भारतीय क्रिकेट जगत का जानामाना नाम मोहम्मद शमी पिछले दिनों सुर्खियों में रहे. उन की पत्नी हसेन जहान ने उन पर आरोप लगाया कि वे दूसरी औरत के चक्कर में घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं.

जहान ने शमी के व्हाट्सऐप और फेसबुक मैसेंजर के कई स्क्रीन शौर्ट दिखाए जिन में कितनी ही औरतों के साथ उनकी बातचीत के सुबूत थे. जब शमी दक्षिण अफ्रीका के दौर से लौटे और जहान ने इस सब के खिलाफ आपत्ति जताई तब उन्होंने जहान के साथ मारपीट शुरू कर दी. जहान कहती हैं कि उन्होंने शमी को काफी समय दिया खुद को सुधारने के लिए, लेकिन शमी ने अपना सारा गुस्सा जहान पर निकाला. हालांकि शमी इस सब से इनकार करते हैं.

साक्षी एक बैंक मैंनेजर हैं. अच्छा जौब, अच्छी शादीशुदा जिंदगी और ऊपर से देखने में सबकुछ बहुत बढि़या. लेकिन अंदर ?ांको तब पता चलता है कि जब साक्षी को अपने पति के दूसरी औरत के साथ संबंध के बारे में शक हुआ और उस ने अपने पति ने प्रश्न किया तो उस के पति ने आक्रामक रूप धारण कर लिया. चोर की दाढ़ी में तिनका वाली कहावत सच हो गई. जब कभी साक्षी कोई प्रश्न करती तभी उस का पति फौरन गुस्सा करने लगता. धीरेधीरे साक्षी का शक बढ़ता गया और उस के पति का उस के ऊपर गुस्सा.

मजबूरी में जिंदगी

बात घरेलू हिंसा तक पहुंची गई. हर बार ?ागड़े की स्थिति में साक्षी का पति उसे अपने जूते की हील से तो कभी लातघूंसों से पीटता, साक्षी फिर भी उस के साथ जीती जा रही थी, इस उम्मीद में कि उस के पति को गलती का एहसास होगा और वह उस के पास लौट कर आ जाएगा.

हिंसा के बाद जब अगली सुबह साक्षी अपने बैंक जाती तो मेकअप से अपनी चोटों के निशान छिपा कर, बढि़या लिपस्टिक, बिंदी लगा कर जाती. लेकिन उस की सहेली और सहकर्मी को फिर भी शक हो ही गया. उन के द्वारा किसी को न बताने का वादा करने पर साक्षी ने रोरो कर अपना हाल सुना दिया.

‘‘हमारे घर के पास एक बाबाजी रहते हैं जो सौतन से तुरंत छुटकारा दिलवा देते हैं. तू हिम्मत न हार. मैं तु?ो उन के पास लेकर चलूंगी.’’

सहेली की बातों में आ कर साक्षी बाबाजी की शरण में पहुंच गई. बाबाजी के आश्रम में जगहजगह संदिग्ध से पोस्टर लगे हुए थे, धूपदीप जल रहे थे, धुआं उठ रहा था. उन्होंने नाटकीय मुद्रा में आंखें बंद कीं और हाथ हवा में लहराते हुए कहने लगे, ‘‘अगर तेरा पति किसी और औरत के जाल में फंस गया है तो कमी जरूर तेरे ही प्यार में है तभी वो दूसरी की ओर आकर्षित हुआ है.

‘‘छुटकारा पाने के लिए तुम्हें अपनी यौवन की सुंदरता का मोहजाल बनाना होगा पर सब से असरदार टोटका है कि तुम भगवान कृष्ण की शरण में जाओ क्योंकि वे प्रेम के देवता हैं. उन की शरण में जाने से तुम्हारा प्रेम पुन: तुम्हें प्राप्त होगा. हर शुक्रवार को भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए मात्र 3 इलायची अपने शरीर पर स्पर्श कर के अपने पल्लू में बांध लेना और उन्हें बंधे रहने देना.

