फैशन की दुनिया का आइकोन समझी जाने वाली डिजाइनर नीता लुल्ला की शख्सीयत अनूठी है. वे भारत की पहली ऐसी कौस्ट्यूम डिजाइनर हैं, जिन्हें भारत के राष्ट्रपति से 4 बार बैस्ट कौस्ट्यूम डिजाइनिंग के लिए नैशनल फिल्म अवार्ड मिला. इतना ही नहीं, उन्हें कई नैशनल और इंटरनैशनल अवार्ड भी फैशन और स्टाइल के लिए मिले. 28 साल से इस क्षेत्र में काम कर रहीं नीता ने हिंदी सिनेमा जगत के कई बड़ेबड़े निर्देशकों के साथ काम कर अपनी अमिट छाप छोड़ी.

उन की खास फिल्में ‘चांदनी’, ‘लम्हे’, ‘खलनायक’, ‘रूप की रानी चोरों का राजा’, ‘ताल’, ‘किसना’, ‘डर’, ‘आईना’, ‘खुदा गवाह’, ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘देवदास’, ‘जोधा अकबर’ आदि हैं और हिंदी फिल्म जगत की जिन खास हीरोइनों ने नीता की डिजाइन की पोशाकों से अपनी अलग छवि बनाई, वे हैं श्रीदेवी, ऐश्वर्या राय बच्चन, जूही चावला, करीना कपूर खान, सुष्मिता सेन, शिल्पा शेट्टी, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा आदि. रजनीकांत, शहरुख खान, आमिर खान, रितिक रोशन आदि ने भी नीता की डिजाइन की पोशाकें फिल्मों में पहनी हैं.

नीता ने अपने कैरियर की शुरुआत उस समय की प्रसिद्ध फैशन कोरियोग्राफर जैन नौरोजी के साथ की थी. उन की पहली फिल्म ‘तमाशा’ थी. इस के बाद वे कामयाबी की सीढि़यां चढ़ती गईं. अभी उन्होंने निर्मातानिर्देशक सुभाष घई के साथ मिल कर वर्ल्ड क्लास फैशन स्कूल, व्हिसलिंग वुड खोला है.

इस अभियान से जुड़ने की खास वजह क्या है?

मैं करीब 28 साल से फैशन के बारे में युवाओं को पढ़ाती रही हूं और अब यहां पर उन्हें फैशन की शिक्षा के साथ मार्केटिंग, कारीगरी, नयापन आदि सभी विषयों पर शिक्षा देने का प्रावधान है, जिस से छात्र ढाई साल बाद पूरी तरह से अपनेआप को तैयार पाएंगे. 

जिस समय आप फैशन डिजाइनिंग में आईं, उस समय लोग फैशन में अधिक नहीं आते थे. आप के आने पर आप के परिवार की प्रतिक्रिया क्या थी?

यह बात सही है कि फैशन पौपुलर नहीं था, लेकिन कुछ डिजाइनर्स तब भी फिल्मों में यह काम करते थे. मैं उन के काम से बहुत प्रभावित थी, इसलिए मैं ने इस क्षेत्र को चुना.

तब कितना संघर्ष था?

जब मुझे पहली फिल्म ‘तमाशा’ के लिए ‘किमी काटकर’ की ड्रैस बनाने का औफर मिला, तो मैं बहुत खुश हुई. मैं ने उसे टेलरिंग के हिसाब से बनाया था. लेकिन जब उसे शूट पर ले गई थी, तो किमी काटकर की मां ने कहा था कि पता नहीं कहां से ये डिजाइनर आ जाते हैं जिन्हें ड्रैस बनाने का थोड़ा भी ज्ञान नहीं है. शूट कैंसल हो गया था. यह बात मुझे खराब लगी थी, लेकिन मैं ने पूरी रात मास्टर के साथ बैठ कर उस ड्रैस को ठीक किया था और उस की तकनीक भी सीखी थी. सुबह ड्रैस परफैक्ट बनी थी.

आज फैशन बहुत आगे बढ़ चुका है. ऐसे में आप के सामने चुनौतियां क्या होती हैं?

नई पीढ़ी को फैशन के बारे में समझाना मुश्किल होता है. जो सीखते हैं उन्हें भी पूरी जानकारी नहीं होती. इस में फैशन डिजाइनिंग के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी आगे आना होता है, जिस में मार्केटिंग, नए काम, स्टाइल आदि को जानना आवश्यक है.

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