अमृता प्रीतम ऐसी पहली साहित्यकार हैं जिन के साहित्य से ज्यादा उन से जुड़े प्रेमप्रसंग पढ़े जाते हैं. आज का युवा यह जान कर हैरत में पड़ सकता है कि घोषित तौर पर लिविंग टूगैदर का चलन दरअसल में अमृता प्रीतम ने ही शुरू किया था जो अपने एक प्रेमी इमरोज के साथ 40 साल एक छत के नीचे रहीं.

लेकिन वे अपने ही दौर के अपने ही जितने मशहूर गजलकार साहिर लुधियानवी से भी प्यार करती थीं और इस के भी और पहले वे अपने शादीशुदा कारोबारी पति प्रीतम सिंह से प्यार करती थीं इसीलिए उन्होंने अपना तखल्लुस यानी उपनाम प्रीतम कभी हटाया नहीं वरना तो शादी के पहले उन का नाम अमृता कौर हुआ करता था. प्रीतम से उन्हें 2 बच्चे भी हुए थे, लेकिन तलाक के बाद लोग इमरोज जो पेशे से चित्रकार थे को ही उन का पति समझते थे. प्रीतम का रोल तो तलाक के साथ ही खत्म हो गया था.

कहने का मतलब यह नहीं कि अमृता प्रीतम नाम की साहित्यकार जिन्हें अपनी रचनाओं के लिए ढेरों छोटेबड़े  पुरस्कार और सम्मान देशविदेश से मिले ने प्यार और व्यभिचार में फर्क ही खत्म कर दिया था बल्कि सच तो यह है कि उन्होंने प्यार के असल माने उस दौर में समझए थे जब किसी तलाकशुदा या शादीशुदा और विवाहित महिला का प्यार करना पाप और किसी अविवाहिता का प्यार में पढ़ना चरित्रहीनता अपराध, नादानी, बहकना या गलती समझ जाता था.

आज का युवा अमूमन अमृता इमरोज और साहिर जैसा ही प्यार कर रहा है जिस में घर और समाज के दखल के लिए कोई स्पेस ही न हो और प्यार में हमेशा बंधे रहने की कसमेंरस्में यानी वर्जनाएं भी न हों. 2019 में अमृता प्रीतम की जन्मशताब्दी पर गूगल पर सब से ज्यादा उन के प्रेमप्रसंग सर्च किए गए थे. इन में भी युवाओं की खासी तादाद थी जिस के मद्देनजर कहा जा सकता है कि उन में से अधिकांश इस ट्राइऐंगुलर में अपनी किसी परेशानी का हल ढूंढ़ रहे थे.

बहुत बड़ी चुनौती

अब न अमृता हैं, न साहिर हैं और न ही प्रीतम और इमरोज हैं, लेकिन उन के प्यार के किस्से मिसाल और सबक नई पीढ़ी के लिए बन रहे हैं तो उस की खासीयत यह है कि कोई कभी किसी के लिए न तो पजैसिव हुआ और न ही किसी ने जरूरत से ज्यादा त्याग किया. चारों किरदारों ने जो कुछ भी था उसे सहज रूप से स्वीकार लिया था जिस से लगता है कि सच्चा प्यार करने की पहली शर्त बहुत बड़ा दिल और उदारता है जिस में आप अपनी पत्नी के ऐक्स प्रेमी या पति को सहज स्वीकार लें.

एक भारतीय पति के लिए यह सिचुएशन बहुत बड़ा चैलेंज होती है कि वह अपनी पत्नी के पूर्व पति या प्रेमी के सामने पड़ने पर कैसे रिएक्ट करे. हरकोई इमरोज या साहिर लुधियानवी तो नहीं हो सकता जो कबीर दास के दोहे- प्रेम गली अति सांकरी जा में दो न समाय… बाला मिथक तोड़ दे. हरकोई प्रीतम भी नहीं हो सकता जो यह जानतेसमझते कि पत्नी किसी और से प्यार करने लगी है इसलिए सहूलियत से तलाक दे दे.

