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बीमा लेते वक्त ज्यादातर लोग इस बात का खयाल नहीं रखते कि बीमा कवर कितना होना चाहिए जिस से आने वाले समय में अपनों की बीमारी, पढ़ाई, शादीब्याह के मौके पर किसी प्रकार का वित्तीय दबाव न झेलना पड़े. जो लोग पर्याप्त बीमा कवर लेने की सोचते हैं वे ऊंचे प्रीमियम के चलते ऐसा कर नहीं पाते. ऐसी स्थिति में मौजूदा जरूरतों को और मुद्रास्फीति का ध्यान रखते हुए टर्म इंश्योरैंस प्लान प्रत्येक के लिए बेहतरीन विकल्प है.

बैंक बाजार डौट कौम के सीइओ व कोफाउंडर आदिल शेट्टी का कहना है, ‘‘टर्म इंश्योरैंस आप को जीवन में निश्चितता देता है. दरअसल इस के जरीए आप कम प्रीमियम पर बड़ा बीमा कवर खरीद पाते हैं. अच्छा तो यह रहेगा कि आप अपनी मौजूदा सालाना आय का 20 गुना के बराबर बीमा कवर लें. इस से आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिजनों को संपूर्ण वित्तीय सुरक्षा मिलती है.’’

क्या है टर्म इंश्योरैंस

यह बीमा का ही एक प्रकार है. हालांकि दूसरे बीमा विकल्पों की तुलना में यह खास इसलिए है, क्योंकि यह काफी सस्ता है और इस से पर्याप्त कवर मिलता है. दरअसल, टर्म इंश्योरैंस में कोई कैश वैल्यू नहीं होती. टर्म प्लान 10, 20, 30 या 50 वर्षों के लिए भी हो सकता है. यदि इस अवधि में बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उस के नौमिनी कवर की राशि क्लेम कर सकते हैं.

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टर्म इंश्योरैंस की औनलाइन खरीदारी सस्ती है. दरअसल, उपभोक्ता जब औनलाइन पौलिसी लेता है तो संबंधित बीमा कंपनी को इंश्योरैंस एजेंट और कागजी कार्यवाही पर खर्च नहीं करना पड़ता है. लिहाजा इस का फायदा बीमा कंपनी सीधा पौलिसीधारक को उपलब्ध कराती है. साथ ही बीमा खरीदते वक्त औनलाइन फार्म भरने से आप कई औपचारिकताओं से भी बच जाते हैं.

पर्याप्त बीमा कवर

टर्म इंश्योरैंस व्यक्ति को न्यूनतम प्रीमियम पर अधिकतम कवर उपलब्ध कराता है. उदाहरण के तौर पर यदि मुंबई में रहने वाला 30 वर्ष का युवक जो धूम्रपान नहीं करता, वह 30 साल के लिए एक करोड़ रुपए के कवर वाला टर्म प्लान लेता है तो इस का सालाना प्रीमियम 7,497 रुपए से शुरू होता है. यही व्यक्ति अगर इतनी ही अवधि के लिए 50 लाख रुपए का कवर लेता है तो इस का सालाना प्रीमियम 4,222 रुपए से शुरू होता है.

सर्वाइवल बैनिफिट

रैग्युलर टर्म प्लान में प्रावधान है कि यदि बीमा की अवधि में बीमित व्यक्ति सही सलामत है, तो उसे मैच्योरिटी पर कोई कैश वैल्यू नहीं प्राप्त होती. लेकिन टर्म इंश्योरैंस की श्रेणी में ही टर्म रिटर्न औफ प्रीमियम प्लान्स (टीआरओपी) का भी विकल्प मौजूद है. इस में प्लान की मैच्योरिटी पर प्रीमियम रिफंड का विकल्प होता है.

लो क्लेम रिजैक्शन

यदि आप का टर्म इंश्योरैंस 10 साल से अधिक समय तक सक्रिय रहा है तो क्लेम खारिज होने की संभावना बेहद कम होती है. यदि आप ने 50 लाख रुपए या इस से कम राशि का टर्म प्लान लिया है तो बहुत सी बीमा कंपनियां आप से हैल्थ चैकअप कराने का आग्रह भी नहीं करती हैं.

राइडर्स

राइडर्स के जरीए आप अपने टर्म इंश्योरैंस को समय समय पर और बेहतर बना सकते हैं. इस से आप को कई अन्य जोखिमों का भी कवर मिल जाएगा. उदाहरण के तौर पर आप बेहद कम कीमत पर टर्म प्लान के तहत ऐक्सीडैंटल डैथ बैनिफिट, क्रिटिकल इलनैस, पार्शियल और परमानैंट डिसैबिलिटी कवर जैसी अतिरिक्त सुविधाओं को भी जुड़वा सकते हैं.

फ्लैक्सिबल पेमैंट औप्शन

टर्म इंश्योरैंस पौलिसी में पौलिसीधारक को उस की सुविधा अनुसार प्रीमियम भुगतान के कई विकल्प मिलते हैं. मसलन इस में आप को सीमित भुगतान या एकमुश्त भुगतान या फिर नियमित भुगतान का विकल्प मिलता है, जिस का मतलब है कि आप पौलिसी प्रीमियम की पेमैंट मासिक, तिमाही या फिर सालाना आधार पर कर सकते हैं.

कर छूट का फायदा

परिजनों की वित्तीय सुरक्षा के साथ ही टर्म इंश्योरैंस पर पौलिसीधारक को आयकर छूट का भी फायदा मिलता है. पौलिसीधारक इस पर आयकर अधिनियम की धारा 80(सी) के तहत कर छूट प्राप्त कर सकते हैं. इस के अलावा बीमित व्यक्ति की यदि मृत्यु हो जाए तो उस के द्वारा नामांकित व्यक्ति को बीमा की जो राशि मिलती है उस पर भी धारा 10 (10डी) के तहत कर छूट का प्रावधान है.

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