Feeling Angry : क्रोध आना और क्रोधित होना कोई अजीब बात नहीं है. जब कभी माहौल अनुकूल नहीं होता है तब न चाह कर भी गुस्सा आ ही जाता है. जब भी हमें गुस्सा आ रहा होता है तब हम क्रोध के आवेश में अंधे हो कर कभीकभार ऐसे काम भी कर देते हैं कि बाद में बहुत पछतावा होता है. इसलिए जब कभी किसी भी वजह से क्रोध आ रहा हो तो एक पल के लिए रुकें और सोचें कि आप को किस बात पर गुस्सा आया है.
इस समय लंबी तथा गहरी सांस लें
गहरी सांस लेने से आप का शरीर शांत होता है और गुस्से की भावनाएं कम होती हैं. संगीत सुनना भी मददगार होता है.
किसी और बात की कल्पना करें
किसी आरामदायक अनुभव की कल्पना करें. जीवन में जब क्रोध न किया तब सब कितना सकारात्मक रहा. ऐसा सोच कर शायद आप के क्रोध का आवेग कम होने लगे.
दूसरे की बात को अधूरा नहीं बल्कि पूरा सुनें
जब बहुत ही क्रोध आने लगे तो दूसरे व्यक्ति की बात को ध्यान से सुनें और जवाब देने से पहले जरा सा धीरज रखें. जबान तलवार से भी धारदार है, यह कभी न भूलें. जब भी बहुत क्रोध आ रहा हो तो दिमाग से हर तरह के नकारात्मक तथा अनावश्यक विचारों को पास नहीं आने देना चाहिए. अगर बगावत जैसे विचार आप के गुस्से को और बढ़ा रहे हों तो अच्छा होगा कि किसी भरोसेमंद दोस्त से बात करें, अपनी परेशानी साझा करें और क्रोध की अग्नि को शांत होने दें.
जिस व्यक्ति का गुस्सा खराब होता है, उस व्यक्ति की सब से बड़ी कमजोरी यही होती है कि वह अपने शब्दों की वजह से अकसर अपने संबंध या जानपहचान को बिलकुल खराब कर बैठता है. हालांकि आज की हमारी जीवनशैली के लिए यह मान लेना ज्यादा अच्छा है कि विभिन्न विचार रखने वालों की वजह से भी अचानक मन में क्रोध और संघर्ष पैदा होता है और जब बात हो घर, परिवार या दफ्तर के सहकर्मी के साथ नाजुक रिश्ते की तो भावुकता के कारण ये चीजें ज्यादा खराब होने लगती हैं. हालांकि इस का ऐसा बिलकुल मतलब नहीं है कि आप सब की गलत बातों को भी सही मान लें और हमेशा गुस्सा थूक दें. अपनी बात भी रखनी चाहिए लेकिन कोशिश करें कि आप के क्रोध भरे विचारों का असर आप के किसी भी रिश्ते या परिचय पर नकारात्मक न हो.
दूसरों को ठेस न पहुंचाएं
जिस से हम सब से ज्यादा प्यार करते हैं उसे हम कभी भी दुखी नहीं करना चाहते हैं लेकिन दैनिक जीवन में होता उस का उलटा ही है. क्रोध में भर कर किसी के भी लिए न केवल घटिया, बेहूदा या पागल, बेवकूफ जैसे शब्द इस्तेमाल करना गलत है बल्कि यह भावना उन्हें काफी ठेस भी पहुंचाती है. भले ही आप कितने भी गुस्से में क्यों न हों लेकिन भावनाओं को समझ कर और सीधे अनुरोध कर के भी अपने सामने वाले को उस की गलती का एहसास करा सकते हैं.
अगर अपने बच्चों से, भाईबहन से या अपने सहयोगियों से कोई नाराजगी क्रोध बन रही हो तो कुछ ठहर कर बात करनी चाहिए. भले ही आप उस वक्त बहुत गुस्से में थे, जब आप ने अपने जूनियर या अपने किसी सहयोगी को गलत या अनुचित काम करने से रोका था और काम सही न होने पर आप क्रोध में कह देते हैं कि वे सब तो नालायक हैं या फिर आप के लायक ही नहीं हैं.
‘‘मगर जरा सोचिए तो कि क्रोध में मुंह के रास्ते दिल से निकली बात बहुत दूर तक जाती है और अगर यह कटु बात उन के मन में बैठ गई तो यह आप के भविष्य के लिए कितनी खराब होगी. कभी भी अपने साथ मतभेद करने वाले को इस बात का एहसास न दिलाएं कि आप उसे अपने लायक नहीं सम?ाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि यही छोटीछोटी बातें रिश्ते तोड़ने का कारण बनती हैं.
