हर किसी के सामने कभी न कभी ऐसी स्थिति आती है जब उसे अतिरिक्त पैसों की जरूरत पड़ती है और तब मदद के लिए उसके दिमाग में सबसे पहले दोस्त व रिश्तेदार ही आते हैं. यदि आपका भी कोई दोस्त या रिश्तेदार आपसे पैसों की मदद मांगे, तो उनकी मदद जरूर करें, मगर यहां कुछ बातों का ध्यान रखें.
आमतौर पर लोग रिश्तेदारी में पैसों के लेनदेन से बचते हैं क्योंकि कई बार पैसा, बेहद करीबी रिश्तों में भी कड़वाहट घोल देता है, इसलिए लोग दोस्त या रिश्तेदारों के साथ बिजनेस पार्टनरशिप करने से भी बचते हैं, मगर बावजूद इसके कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि आपका कोई करीबी आपसे मदद मांगता है और आप रिश्तों का लिहाज करके ना नहीं बोल पातें. अपनों की मदद करना अच्छी बात है, मगर पैसों के मामले में थोड़ी एहतियात भी बरतनी चाहिए, यदि आपको किसी अपने को उधार देना ही पड़ें, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें.
परिस्थितियों का आकलन करें
किसी अपने को उधार देने से पहले परिस्थितियों का अच्छी तरह से विश्लेषण कर लें, साथ ही मामले की गंभीरता को भी समझने की कोशिश करें. क्या सामने वाले को सचमुच किसी बेहद ज़रूरी काम के लिए पैसे चाहिए या फिर बस अपना कोई शौक पूरा करने लिए वो आपसे पैसे मांग रहा है.
हालांकि इस मामले में बहुत ज्यादा पूछताछ न करें, मगर इतना जरूर जानने की कोशिश करें कि उसे किस काम के लिए पैसे चाहिए? हो सके तो उसे तुरंत पैसे देने की बजाय कोई दूसरा रास्ता सुझाएं. यदि फिर भी बात न बनें और पैसे देने ही पड़े, तो अच्छी तरह से उसकी जरूरत की पड़ताल करने के बाद ही पैसे दें, कहीं ऐसा न हो कि वो आपके पैसों का गलत इस्तेमाल करे, जिससे भविष्य में आपके रिश्ते में दरार पड़ जाए.
शर्तों और नियमों पर चर्चा कर लें
पैसों के मामले में भावनाओं को दूर ही रखें. आपकी क्या शर्तें और नियम है इसकी लिस्ट बना लें, जैसे- वो कितने दिनों में आपके पैसे लैटाएंगे, पेमेंट कैसे करेंगे? यदि ज़्यादा अमाउंट है तो इंस्टॉलमेंट कितनी होगी आदि आदि.
ये सारी चीजें सामने वाले से डिस्कस कर लें, ताकि भविष्य में किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश न रहे. एक बात याद रखिए कि एक बार पैसे देने के बाद उससे बार-बार ये न पूछे कि उसने पैसों का क्या किया, कैसे खर्च किए. आपके बार-बार पूछने से रिश्ते में तनाव और दरार आ सकती है. यदि बहुत बड़ी रकम उधार दे रहे हैं, तो उसका लिखित सबूत यानि की रिटेन प्रूफ जरूर रखें.
पहले अपनी सहूलियत देखें
‘अरे चाचा जी ने आज पहली बार मुझसे पैसे मांगे है, अब तो किसी भी तरह से पैसों का इंतज़ाम करना ही पड़ेगा…’ अपने किसी करीबी द्वारा उधार मांगने पर ऐसा रिएक्शन आपको मुश्किल में डाल देगा.
मान लीजिए आपने अभी तो अपनी क्षमता से बाहर जाकर अपने किसी दोस्त या कलीग से पैसे मांगकर उन्हें दे दिए, लेकिन यदि सामने वाले ने आपको समय पर पैसे नहीं लौटाएं तब आप क्या करेगें. अतः यदि आपके पास पैसे नहीं है तो इन्कार करने में संकोच न करें. अपनी जरूरते पूरी होने के बाद यदि आपके पास अतिरिक्त पैसे हो तो ही किसी को उधार दें.
