ज़्यादातर लोग नौकरी को ही रोजगार मानने लगे हैं. विशेषकर, शिक्षितवर्ग में इस के प्रति आकर्षण बहुत बढ़ा है. व्यापार में परिश्रम तो अधिक है, पर उसी तुलना में उस में पैसा व सम्मान भी बहुत अधिक है. दुनिया में जितने भी संपन्न लोग हैं, सब व्यापारी हैं. नौकरी में अकसर अफसर की धौंस सुननी पड़ती है, जबकि व्यापार में इंसान खुद मालिक होता है.
पेशा इंसान के लिए ऐसा जरिया है जिस से वह काफी ज्यादा मालूमात हासिल करने के साथसाथ पैसे कमा सकता है और अपनी जीवनशैली को बेहतर कर सकता है. पेशे का सही चुनाव करना बहुत ही जरूरी है. पेशे यानी कैरियर के चयन के लिए सब से पहली शर्त यह है कि आप को अपनी ताकत व कमजोरी पता होनी चाहिए.
जीवनशैली का नेतृत्व :
पेशा इंसान की जीवनशैली का नेतृत्व करता है जिस से समाज में उस की स्थिति तय होती है. वहीं, सिर्फ काम शुरू करने या नौकरी पा जानेभर से आप का लक्ष्य पूरा नहीं होता. आप को सीखने की प्रक्रिया लगातार जारी रखनी है. भविष्य के लक्ष्य को आप को हमेशा आगे बढ़ाते रहना चाहिए. पेशा आप के भविष्य को तय करता है.
दुनिया अब डिजिटल हो रही है और आप को डिजिटल स्किल्स के हिसाब से खुद को अपग्रेड करना चाहिए, भले ही आप किसी भी फील्ड में काम कर रहे हों. उदाहरण के लिए, सेल्स और मार्केटिंग का काम करने वाले लोगों को अब औनलाइन सेल्स और मार्केटिंग कैंपेन के बारे में जानना चाहिए. बैंकिंग प्रोफैशनल को मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमैंट को बढ़ावा देने के लिए नई तकनीक की जानकारी होनी चाहिए. इसी तरह फिजिकल क्लासरूम की जगह अब टीचर्स को औनलाइन प्लेटफौर्म पर आने की जरूरत है. एचआर प्रोफैशनल को अब हायरिंग के परंपरागत तरीके की जगह लिंक्डइन जैसे औनलाइन प्लेटफौर्म पर शिफ्ट होना चाहिए.
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भ्रमित रहता है युवा :
आज के दौर में बहुत ज्यादा औपशंस यानी विकल्प होने के चलते विद्यार्थी भ्रमित रहता है कि वह कौन से विषय का चुनाव करे. दरअसल, यह उलझन हर उस विद्यार्थी की है जो विषयों के विकल्पों के बीच अपना भविष्य तलाश रहा है. समय था जब सीमित विकल्प होते थे, जैसे इंजीनियरिंग, मैडिकल और सिविल सर्विसेस. अच्छे विद्यार्थी इन्हीं की ओर रुख करते थे. लेकिन आज, उस के सामने इतने विकल्प हैं कि वह भ्रमित हो जाता है.
पेशा यानी कैरियर आमतौर पर विद्यार्थी/युवा की जिंदगी के पेशेवर पहलू से जुड़ा होता है. इसलिए, कैरियर का चयन करना एक बड़ा फैसला है और हालत यह है कि जब विद्यार्थी को ऐसे निर्णय लेने की ज़रूरत होती है तो वह इस तरह के बड़े फैसले लेने के लिए तैयार नहीं होता. युवा अभी स्कूली जीवन में है जहां उसे विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी स्ट्रीम के बीच चयन करना पड़ता है जो मुख्यरूप से उस के भविष्य के कैरियर के रास्ते को प्रभावित करता है.
प्रोफैशनल भविष्य की प्लानिंग :
पेशे या कैरियर का चयन करते वक्त विद्यार्थी के विचारों व इच्छाओं को समझ कर उन का सम्मान करना चाहिए. आमतौर पर इस पहलू को अनदेखा किया जाता है कि उन की रुचि किस ओर है. कैरियर का चयन करते समय इस बात पर गौर किया जाए तो नौकरी करने या कोई काम शुरू करने के बाद उन्हें उस क्षेत्र में काम करने में कोई दिक्कत नहीं होगी.
