अक्सर हम सेहत को लेकर बहुत फिक्रमंद रहते हैं, और अच्छी सेहत के लिए योग, व्यायाम और हैल्दी डाइट को फॉलो करते हैं. पर क्या आप जानते हैं कि घर में सर्वाधिक संक्रमण का स्थान हमारा रसोईघर होता है क्योंकि यहां पर हम हरदिन काम करते हैं. रसोईघर में बने भोजन को प्रतिदिन कम से कम तीन से चार बार घर के सभी सदस्य खाते हैं. आमतौर पर घर के ड्राइंग रूम और लिविंग रूम की तरफ तो हम हर रोज ध्यान देते हैं, उसे व्यवस्थित करते हैं पर रसोईघर की साफ सफाई की तरफ बहुत कम ध्यान दिया जाता है. भोजन का सीधा सम्बन्ध हमारे स्वास्थ्य से होता है इसलिए इस ओर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है ताकि घर के सभी सदस्य स्वस्थ रहें. आज हम आपको कुछ बिंदु बता रहे हैं जिनका ध्यान रखकर आप अपनी रसोई को कीटाणुमुक्त रख सकतीं है-
1. स्वस्थ हो शरीर
आप अथवा आपकी मेड शरीर के किसी भी हिस्से में फोड़ा, फुंसी अथवा कटे फटे होने पर खाना न बनाएं क्योंकि खाना बनाते समय इनमें लगे अति सूक्ष्मजीवी कीटाणु भोजन को संक्रमित करके आपको भी बीमार कर सकते हैं. यदि आपको सर्दी खांसी या जुकाम है तो मुंह पर कपड़ा या मास्क लगाकर किचिन में काम करें.
2. बर्तन हों स्वच्छ
खाना पकाने और सर्व करने वाले बर्तन को ठीक से धोकर पोंछकर ही प्रयोग करें क्योंकि कई बार इनमें छोटी छोटी मकड़ी या कॉकरोच चिपके रहते हैं जो आपके भोजन को विषाक्त कर सकते हैं. धुले बर्तनों को पूरी तरह सूख जाने पर ही शेल्फ में जमाएं, शेल्फ को कम से कम माह में एक बार धो पोंछकर जमाएं.
3. हैल्दी हों बर्तन
खाना पकाए जाने वाले बर्तन भोजन में बहुत अहमियत रखते हैं. हमारी दादी नानी भोजन पकाने के लिए लोहा, पीतल, कांसा और तांबे के बर्तनों का प्रयोग करतीं थीं जिसका प्रमुख कारण था कि खाना पकने के दौरान उन धातुओं के तत्व भोजन में मिलकर उसकी पौष्टिकता को बढ़ा देते थे परन्तु आजकल स्टील, कांच और एल्युमिनियम के बर्तनों का प्रयोग किया जाने लगा है जिससे भोजन को बर्तनों का कोई पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाता. जहां तक सम्भव हो सब्जी बनाने के लिए लोहे की कढ़ाई का प्रयोग करना चाहिए ताकि उसमें निहित आयरन आपको प्राप्त हो सके.
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4. सुरक्षित हों नॉनस्टिक बर्तन
आजकल घरों में नॉनस्टिक बर्तन बहुतायत में पाये जाते हैं. नॉनस्टिक बर्तन को बहुत ध्यान से प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि यदि इनमें जरा भी स्कैच हो जाता है तो इसकी कोटिंग निकलना प्रारम्भ हो जाती है जो हमारे भोजन में जाकर उसे विषाक्त कर देती है. खरोंच लगे अथवा कोटिंग निकले नॉनस्टिक बर्तनों का प्रयोग करने से बचना चाहिए.
5. गूंजा और ब्रश हों साफ सुथरे
बर्तन साफ करने वाले गूंजा, ब्रश, प्लेटफॉर्म के कपड़े आदि को प्रतिसप्ताह गर्म पानी में बेकिंग सोडा डालकर उबालकर धूप में सुखाएं ताकि वे कीटाणुमुक्त हो जाएं.
6. कीटाणुमुक्त हो चोपर
सब्जी काटने के लिए आजकल चॉपर का प्रयोग किया जाता है, इनकी दरदरी सर्फेस में गंदगी भर जाती है, और सब्जी काटते समय यह गन्दगी सब्जी में ही समा जाती है इससे बचने के लिए रोज धोने के अतिरिक्त प्रतिसप्ताह किसी अच्छे कीटनाशक के पानी से धोना चाहिए. इसके अतिरिक्त बहुत अधिक स्क्रैच हो जाने पर बदल ही देना चाहिए.
7. साफ हो डस्टबिन
जहां तक सम्भव हो किचिन में साफ सुधरे ढक्कन दार डस्टबिन का प्रयोग करना चाहिए. सूखा और गीला कचरा अलग रखनेके साथ साथ इसके अंदर प्रतिदिन साफसुथरी थैली लगाएं.
8. चिमनी भी है अहम
आजकल की रसोई में चिमनी भी बहुत महत्वपूर्ण होती है आमतौर पर इन्हें सब्जी छौंकने के दौरान उत्पन्न चिकने धुंए की निकासी के लिए लगाया जाता है परन्तु यदि इनकी नियमित सफाई न की जाए तो इनमें जाले और मिट्टी भर जाती है जो गैस पर रखे भोजन में गिरकर उसे खराब कर सकती है. यदि आपकी चिमनी में ऑटोमेटिक फंक्शन है तो माह में एक बार उसे चलाकर साफ करें, साथ ही वर्ष में एक बार किसी मैकेनिक से पूरी सफाई भी करवाएं.