‘‘दूसरे दिन प्रात:काल उठ कर स्नान कर के भगवान कृष्ण का ध्यान करते हुए अपने पति को चाय में या भोजन में मिला कर इलायची खिला देना. यह टोटका तुम्हें 3 शुक्रवार करना होगा. देखना तुम्हारा पति तुम्हारी तरफ आकर्षित होने लगेगा और पहले से भी अधिक प्रेम करने लगेगा. जा अपनेआप सौतन से छुटकारा मिल जाएगा.’’

इतना सरल उपाय जान कर साक्षी खुश हुई और बाबाजी का जयकारा करती हुई आश्वस्त हो कर वापस लौट आई. लेकिन बाबाजी के टोटके से कोई लाभ न हुआ. पति की दूसरी औरत के प्रति आसक्ति भी वही रही और साक्षी के टोकने पर हिंसा भी जस की तस बनी रही. हां बाबा और उन के चेलों को सभी का रोजाना दर्शन लाभ अवश्य मिला.

आकर्षण की सीमा रेखा

किसी के प्रति आकर्षण होना एक अलग चीज है, लेकिन उस आकर्षण के चलते अपनी शादीशुदा जिंदगी को ताक पर रख देना बिलकुल गलत है. ऐसा नहीं कि शादी के बाद महिला या पुरुष इस बात के लिए प्रतिबंधित हो जाएंगे कि वे अपने साथी के अलावा न तो किसी को देखेंगे और न ही बात करेंगे.

शादी का अर्थ बंधन नहीं और न ही अपने साथी को किसी पिंजरे में रखना है. लेकिन अगर बात केवल देख कर तारीफ करने या बात करने से आगे बढ़ती है तो बेशक इसे गलत कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए.

हिंदू संस्कृति में सौतन से छुटकारा

मनुष्यों के रिश्तों में सब से महत्त्वपूर्ण है पतिपत्नी का रिश्ता जैसे इंसान स्वयं जोड़ता है. कभी अभिभावक जीवनसाथी चुनते हैं तो कभी हम खुद. दोनों ही स्थितियों में इस रिश्ते की गरिमा अनूठी और गरिमामई होती है. पुराने जमाने में पतियों को एक से अधिक पत्नी रखने की सामाजिक स्वीकृति प्राप्त थी. हिंदू समाज में पहली पत्नी का अपना स्थान होता था, लेकिन वहीं दूसरी औरत को हेय दृष्टि से न देख कर उसे भी पत्नी का स्थान प्राप्त हो जाता था.

किंतु हिंदू मैरिज ऐक्ट के आने से यह संभव नहीं है, इसलिए अब पहली पत्नी के होते हुए दूसरा विवाह करना संभव नहीं परंतु पराई स्त्री की ओर आकर्षण कैसे रोक सकता है कोई. ये सौतनों पतियों की दृष्टि में हमेशा से खटकती आई हैं. हिंदू शास्त्रों के अनुसार कामदेव की उपासना करने और उन के मंत्र जाप से पतिपत्नी में प्रेम बढ़ता है और सौतन से छुटकारा मिलता है. यहां पति को सौतन की कुदृष्टि से बचाने के लिए मंत्र भी है-

ॐ कामदेवाय: विद्मह्य: रति प्रियायौ धीमाहिं तन्नोह् अनंग: प्रचोदयात्. ऐसे ही कहा गया कि शुक्र मंत्र का जाप करने से भी सौतन से छुटकारा मिलता है और पतिपत्नी में प्रेम बढ़ता है.

ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय: नम:

टोनेटोटकों की दुनिया

सौतन से छुटकारा पाने के लिए टोनेटोटकों की कोई कमी नहीं है. चाहे आप औफलाइन जाएं या औनलाइन, टोटकों की भरमार आप को चकित कर देगी. ज्योतिसकथन साइट के उपेंद्र अग्रवाल पति वशीकरण का टोटका बताते हुए कहते हैं, ‘‘अगर आप अपने पति को वश में रखना चाहती हैं और आप को शक है कि आप का पति किसी अन्य स्त्री से प्रेम करता है तो शुक्ल पक्ष के किसी भी रविवार को अपने शरीर के उस स्थान पर लौंग रखें जहां पसीना आता हो और फिर उस लौंग को सुखा कर रख लें और अपने पति को किसी तरह खिला दें. आप का पति आप के वश में आ जाएगा और आप के कहे अनुसार चलेगा.’’

