उस दिन शमशेर सिंह धीरे से नेहा चौहान के पीछे आकर फुसफुसाया, ‘आज लंच के लिए मेरे केबिन में आइये.’ नेहा ने पहले तो उसको घूर कर देखा और अगले ही क्षण वह पूरे स्टाफ के सामने उस पर बरस पड़ी. तेरी हिममत कैसे हुई… तूने मुझे समझ क्या रखा है… अपनी शक्ल देखी है कभी आइने में… जब से मैंने ये औफिस ज्वाइन किया है उल्लू की तरह आंखें फाड़-फाड़ कर घूरता रहता है… पहले कोई लड़की नहीं देखी क्या तूने…? मजनूं की औलाद, यौन उत्पीड़न का केस कर दूंगी तुझ पर… समझ क्या रखा है तूने मुझे? वगैरह वगैरह. शमशेर सिंह तो उस दिन मारे शर्म के चूहा सिंह बन गये.

अगले चार दिन तक औफिस से गायब रहे. बाद में औफिस आये तो पूरे वक्त अपने केबिन में ही बंद रहने लगे. अपमान, शर्म और तिरस्कार के तीर खाकर उनके प्रेम का उफान पूरी तरह ठंडा पड़ चुका था. कहां गलती हो गयी? शायद जल्दबाजी कर दी मैंने? उसको समझ नहीं पाया? ऐसे ही सवाल उनके दिमाग में चक्कर मारते रहते थे. काम में मन ही नहीं लग रहा था. उधर बौस तक बात पहुंचने से नौकरी पर भी तलवार लटक रही थी. जो तीन-चार दोस्त लंच टाइम में उनके केबिन में आकर साथ खाना खाते थे, वह भी नहीं आ रहे थे, कि कुछ सफाई पेश कर पायें. औफिस में बड़ी अटपटी सी स्थिति हो गयी थी. पहले वो औफिस में नेहा को घूरते रहते थे अब पूरा स्टाफ उन्हें घूर-घूर कर देखता है.

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दरअसल शमशेर सिंह को नेहा चौहान से प्रेम हो गया था. नेहा ने यह औफिस कोई महीना भर पहले ही ज्वाइन किया था. देखने में सुन्दर थी. काम में भी तेज. शमशेर तो देखते ही रीझ गया था. लगा कि कोई उनकी जीवनसंगिनी अगर बन सकती है तो वह बस नेहा ही है. वे दिन-रात उसके सपने में खोये रहते. बिना इस बात को समझे कि नेहा उनके बारे में कुछ पौजिटिव सोचती भी है या नहीं. नेहा ज्यादा किसी से बात नहीं करती थी, हर वक्त बस अपने काम में ही व्यस्त दिखती थी. मगर उसको इस बात का अहसास था कि शमशेर उसको घूरता रहता है. वह अक्सर सामने पड़ने पर नजरें झुका लेती थी. इस बात को शमशेर ने उसकी शर्म समझ ली. मन ही मन शर्मीली लजीली नेहा की कल्पनाएं करता बार-बार अपने केबिन से निकल कर उसकी कुर्सी के आसपास मंडराने लगा. उस दिन मौका पाते ही लंच का औफर दे दिया और तब पहली बार उसने नेहा का असली रूप देखा और अपने बारे में उसके विचार जाने.

शमशेर का प्यार एकतरफा था. वह न तो नेहा को अच्छी तरह जानता था और न ही उसने इस बात की कोई तस्दीक की थी कि नेहा के दिल में उसके लिए कुछ है भी या नहीं? नेहा की छठी इन्द्री ने उसको शमशेर के प्रति पहले ही सचेत कर दिया था. वह जानती थी कि यह व्यक्ति उस पर लगातार नजरें जमाये हुए है. उसको इस बात से शमशेर से चिढ़ हो गयी थी. इसलिए वह उसके सामने पड़ने पर उसे इग्नोर करने के इरादे से नजरें झुका लेती थी. मगर शमशेर ने इसका गलत अर्थ निकाल लिया. औफिस में एकतरफा रोमांस की ऐसी सजा शमशेर को मिली कि वह अवसादग्रस्त हो गया.

