं. यहां तक कि बाजार में अब रंगबिरंगी प्लास्टिक ज्वैलरी भी मिलने लगी है, जिसे आप ‘यूज एंड थ्रो’ की तर्ज पर उपयोग में ला सकती हैं.

इसी तरह मैचिंग ज्वैलरी से ले कर शंख, सीप, बीड्स, लकड़ी, मोती, लाख, कपड़े तथा लैस से बने कान के झुमके भी आजकल चलन में आ गए हैं. साधारणतया इन का दाम 5 रुपए से ले कर 500 रुपए तक हो सकता है. अब कानों में झुमके आदि पहनने के लिए पेच का होना भी जरूरी नहीं है. पहनने में आसानी के लिए हुक वाले इयररिंग्स भी बड़ी तादाद में बाजार में मौजूद हैं. ये हलके होते हैं तथा आसानी से पहने जा सकते हैं. हालांकि आर्टिफिशियल ज्वैलरी के चलन के बावजूद असली ज्वैलरी पहनने वाले शौकीन अपना शौक पूरा करते हैं और ऐसे लोगों के लिए मीना, कुंदन, हीरों से जुड़े बड़े झुमके, कानों को पूरा कवर करते गहने तथा अन्य वैराइटीज बनाई जाती हैं. इन के अलावा एक बड़ा वर्ग ऐंटीक का शौक रखने वाला भी है, जो पुराने जमाने में पहने गए झुमकों में ज्यादा दिलचस्पी रखता है.

आज का बाजार इन सब की मांग पूरी करता है. चूंकि फैशन के अनुरूप चलने वाली ट्रैंडी चीजें पहनने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है, यही कारण है कि कानों में पहने जाने वाले गहनों के बाजार में भी आप को चलन के मुताबिक चीजें ज्यादा दिखाई देंगी और अब इस मामले में ग्लोबल ट्रैंड के भी शामिल हो जाने के बाद तो फैशन जगत में काफी नए प्रयोग किए जाने लगे हैं. स्वरोवस्की क्रिस्टल तथा जरदोजी से सजे गहने इस का साक्षात प्रमाण हैं.

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