घातक है गुस्सा
अगर घर पर किसी कारण से क्रोध आ गया तो गुस्से में घर से दोपहिया या चौपहिया वाहन ले कर निकलना बहुत घातक है. इस तरह गाड़ी चलाने से दुर्घटना का खतरा 10 गुना तक बढ़ जाता है.
गुस्से में गाड़ी चलाने से आप शारीरिक रूप से बीमार पड़ सकते हैं और आगे चल कर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का सामना कर सकते हैं. एक बार गंभीरतापूर्वक चिंतन कीजिए कि सड़क पर वाहन को तेज चला कर कोई भी अपने घर या कुटुंब के गुस्से से निबटने का उपाय या तरीका नहीं पा सकता है. ठंडे दिमाग से कुछ देर एकाग्र हो कर बैठना ही बेहतर है.
जब भी आप किसी वजह से बेहद क्रोध में हों तो इस विषय पर एकतरफा विचार कभी भी सोशल मीडिया में नहीं लिखने चाहिए. कुछ लोग अपने मन का गुबार, गुस्सा आदि सोशल मीडिया में जाहिर कर देते हैं. सोशल मीडिया इमेज बनाने में बहुत योगदान देता है. इस का दुरुपयोग कर अपनी कुंठा अथवा भड़ास मत निकालिए.
इस से पहले कि क्रोध में भर कर आप औनलाइन कुछ लिखें या किसी ऐसी बात में शामिल हों जो किसी गरमगरम बहस या शत्रुता में भी बदल सकती है, अपनी भावनाओं को शांत करने के लिए थोड़ा समय निकालें. आप जवाब भी लिख सकते हैं लेकिन उसे अपने इनबौक्स में तब तक के लिए छोड़ दें जब तक कि आप उस पर नए सिरे से विचार न कर सकें. एक बार जब आप किसी मुश्किल बातचीत का फैसला कर लेते हैं और गुस्सा बढ़ता हुआ देखते हैं तो आप हमेशा रुक सकते हैं, शांत हो सकते हैं और बाद में वापस आ सकते हैं.
ठंडे दिमाग से सोचें
कभीकभार कार्यस्थल पर अपने सीनियर से कुछ फटकार मिलने पर मन आहत हो जाता है. मगर ऐसे में इस्तीफा देना ठीक नहीं है. ठंडे दिमाग से सोच कर फिर अपनी नौकरी का कोई फैसला लेना चाहिए.
आज मस्तिष्क विज्ञान यह समझने में सहायक है कि जब आप बहुत गुस्से में होते हैं या किसी चीज से उत्तेजित होते हैं तो आप का मस्तिष्क बगावत, लड़ाई या फिर पलायन अथवा भागने की प्रतिक्रिया में बदल जाता है और आप के सोचनेसम?ाने की शक्ति को कुप्रभावित करता है. अगर क्रोध आने लगता है तो गौर कीजिए कि आप किसी अपेक्षाकृत बहुत छोटी सी बात से भी उत्तेजित हो सकते हैं.
तो इस का मतलब यह है कि यह क्रोध आप के मस्तिष्क के उस हिस्से को दबा देता है जो भावनाओं को नियंत्रित करने और कार्यों का मूल्यांकन करने के लिए जिम्मेदार होता है. बहुत परेशान होने की स्थिति में, आप के पास अपनी तर्कसंगत, तार्किक सोच प्रक्रियाओं तक कम पहुंच होती है और यदि आप क्रोध की स्थिति में अपना कोई कार्य करते हैं तो आप को बाद में अपने उन कर्मों पर पछतावा होने की अधिक संभावना होती है.
बारबार क्रोध करने से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थायराइड, कब्ज, दिल की बीमारी, लकवा, अवसाद जैसे रोग अपनी चपेट में ले लेते हैं. क्रोध एक मानसिक अवस्था है. इसे नियंत्रित किया जा सकता है. इसलिए जब भी आप को गुस्सा आता है तो उलटी गिनती करें, थोड़ा टहलें, मैडिटेशन करें, गहरी सांस लें या चुप रहें, उस जगह से हट जाएं. मगर अपशब्द न बोलें और न ही तैश में, आवेश में आ कर कोई सार्वजनिक निर्णय लें. अगर आप को क्रोध में अपने व्यवहार को नियंत्रित करने में बारबार परेशानी हो रही है तो किसी अपने से, करीबी दोस्त या फिर मनोवैज्ञानिक सलाहकार से मदद लें. मगर बारबार पनपने वाले क्रोधरूपी पौधे को विशाल वृक्ष न बनने दें.