शेयर बाजार से वारेन बफेट ने बेहिसाब मुनाफा कमाया है और नुकसान न के बराबर. कामयाबी का गुर उन से साझा करने की विनती की गई तो उन्होंने बताया, ‘‘मैं शेयर बाजार में निवेश नहीं करता बल्कि मैं तो बिजनैस में निवेश करता हूं. ’’

तात्पर्य यह था कि बफेट उन्हीं बिजनैस कंपनियों के शेयर खरीदते हैं जिन की उन्हें समझ है. इस के लिए वे उपलब्ध डाटा, रिपोर्ट और कंपनी की बिजनैस मैनेजमैंट टीम के बारे में पूरी जानकारी जुटा कर बारीकी से अध्ययन करते हैं. यही नहीं, वे बिजनैस मौडल को समझने पर ही निवेश करने की सोचते हैं.

शेयर बाजार में अलगअलग कंपनियों के नाम से शेयर होते हैं जो अलगअलग क्षेत्रों से सबंधित होती हैं. जैसे रियल एस्टेट, औयल, बैंकिंग, कंज्यूमर गुड्स, पावर, स्टील, संचार व मैटल आदि. यदि आप को पहले अपनी पसंद की कंपनी चुननी है तो सब से उस कंपनी के इतिहास को खंगालें और अच्छी तरह से उस कंपनी की बैलेंस शीट और टर्न ओवर के बारे में जांचपड़ताल कर लें. तभी निवेश के बारे में सोचें.

हालांकि यह बात काफी हद तक सही है कि बाजार के भविष्य के बारे में कोई भी नहीं बता सकता. परंतु उपलब्ध आंकड़े, तथ्य एवं अच्छे बिजनैस में पैसा लगा कर जोखिम को कम तो किया ही जा सकता है.

पहली बार अगर आप बाजार में निवेश करने की सोच रहे हैं तो सब से पहले यह पता करें कि बाजार की चाल क्या है. आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, कितने रिटर्न की चाहत रखते हैं. आप शौर्ट टर्म, मिड टर्म या फिर लंबे समय के निवेश की सोच रहे हैं.

ज्यादा रिटर्न, ज्यादा रिस्क

अधकचरे ज्ञान के साथ या फिर ब्रोकर के कहे अनुसार निवेश करना अक्लमंदी नहीं है. वैसे भी पहली बार निवेशक अधिक उत्साह में होता है. लगता है, कोई बनाए न बनाए, वह तो बाजार से पैसा बनाएगा ही. दुख की बात तब होती है जब रिटायर्ड आदमी अपनी तमाम जमापूंजी के साथ खिलवाड़ कर बैठता है. फिक्स्ड डिपौजिट की ब्याज दर घटती देख कर लोग चाहते हैं कि शेयर बाजार से बढि़या रिटर्न लें. ज्यादा रिटर्न, ज्यादा रिस्क.

राकेश झुनझुनवाला ने रातोंरात अत्यधिक मुनाफा कमाने की चाह रखने वाले व्यक्तियों को शेयर बाजार में निवेश न करने की सलाह दी है. उन का कहना है, ‘‘यह तो जुआ खेलने से ही संभव है. बाजार में निवेश लंबी अवधि, संयम एवं उतारचढ़ाव से न घबराने वाले लोगों को ही करना चाहिए.’’

पहली बार निवेश करने वाले निवेशकों को कम से कम इन बातों को जरूर ध्यान में रखना चाहिए-

– बाजार में उतारचढ़ाव आतेजाते हैं. शेयर में गिरावट आने पर घबरा कर तुरंत पैसा निकालने से पहले दस बार सोचें.

– अगर आप ने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है तो मासिक या वीकली रिपोर्ट पर ही गौर करें. रोजरोज शेयर की घटतीबढ़ती दरों को देख कर परेशान न हों.

– मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी पूंजीकरण के हिसाब से अधिक बड़ी कंपनियों में निवेश शुरुआती दौर में ठीक है. दरअसल, आप का पहला फोकस अपनी पूंजी को गंवाना (किसी भी हाल में) नहीं होना चाहिए.

– अगर लाभ नहीं भी मिले तो पूंजी हर हाल में सुरक्षित रहे. ऐसा सोच कर निवेश करें.

– निवेश से पहले ईपीएस यानी (अर्निंग पर शेयर) जरूर देखें.

– बुक वैल्यू/शेयर जरूर देखें. बुक वैल्यू अच्छी होनी चाहिए.

– ऋण इक्विटी अनुपात यानी डैब्ट इक्विटी रेशियो जरूर देखें. यह जितना निम्न हो, उतना बढि़या है.

– वर्तमान संपत्तियों/ वर्तमान देनदारियों का वर्तमान अनुपात देख कर ही निवेश करने की सोचें.

– ध्यान दें कि 1 साल से कम पैसा निकालने पर शौर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है. इस की दर 15 प्रतिशत है.

– डीमैट अकाउंट की मैंटेनैंस फीस हर बैंक या संस्था की अलग होती है. कुछ बैंक पहले वर्ष कोई फीस नहीं लेते परंतु दूसरे या तीसरे वर्ष उन की फीस में काफी बढ़ोतरी हो जाती है.

– अगर आप सिर्फ म्यूचुअल फंडों में निवेश करना चाहते हैं तो बिना डीमैट अकाउंट खोले भी कर सकते हैं.

– बैंक बेहद कम चार्ज ले कर म्यूचुअल फंडों में निवेश की सुविधा देते हैं. कुछ बैक प्रोसेसिंग फीस भी चार्ज नहीं करते. इन सब के बारे में अच्छी जानकारी लेने के बाद ही निवेश करें. निवेश करने से पहले ब्रोकरेज के बारे में भी पता कर लें. पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही आगे बढ़ें.

– यह जरूर ध्यान में रखें कि बाजार की चाल कोई नहीं जान सकता.

उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए निवेश करें. साथ ही बाजार में फैली अफवाहों और दोस्त, रिश्तेदारों या ब्रोकरों के बताए टिप्स से दूर ही रहें तो अच्छा है. नियमित रूप से बाजार के बारे में जानकारी हासिल करते रहें. शुरुआत हमेशा कम पूंजी से करें ताकि ज्यादा नुकसान न हो. बाजार को कई बार बड़ेबड़े खिलाड़ी भी भांप नहीं पाते हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है.

निवेशक के अधिकार

– हर क्लाइंट का अलग यूनीक क्लाइंट कोड होता है.

– केवाईसी की कौपी एवं अन्य दस्तावेज.

– निवेश या व्यापार सिर्फ आप के यूनीक क्लाइंट कोड के साथ ही करें.

– फंड एवं सिक्युरिटीज समय से प्राप्त करने का अधिकार.

– शुल्क या किसी भी अन्य कटौती का विवरण जानने का अधिकार.

– कंपनी के विरुद्ध शिकायत का अधिकार.

– अकाउंट के सैटलमैंट का अधिकार.

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