पाखंडियों का पाखंड

अघोरी को इन वैबसाइट के अनुसार पति को अपने प्रति मोहित करने के लिए शुक्र मंत्र का जाप अचूक उपाय माना जाता है जिस के नियमित रूप से पाठ करने से पति सौतन को छोड़ कर अपनी पत्नी के प्रति कामासक्त हो उठेगा.

एक और वैबसाइट ‘पामशास्त्र’ कहती है कि सौतन से छुटकारा पाना हो तो साबूत पान के पत्ते पर चंदन तथा केसर का चूर्ण मिला कर अपने मस्तक पर तिलक लगाएं तथा पति या उन के चित्र के समक्ष जाएं. ये प्रयोग 43 दिनों तक करें तथा नित्य नयापत्ता लें जो कहीं से भी कटाफटा न हो. अंतिम दिन सभी पान के पत्तों को एकत्रित कर बहते पानी में बहा दें. आप में सम्मोहक शक्ति आ जाएगी.

बैंगलुरु की ऐस्ट्रोलौजर साइट के मोहम्मद अली खान का दूसरी औरत से छुटकारा पाने का टोटका मानें तो सिंदूर में डूबी हुई कलाई में पहने लायक काली डोरी अपने पति की जेब या पर्स में रखें. अगर आप के पति रखने से मना कर दे तो आप अपने शयनकक्ष के बैड के सिरहाने कहीं भी छिपा के रख दें. ऐसे ही पति को औफिस के लिए खाना जिस बरतन में देते है उस बरतन पर सिंदूर का छोटा सा निशान कर दें.

मगर इन टोनेटोटकों से कुछ नहीं होता. आप को ध्यान रखना होगा कि जिंदगी में इन नकारा, मन बहलाने के कामों से कुछ हासिल नहीं होता. जो कुछ होगा वह ठोस कदम उठाने से होगा, इसलिए इन बहकावों में आ कर अपनी जिंदगी के महत्त्वपूर्ण समय को व्यर्थ न गवाएं बल्कि सही समय पर उचित कदम उठा कर अपने जीवन को सही राह पर लाने का भरसक प्रयास करें.

ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के कारण

ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने के बहुत से कारण हो सकते हैं, लेकिन अगर समय रहते उन कारणों को जान लिया जाए तो इस मुसीबत से पार पाया जा सकता है. ज्यादातर मामलों में ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर शादीशुदा जिंदगी में कलह होने की वजह से होते हैं, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं है. कई बार घर वालों और समाज की वजह से कुछ लोगों की शादी बहुत कम उम्र में हो जाती है. ऐसे लोग जब जिंदगी के अगले पड़ाव पर पहुंचते हैं तो उन्हें यह लगने लगता है कि उन्होंने काफी कुछ मिस कर दिया है.

ऐसे में वे ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर कदम बढ़ाने लगते हैं. सैक्सुअल सैटिस्फैशन न मिलना भी एक प्रमुख कारण हो सकता है कि आप का साथी आप के अलावा किसी और के प्रति आकर्षित हो. कई मामलों में तो यह सब से बड़ी और एकमात्र वजह होती है. लेकिन कई बार कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन में अतिरिक्त संबंध बनाने की क्रेविंग होती है.

अपने साथी से संतुष्ट होने के बावजूद वे दूसरे के साथ संबंध बनाने के लिए आतुर रहते हैं. एक और बड़ी वजह है बच्चों का जन्म. मातापिता बनाने के बाद जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है. पत्नी अकसर मां की भूमिका को प्राथमिकता देने लगती है और पति इधरउधर भटक जाता है.

अफेयर होने के चांस

दांपत्य विश्वासघात के प्रसिद्ध थेरैपिस्ट डा. स्काट हाल्जमन कहते हैं कि सोशल मीडिया और ई कम्यूनिकेशन के आ जाने से विश्वासघात में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. कारण है नए लोगों से मुलाकातों के बढ़े हुए आयाम. कई लोगों से आप पहली बार नैट के जरीए मिल सकते हैं. और तो और पुराने जानकारों से व मित्रों से भी सोशल नैटवर्किंग साइट की मदद से आसानी से मिल सकते हैं, जिस से कई बार अफेयर होने के चांस बढ़ जाते हैं.

