महिलाएं चाहे कितनी ही आधुनिक हो जाए, फिर भी कुछ ऐसे मौके होते हैं जब सिर्फ और सिर्फ साड़ी भी अच्छी लगती है . यही कारण है कि हर त्योहार और समारोह में लड़कियां साड़ी को ही प्राथमिकता देती हैं. आइए जानते हैं भारत के प्रमुख शहरों के बारे में जहां की सिल्क की साड़ियां पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.

1. कांजीवरम

दक्षिण भारत का नाम आए और कोई कांजीवरम साड़ी की बात ना करें ऐसा कैसे हो सकता है दक्षिण भारत की कांजीवरम की खूबसूरत तथा भारी-भरकम साड़ियां महिलाओं की खास पसंद है. शायद इतना पढ़कर आपको बौलीवुड ऐक्ट्रेस रेखा, जयप्रदा, वैजयंती माला की याद आ जाए.

ट्रेडिशनल रिच कलर्स और इंडिया की सबसे ज्यादा मशहूर और महंगी साड़ियों में से हैं. कांजीवरम सिल्क ,तमिलनाडु के एक गांव के नाम पर है . जहां इस सिल्क को बनाया जाता है. बाकी सिल्क साड़ियों के मुकाबले ये साड़ियां काफी भारी होती हैं, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाले सिल्वर धागे गोल्ड में डिप होते हैं, वहीं मोटिफ्स मोर और तोते से इंसपायर्ड होते हैं. इस साड़ी का सबसे बेस्ट पार्ट होता है इसका पल्लू, जो अलग से बनाकर बाद में साड़ी से जोड़ा जाता है.

2. बनारसी साड़ी

बनारसी साड़ियों का नाम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. रेशम की साड़ियों पर बनारस में बुनाई के संग जरी के डिज़ाइन मिलाकर बुनने से तैयार होने वाली सुंदर रेशमी साड़ी को बनारसी साड़ी कहते हैं.  इसे सुहाग की निशानी भी माना जाता है. मल्टी बनारसी साड़ी, पौड़ी, पौड़ी नक्काशी, कतान अम्बोज, टिपिकल बनारसी जंगला, एंटिक बूटा, जामेवार, कतान प्लेन,कतान फैंसी, तनछुई बनारसी आदि कई वरायटीज़ में ये साड़ियां उपलब्ध हैं.

3. महाराष्ट्रियन साड़ी

महाराष्ट्र की पैठणी  एक खास तरह की साड़ी है . जो नौ गज लंबी होती है . यह पैठण शहर में बनती है. इस साड़ी को बनाने की प्रेरणा अजन्ता की गुफा में की गई चित्रकारी से मिली थी. इसे पहनने का अपना पारंपरिक स्टाइल है, जो महाराष्ट्र की औरतों को ही अच्छी तरह से आता है.

4. रौ सिल्क

रौ सिल्क साड़ियां गोंद से बनती है. इससे सिल्क निकालने के लिए लम्बी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है.

5. कोरा सिल्क

भारत के अधिकतर शहरों में कोटा सिल्क की साड़ियां आसानी से उपलब्ध होती है. ये साड़ी काफी हल्की होती है.  जिसे कई कलर्स और डिज़ाइन्स की कोरा सिल्क फैब्रिक से बुना जाता है. कोरा सिल्क का अपना अलग ही चार्म है.

6. महेश्वरी साड़ी

यह साड़ी खासकर मध्य प्रदेश में पहनी जाती है. यह रेशम से  बनाई जाती है. इसका इतिहास काफी पुराना है. होल्कर वंश की महान शासक देवी अहिल्याबाई ने 250 साल पहले गुजरात से लाकर महेश्वर में कुछ बुनकरों को बसाया था और उन्हें घर, व्यापार और अन्य सुविधाएं दी थीं. यही बुनकर महेश्वरी साड़ी तैयार करते थे.

7. चंदेरी साड़ी

विश्व प्रसिद्ध चंदेरी की साड़ियां आज भी हथकरघे पर ही बुनी जाती हैं . इन साड़ियों का अपना समृद्धशाली इतिहास  है. पहले ये साड़ियां केवल राजघराने में ही पहनी जाती थीं, लेकिन अब यह आम लोगों तक भी पहुंच चुकी हैं. एक चंदेरी साड़ी बनाने में एक बुनकर को साल भर का वक्त लगता है, इसीलिए चंदेरी साड़ियों को बनाते वक्त कारीगर इसे बाहरी नजरों से बचाने के लिए हर मीटर पर काजल का टीका लगाते हैं.

8. मैसूर सिल्क

सिल्क की साड़ियों की बात हो और मैसूर सिल्क का नाम नहीं आए यह कैसे हो सकता है? अगर आपको साड़ियों में  रिचनेस और ट्रेडिशनल टच चाहिए तो बस एक ही नाम है मैसूर सिल्क. ये साउथ इंडिया की कई मशहूर साड़ियों में गिनी जाती है. ये सिल्क मलबेरी सिल्क से बनता है, जो कर्नाटक में आराम से मिल जाता है.

9. नारायणपेट सिल्क

यह सिल्क साड़ी अपने अलग तरह के पैटर्न के लिए प्रसिद्ध है. साड़ी में एम्ब्रॉयडरी के साथ चेक्ड सरफेस पैटर्न होते हैं . जो मिलकर बॉर्डर या पल्लू पर बहुत ही खास डिज़ाइन का लुक बनाते हैं.  जैसे किसी मंदिर की आउटलाइन. इन साड़ियों की शुरुआत तेलंगाना के नारायणपेट डिस्ट्रिक से 1630 ईसा पूर्व में हुई थी. साड़ी के बॉर्डर पर छोटे ज़री डिज़ाइन्स से कंट्रास्ट लुक मिलता है . यह ब्राइड्स के लिए स्पेशल साड़ी है.

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