छोटे बच्चों के साथ बाहर खाना खाने जाने के बजाय ज्यादातर मातापिता बाहर का खाना खाने का मन होने पर खाना पैक करा कर घर लाना ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि बच्चे इतना तमाशा करते हैं कि वे परेशान हो उठते हैं. मगर इस का यह मतलब भी नहीं कि छोटे बच्चों के साथ रैस्टोरैंट में खाना खाने जाएं ही नहीं. निम्न बातों पर ध्यान दे कर आराम से घर से बाहर अपनी पसंद के भोजन का लुत्फ उठाएं:
सही रैस्टोरैंट का चुनाव
रैस्टोरैंट ऐसा हो जहां अगर बच्चे शोर मचाएं, तो अजीब न लगे. कहने का मतलब यह है कि कुछ रैस्टोरैंट फैमिलीज के लिए जाने जाते हैं, जहां अन्य परिवार भी बच्चों के साथ आते हैं. यदि आप ने कोई ऐसा रैस्टोरैंट चुना जहां कपल्स आंखों में आंखें डाल कर लाइव गजलों का आनंद ले रहे हों, तो वहां आप को आप के खुराफाती बच्चों के साथ 15 मिनट के अंदर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा.
पूल साइड रैस्टोरैंट्स में न जाएं, क्योंकि बच्चा खेलतेखेलते कब पूल में गिर जाए, कोई भरोसा नहीं.
पिज्जाबर्गर जौइंट्स या फास्ट फूड रैस्टोरैंट्स बच्चों के साथ जाने के लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं. वहां आप को खाने का अधिक समय इंतजार नहीं करना पड़ता. बच्चों के साथ इंतजार करना मुश्किल होता है.
बुफे भी एक अच्छा चुनाव हो सकता है, क्योंकि वहां लोग चलफिर रहे होते हैं. बच्चे अधिक देर एक जगह नहीं बैठ सकते. अत: वे जब इधरउधर जाएंगे, तो बुफे में अजीब नहीं लगेगा. आप का बच्चों के पीछे भागना भी अजीब नहीं लगेगा. साथ ही खाने की अधिक वैराइटी सामने होने पर बच्चे भी अपनी पसंद का खाना चुन सकते हैं.
कई रैस्टोरैंट्स हाई चेयर, झूला आदि की व्यवस्था बच्चों के लिए रखते हैं. बहुत छोटे बच्चे को झूले में लिटा कर आप कुछ समय के लिए तो बेफिक्र हो ही सकते हैं. बच्चे को नींद आ जाए, तो और बढि़या. थोडे़ बड़े बच्चे के लिए हाई चेयर वरदान है. उस से बच्चा उतर कर भाग नहीं पाएगा और उस की फूड ट्रे पर आप उस का पसंदीदा भोजन रख सकती हैं या उस के खिलौने भी. बच्चा कुछ समय के लिए ही सही पर व्यस्त हो जाएगा.
कुछ रिजौर्ट्स में बच्चे जब इधरउधर भागते हैं तो वेटर्स उन का ध्यान रखते हैं ताकि मातापिता आराम से भोजन कर सकें. अत: जिस रैस्टोरैंट में ऐसी सुविधा हो वहां बच्चों के साथ खाना खाने जाएं.
कुछ रैस्टोरैंट्स में चिल्ड्रन मेन्यू अलग से होता है, जिस में बच्चों की पसंद का खास ध्यान रखते हुए खाने की चीजें होती हैं. ये मिर्च रहित और बच्चों को आकर्षित करने वाली चीजें होती हैं. बच्चों के साथ रैस्टोरैंट का चुनाव करने में यह एक मेजर प्लस पौइंट होता है.
बैग में जरूर हों ये सामान
बच्चों के साथ रैस्टोरैंट जाना हो, तो अपने बैग में ये सामान जरूर रखें:
बच्चे की पसंदीदा किताबें, गेम्स या पजल्स और खिलौने. ये चीजें यदि ऐसी हों जो उस ने पिछले 2-3 महीनों से नहीं खेली हों, तो और बढि़या. बच्चे 15-20 मिनट तो इन में जरूर व्यस्त रहेंगे. तब तक आप अपना भोजन आराम से कर सकते हैं.
