हिंदी फ़िल्म का एक मशहूर गीत है – जिसकी बीवी मोटी उसका भी बड़ा नाम है…….  जी हाँ, मोटा या मोटी होना कोई अवगुण नहीं है, बल्कि इसके भी प्लस पॉइंट हैं. अब दक्षिण भारतीय फिल्मों की हेरोइनों को देखें या भोजपुरी फिल्मों की, कैसे मोटे और गठे शरीर की होने के बावजूद खूबसूरत और आकर्षक नज़र आती हैं. पुरानी बॉलीवुड फिल्मों में भी हीरोइने कोई जीरो फिगर वाली नहीं, बल्कि तदरूस्त भरे-भरे शरीर वाली होती थीं, फिर चाहे वो पुरानी रेखा हो या हेमा मालिनी. जीरो फिगर के चलन ने तो बॉलीवुड में कोई दो दशक से ही ज़ोर पकड़ा है, वरना भोजपुरी, पंजाबी या दक्षिण भारतीय फिल्मों में तो आज भी गठे शरीर की अदाकाराओं की धमक है. वहां दुबली-पतली हीरोइनें मुश्किल से ही नज़र आती हैं.

भोजपुरी फिल्मों की तो दस टॉप हीरोइनें मोटी और गठे हुए शरीर की हैं. लेकिन वे बेहद आकर्षक और लोकप्रिय हैं. रानी चटर्जी, स्वीटी छाबड़ा, अंजना सिंह, चांदनी सिंह, काजल राघवानी, नेहा श्री सिंह, आम्रपाली दुबे, मोनालीसा, सीमा सिंह, शिखा मिश्रा, शुभी शर्मा, तन्नू चटर्जी, ये सभी भोजपुरी फिल्मों की नामचीन अदाकारा हैं और भरे-भरे जिस्मों की मालकिनें हैं. हरियाणा की सपना चौधरी को ही देख लीजिये. आप उनको दुबली-पतली तो हरगिज़ नहीं कह सकते, लेकिन वो कमाल की गायिका और नर्तकी हैं. उनके शो में इतनी ठसाठस भीड़ उमड़ती है कि तिल रखने की जगह नहीं होती. उनका आकर्षण ऐसा गज़ब का है कि लोग उनकी एक झलक पाने के लिए मरने-कटने को तैयार रहते हैं. अपने ज़माने में टुनटुन यानी उमा देवी के चाहने वालों की भी लम्बी कतार हुआ करती थी. टुनटुन ने तो अपने मोटापे को ही अपना फ़िल्मी करियर बना लिया था और खूब-खूब मशहूर हुईं.

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19वीं सदी में मोटापे को ही खूबसूरत समझा जाता था. ईरान की राजकुमारी ताज अल कजर सुल्ताना के बारे में कहा जाता है कि उसके भारी-भरकम शरीर ने सुंदरता के सभी मानकों को तोड़ दिया था. यहाँ तक कि उसके चेहरे पर मूंछे और घनी भौहें भी थीं, बावजूद इसके उन्हें काफी सुंदर माना जाता था. कहा तो यह भी जाता है कि उसके प्यार में बहुतेरे नौजवान पागल थे और 13 नौजवानों ने तो उनकों ना पाने के गम में खुदकुशी कर ली थी. ये सभी उसके दीवाने थे और उससे विवाह करने के इच्छुक थे, लेकिन राजकुमारी चूंकि पहले ही शादीशुदा थीं, इसलिए उन्होंने इनके प्रस्तावों को ठुकरा दिया जिससे बेचारों का दिल टूट गया. दरअसल राजकुमारी उस दौर की आधुनिक महिलाओं में से एक थी. वो पश्चिमी सभ्यता से काफी प्रेरित थी और वेस्टर्न कपड़े पहनती थीं. राजकुमारी कजर हिजाब उतारने वाली उस दौर की पहली महिला मानी जाती हैं. राजकुमारी का ये किस्सा पढ़कर आपको इस बात को समझ लेना चाहिए की मोटापा अभिशाप नही है लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा हर चीज़ बुरी होती है इसलिए फिट रहना बेहद ज़रूरी है.