आज हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है. व्यावसायिक विषयों में सीमित प्रवेश संख्या होती है, प्रतिस्पर्धियों की संख्या ज्यादा है. आप में भले ही बहुत प्रतिभा या क्षमता हो, मेरिट हो, लेकिन मुमकिन है कि पसंद के कोर्स या पसंद के कालेज में दाखिला न मिले. इस के लिए जरूरी है कि एक अलग योजना भी तैयार रहे.
अपनेआप को जांचें : कभीकभी ऐसा भी होता है कि आप अपनी पहचान करने में भी गलती कर जाते हैं, खुद को सही से पहचान नहीं पाते. हो सकता है आप वैज्ञानिक बनना चाहते हों पर आप की गणित कमजोर हो, आप गायक बनना चाहते हों पर आप की आवाज लड़खड़ाती हो, आप चार्टर्ड अकाउंटैंट बनना चाहते हों पर अकाउंटिंग में रुचि नहीं और आप रिपोर्टर बनना चाहते हों पर आप को धूप से एलर्जी हो. सो, खुद को अच्छे से पहचानें, फिर उस फील्ड के बारे में गहराई से मालूमात हासिल करें और तब कोई फैसला लें.
आप एयरहोस्टेस बनना चाहती हैं तो ध्यान रहे परिवार से दूर रहने के लिए आप को तैयार रहना होगा. वहीं, अगर आप रिपोर्टर बनना चाहते हैं तो याद रहे, टीवी के ग्लैमर से दूर उन्हें न्यूज़ के लिए दिनरात दौड़ना भी पड़ता है, कभीकभी देररात तक भी काम करना पड़ता है. इसलिए अपनी स्ट्रीम को बारीकी से जानें, समझें, फिर फैसला लें.
ग्रूमिंग को इग्नोर न करें : नौकरी ढूंढ़ रहे लोगों को उन मसलों पर भी गौर करने की जरूरत है जो पेशे से सीधे जुड़े नहीं होते, लेकिन उन का महत्त्व कम नहीं होता. शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना ऐसी ही एक जरूरत है.
एबीसी कंसल्टैंट्स के एमडी शिव अग्रवाल कहते हैं, “’अधिकतर एंप्लौयर यह मानते हैं कि अगर आप खुद का खयाल नहीं रख सकते तो आप कंपनी के बारे में क्या सोचेंगे.” एपियरेंस यानी ठीक से कपड़े पहनना और आकर्षक सीवी/बायोडाटा ऐसे फैक्टर हैं जिन का ध्यान रखा जाना जरूरी है. आप का एंप्लौयर इन बातों पर ध्यान क्यों देगा, दरअसल, आप के बारे में धारणा ही हकीकत है और आप के बारे में बनी धारणा पर ही एंप्लौयर आप को जौब देता है. आप बहुत अच्छे हैं, फिर भी आप की धारणा अच्छी होनी जरूरी है. अगर 2 कैंडिडेट्स एकजैसे ही हैं तो जो फिजिकली फिट होगा, एंप्लौयर उसे तरजीह देगा, बजाय मोटे या दुबले कैंडिडेट के.
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लब्बोलुआब यह है कि प्रोफैशन का चुनाव सोचसमझ कर कीजिए और किसी नौकरी को ही अपना कैरियर बनाने की मत सोचिए. नौकरी होती है नौकरी और अपना काम अपना ही होता है. हर काम के लिए बड़ी रकम की ज़रूरत नहीं होती. सोच क्रिएटिव है तो स्टार्टअप शुरू कीजिए, पैसे लगाने वाले भी मिल जाएंगे. यह सच है कि व्यापार में कुछ तो पूंजी चाहिए, पर पूंजी का अर्थ केवल नकद धन नहीं होता. शिक्षा, परिश्रम, धैर्य और दिमाग भी बहुत बड़ी पूंजी है. इन के सदुपयोग से भी कामयाबी मिलती है. सालदोसाल कष्ट उठाने पड़ सकते हैं, पर फिर केवल अपना ही नहीं, भावी पीढ़ी का भविष्य भी सुरक्षित हो जाता है.