वहीं, अभिमन्यु और आरिफा का औफिस -रोमांस ऐसा परवान चढ़ा कि आज न सिर्फ वे अच्छे कलीग हैं, बल्कि अच्छे पति-पत्नी भी हैं. मगर जब तक दोनों की शादी नहीं हो गयी, तब तक उनके औफिस में किसी को भनक तक नहीं लगी कि डेढ़ साल से दोनों का औफिस में रोमांस चल रहा था. डेढ़ साल के लम्बे समय में दोनों ने एकदूसरे को बखूबी जांचा-परखा मगर दूसरों की नजरों से छुप-छुप कर. वे अलग-अलग औफिस आते. लंच टाइम पर अपने-अपने दोस्तों के साथ अलग-अलग खाना खाते. कभी एकदूसरे से बात भी करते थे तो ‘सर’ या ‘मैडम’ के सम्बोधन के साथ, जैसे कि औफिस में अन्य लोग करते थे. छुट्टी के वक्त भी अलग-अलग निकलते मगर दोनों के मिलने की जगह फिक्स थी. औफिस के बाहर वह लम्बे समय तक एक-दूसरे के साथ रहते. वीकेंड साथ बिताते और दो-तीन दिन की छुट्टियां पड़तीं तो आसपास किसी पिकनिक स्पाट या हिल स्टेशन पर चले जाते थे. मगर औफिस टाइम में अगर उन्हें कोई पर्सनल बात करनी होती थी तो वह मोबाइल मैसेज या इंटरनेट चैट के जरिये ही करते थे कभी एक-दूसरे के पास आकर निजी बातें करते उन्हें किसी ने नहीं देखा था.

औफिस में इश्क परवाना चढ़ने के किस्से अक्सर सुनने को मिलते हैं और अब एक सर्वेक्षण के जरिए भी यह बात सामने आयी है. इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि करीब 85 फीसदी लोगों को अपने सहकर्मी के साथ रोमांस में कोई झिझक नहीं है, बशर्ते दोनों के काम जुदा हों. किसी ने ठीक ही कहा है कि प्यार पर किसी का जोर नहीं चलता. प्यार कभी भी, कहीं भी, किसी से भी हो सकता है. लेकिन अगर ये प्यार अपने औफिस के ही किसी कलीग से हो जाए तो ये समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है कि उसके साथ औफिस में कैसा व्यवहार किया जाए.

आज का खुले दिल-दिमाग वाला युवा अपनी पसन्द और स्टेटस के अनुसार अपना जीवनसाथी चुनना चाहता है. घर-परिवार की पसन्द से होने वाली अरेंज मैरिज का सिस्टम अब धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है. अब तो जोड़ियां कौलेज या औफिस में ही बनने लगी हैं. हर औफिस में आपको दीवाने भी मिल जाएंगे और फ्लर्टी भी, जो हर समय लड़कियों से फ्लर्ट करने से नहीं चूकते. वहीं ऐसी लड़कियां भी मिलेंगी जो लड़कों को और खासतौर पर अपने युवा बौस को अपनी अदाओं से रिझाने में लगी रहती हैं. दफ्तरों में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपना भावी जीवनसाथी तलाशते रहते हैं. पेशेवर लोगों के 9 से 10 घंटे औफिस में गुजरते हैं. ऐसे में सहकर्मी के प्रति लगाव होना आम बात है. रोमांस करना बुरी बात नहीं है, लेकिन जब बात हो औफिस में रोमांस करने की तो थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत होती है. अकसर औफिस में रोमांस के दौरान लोग कई ऐसी बातों को भूल जाते हैं जिसका उन्हें भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

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वहीं अगर आप अपने रिश्ते को लेकर गम्भीर हैं तो कोशिश करें कि जब तक आप और आपका पार्टनर शादी के निर्णय तक न पहुंच जायें,  किसी को इस बात की खबर ना लगे. आप युवा हैं, शादी लायक हैं, आपको अपने औफिस में ही कोई पसन्द आ रहा है तो औफिस में रोमांस जरूर करिये, मगर कुछ सावधानी के साथ और दूसरों की नजरों से बच कर. हम आपको बताते हैं कि आप अपने कलीग, जिससे आपको प्यार हो गया है, के साथ औफिस में कैसा बर्ताव करें जिससे आप और आपके प्यारे साथी को लोगों के सामने शर्मिंदा न होना पड़े.

इन बातों का रखें ख्याल

आइये जानते हैं कि आफिस में किस तरह से रोमांस किया जाए कि वहां पर मौजूद किसी दूसरे इंसान को जरा सा भी शक ना हो पाए.

–  सबसे जरूरी बात यह जानने की है कि आप जिसे पसन्द करते हैं, वह भी आपको पसन्द करता है कि नहीं. रोजाना की मुलाकात में उसका आपके प्रति व्यवहार, आकर्षण, बात करने का तरीका इस बात का इशारा कर देता है कि वह आपके बारे में क्या धारणा रखता है.

–   औफिस में अपने प्रेमी से चैटिंग या रोमांटिक बातचीत करने के लिए कभी भी कम्पनी द्वारा दिये गये ई-मेल आई डी का प्रयोग ना करें क्योंकि कम्पनी को कभी भी आप पर शक हो सकता है और वह आपसे आपका अकाउंट खुलवा कर कुछ भी चेक कर सकती है.