यदि आपके दोस्त या रिश्तेदार ने जितने पैसे मांगे हैं, आपके पास उतना नहीं है, तो उनसे साफ शब्दों में कह दीजिए कि आपके पास फिलहाल उतने पैसे नहीं हैं और जितना आपसे बन पड़े उतने ही पैसे दें.
पैसे वापस करने का समय निश्चित करें
चूंकि आप किसी अपने को ही उधार दे रहे हैं तो ऐसे में शायद आपको लगे कि पैसे वापस करने का समय निश्चित करने की जरूरत नहीं है, मगर आपकी ये सोच सही नहीं है. आप चाहे किसी को भी उधार दें, पैसे देते समय ही उसे वापस करने का समय भी तय कर लें.
इस बात का ध्यान रखें कि सामने वाला भी समय तय करने की जरूरत को समझें. दरअसल, ऐसा करना उसके लिए भी फायदेमंद ही रहेगा क्योंकि समय तय करने से उस पर निश्चित तारीख तक पैसे देने का दबाव बढ़ेगा और आपके पैसे वापस चुकाने के लिए सेविंग करने में जुट जाएगा. जहां तक संभव हो कम पैसों के लिए ज्यादा लंबा समय न रखें. हां, यदि पैसे ज्यादा दिए हैं, तो आप साल दो साल का समय तय कर सकते हैं. आपने कितना उधार दिया है, ये हमेशा याद रखें.
ब्याज न वसूलें
आपने कोई बिजनेस डील नहीं की है और न ही किसी बैंक या फायनेस कंपनी में निवेश किया है कि आपको ब्याज मिलेगा. अपने किसी सगे-संबंधी को दिए पैसों पर ब्याज वसूलने की गलती न करें, हो सकता है उस वक्त वो शख्स आपकी बात मान ले, मगर आगे चलकर निश्चित ही आपके रिश्तों में दूरियां आ जाएंगी. ये बात भी आपको सोचना चाहिए कि उन्होंने बैंक या किसी फायनेंशियल कंपनी की बजाय आपसे पैसे इसलिए मांगे क्योंकि उन्हें आप पर विश्वास है कि आप उनकी मजबूरी समझेंगे और उसका नाजायज फायदा नहीं उठाएंगे.
उधार को आदत न बनाएं
हालांकि आप अपने किसी करीबी को पैसे देकर उसकी मदद कर रहे हैं, मगर उधार देने को अपनी आदत में शुमार न करें. वरना सामने वाला व्यक्ति आपको ग्रांटेड लेने लगेगा. वो पैसों की अहमियत भी नहीं समझेगा क्योंकि उसे पता है कि जब उसे जरूरत होगी तो आप तो हैं ही उसकी मदद करने के लिए और ये हालात आपके लिए खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि लंबे समय पैसे न चुकाने पर यदि आप उसे बार-बार याद दिलाते हैं, तो वो अपमानति और असुरक्षित महसूस करने लगता है.
इस स्थिति में कई बार उधार लेने वाला व्यक्ति आपके साथ कुछ गलत भी कर सकता है. ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां उधार लेने वाले व्यक्ति ने तंगहाली के कारण पैसे देने वाले को ही रास्ते से हटा दिया है.
पहचान वालों को बनाएं गवाह
आप जो उधार दे रहे हैं यदि उसके लिए कोई लिखित सबूत नहीं है, तो कभी भी अकेले में पैसे उधार न दें, भले ही वो आपके भाई या बहन ही क्यों न हो. जहां तक संभव हो ऐसे कुछ लोगों के सामने पैसे दें, जो आप दोनों को जानते हों. इससे पैसे लेने वाले को अपनी जिम्मेदारी का एहसास रहेगा और वो जल्द पैसे वापस करने की कोशिश करेगा. इसी तरह इन्हीं जानकार लोगों के सामने पैसे वापस लौटाने पर उधार वापस करने वाले को भी तसल्ली रहती है.