पूर्वोत्तर भारत में गरमी के मौसम में घूमने लायक कई अच्छे शहर हैं जो प्राकृतिक संपदा के साथ आधुनिकता का बेहतर तालमेल रखते हैं. पर्यटन के लिए पूर्वी कौरिडोर में दार्जिलिंग, कलिंगपोंग, कोलकाता, भुवनेश्वर, पुरी और कोणार्क प्रमुख स्थल हैं. यहां पहाड़, झरने व झील देखने में बहुत सुंदर लगते हैं. ऐतिहासिक पर्यटन के साथसाथ यहां बागबानी को भी देखासमझा जा सकता है. प्रदूषण यहां न के बराबर है. ये सभी स्थल शुद्ध हवा के साथ मन को शांति देते हैं.
दार्जिलिंग
दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का खूबसूरत शहर है. यह चाय के साथ मसालों के लिए भी प्रसिद्ध है. इस का नजदीकी रेलजोन जलपाईगुड़ी है. कोलकाता से दार्जिलिंग मेल तथा कामरूप ऐक्सप्रैस जलपाईगुड़ी जाती हैं. दिल्ली से गुवाहाटी डिब्रूगढ़ राजधानी ऐक्सप्रैस यहां तक आती है. इस के अलावा टौय ट्रेन से जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग 8-9 घंटे में पहुंचा जा सकता है.
दार्जिलिंग सड़कमार्ग से सिलीगुड़ी से 2 घंटे की दूरी पर स्थित है. कोलकाता से सिलीगुड़ी के लिए बहुत सी सरकारी व निजी बसें चलती हैं. दार्जिलिंग हवाईमार्ग से भी जुड़ा हुआ है. बागडोगरा (सिलीगुड़ी) यहां का नजदीकी हवाईअड्डा (90 किलोमीटर) है. यह दार्जिलिंग से 2 घंटे की दूरी पर है. यहां से कोलकाता और दिल्ली के लिए प्रतिदिन उड़ानें संचालित की जाती हैं. इस के अलावा गुवाहाटी तथा पटना से भी यहां के लिए उड़ानें हैं.
दार्जिलिंग के टाइगर हिल का मुख्य आनंद चढ़ाई करने में है. हर सुबह पर्यटक इस पर चढ़ाई करते हुए मिल जाएंगे. इसी के पास कंचनजंघा चोटी है. टाइगर हिल से कंचनजंघा और एवरेस्ट दोनों चोटियों को देख सकते हैं. दोनों चोटियों की ऊंचाई में मात्र 827 फुट का अंतर है. वर्तमान में कंचनजंघा विश्व की तीसरी सब से ऊंची चोटी है. कंचनजंघा को सब से रोमांटिक माउंटेन की उपाधि से नवाजा गया है. इस की सुंदरता के कारण पर्यटकों ने इसे इस उपाधि से नवाजा है.
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का निर्माण 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुआ था. यह रेलमार्ग इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना है. यह रेलमार्ग 70 किलोमीटर लंबा है. यह पूरा रेलखंड समुद्रतल से 7,546 फुट ऊंचाई पर स्थित है.
यह रेलखंड कई टेढ़ेमेढ़े रास्तों तथा वृत्ताकार मार्गों से हो कर गुजरता है. इस रेलखंड का सब से सुंदर भाग बताशिया लूप है. इस जगह रेलखंड 8 अंक के आकार में हो जाता है. ट्रेन से पूरा दार्जिलिंग घूम सकते हैं. ट्रेन से सफर करते हुए इस के चारों ओर के प्राकृतिक नजारों का लुत्फ ले सकते हैं. ट्रेन पर यात्रा करने के लिए या तो सुबह जाएं या फिर देर शाम को.
कलिंगपोंग
कलिंगपोंग शहर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में स्थित है. यह प्रमुख हिल स्टेशन है. दार्जिलिंग और गंगटोक इसी शहर से हो कर जाया जाता है. गाड़ी से इस शहर को एक दिन में घूमा जा सकता है. इस शहर को पैदल घूमने में 2 या 3 दिन का समय लगता है. कलिंगपोंग पूर्वोत्तर हिमालय के पीछे स्थित है. यहां से कंचनजंघा पर्वतशृंखला तथा तिस्ता नदी की घाटी का बहुत सुंदर नजारा दिखता है.
गोंपा कलिंगपोंग में स्थित सभी मठों में सब से पुराना है. इसे भूटानी मठ के नाम से भी जाना जाता है. यहां प्रसिद्ध आर्मी गोल्फ क्लब है. इस के अलावा यहां तिस्ता नदी में रोमांचक खेल राफ्टिंग की शुरुआत की गई है. यह स्थान तिस्ता बाजार के नजदीक स्थित है. यहां घूमने के लिए मध्य नंवबर से फरवरी तक सब से अच्छा सीजन रहता है.
इस के अलावा हाइकिंग खेल का मजा तिस्ता नदी की घाटी में सालभर लिया जा सकता है. तिस्ता नदी पर प्रसिद्ध शांको रोपवे है. यह रोपवे 120 फुट की ऊंचाई पर है.