–  छोटे औफिस में रोमांस करना बड़ा रिस्क होता है. वहां बातें तेजी से फैलती हैं. ऐसे में जरूरी है कि आपके प्रेम के चर्चे किसी तीसरे के कान में न पड़ें.

–  अगर आप नये-नये आफिस में आये हैं, तो कोशिश करिये कि कुछ महीने तक अपना बेस्ट बिहेवियर ही दिखाएं. इसी तरह अगर औफिस में आयी किसी नई लड़की से आपको इश्क हो गया है तो पहले कुछ महीने तक उसके बिहेवियर और पसन्द को समझने और जानने की कोशिश करिये. अगर वह आपमें इंटरेस्टेड होगी तो कोई न कोई संकेत जरूर करेगी. इसके बाद ही आप उससे अपने प्रेम का इजहार करें.

–   औफिस में एक दूसरे से बात करने की बजाये आप दोनों औफिस के बाहर कोई जगह निश्चित कर लें, जहां आप दोनों रोजाना मिल पाएं.

–   औफिस में आपके दूसरे दोस्त भी काम करते हैं, इसलिए यह जरूरी नहीं कि आप हर समय अपने प्रिय साथी के ही पास चिपके बैठे रहें. अन्य साथियों को भी समय दें और अपने काम पर भी उतना ही फोकस करें.

–  अगर आप उससे सीनियर हैं, जिससे आप प्यार करने लगे हैं तो औफिस में उससे एक सीनियर की तरह ही व्यवहार करें. दूसरों के सामने उससे ज्यादा घुलना-मिलना या हंस-हंस कर बात करना ठीक नहीं है, इससे लोगों को शक हो जाएगा और आप दोनों को लेकर अनेक कहानियां  औफिस में सुनायी देने लगेंगी, जो आप दोनों के करियर के लिए ठीक नहीं होगा. एक दूसरे के सम्मान का बराबर ख्याल रखें.

–  अपनी प्यार भरी बातों के लिए किसी तीसरे को मीडिएटर ना बनाएं यानी किसी तीसरे व्यक्ति से अपनी बातें साझा ना करें बल्कि सीधे अपने पार्टनर से बात करें.

–  अपने प्रेम प्रसंग को गलती से भी बॉस तक न पहुंचने दें क्योंकि इससे उन्हें लगेगा कि आप दोनों औफिस के काम के लिए सीरियस नहीं हैं.

–  अच्छा होगा कि औफिस में आप अपने पार्टनर से ज्यादा बात ना करें. साथ ही ब्रेकफास्ट, लंच और टी ब्रेक में भी उनके साथ जाने से बचें.

–   औफिस में जरूरी नहीं कि हर समय आप अपने पार्टनर को सपोर्ट करें. यदि आप ऐसा बार-बार करते हैं तो अन्य सहकर्मी आपके खिलाफ हो जाएंगे या आप दोनों के बारे में बातें बनाने लगेंगे.

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–  भले ही आप दोनों एक दूसरे के प्यार में हो, लेकिन औफिस के माहौल को बनाकर रखें. औफिस में आपका रोमांस और लोगों को परेशानी दे सकता है.

–  आप चाहे काम के प्रति कितने भी सीरियस हैं, लेकिन आपका रोमांस आपकी परफॉरमेंस बिगाड़ सकता है. इसलिए औफिस के दौरान सिर्फ और सिर्फ अपने काम पर ध्यान दें.

–   औफिस के कैफेटेरिया में आप दोनों अकेले बैठने के बजाय ग्रुप में साथ बैठें. इससे आप दूसरों को भी बराबर समय दे पाएंगे.

–  आपने कई बार अनुभव किया होगा कि कुछ लोग फ्लर्टिंग के चक्कर में डबल मीनिंग मजाक करते हैं, ऐसे में आप ध्यान रखें कि ना ही आप किसी से ऐसे मजाक करें और अगर कोई आप से करे तो उसे कोई प्रतिक्रिया ना दें या फिर असहमति जाहिर कर दें. इससे सामने वाला व्यक्ति समझ जाएगा कि आपको उसका मजाक बुरा लगा है. अगर आप पुरुष हैं तो किसी भी महिला से इस तरह के मजाक न करें. इससे आपका अपना किरदार खराब साबित होगा.

–  कलीग से प्यार हो जाए तो औफिस आने का उत्साह दस गुना बढ़ जाता है. वहां अच्छा काम करके तारीफ हासिल करना भी लक्ष्य बन जाता है, क्योंकि इससे आप अपने पार्टनर की नजर में भी चढ़ते हैं, मगर इस अतिउत्साह में अगर आपके प्रेम का पर्दाफाश हो जाए तो बाकी लोग बेकार की गौसिप करने लगते हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव आपके रिश्ते, व्यवहार और काम पर पड़ने लगता है. इसलिए औफिस में रोमांस जरूर करें, मगर चोरी-चोरी, चुपके-चुपके.

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