सुगंध का हमारे जीवन में बहुत प्रभाव होता है. यह हमारे स्नायुतंत्र को उत्तेजित कर विचारों को बदल देती है. शोध से पता चला है कि जब आप तनाव या डिप्रैशन में हों तो कुछ प्रकार की सुगंधों को सूंघ कर अपनेआप को तनावमुक्त कर सकते हैं. इतना ही नहीं, सुगंध के द्वारा आप अपनेआप को काम पर केंद्रित कर सकते हैं. सही तरीके की सुगंध और अरोमा से आप अपने बैडरूम के माहौल को बदल सकते हैं. सुगंध 2 प्रकार की होती है. पहली जो आप शरीर पर प्रयोग करते हैं, दूसरी, जो आप के वातावरण को सुगंधित बनाती है. यहां हम उस सुगंध के बारे में बात कर रहे हैं, जो हमारे आसपास के माहौल को हमारे मनमुताबिक बना सकती है. इस बारे में मैसूर के प्रसिद्ध सुगंध निर्माता किरन रांगा, जो ‘रिपल फ्रेग्रैंस प्राइवेट लिमिटेड’ के डाइरैक्टर और ‘फ्रेग्रैंस ऐंड फ्लेवर्स एसोसिएशन औफ इंडिया’ के सदस्य हैं, बताते हैं कि यह व्यवसाय उन के परिवार में सालों से चला आ रहा है. वे तीसरी पीढ़ी के हैं. उन का कहना है कि सुगंध हमारे देश में काफी मात्रा में पाई जाती है, पर इस का अधिकतर निर्यात विदेशों में कर दिया जाता है, क्योंकि यहां के लोग इस की उपयोगिता को नहीं जानते. इस का उपयोग यूरोप और जरमनी में अधिक होता है.

कई बार लोग एक तरह की खुशबू को बारबार चुनते हैं, जिस से आप उस के व्यक्तित्व का पता लगा सकते हैं. व्यक्ति कितना महत्त्वाकांक्षी है, कितना काम करना चाहता है आदि कई बातें सुगंध के द्वारा जानी जा सकती हैं. अगर आप अपने घर के लिए सही सुगंध का चुनाव करते हैं तो आप का जीवन खुशहाल बन सकता है.

फ्लोरल

इस में आप तरहतरह के पारंपरिक फूलों की सुगंध पाते हैं. ये हमारे मस्तिष्क में फेमिनिन विचारों को लाती है. इस में रोज, जैसमीन आदि फूलों की सुगंध अधिक लोकप्रिय है.

फ्रूटी

इस से स्वच्छता और ताजगी का अनुभव होता है. संतरा, नीबू, लैमनग्रास, ग्रेपफ्रूट आदि इस तरह की खुशबू फैलाते हैं. इसे आप बाथरूम, कार या आफिस कहीं भी रख सकते हैं.

ग्रीन

ग्रीन खुशबू हर किसी के लिए लाभदायक होती है. इस में रोजमैरी, चामोमिली और यूकेक्लिप्ट अधिक लोकप्रिय हैं. इन के प्रयोग से आप एक रिलैक्सिंग बाथ ले सकते हैं.

वुडी

यह नहाने के लिए उपयुक्त सुगंध है. इसे पुरुष और महिला दोनों ही प्रयोग कर सकते हैं. इस में संदलवुड, रोजवुड, मस्क आदि सुगंध आती हैं. ये सुगंध आप अपने घर में कहीं भी किसी आकर्षक पात्र में रख सकते हैं. आजकल बाजार में पत्थर, लकड़ी या सिरामिक्स के तरहतरह के आकर्षक पात्र मिलते हैं. किरन रांगा कहते हैं कि किसी भी सुगंध को बनाने के लिए 60 से 100 कच्चे पदार्थों की आवश्यकता होती है, जिन्हें वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बाजार में लाया जाता है. भारत में सुगंध का प्रयोग अगरबत्ती के रूप में अधिक होता है पर आजकल लोग इसे अपने घरों में अरोमा के रूप में रख रहे हैं. यहां फ्लोरल सुगंध अधिक चर्चित है, जबकि विदेशों में फलों की सुगंध अधिक चलती है. एक छोटी बोतल सुगंध का मूल्यक्व700 से 800 तक होता है. पूरा महीना अगर घर में इस का प्रयोग किया जाए तो खर्चा क्व250 से 300 तक ही बैठता है.

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