कलिंगपोंग में हर चौराहे पर स्टीम मोमोज, हक्का (नूडल सूप) तथा चो आदि खाने को मिलता है. कलिंगपोंग में अच्छे रैस्टोरैंट भी हैं. केक, पेस्ट्री, पैटीज, चाय तथा कौफी यहां मिलती है. मंडारिन रैस्टोरैंट मांसाहारी भोजन के लिए प्रसिद्ध है. लिंक रोड को तिब्बती भोजन के लिए जाना जाता है. भूटिया शिल्प, लकड़ी का हस्तशिल्प, बैग, पर्स, आभूषण, थंगा पेंटिंग्स तथा चाइनीज लालटेन की खरीदारी यहां की जा सकती है. कलिंगपोंग का स्थानीय चीज तथा लौलीपौप यहां आने वाले पर्यटकों को बहुत पसंद आता है.
हवाईमार्ग से कलिंगपोंग का सब से नजदीकी हवाईअड्डा बागडोगरा है. यहां से सिलीगुड़ी 69 किलोमीटर दूर है. रेलमार्ग का सब से नजदीकी रेलवे स्टेशन नई जलपाईगुड़ी जंक्शन है. सड़कमार्ग से सिलीगुड़ी (70 किलोमीटर) से यह जुड़ा हुआ है. यहां से कलिंगपोंग के लिए सरकारी व निजी बसें चलती हैं.
कोलकाता
हुगली नदी के किनारे स्थित कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजधानी है. देश का सब से बड़ा बंदरगाह यहीं है. कोलकाता को पूर्वी भारत का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है. यह रेलमार्ग, वायुमार्ग तथा सड़कमार्ग से देश के विभिन्न भागों से जुड़ा हुआ है. यह यातायात का केंद्र, विस्तृत बाजार वितरण केंद्र, शिक्षा केंद्र, औद्योगिक केंद्र तथा व्यापार का केंद्र है. यहां अजायबघर, चिडि़याखाना, बिरला तारामंडल, हावड़ा ब्रिज, कालीघाट, फोर्ट विलियम, विक्टोरिया मैमोरियल, विज्ञान नगरी आदि मुख्य दर्शनीय स्थान हैं.
कोलकाता के निकट हुगली नदी के दोनों किनारों पर भारतवर्ष के अधिकांश जूट के कारखाने हैं. इस के अलावा यहां मोटरगाड़ी तैयार करने का कारखाना, सूतीवस्त्र उद्योग, कागज उद्योग, विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग उद्योग, जूता तैयार करने का कारखाना, होजरी उद्योग और चाय विक्रय केंद्र आदि स्थित हैं.
फोर्ट विलियम, हुगली नदी के समीप भारत के सब से बड़े पार्कों में से एक है. यह 3 वर्ग किलोमीटर में फैला है. मैदान के पश्चिम में फोर्ट विलियम है. फोर्ट विलियम को अब भारतीय सेना के लिए उपयोग में लाया जाता है. यहां प्रवेश के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है. ईडन गार्डन्स में एक छोटे से तालाब में बर्मा का पेगोडा स्थापित किया गया है, जो इस गार्डन का विशेष आकर्षण है. 1906 से 21 के बीच निर्मित विक्टोरिया मैमोरियल रानी विक्टोरिया को समर्पित है. इस स्मारक में शिल्पकला का सुंदर मिश्रण है.
भुवनेश्वर
भुवनेश्वर ओडिशा की राजधानी है. यहां के निकट कोणार्क में विश्वप्रसिद्ध सूर्य मंदिर स्थित है. यह बहुत खूबसूरत और हराभरा प्रदेश है. यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है. इतिहास में यह अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है. तीसरी शताब्दी, ईसापूर्व यहीं कलिंग युद्ध हुआ था. इसी युद्ध के परिणामस्वरूप अशोक एक लड़ाकू योद्धा से प्रसिद्ध बौद्ध अनुयायी के रूप में परिणत हो गया था. बौद्ध धर्म की तरह यहां जैन धर्म से संबंधित कलाकृतियां भी मिलती हैं.
राजधानी से 6 किलोमीटर दूर उदयगिरि तथा खंडगिरि की गुफाओं में जैन राजा खारवेल की बनवाई कलाकृतियां मिली हैं जोकि काफी अच्छी हालत में है.
राजारानी मंदिर की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियां बनी हुई हैं. ये कलाकृतियां खजुराहो मंदिर की कलाकृतियों की याद दिलाती हैं. राजारानी मंदिर से थोड़ा आगे जाने पर ब्रह्मेश्वर मंदिर स्थित है. इस मंदिर की दीवारों पर अद्भुत नक्काशी की गई है. इन में से कुछ कलाकृतियों में स्त्रीपुरुष को कामकला की विभिन्न मुद्राओं में दर्शाया गया है. राजारानी मंदिर से 100 गज की दूरी पर मुक्तेश्वर मंदिर समूह है.
