रुक्मिणी और देवेश ने प्रेम विवाह किया था पर 2 सालों में ही वे आपसी प्रेम की ऊष्मा खो बैठे. तलाक के लिए पारिवारिक अदालत पहुंचे तो अदालत ने कुछ समय साथ बिताने की सलाह दी. इन के अपने मित्रों ने काउंसलिंग की राय दी, क्योंकि वे दोनों के प्रेम से अच्छी तरह परिचित थे. 4 महीने की काउंसलिंग के बाद इन में पहले से कहीं ज्यादा पे्रम हो गया. अब ये फैमिली कोर्ट से केस वापस ले चुके हैं और अपनी इस नासमझी पर खुद को कोसते हैं. सैक्स सीमेंट का काम करता है

दांपत्य संबंधों में आती दूरी की वजह प्रेम व सैक्स का जिम्मेदारियों के बोझ तले कम हो जाना, दब जाना, रूप बदल लेना या फिर नदारद हो जाना है. रुक्मिणी कहती हैं, ‘‘हम 2 काउंसलरों से मिले. घंटों बातचीत के सैशन के बाद भी दोनों ने एक ही तरह की बातें कहीं तो हमें समझ आ गया. फिर हम ने घूमने जाने का प्लान बनाया जिसे हम ने हनीमून कहा. बातचीत, संवाद, गलतफहमियों के दूर होने तथा सैक्स से पहले फोरप्ले और रोमानियत भरे माहौल ने पहली बार हमें चरम सुख दिया. यानी हम और्गेज्म तक पहुंचे. हम ने दिन में 2-3 बार सैक्स का चरमसुख पाया. 3 दिन के इस छोटे से ट्रिप में हम इतने तरोताजा हो कर लौटे कि फिर से नई जिम्मेदारियां उठाने के लिए खुशीखुशी तैयार हो गए. अब 3 साल से हम बहुत खुशीखुशी जीवन गुजार रहे हैं.’’

क्या है और्गेज्म

यौन संबंधों की चरम अवस्था में यौन अंगों से होने वाला स्राव पतिपत्नी दोनों में साथसाथ होने लगे तो वह और्गेज्म कहलाता है. आमतौर पर सैक्स संबंधों में एक पार्टनर और्गेज्म पा जाए और दूसरा नहीं तो उसे बहुत कष्ट होता है.

यदि पत्नी पहले संतुष्ट हो जाती है तो वह कुछ देर तक उस आनंद को अनुभव करते रहने के लिए शांत व स्थिर लेटना चाहती है. पति द्वारा संतुष्टि के लिए किए जा रहे किसी एक में उसे आनंद नहीं आता. इसी प्रकार यदि पति पहले संतुष्ट हो जाता है तो उस के दोबारा तैयार होने तक संभव है पत्नी की सैक्स की चाह खत्म हो जाए.

मनोचिकित्सक, विकास कुमार का कहना है कि सैक्ससुख माइंड व बौडी का बहुत स्ट्रौंग कम्यूनिकेशन है. अंगों में साथसाथ आई तरलता जीवन में सहजतासरलता लाती है. सभी पतिपत्नी इस के लिए कोशिश कर सकते हैं. सह संतुष्टि तनमन की हार्मनी तथा अच्छी अंडरस्टैंडिंग की सूचक होती है. इस की प्राप्ति आधी से ज्यादा पारिवारिक समस्याएं कम कर सकती हैं. सहसंतुष्टि एकजैसी सोच और और अच्छी जीवनशैली की सूचक है. इस से लगता है कि दोनों पार्टनर सैक्स के लिए दिमागी और शारीरिक तौर पर तैयार हैं. उन में बोझिलता या दबाव नहीं है. पार्टनर अपनी अन्य जिम्मेदारियों को समय पर निबटाते हैं, जिस से घर का व अपना भी सुप्रबंधन हो जाता है.

साइकिएट्रिस्ट, रुपाली का कहना है कि सैक्स शरीर के साथसाथ दिमाग में भी होता है. यह स्राव एक जगह पावरफुल भले ही होता है पर कई जगह से गुजर कर आता है. इसीलिए अच्छे मूड, अच्छी आदतों और प्यार के कैमिकल के लिए भी मजबूत भूमिका निभाता है. इस से तनमन दोनों स्वस्थ रहते हैं. सहसुख से सैक्स सार्थक होता है. शादी के 2-4 साल बाद सहसुख को जानने तथा पाने वाला जोड़ा कहता है कि अब तो हमें सह संतुष्टि के बिना सैक्स जैसा नहीं लगता. लगता है कुछ मिस हो गया. इसीलिए हम इस काम को निबटाते नहीं, बल्कि बहुत प्यार से अंजाम देते हैं और वह भी पूरी तैयारी से.

शरीर को दुर्गंध व बालों से मुक्त करते हैं. बिस्तर को भी स्वच्छ व सुवासित करते हैं. चिंता को दूर रखते हैं. अंडरस्टैंडिंग क्या होती है यह इस से जानना आसान हो जाता है. सैक्स को रूटीन या सिर्फ रात्रिकालीन क्रिया मान कर निबटाना सहसंतुष्टि क्या किसी भी तरह की संतुष्टि को भी सही तरीके से नहीं होने देता. इस सहसुख में बिस्तर की सलवटें भी बाधक हो सकती हैं. इसलिए छोटीछोटी बातों का भी ध्यान रखें.

एक और जोड़ा कहता है कि सहसुख को जानने के बाद यह न हो पाने पर गिल्ट होता है. जोड़े वे प्रयास ज्यादा अच्छी तरह करते हैं, जिन से साथी भी संतुष्ट हो जाए. सैक्स दांपत्य की रीढ़ है. हर बार सहसुख न हो तो कोई बात नहीं, महीने में 3-4 बार भी हो जाए तो अच्छा है पर अच्छी केयरिंगशेयरिंग से यह हमेशा भी संभव है.

स्वस्थ सैक्स फिलौसफी

सैक्स की यह स्वस्थ सोच और दर्शन है, जो निजी एक्ट से पूरे जीवन के दर्शन पर असर डालता है. यह टीम स्पिरिट, लचीलेपन तथा लेने के साथ ही देने के विचार को भी दमदार बनाता है. अपना काम होते ही साथी से विमुख हो जाना, मुंह मोड़ कर सो जाना, साथी की परवाह न करना या परवाह करने पर भी कुछ न कर पाने की स्थिति साथी की नजर में सम्मान कम कर सकती है. साथी की यह जरूरत तो जीवनसाथी पर ही निर्भर है. यह कपड़ेलत्ते या अन्य किसी पसंदीदा चीज की तरह नहीं जो साथी के बजाय कोई और दिला दे. अच्छा है शुरू से ही इस स्वस्थ सैक्सुअल फिलौसफी को जानासमझा जाए ताकि यह नैचुरली ऐडौप्ट हो जाए या इसे पाना आसान हो जाए.

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