महिलाओं हमेशा से सहती आई हैं. चाहे घर की बात हो या फिर बाहर उन पर हमेशा से अत्याचार हुए हैं. आज जब सब पर कोरोना की मार पड़ी है तब भी महिलाओं को सब से अधिक सहना पड़ रहा है. कह सकते हैं कि उन पर ज्यादा जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं. एक तरह से पूरे घर की जिम्मेदारी उन के सिर पर आ पड़ी है, क्योंकि जो काम अब से पहले नौकर करते थे अब उन्हें ही करना पड़ रहा है. वहीं अगर वे वर्किंग हैं तो उन्हें अब वर्क फ्रौम होम के कल्चर के कारण घर को ही औफिस बनाना पड़ा. इस बीच परिवार के हर सदस्य को खुश भी रखना है, घर का काम भी करना है, औफिस की पूरी ड्यूटी भी करनी है, हर सदस्य की जी हुजूरी भी करते रहनी है, साथ ही हर रोज पति को भी खुश रखना है, क्योंकि ऐसे माहौल में उस का एकमात्र सहारा उस की पत्नी ही तो है. तभी तो इन दिनों घरेलू हिंसा, जिस में सैक्स को ले कर ज्यादा मामले बढ़े हैं. ऐसे में वे खुद को काफी लाचार व कमजोर महसूस कर रही हैं.
ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ, जहां पति की सैक्स की आदत से परेशान हो कर पत्नी ने लगाई मदद की गुहार. पति पूरे दिन उस से सैक्स की मांग करता रहता था. यहां तक कि उस से अप्राकृतिक सैक्स के लिए भी दबाव बनाता रहता था और मना करने पर मारपीट की नौबत तक आ जाती थी. असल में पति बाहर की कंपनी में जौब करता है और परिवार से मिलने के लिए कुछ दिनों के लिए घर आया था. लेकिन लौकडाउन के चलते उसे घर में ही कैद होने पर मजबूर होना पड़ा, जिस से वह तिलमिला उठा. यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि ऐसे हजारों मामले हैं जिन की वजह से महिलाओं का मानसिक व शारीरिक शोषण काफी बढ़ा है.
नैशनल लीगल सर्विसेज अथौरिटी द्वारा हाल ही में दिए डेटा के अनुसार, पिछले 2 महीनों में घरेलू हिंसा के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. उत्तराखंड में सब से ज्यादा, उस के बाद हरियाणा और फिर दिल्ली का नंबर आता है. ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में घरेलू हिंसा के मामले काफी बढ़े हैं. आकड़ों की मानें तो यूके में 23 मार्च से 12 अप्रैल के बीच घरेलू शोषण के कारण 16 मौतें दर्ज की गई, जो पिछले 11 वर्षों में सब से बड़ी संख्या है. इसे देख कर यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में यह समस्या एक बड़ा संकट बन कर उबरेगी.
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क्यों बढ़ीं महिलाओं के लिए मुश्किलें
1. कामकाज का दबाव बढ़ा:
घर में कपड़े धोने, खाना बनाने, बीचबीच में स्नैक्स की डिमांड, झाड़ूपोंछा, बरतन, किचन की साफसफाई, ये सब उन के डेली रूटीन में शामिल हो गए हैं. हर काम उन्हें ही करना है, क्योंकि घर में दूसरा कोई सहयोग देने वाला जो नहीं है. बच्चे अपने स्कूल होमवर्क, पढ़ाई व टीवी देखने में बिजी रहते हैं, तो पति देव अपनी पूरी नींद लेने के बाद औफिस के काम में लग जाते हैं, पत्नी चाहे वर्किंग हो लेकिन उस के दर्द से किसी को कोई मतलब नहीं है. बस एक कहने भर से कि मैं बहुत थक जाती हूं, यही जवाब मिलता है कि तुम करती ही क्या हो. ऐसे में वे खुद पर दोहरा दबाव महसूस कर के खुद को मानसिक रूप से कमजोर महसूस कर रही हैं.