भुवनेश्वर में कई मशहूर मंदिर हैं जिन को देखने से मूर्तिकारों की कुशलता का पता चलता है. इस मंदिर की दीवारों पर खजुराहो के मंदिरों जैसी मूर्तियां उकेरी गई हैं. इसी मंदिर के भोग मंडप की बाहरी दीवार पर मनुष्य और जानवर को सैक्स करते हुए दिखाया गया है. भुवनेश्वर का राज्य संग्रहालय देखने योग्य है. यह संग्रहालय जयदेव मार्ग पर स्थित है. भुवनेश्वर के आसपास देखने योग्य स्थलों में हीरापुर है जो 15 किलोमीटर दूर बसा एक गांव है. इसी गांव में भारत का सब से छोटा योगिनी मंदिर चौसठ योगिनी है. इस मंदिर में 64 योगिनियों की मूर्तियां बनाई गई हैं. धौली भुवनेश्वर के दक्षिण में राजमार्ग संख्या 203 पर स्थित है.
यह वही स्थान है जहां अशोक कलिंग युद्ध के बाद पश्चात्ताप की अग्नि में जला था. इसी के बाद उस ने बौद्ध धर्म अंगीकार कर लिया और जीवनभर अहिंसा के संदेश का प्रचारप्रसार किया. अशोक के प्रसिद्ध पत्थर स्तंभों और शांति स्तूप भी घूमने लायक हैं जोकि धौली पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है.
खाने के लिए मशहूर
भुवनेश्वर में ओडिशा और बंगाली भोजन को लगभग एकसमान माना जाता है लेकिन स्वाद के मामले में एकदूसरे से बहुत भिन्न. चावल ओडिशा का प्रमुख भोजन है. पखाभात यहां की लोकप्रिय डिश है. यह भोजन एक दिन पहले के चावल को आलू के साथ तल कर बनाया जाता है. इस के साथ आम, आलू भरता, बड़ी चूरा पोईसाग खाया जाता है. ओडिशा की छतु तरकारी एक तीखा भोजन है जो मशरूम से बनता है.
यहां हर खाने में पंचफ ोरन मिलाने का रिवाज है. यह एक खास तरह का मसाला होता है जिसे हर भोजन में मिला दिया जाता है. इसे भोजन में मिलाने से खाना स्वादिष्ठ हो जाता है. इस के अलावा यहां का तड़का, डालमा, पीठा तथा नारियल के तेल में बनी पूड़ी भी लोग खाते है. महूराली-चड़चड़ी एक प्रकार की मछली डिश है जो छोटी मछली से बनती है.
चिंगुडि भी एक प्रकार की डिश है जो चिलका झील में पाई जाने वाली झींगा मछली से बनी होती है. यह भोजन तरकारी की तरह बनाया जाता है. इसी प्रकार का एक अन्य भोजन माछभजा है जो मीठे पानी में पाई जाने वाली रोहू मछली से बना होता है.
मिठाइयों में छेनापोड और छेनागजा मिलती हैं. यहां का दहीबड़ा भी काफी प्रसिद्ध है जोकि इमली की चटनी के साथ परोसा जाता है.
पुरी
पुरी ओडिशा प्रांत का एक जिला है. यहां लहरों का भरपूर आनंद लिया जा सकता है. 65 मीटर ऊंचा जगन्नाथ मंदिर पुरी के सब से शानदार स्मारकों में से एक है. पुरी से 8 किलोमीटर दूर नुआनई नदी के मुहाने पर बालीघई बीच प्रसिद्ध पिकनिकस्पौट है, यह चारों ओर से कौसरीना के पेड़ों से घिरा है. पुरी में समुद्रतट का मजा भी लिया जा सकता है.
कोणार्क
कोणार्क ओडिशा प्रदेश के पुरी जिले में पुरी के जगन्नाथ मंदिर से 21 मील उत्तरपूर्व में समुद्रतट पर चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित है. यहां का सूर्य मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. इस मंदिर की कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गई है. मंदिर के भीतर एक नृत्यशाला और एक हौल है.
कई नक्काशियां, विशेषकर मुख्य प्रवेशद्वार पर पत्थरों से निर्मित हाथियों को मारते 2 बड़े सिंह दिखते हैं. प्रत्येक मूर्ति बनाने में हाथ के कौशल और दिमाग की चतुराई का इस्तेमाल किया गया है.
सूर्यदेव की 3 सिरों वाली आकृति इस बात का उदाहरण है कि सूर्यदेव के तीनों सिर विभिन्न दिशाओं में हैं जो सूर्योदय, उस के चमकने और सूर्यास्त का आभास देते हैं. इस मूर्ति के बदलते भावों को देखना चाहिए. सुबह के समय की स्फूर्ति और सायंकाल होतेहोते दिखने वाली थकान के भाव देखने योग्य हैं.
मंदिर परिसर के दक्षिणपूर्वी कोने में सूर्यदेव की पत्नी माया देवी को समर्पित एक मंदिर है. यहां नवग्रहों वाला मतलब सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, जुपीटर, शुक्र, शनि, राहू और केतु को समर्पित मंदिर भी है. यहां मंदिर के समीपवर्ती समुद्रतट पर आराम किया या घूमा जा सकता है.