अगर आपको अपने मोटे और गठे शरीर से कोई दिक्कत नहीं है, आपको कोई रोग नहीं है, आप चुस्त-दुरुस्त फील करते हैं तो यकीन मानिये मोटापा अच्छा है. जीरो फिगर या दुबलेपन को सौंदर्य का पैमाना बनाने वाले दरअसल उन कंपनियों के इशारे पर अपनी राय जनता पर थोपते हैं जो दुबलेपन की जेल, क्रीम, दवाएं, जिम  जैसे कारोबारों से जुडी हुई हैं और लोगों को बेवक़ूफ़ बना कर अपना उल्लू सीधा कर रही हैं.

इनके विज्ञापनों के भंवरजाल में उलझ कर सुबह उठते ही लोग न जाने क्या-क्या करते हैं, अखबार देखने और दुनिया का हाल जानने का समय मिले न मिले लेकिन जिम जाने का वक़्त तो निकालना ही है. जिम तो जैसे नौजवानों की जान बन चुका है. लड़की हो या लड़का सबको दुबला दिखना है. मोटापा तो कोई भूत सा लगता है जो जिस पर आ गया तो लोग उस इंसान को पसंद करना ही छोड़ देंगें.

लोगों को दुबला करने के लिए दुनिया भर में बड़े-बड़े योगा इंस्टीटूट्स चल रहे हैं, बड़े-बड़े जिम में लोग भारी भरकम धन खर्च करके घंटों पसीना बहा रहे हैं कि किसी तरह सौंदर्य के पैमाने में फिट हो जाएँ. दुबलेपन की क्रीम-जेल से बाज़ार भरे पड़े हैं. दवा कंपनियां दुबलेपन की दवाओं से प्रतिदिन लाखों-करोड़ों का वारा न्यारा कर रही हैं. और अब तो बाजार में आपको दुबला करने के लिए मसाजर आ गए हैं. आपको कमर की चर्बी घटानी हो या जाँघों की बस मसाजर उठाइये और दो तीन घंटे मसाज कर डालिये. लेकिन ये तमाम कंपनियां अपने उत्पादों से होने वाले साइड इफेक्ट आपको हरगिज़ नहीं बताएंगी. टीवी शोज़ के बीच में आपको दुबला करने के दर्जनों विज्ञापन और शार्ट फ़िल्में दिखेंगी. दरअसल दुबलेपन को सौंदर्य का पैमाना बनाने वाले कारोबारियों को आपके स्वास्थ्य से कोई सरोकार नहीं है, उन्हें तो बस अपने बिज़नेस और पैसे से मतलब है.

अवंतिका ने टीवी पर मसाजर की विशेषताएं देख कर ऑनलाइन सात हज़ार रूपए का मसाजर ऑर्डर किया. अवंतिका को लगने लगा था कि उसकी टाँगे और कमर के हिस्से में ज़्यादा चर्बी जमा हो गयी है जिसके कारण उसका फिगर ठीक नहीं है. अवंतिका ने तीन दिन टांगों की मसाज की. पहले दिन तो उसको बहुत अच्छा लगा लेकिन तीसरे दिन रातों में उसकी टांगों में क्रैम्प्स उठने लगे. क्रैम्प्स के कारण दोनों टाँगे इसकदर खिंचाव महसूस करने लगीं कि अलगे पूरे हफ्ते वो ठीकसे चल फिर भी नहीं पायी. पैरों को ठीक होने में बीस-पच्चीस दिन लग गए और वो भी तब ठीक हुए जब फिज़ियोथैरिपिस्ट ने उसको चार सिटिंग्स दीं. सात हज़ार का मसाजर और दस हज़ार फिज़ियोथैरिपिस्ट को देने के बाद अवंतिका का ध्यान अब अपनी मोटी कमर या टांगों पर नहीं जाता है.