2. खुद की स्वतंत्रता पर चाबुक चढ़ा:
पहले घर जहां उन का अपना स्पेस होता था, अब इस स्पेस में घर के हर सदस्य का दखल है. यही नहीं चाहे वे घर में रहती थीं या फिर वर्किंग होने पर भी वे फ्रैंड्स के साथ पार्टी, मूवी देखना, टी ब्रेक, शौपिंग पर जाना, सब कुछ करती थीं. लेकिन अब वे घर में कैद हो गई हैं. मस्ती के मूवमैंट्स तो मानो उन के लिए खत्म से हो गए हैं. बस हर समय काम और काम. जो उन्हें एक तरह का टार्चर करने से काम रहा है.
3. रोजरोज सैक्स की मांग:
पति अब जब घर से बाहर जा नहीं पा रहा. उस के ऐंटेनमैंट के सारे साधन बंद से हो गए हैं. ले दे कर पत्नी ही है जो उसे मजा दे सकती है. ऐसे में जब भी उस का मन करता है तो वह पत्नी से सैक्स करने को बोलता है. और अगर मना किया तो लड़ाईझगड़े तक की नौबत आ जाती है. ऐसे में बेचारी पत्नी करे तो क्या करे. अब तो वह खुद शारीरिक रूप से भी काफी बेबस महसूस कर रही है. क्योंकि उस पर उस का नहीं बल्कि किसी और का जोर जो चल रहा है.
4. स्ट्रैस बढ़ा:
जिन घरों में पति कोरोना वायरस के चलते भी औफिस जा रहे हैं उन घरों में हाइजीन का खास तौर पर ज्यादा ध्यान रखा जा रहा है. पति जब रात को थकाहारा घर लौटता है तो अपनी थकान को दूर करने के लिए पत्नी के करीब जैसी ही जाता है तो पत्नी के यह समझाने पर कि अभी, इन दिनों यह सब करना ठीक नहीं है तो पति भड़क जाता है और जब सैक्स नहीं मिलने के कारण उस का तनाव कम नहीं होता तो उस की पत्नी या तो उस के गुस्से का शिकार होती है या कई दिनों तक घर में तनाव का माहौल बना रहता है. जो स्ट्रैस लेवल को बढ़ाने का ही काम कर रहा है.
5. घरों में हर समय किटकिट:
वायरस के कारण अब लोग हर समय घर में ही रहने को मजबूर हैं. नौकरी के सिलसिले में शहरों में रहने के कारण परिवार से अलग रहते थे लेकिन इस संकट के कारण अब वे अपनेअपने गांवोंघरों में लौटने को मजबूर हो गए हैं, जिस के कारण अब साथ रहना बड़ी मुसीबत बन गई है. परिवार में सासससुर, ननद, देवरानी, जेठानी सब एक ही छत के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं. जिस से कभी खाना बनाने को ले कर, तो कभी साफसफाई को ले कर पूरे दिन घर में कलेश चलता रहता है.
6. नौकरी गवाने का डर:
इस समय अधिकांश घरों में यही चिंता का कारण बना हुआ है कि अगर नौकरी चली गई तो घर कैसे चलेगा, अभी तो कोई और नौकरी भी नहीं मिलेगी. या फिर सैलरी में कटौती के कारण पति झुंझलाहट में हर समय पत्नी को ही सुनाता रहता है. ऐसे में वह यही सोचती है कि इस में मेरा क्या दोष. उस के घर की भंग हो रही शांति के कारण और पति के बदलते हुए व्यवहार से वह अंदर ही अंदर घुट रही है. समझ नहीं आ रहा अपने दिल का हाल सुनाए तो किसे सुनाए.
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7. फरमाइशों का बोझ:
घर में पूरे दिन फरमाइशों का दौर चलता रहता है. अब यह बनाओ, यह अच्छा नहीं बना, खाना खाया नहीं कि चाय की फरमाइश आ जाती है. यानी पूरे दिन किचन ही चलती रहती है और उन्हें आराम नहीं मिल पाता, जिस से स्ट्रैस में रहने के कारण वे काफी घुटन महसूस करने लगी हैं. इन बातों के आधार पर कह सकते हैं कि महिलाओं को इन दिनों काफी सहना पड़ रहा है.