बच्चे की बिब, भोजन गिरने पर साफ करने के लिए नैपकिन और कपड़े खराब होने पर बदलने के लिए 1 जोड़ी ऐक्स्ट्रा कपड़े.
कुछ नए छोटेछोटे खिलौने भी आप रख सकती हैं. मगर ध्यान रहे शोर करने वाले खिलौने न हों वरना रैस्टोरैंट में आसपास के लोगों की शांति में खलल पड़ेगा. नए खिलौने में बच्चेका ध्यान अधिक समय तक बंटा रहेगा. हैलिकौप्टर, कार आदि खिलौने बच्चा हाई चेयर की ट्रे पर भी चला सकता है.
बच्चे की खाने संबंधी पसंदनापसंद आप को अच्छी तरह पता होती है. यदि बच्चे को रैस्टोरैंट में मिलने वाला खाना पसंद नहीं है, तो
आप उस के लिए कुछ स्नैक्स व किशमिश वगैरह ले जा सकती हैं. वे बच्चे को अधिक समय तक व्यस्त रखने में उपयोगी होते हैं और बच्चे का पेट भी खराब नहीं करते.
इन बातों का भी रहे ध्यान
आप का अटैंशन और बातचीत: चाहे बच्चों को सौ तरीकों से व्यस्त रखने की कोशिश करें, किंतु उन के लिए आप का अटैंशन भी जरूरी है. यदि आप के बच्चे को लगा कि आप कहीं और मशगूल हैं, तो वह रो कर ध्यान आकर्षित करेगा. इस से यह है कि अच्छा आप बीचबीच में उस से बात करें. जैसेकि अरे वाह, आप ने सारी किशमिश फिनिश कर दी. आप के ऐरोप्लेन में पायलट कहां बैठता है? या वेटर अंकल आए हैं, क्या आप के खाने के लिए कुछ मंगा दूं? आदि.
बच्चे की पसंद का खाना और्डर करें: नन्ही प्रियांशी को टोमैटो और चिकन दोनों ही सूप बहुत पसंद हैं. इसलिए प्रीति और प्रीतेश जब भी रैस्टोरैंट जाते हैं, तो सब से पहले सूप और्डर करते हैं. फ्रैंच फ्राइस, चिकन नगेट्स आदि भी बच्चों को बहुत पसंद होते हैं.
कुछ डैजर्ट भी आप सिर्फ अपने रैस्टोरैंट विजिट के लिए रिजर्व कर सकती हैं. अंशिका को पता है कि जब वह मम्मीपापा के साथ रैस्टोरैंट जाएगी, तो उसे पुडिंग मिलेगा उसी चक्कर में वह रैस्टोरैंट में अच्छी बच्ची बन कर रहती है. पीक आवर्स से पहले पहुंचें: लंच और डिनर के कुछ पीक आवर्स होते हैं, जिन में रैस्टोरैंट्स में बहुत भीड़ होती है. अत: कोशिश करें कि आप उस से पहले पहुंचें ताकि आप को सर्विस के लिए इंतजार न करना पड़े.
कुछ अनुशासन के नियम घर में भी जरूरी: खाने और मुंह से पानी को फेंकने न देना और जोर से चिल्लाने के लिए मना करना, ऐसे कुछ नियम घर पर भी बच्चों को अनुशासित करने के लिए अपनाएं ताकि घर और बाहर दोनों ही जगह वे सलीकेदार रहें.
बाहर जाने से पहले समझाएं: ज्यादातर मातापिता को यही लगता है कि बच्चों को समझाने का कोई फायदा नहीं होता, पर हकीकत में ऐसा नहीं होता है. बच्चे बहुत समझदार होते हैं. यदि उन्हें प्यार से समझाया जाए, तो वे बाहर भी गुड मैनर्स जरूर अपनाएंगे.