प्यार करना आसान है मगर उसे निभाना और कायम रखना बहुत कठिन. प्यार तभी सफल होता है जब दो व्यक्ति एकदूसरे को अच्छी तरह समझने लगते हैं, एकदूसरे के प्रति पूरा विश्वास बना कर रखते हैं और छोटीछोटी बातों को नजरअंदाज कर दिया करते हैं. प्यार जो गहरा होने लगे तो कुछ बातों का ख्याल जरूर रखें:
- खराब पक्ष भी करें जाहिर – जब आप एकदूसरे के साथ गहराई से जुड़ जाते हैं तो आप के दरमियान कोई भी राज नहीं रहना चाहिए. आप वास्तव में किसी के करीब हैं तो अपनी खूबियों के साथसाथ व्यक्तित्व के खराब पक्ष भी उजागर करने से घबरायें नहीं. भले ही एक साथ अपनी सारी नेगेटिव बातें न बताएं मगर धीरेधीरे हर राज खोलने शुरू करें. शुरुआत में आप इस बात पर गौर करने का प्रयास करें कि जब आप अपनी कुछ नेगेटिव बातें बताते हैं तो उस का रिएक्शन कैसा होता है. यदि वह सचमुच प्यार करता होगा तो आप के व्यक्तित्व के अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं को स्वीकार करेगा और उस के प्यार में कोई कमी नहीं आएगी.
2. अपनी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से बताएं – कई दफा जिसे हम चाहते हैं उस से अपनी अपेक्षाओं और दिल में चल रही उलझन को शेयर नहीं कर पाते. संभव है कि आप का पार्टनर कुछ समय से आप को औफिस के बाद फोन नहीं कर रहा जबकि पहले वह रोजाना 1 घंटे बात जरूर करता था. ऐसे में आप को महसूस होगा जैसे उस का प्यार घट गया है. वह आप से बोर हो गया है और आप इस रिश्ते को लेकर इनसिक्योर हो जाते हैं. ऐसी सोच गलत है. आप साफ तौर पर उसे अपनी इच्छा से वाकिफ कराएं कि आप औफिस के बाद उस के फोन का इंतजार करते हैं. हो सकता है कि वह अपने किसी प्रोजेक्ट में व्यस्त होने की वजह से ऐसा नहीं कर पा रहा. इस तरह बेवजह दूरी बढ़ाने से अच्छा है कि बात साफ कर ली जाए.
3. अपने पार्टनर पर हक़ न जताएं — अक्सर हमें लगता है कि जिसे हम प्यार करते हैं उस का सारा वक्त सिर्फ हमारे लिए है. पर जब ऐसा नहीं हो पाता तो हम निराश होने लगते हैं. यह समझना जरूरी है कि आप का पार्टनर एक अलग इंसान है और उस की अपनी एक अलग जिंदगी पहले से है. अपनी पसंद,अपने शौक और रिश्ते नाते भी हैं. हर समय अपने पहलू से बांध कर रखने या अपनी इच्छानुसार उसे चलाने के बजाय उसे भी थोड़ी स्वतंत्रता और स्पेस दें. ताकि वह खुद को बंधा हुआ महसूस न करे और खुल कर आप के साथ को इंजौय कर सके.
4. झगड़े को प्यार से सुलझाएं – रिश्ते की मजबूती इस पर निर्भर करती है कि आप उस झगड़े को सुलझाते कैसे हैं. एक नियम यह बनाएं कि जब भी झगड़ा हो तो दोनों में से एक शांत रहे. चुप हो जाए. एकदूसरे से दूर चले जाएं मगर 24 घंटे के अंदर उस मुद्दे पर दुबारा डिस्कशन जरूर करें. क्रोध के समय झगड़ा सुलझाने का प्रयास उल्टा असर दिखा जाता है इसलिए कुछ घंटे बाद जब दोनों का दिमाग शांत हो जाए तब सुलझाएं.