दिलचस्त बात

हालांकि एक बड़ी दिलचस्प बात देशभर से पिछले दिनों में यह सामने आनी है कि कुछ पतियों ने दीनदुनिया की परवाह न करते हुए अपनीअपनी पत्नी की शादी उस के प्रेमी से करवा कर एक नई मिसाल कायम कर दी नहीं तो रोजरोज ऐसी खबरें आना भी आम बात है जिन में पति ने पत्नी के प्रेमी की हत्या कर दी क्योंकि वह उस का कहीं और अफेयर बरदाश्त नहीं कर पा रहा था या फिर यह कि पत्नी ने प्रेमी के साथ मिल कर पति को ठिकाने लगा डाला.

इन में समझदार कौन? इस सवाल का जवाब बहुत स्पष्ट है कि वे पति जिन्होंने अपनी पत्नी का हाथ उस के प्रेमी के हाथों में सौंप कर खुद की चैन की नींद और सुकून भरी जिंदगी का इंतजाम कर लिया. वे शक और बदले की आग में नहीं जले और न ही होश या नशे में पत्नी को कुलटा कहा या उस से मारपीट की यानी उस के प्रति हिंसा नहीं की जो कई परेशानियों और कलह की वजह बनती है और इस से किसी को कुछ हासिल नहीं होता.

‘वो’ के चक्कर में तबाही

पत्नी के पूर्व पति या प्रेमी से सामना होने पर क्या करें यह सवाल ही किसी भी पति को असहज कर देने वाला है. सभ्य और आधुनिक होते समाज का यह वह दौर है जिस में इस वो को ले कर आए दिन हंसतेखेलते घर उजड़ रहे हैं. अभी तक प्यार करना पुरुष का ही अधिकार माना जाता था, लेकिन अब उलटी गंगा बहने लगी है जो अपने साथ तबाही का तूफान ले कर आती है और हैरत की बात यह कि इस का खमियाजा अकसर पति को ही भुगतना पड़ता है. ऐसे हादसे रोजमर्रा की बात हो चले हैं जिन में पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या कर दी.

बीती 25 फरबरी को राजस्थान के बीकानेर जिले के महाजन नाम के कसबे में नहर के पास

22 वर्षीय आमिर की लाश मिली. पुलिस की जांच में उजागर हुआ कि हत्या आमिर की पत्नी सुलताना और उस के प्रेमी समीर ने की थी. 19 वर्षीय सुलताना को बीती 16 मार्च को गिरफ्तार किया गया.

आमिर और उस के परिवारजनों को सुलताना के प्रेमप्रसंग की भनक शादी के वक्त से ही थी, लेकिन इज्जत के चलते वे खामोश रहे. पतिपत्नी में कलह इस बात को ले कर होती रहती थी. तंग आ कर समीर ने सुलताना से कहा कि जब तक तुम्हारा पति जिंदा है तब तक हम एक नहीं हो पाएंगे फिर दोनों ने मिल कर आमिर को ठिकाने लगा दिया पर अब जेल में हैं यानी एक नहीं हो पाए.

खतरनाक अंजाम

दिल्ली के बेगमपुर इलाके के 35 वर्षीय करोड़पति डेयरी कारोबारी प्रदीप की लाश 21 फरवरी को मिली थी. पुलिस जांच में पता चला कि यह साजिश पत्नी सीमा और उस के प्रेमी गौरव ने रची थी जो सीमा और प्रदीप की शादी के पहले से ही एकदूसरे को प्यार करते थे और इतना करते थे कि गौरव ने उत्तर प्रदेश से दिल्ली आकर प्रदीप के मकान में एक कमरा ही किराए पर ले लिया था. एक होने के लिए प्रदीप को रास्ते से हटाने के लिए इन्होने प्लानिंग कर भाड़े के हत्यारों को 20 लाख रुपए दिए थे.

