लड़ाई झगड़ा हर कपल में होता है, हालांकि कोई भी ऐसा जानकर नहीं करता. लेकिन कुछ बातों पर बहस करना आपकी जिंदगी को आसान बना सकता है.
“दीक्षा आजकल तुम दोनों पति-पत्नी में कुछ अनबन चल रही है क्या मैं काफी दिनों से देख रही हूं कि तुम लोग एक दूसरे से बात नहीं कर रहे?”
दीक्षा की सास के पूछते ही दीक्षा की आंखों में आंसुओं की झड़ी लग गई और उसने सुबकते हुए कहा,”हां छोटी सी बात थी लेकिन पता नहीं था कि इतना बड़ा तूल पकड़ लेगी. आपको याद है हम पिछले संडे रात को एक पार्टी में गए थे वहां पर अक्षय अपनी कलीग से बड़ा हंस-हंसकर बात कर रहे थे. मुझे थोड़ा अखरा और मैं ने बस अक्षय से बात करनी बंद कर दी. अक्षय ने पहले तो एक दो बार नराजगी की वजह जाननी चाही, पर बाद में उन्होंने भी बात करनी बंद कर दी.”
इतना बता कर दीक्षा रोने लगी. तब दीक्षा की सासू मां ने समझाया,” देख बेटा,जहां प्यार है, वहां तकरार भी होगी. ये बात तो हम सभी जानते हैं. हर रिश्ते पर यह बात लागू होती है. खासतौर पर कपल्स पर. जब दो लोग एक रिश्ते में होते तो दोनों के अपने-अपने विचार और तर्क होना स्वाभाविक है. लेकिन इन्हें सभ्य तरीके से सुलझाना आपके हाथ होना चाहिए. इससे रिश्ते बिगड़ते नहीं हैं. यही कदम दूरियों को नजदीकियों में बदल सकता है. तुम्हें बात करना नहीं छोड़ना चाहिए था.”
बात तो सही है, बहस के डर से कभी भी कुछ बातों पर ध्यान देना बिल्कुल न छोड़े। इनपर खुलकर अपना तर्क दें और अपना नजरिया भी बताएं। आइए जानते हैं विस्तार से –
1. खुलकर करें बात
क्या आपकी पत्नी को पसंद नहीं है कि आप अपनी कॉलेज या ऑफिस की महिला मित्रों से बात करते हैं. क्या आपके पति अक्सर आप पर शक करते हैं. इन दोनों ही स्थितियों में अपने पार्टनर से खुलकर, साफ बात करें. अगर आप समय पर इन शंकाओं और ईर्ष्या को दूर नहीं करेंगे तो यह बढ़कर एक बड़ी परेशानी बन सकते हैं. इसलिए इसपर भूलकर भी चुप्पी नहीं साधे.
2. पहल करने में न रहें पीछे
अगर आपकी अपने पार्टनर से लड़ाई हो गई है और आप दोनों ही एक दूसरे से गुस्सा हो तो ऐसे में अक्सर बातचीत का सिलसिला रुक जाता है. चाहते हुए भी कई बार साथी बात करने की पहल नहीं कर पाते. इससे एक दूसरे के मन की भावना समझ पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसा महसूस होने लगता है कि शायद सामने वाले की जिंदगी में आपकी कोई अहमियत ही नहीं. लेकिन इसकी बहुत संभावना है कि आपकी सोच गलत हो. हो सकता है कि आपका साथी आपकी पहल का इंतजार कर रहा हो. इसलिए गुस्से का पिटारा सिर से उतारकर आप शांत हो जाएं और अपने पार्टनर से खुलकर बात करें.
3. पसंद में बराबरी
‘मैंने सोचा है कि कल मेरे दोस्त के चलेंगे’,’मुझे तो संडे को सिर्फ सोना पसंद है, कहीं बाहर जाना मेरे बस की बात नहीं’, ये वो सामान्य बातें हैं, जो अक्सर आपने हर घर में सुनी होंगी. लेकिन रिश्ते में जब आप दो लोग हो तो इसमें ‘मैं’ की नहीं ‘हम’ की बात होनी चाहिए. अगर आपका साथी हमेशा अपनी पसंद आप पर थोपने की कोशिश करता रहता है और आपकी इच्छाओं के बारे में नहीं सोचता तो यह बहस का एक बड़ा मुद्दा है. हर किसी को एक ही जिंदगी मिलती है और रिश्ते उसे और भी खूबसूरत बनाने के लिए होते हैं, न कि बोझिल बनाने के लिए. अपने साथी को समझाएं कि जिंदगी का यह सफर आप दोनों को मिलकर तय करना है तो एक दूसरी की पसंद का ध्यान भी मिलकर ही रखना होगा.
4. मिलकर करें वित्त प्रबंधन
ऐसा तो लगभग हर कपल में आपने देखा होगा. एक साथी भविष्य के लिए बचत करने पर जोर देता है तो दूसरा आज को जीने में विश्वास रखता है. ऐसे में विचारों की यह भिन्नता अक्सर विवाद का कारण बन जाती है. हालांकि अपनी अपनी जगह पर दोनों ही सही हैं. इसलिए इस विषय पर शांति से बैठकर बात करें और बीच का कोई रास्ता निकालने की कोशिश करें. जब आप एक दूसरे को आराम से सुनेंगे तो पक्का कोई न कोई हल आप निकाल ही लेंगे. इससे एक सफल रिश्ते की नींव मजबूत होगी.