इसलिए बिना सोचे समझे बाजार के इशारे पर चल पड़ना ठीक नहीं है. अगर आपको मोटापे की वजह से कोई रोग नहीं है तो इसका मतलब है कि आपका शरीर बिलकुल फिट है. अपने मोटापे को लेकर तनावग्रस्त रहना या हीनता को पोसना ठीक नहीं है. सुंदरता का पैमाना कभी भी मोटा या दुबला होना नहीं हो सकता. आप मोटे होते हुए भी बेहद खूबसूरत हो सकते हैं. सुंदरता के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, मगर सुंदरता वास्तव में खुद को स्वीकार करने और आपकी सहजता से उभरती है. जिस पल आप खुद को लेकर सहज होते हैं, आप सुंदर महसूस करते हैं. जब आप खुद को स्वीकार करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास दूसरे लोगों को आपकी ओर आकृष्ट करता है और असली सुंदरता दरअसल यही है.

आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर की फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ इस मकसद में बहुत कामयाब फिल्म है जिसने साबित किया है कि सौंदर्य का पैमाना बाजार द्वारा तय मानकों से बिलकुल अलग है. तो अगर आप मोटी हैं और पार्टी-पिकनिक पर दोस्तों संग जाने में आपको झिझक महसूस होती है तो आज ही इस फीलिंग को अपने दिल से निकाल फेंकिए क्योंकि असली सौंदर्य तो आपका आत्मविश्वास और आपका व्यवहार है. इसके अलावा मोटापे के और बहुत सारे फायदे हैं.

–  मोटे लोग कपड़ों को लेकर सेलेक्टिव नहीं होते. उन्हें पता होता है कि उन पर क्या सूट करेगा. उनकी रेंज सीमित होती है, इसलिए उनकी शॉपिंग और खर्च कम ही होते हैं.

–  अगर आपके पति फूडी हैं तो आपका मोटापा उनके लिए प्लस पॉइंट है. वो आपको सिर्फ इसलिए भी बहुत सारा प्यार देंगे कि आप उनको हर वक़्त खाने को लेकर टोकती नहीं हैं बल्कि खुद अच्छी अच्छी चीज़ें बना कर प्यार से परोसती हैं.

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–  फिगर कॉन्श‍ियस लड़कियों के लिए शीशा ही सबसे प्यारा दोस्त होता है. वो अपने पति से ज्यादा शीशे के साथ समय बिताती हैं. लेकिन मोटी बीवी के साथ ये प्रॉब्लम कभी नहीं होती. मोटी बीवी पति को भरपूर प्यार और टाइम देती है.

–  कहते हैं गर्लफ्रेंड हो या बीवी, लड़के हमेशा उनके लिए बॉडीगार्ड का काम भी करते हैं. लेकिन मोटी बीवी तो खुद अपने पति के लिए बॉडीगार्ड होती है. उसको लेकर पतियों की चिंता बहुत कम हो जाती है.

–  अपने पार्टनर को लेकर पोजेसिवनेस या उसे खो देने का डर मर्दों को काफी तनाव और तकलीफ देता है. लेकिन बीवी मोटी होगी तो वो इस तनाव और डर से हमेशा दूर रहेंगे.

–  कहते हैं मोटे लोग ज़्यादा संवेदनशील भी होते हैं इसलिए उनकी दोस्ती में स्थायित्व होता है और उनपर भरोसा किया जा सकता है.

– और आपके मोटे होने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपके घर में आने वाला सारा फर्नीचर काफी मजबूत और अच्छी क्वालिटी का आएगा. आपके वजन को देखते हुए पति हल्का या कमजोर सामान लाने की गलती कभी नहीं करेंगे. यही नहीं अगर घर में कोई व्हीकल लाने पर विचार चल रहा है तो निसंदेह चारपहिया वाहन ही आएगा, क्योंकि दोपहिया पर तो आप समा नहीं पाएंगी. इससे आपकी और आपके परिवार की शान में ही इजाफा होगा.

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