होते हैं विवाद

यानी पत्नी के ‘वो’ को ले कर फसाद अब ऊंची सोसायटी में भी आम होने लगे हैं. एक दिलचस्प मामला भोपाल के पौश इलाके कटारा हिल्स का है. पत्नी संगीता और उस के सौफ्टवेयर इंजीनियर प्रेमी आशीष पांडे ने पति धनराज मीणा की अपने फ्लैट में डंडे से पीटपीट कर हत्या कर दी और दूसरे दिन लाश को ठिकाने लगाने की गरज से दिनभर शहर में घूमते रहे? लेकिन कोई मौका या एकांत जगह नहीं मिली तो दोनों कटारा हिल्स थाने पहुंचे और कार की डिग्गी खोल कर धनराज की लाश खुद पुलिस वालों को बरामद करवा दी.

यहां संगीता ने बड़ी मासूमियत से स्वीकारा कि उस ने प्रेमी के सहयोग से अपने पति की हत्या कर दी. आशीष को ले कर धनराज और संगीता में आए दिन विवाद होता था.

ऐसे 90 फीसदी मामलों में मारा पति ही गया तो जाहिर है इस की वजह पत्नी के वो को सहज स्वीकार न कर पाना है जिस की बहुत ज्यादा उम्मीद भी नहीं करने चाहिए. खुद महिलाएं भी इस बात को जानतीसमझती हैं कि पति उन के विवाह पूर्व पति या प्रेमी को बहुत ज्यादा दरियादिली से नहीं ले पाएगा क्योंकि शादी की पहली रात उस का पहला सवाल यही होता है कि देखो तुम्हारा पहले कभी कहीं अफेयर रहा हो तो अभी बता दो.

मगर अब पूरी तरह ऐसा नहीं है. बैंगलुरु में एक सौफ्टवेयर कंपनी में जौब कर रहे भोपाल के आर्यमान का कहना है कि अधिकांश युवा जानते हैं कि लगभग सभी लड़कियां शादी के पहले प्यार करती ही हैं क्योंकि आजकल आजादी और प्यार के मौके उन्हें भी बराबर मिल रहे हैं.

बदलता नजरिया

आजकल लड़कियां अपने अफेयर छिपाती नहीं हैं जो भविष्य के लिहाज से अच्छी बात है. आर्यमान अपने 2 दोस्तों का हवाला देते बताते हैं कि उन्हें पत्नी के अफेयर के बारे में मालूम था. इन में से एक तो बाकायदा पत्नी के पहले प्रेमी से मिला भी था और उसे घर पर डिनर के लिया इनवाइट भी किया था. तो क्या नए दौर के पतियों ने इस मसले पर रोना, कल्पना, चिढ़ना छोड़ दिया है और उन्हें पत्नी की बेवफाई से कोई गिलाशिकवा नहीं रह गया है? क्या भारतीय समाज अंगरेजी दां हो गया है?

इन सवालों पर आर्यमान के मुंबई के एक बड़े मल्टीनैशनल बैंक में काम कर रहे सारांश (बदला नाम) कहते हैं कि नहीं ऐसा नहीं है पत्नी का अफेयर पूरी दुनिया में कहीं सहज स्वीकार नहीं किया जाता.

मैं ने अपनी पत्नी के प्रेमी को डिनर पर आमंत्रित इसलिए किया था कि दोनों को समझ आ जाए कि अब उन के बीच मामूली दोस्ती भर रह गई है और पत्नी नेहा (बदला नाम) भी मुझ पर पूरा भरोसा कर सके क्योंकि उस ने मुझे शादी के पहले ही सब बता दिया था. हां अचानक यह सब हुआ होता तो जरूर मुझे तनाव होता.

जब हटता है राज पर से परदा

मगर आमतौर पर सभी युवा इतने समझदार नहीं होते. भोपाल की 28 वर्षीय वर्तिका (बदला नाम) को उन के पति ने 3 साल पहले शादी के 4 महीने बाद ही छोड़ दिया था क्योंकि एक दिन उन का प्रेमी घर आ धमका था. तब दोनों पुणे में नौकरी करते हुए किराए के फ्लैट में रहते थे.