योगेश निजी कंपनी में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत है. उस की सामाजिक छवि एक सफल गृहस्थ इंसान की है. किंतु उस की पत्नी पद्मा जानती है कि उस की भटकती हुई नजरें हर सामने आने वाली महिला पर बिखर जाती हैं. वो उस की इस आदत से काफी परेशान है. लेकिन हद तो तब हो गई जब योगेश का अफेयर उस के दफ्तर में कार्यरत एक महिला सहकर्मी से चल पड़ा.

धीरेधीरे वह उस महिला को घर लाने लगा. वह उसे घर लाता, अपने कमरे में ले जा कर दरवाजा अंदर से बंद कर लेता. पद्मा के पूछने पर कहता कि औफिस का कुछ खास काम है और उन दोनों को डिस्टर्ब न किया जाए.

जब यह सिलसिला बढ़ने लगा तो पद्मा ने इस पर आपत्ति जतानी शुरू की. लेकिन उस के मना करने पर योगेश उस पर हाथ उठाने लगा. पद्मा को आभास हो गया कि पानी सिर से ऊपर जा रहा है. आखिर ऐसे कब तक सहती वह.

यदि पतिपत्नी का संबंध तालमेल से चले तो जिंदगी एक सुमधुर गीत बन जाती है, परंतु ताल टूटते ही मेल भी बिखर कर रह जाता है और ऐसा अकसर तीसरे के कारण होता है जो दोनों के बीच आकर पूरा रिश्ता खराब कर देता है. पद्मा को एक परित्यक्ता का जीवन जीना स्वीकार नहीं था. उस ने ठोस कदम उठाने के बारे में सोचा.

परिवार को सम्मिलित किया

पद्मा ने पहले योगेश के और फिर जब बात नहीं बनी तो अपने परिवार को अपनी समस्या में सम्मिलित लिया. उस ने पारिवारिक मीटिंग बुलवाई और उन में योगेश के अफेयर और उस पर हाथ उठाने की बात को उठाया. वह इस शर्म से बाहर निकली कि समाज क्या कहेगा. उस ने अपने कुछ निकटतम दोस्तों और यहां तक कि योगेश के औफिस के बौस को भी ये बातें बताईं. योगश को अपनी छवि का बेहद खयाल था. अपनी छवि खराब होती देख उसे संभलना ही पड़ा. लेकिन बात यहां खत्म नहीं हुई. पद्मा ने इस प्रकरण के पीछे के असली कारणों को जानने की पूरी कोशिश की ताकि भविष्य में दोबारा ऐसा कभी न हो.

पहचानें असली कारणों को

एक अफेयर यों ही नहीं हो जाता. क्यों होता है? क्या कारण रहते हैं कि एक गृहस्थ पुरुष भटक जाता है? इस के पीछे छिपे कारण और असलियत जानने की कोशिश करनी चाहिए. अफेयर को नजरअंदाज करना ठीक वैसा ही होगा जैसे किसी चोटिल व्यक्ति को अस्पताल न ले जाना. देरसबेर चोट भले ही ठीक हो जाए पर उस का दर्द और निशान छूट ही जाएगा. भावनात्मक चोट भी शारीरिक चोट की तरह ही होती है.

यदि आप अपनी गृहस्थी बचाना चाहती हैं तो अफेयर का सामना करना, डट कर खड़े रहना और उस के वार के सामने अडिग रहना जरूरी है वरना कहीं ऐसा न हो कि एक अफेयर खत्म होने पर भी इस के पुन: आप के जीवन में आ कर आप को डराने की आशंका बनी रहे.

द्य सब से पहले तो पत्नी को अफेयर करने, अपनी पत्नी को धोखा देने और घरेलू हिंसा करने की जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी. वह मासूम सा बन कर या सारा दोष अपनी पत्नी पर मढ़ कर नहीं छूट सकता. जब अपनी गलती स्वीकारेगा, तभी तो सुधार की दिशा में कदम उठाएगा.

द्य अफेयर के पीछे कई कारण होते हैं. केवल पति को दोष देना भी ठीक नहीं. पत्नी को भी अपने अंदर ?ांकना होगा. हो सकता है कुछ ऐसे कारण दिखाई दे जाएं जिन की वजह से पति को शादी के बाहर भटकना पड़ गया.

