आजकल बीमारियों का इलाज बेहद महंगा होता जा रहा है. ऐसे में अपने और अपने प्रियजनों के लिए इलाज का खर्च जुटाना एक बडा चैलेंज हैं. लोग जाने-अनजाने में ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिससे इलाज का खर्च उन पर भारी पड़ जाता है.
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी डाक्युमेंट ठीक से न पढ़ना
आम तौर पर लोग अपने लिए या अपने परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय पॉलिसी डाक्युमेंट ठीक से नहीं पढ़ते. इसकी वजह से वे पॉलिसी के फीचर्स और शर्तो को नहीं जान पाते हैं. ऐसे में जब उनको या उनके परिवार के लिए किसी सदस्य को ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है तो पता चलता है कि अमुक बीमारी या अमुक सर्जरी प्रोसिजर तो इस पॉलिसी में कवर ही नहीं है. इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कई तरह की शर्ते होती हैं. अगर आप को इन शर्तो के बारे में जानकारी नहीं है तो ज्यादा संभव है कि आपका मेडिकल क्लेम खारिज हो जाए.
प्री एक्जिस्टिंग डिजीज के बारे में सही जानकारी न देना
मेडिक्लेम प्रपोजल फॉर्म में प्वाइंटेड सवाल पूछे जाते हैं क्या आपको प्री एक्जिस्टिंग डिजीज है क्या आपके परिवार में किसी बीमारी की हिस्ट्री है इन सवालों का जवाब इमानदारी से देना चाहिए. कई लोग सोचते हैं कि प्री एग्जिस्टिंग डिजीज के बारे में जानकारी दिए बिना ही काम चल जाएगा. जब ऐसे लोग डॉक्टर के पास जाते हैं तो वे बेहतर इलाज के लिए अपनी मेडिकल हिस्ट्री का पूरा खुलासा करते हैं. बीमा कंपनियों की पहुंच हॉस्पिटल रिकॉर्ड तक होती है और वे यह रिकॉर्ड हासिल कर लेती हैं. आपकी मेडिकल हिस्ट्री से अगर ये पता चलता है कि आपको प्री एग्जिस्टिंग डिजीज थी और आपने इसका खुलासा नहीं किया है तो आपका क्लेम खारिज हो जाएगा.
मेडिकल चेकअप स्किप करना
आम तौर पर बीमा कंपनियां 45 वर्ष की उम्र तक मेडिकल चेकअप के लिए नहीं कहती हैं. लेकिन अगर आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है तो मेडिकल चेकअप जरूरी हो जाता है. अगर आपने मेडिकल चेकअप नहीं कराया है और बाद में पता चलता है कि आपको पहले से कोई मेडिकल प्रॉब्लम थी आपका क्लेम खारिज हो जाएगा. इसके अलावा कई बीमा पॉलिसी 30 से 90 दिन की कूलिंग पीरिएड के साथ आती हैं. इस अवधि में कोई बीमारी कवर नहीं होती है. इस अवधि में सिर्फ एक्सीडेंट कवर होता है.
सीनियर सिटीजंस को पेमेंट क्लॉज के बारे में जानकारी न होना
सीनियर सिटीजंस की पॉलिसीज में को पेमेंट क्लॉज होता है. जब इलाज का बिल आता है तो आपको इसका निश्चित फीसदी हिस्सा पेमेंट करना होता है और इसके बाद बीमा कंपनी शेष बिल का पेमेंट करती है. अगर पॉलिसी छोटे कस्बे में खरीदी गई है और आप इलाज मेट्रो में कराते हैं तो भी बीमा कंपनी इलाज प होने वाले खर्च के एक हिस्से का ही भुगतान कर सकती है.
रूम रेट या आईसीयू के चार्ज पर कैपिंग की जानकारी न होना
कुछ बीमा कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर कम प्रीमियम देती हैं लेकिन इनमें सब लिमिट हो सकती है. रूम रेंट और आईसीयू के चार्जेज के रिइंबर्समेंट पर कैपिंग होती हैं. कुछ पॉलिसी डिजीज स्पेशिफिक सब लिमिट के साथ होती हैं.