पति पहले तो अचकचाया और सामान्य होने की कोशिश या यों कह लें कि सच का सामना करने के लिए खुद को तैयार कर ही रहा था कि प्रेमी ने अपने और वर्तिका के नैनीताल ट्रिप का जिक्र कर डाला. इस ट्रिप के कुछ अंतरंग पलों के बारे में वह कुछ बोला ही था कि पति ने आपा खोते हुए भद्दी गालियां बकते हुए उसे घर से निकाल दिया. जातेजाते गुस्से में प्रेमी ने भी कह दिया कि मैं तो अच्छी दोस्ती और रिलेशन की उम्मीद ले कर आया था, लेकिन तुम तो निहायत घटिया इंसान निकले जो इत्तफाक से वर्तिका जैसी सुंदर और प्रतिभावान लड़की का पति बन गया. अब जिंदगीभर मेरी जूठन चाटते मुझे याद करते रहना.

उस के जाने के बाद पति ने वर्तिका की तुलना वेश्याओं से कर डाली. यह सीन मानसिकता और व्यवहार के मामले में ठीक झग्गीझेंपड़ी सरीखा था. फर्क इतना भर था कि किरदार साफ सुथरे कपडे़ पहने थे, अंगरेजी स्कूलकालेज में पड़े थे, अच्छी नौकरियां कर रहे थे और सभ्य व आधुनिक समाज का हिस्सा माने जाते. उस के जाने के बाद तो मेरी घरगृहस्थी बसने के पहले ही उजड़ गई.

वर्तिका बताती है कि पति ने एक बार फिर मुझे केरैक्टरलैस कहते घर से बाहर कर दिया. वह रात मैंने एक होटल में बिताई और दूसरे दिन की फ्लाइट से भोपाल आ कर मम्मीपापा को सारी बात बताई. दुख तो तब और बढ़ा जब उन दोनों ने भी मुझे गलत ठहराया, लेकिन मुझे चिंता न करने की भी हिदायत दी कि कभीकभी ऐसा होता है और वे पति से बात कर उसे समझ लेंगे.

क्या करें जब कोई हल न निकले

मगर आज तक कोई हल नहीं निकला. दोनों के तलाक का मामला अदालत में चल रहा है. पति ने उस के पिता से साफ कह दिया कि अब कुछ नहीं हो सकता. मैं किसी और की झठन चाट कर स्वाभिमान के साथ जिंदा नहीं रह सकता. आप ने और आप की लड़की ने मुझे धोखा दिया है.

अगर वह पहले बता देती कि वह शादी के पहले किसी और के साथ नैनीताल के एक होटल में 2 रातें गुजार चुकी है तो मैं शायद एडजैस्ट कर लेता, लेकिन उस के ऐक्स ने मेरी बेइज्जती की है, मेरी मर्दानगी को ललकारा है. मैं आत्महत्या नहीं कर रहा हूं यही बहुत है. अब आप तलाक के बाद उस के प्रेमी से ही उस की शादी करवा दें तभी सब सुखी और खुश रहेंगे.

अप्रत्याशित घटना

इस मामले में सब से बड़ी गलती वर्तिका के ‘वो’ की है. शक उस की मंशा और नीयत पर भी किया जा सकता है. इस के बाद खुद वर्तिका की गलती है जिस ने पति को अल्ट्रामाडर्न समझ और प्रेमी को घर आने दिया वह भी शादी के तुरंत बाद जब दोनों एकदूसरे को अच्छी तरह समझ भी नहीं पाए थे.

वर्तिका के पति ने वही रिएक्ट किया जो कोई भी पति करता लेकिन उसने बहुत बड़े दिल से काम नहीं लिया. अगर बारीकी से देखें तो उस के गुस्से की वजह पत्नी के ऐक्स की वे बातें ज्यादा थीं जो इस वक्त में करना गैरजरूरी था. सामान्य बातचीत होती तो यह नौबत नहीं आती.

खुद वर्तिका अब यह मानने लगी है कि जो भी उस शाम हुआ वह अप्रत्याशित था और एकदम कुछ न सोच पाने के कारण वह प्रेमी को टरका नहीं पाई और इस से भी ज्यादा अहम बात यह कि उसे पति को शादी के पहले सबकुछ बता देना चाहिए था. लेकिन प्रौस्टीट्यूट कहने और घर से निकालने के फैसले पर सोचना उसे भी चाहिए था. किसी को भी इस तरह पत्नी तो क्या किसी भी औरत का अपमान करने का हक नहीं. ऐसे गंवार के साथ कोई लड़की जिंदगी नहीं गुजार सकती. मैं ने और लड़कियों की तरह प्यार किया था कोई गुनाह नहीं किया था.