द्य खुल कर आपसी बातचीत से हल निकाला जा सकता है. पतिपत्नी को एकदूसरे के प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश करनी चाहिए पर ध्यान रहे कि उत्तर ईमानदार हों.

द्य अपने अंदर के दर्द का सामना करें और जिस किसी चीज से आप को शांति मिले, वह करने का प्रयास करें.

काउंसलर की सहायता लें

डा. निशा खन्ना जोकि एक फैमिली काउंसलर हैं, कहती हैं कि जहां परिवार और दोस्त किसी एक पक्ष की तरफदारी कर सकते हैं, वहीं काउंसलर एक निष्पक्ष व्यक्ति होता है जो तटस्थ भाव से दोनों पक्षों की बात सुन कर बीच की राह ढूंढ़ने का प्रयास करता है. काउंसलर की कोशिश रहती है कि पतिपत्नी में आपसी कम्यूनिकेशन में सुधार हो और रिश्ते में जो दूरी आ गई है वह मिट सके.

सरलाजी के पति को उन के अफेयर के बारे में जब पता चला तो वे एकदम बिखर सी गईं. उन का विश्वास तारतार हो गया. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि महेंद्रजी उस के साथ विश्वासघात करेंगे. बात पुरानी हो चुकी थी. महेंद्रजी को अपनी गलती का एहसास हो गया था और प्रायश्चित्त के तौर पर उन्होंने स्वयं ही यह बात सरलाजी को बताई.

पहले तो सरलाजी इतना नाराज हुईं कि कई दिनों तक महेंद्रजी से कोई बातचीत नहीं की. लेकिन फिर उन के मन में यह विचार आया कि क्या 6 माह के अफेयर के लिए वे अपनी 30 साल की शादी तोड़ देंगी? क्या एक भूल सुधरी नहीं जा सकती? क्या वे इतने पुराने गृहस्थ जीवन को एक गलती की कसोटी पर तोल नहीं पाएंगी? उन्होंने अपनी शादीशुदा जिंदगी को चुना और एक भूल को माफ  करने में ही सम?ादारी सम?ा.

ऐक्सट्रा मैरिटल अफेयर और घरेलू हिंसा

‘जर्नल औफ मैरिज ऐंड फैमिली’ के एक आलेख ‘वायलैंस पोटैंशियल इन ऐक्सट्रा मैरिटल रिस्पौंस’ के लेखक राबर्ट वाइटहर्स्ट की मानें तो ऐक्सट्रा मैरिटल सैक्स के कारण ही घरेलू हिंसा होती है. जब बात मारपीट पर उतर आए तो इसे हलके में नहीं लेना चाहिए. कोई भी पत्नी यह सह नहीं सकती कि उस का पति किसी और स्त्री के चक्कर में पड़ जाए. किंतु यदि विरोध करने से बात बिगड़ने लगे तो इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा. यदि पति मारपीट न छोड़े तो पुलिस में जाने से भी नहीं हिचकना चाहिए.

ऐसी कितनी ही महिलाएं होंगी जिन के पति उन के साथ विश्वासघात करते हैं. यह बात बेहद उदासीन है, लेकिन सच है. मगर एक बात यह भी सच है कि हर किसी के जीवन में कोई न कोई कमी, कोई न कोई दुख होता है. कोई बीमारी से ग्रस्त होता है तो कोई जीवनसाथी के अभाव से. इस संसार मेंकौन है जो किसी भी दुखदर्द से वंचित है.

यदि आप का पति पराई स्त्री के रूपयौवन के पीछे दीवाना हो जाए तो आप की खुशियों को ग्रहण लग जाना स्वाभाविक है. ऐसे में कोई भी चीज आप को सुख नहीं देती, किंतु फिर भी इस कठिन समय से बाहर निकलना जरूरी है.

इसलिए जो कुछ भी संभव हो वह प्रयास करें और स्वयं को तथा अपने साथी को इस समस्या से उबारने की भरसक कोशिश करें ताकि भविष्य में आने वाली खुशियां आप का द्वार खटखटाएं और तब आप सोचें कि हम दोनों ने कितना अच्छा किया जो समय से चेत गए और सही राह चुन ली.

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