महंगा पड़ता है सच बताना

ठीक ऐसी ही परिस्थिति से डेढ़ साल पहले कानपुर के युवा पिंटू को दोचार होना पड़ा था जब शादी के चंद दिनों बाद ही खुमारी उतरने से पहले ही उसे लगा कि पत्नी कोमल मोबाइल फोन पर किसी से कुछ ज्यादा ही बतियाती रहती है. उस ने इस बाबत उस से पूछा तो शुरुआती नानुकुर के बाद कोमल ने सच बता दिया कि यह शादी तो उस ने घर वालों के दबाव में की नहीं तो वह तो स्कूल के दिनों से ही पंकज नाम के लड़़के से प्यार करती है और उसे कभी भूल नहीं पाएगी.

सुन कर पिंटू को जोर का झटका लगा, लेकिन उस ने खुद को संभाल लिया और अपने ‘सौत’ से खुद मिला.

पिंटू जलाभुना नहीं, न ही उस ने पत्नी व ससुराल वालों पर धोखा देने का आरोप लगाया और न ही वर्तिका के पति की तरह पत्नी के चरित्र पर ऊंगली उठाई बल्कि कोमल और पंकज के सच्चे प्यार का कायल हो गया. इस के पहले उस ने पति का फर्ज निभाते हुए कोमल को समझया पर उस ने अपना दिल खोल कर रख दिया तो वह पसीज उठा और पत्नी की शादी प्रेमी से करवा दी.

इस के लिए पहले उस ने बाकायदा कोमल को तलाक दिया और खुद की मौजूदगी में पत्नी के 7 फेरे प्रेमी से पड़वा दिए. कोई अनहोनी या अड़ंगा पेश न आए इस के लिए उस ने पुलिस की मदद भी ली. इस त्याग और समझ की चर्चा देश भर में हुई जिस का असर भी हुआ था. इस के बाद से ऐसी खबरें भी आने लगीं जिन में पति ने पत्नी के प्रेमी को सहज स्वीकार लिया.

पौराणिक मानसिकता

यह भी सच है कि अमृता, इमरोज और साहिर जैसे आभिजात्य कलाकार अपना एक अलग समाज बना लेते हैं, जिस में स्वतंत्रता और उच्छृंखलता में कोई खास फर्क नहीं रह जाता, लेकिन औसत समाज अपने ही बनाए कायदेकानूनों के मकड़जाल में फंसा छटपटाता रहता है. यह पौराणिक मानसिकता है कि कोई पति, पत्नी के ‘वो’ को ले कर तिलमिला उठता है और उस का सामना आमतौर पर सहज दिखने की कोशिश करता हुआ करता है, लेकिन बाद में उस की मर्दानगी हिंसा और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना की शक्ल में पत्नी पर उतरती है.

यहां से अकसर एक अपराध कथा की स्क्रिप्ट का भी जन्म होता है. जितना पति पत्नी को अपनी दासी और जायदाद मानते हुए परेशान और प्रताडि़त करता है पत्नी उतनी ही शिद्दत से प्रेमी के और नजदीक पहुंचती जाती है और फिर एक दिन अखबार की सुर्खी इस तरह के शीर्षक के साथ बनती है कि पत्नी ने प्रेमी के साथ मिल कर पति की हत्या कर दी.

कानपुर का पिंटू भी यही सब करता तो मुमकिन है उस का हश्र भी भोपाल के धनराज या दिल्ली के प्रदीप जैसा होता, इसलिए पत्नी के प्रेमी से पेश आने के पहले बहुत सोचसमझ लेना चाहिए. किसी भी तरह की हिंसा या पत्नी को किश्तों में कल्पा कर सजा देना और खुद भी घुटते रहना इस समस्या का हल नहीं.

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