मैकलॉडगंज धौलाधार पहाड़ियों से घिरा हिमाचल प्रदेश का पॉपुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन है. यहां बड़ी संख्या में तिब्बती माइग्रेंट्स बसे हैं, जिनके कल्चर की झलक पूरे शहर में नजर आती है. ज्यादातर टूरिस्ट बौद्ध कल्चर और रिलीजन को जानने के लिए मैकलॉडगंज आते हैं. यहां तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का घर है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं. यहां यूनीक स्टाइल के कैफे और रेस्टोरेंट्स हैं, जहां थाई, चाइनीज, तिब्बतियन, इटालियन, जैपनीज और कॉन्टिनेंटल फूड अवेलेबल है.
हनुमान जी का टिब्बा
मैकलॉडगंज के धौलधार पर्वत शृंखला की सबसे ऊंची चोटी है हनुमान जी का टिब्बा. ये चोटी चारों ओर से ग्लेशियर से घिरी है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, संजीवनी बूटी लाते समय हनुमान इसी चोटी पर रुके थे, जिस कारण इसका नाम हनुमान जी का टिब्बा पड़ा. बताया जाता है कि इसकी चोटी तक पहुंचना किसी खतरे से खाली नहीं है. यहां हजारों लोग हर साल ट्रैकिंग के लिए आते हैं. ठंड और खतरनाक रास्तों का सामना करते हुए कई लोगों की यहां मौत भी हो चुकी है. हालांकि, ट्रैकिंग के नियमों को फॉलो कर ऐसे हादसों से बचा जा सकता है .
बिर बिलिंग
जमीन से 2400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है बिर बिलिंग. 17 वीं सदी में इस जगह के अस्तित्व में आने के प्रमाण मिलते हैं, समय- समय पर यहां कई राजाओं ने शासन किया है. लेकिन अब ये जगह एशिया की बेस्ट पैराग्लाइडिंग प्लेस कहलाती है. ये जगह जंगल कैपिंग और पैराग्लाइडिंग के लिए मशहूर है. यहां अक्सर पैराग्लाइडिंग टूर्नामेंट्स होते हैं, जिसमें दुनिया भर के लोग शामिल होते हैं.
त्रिउंड हिल ट्रैकिंग
त्रिउंड ट्रैक गालू मंदिर से शुरू होता है. यहां पहुंचने के लिए आप मैकलॉडगंज से टैक्सी या ऑटो रिक्शा के जरिए धरमकोट (3 किमी) पहुंचना होगा. धरमकोट से गालू मंदिर एक किलोमीटर का रास्ता है. गालू मंदिर से त्रिउंड की दूरी 6 किलोमीटर है. इसके अलावा भागसू नाथ से भी छोटे ट्रैक के जरिए गालू मंदिर पहुंचा जा सकता है.
आप चाहें तो त्रिउंड पहुंचकर हिमाचल टूरिज्म के फॉरेस्ट गेस्ट हाउस या कैम्प में रुक सकते हैं. दूसरे दिन लाहेश गुफा के लिए 5 घंटे का ट्रैक किया जा सकता है. त्रिउंड से ही लाका ग्लेशियर का भी ट्रैक किया जा सकता है.
सेंट जॉर्ज चर्च
समुद्र तल से 5600 फुट की ऊंचाई पर बसा ये चर्च 1852 में बनाया गया था. 1905 में भूकंप से हुई भारी तबाही के बावजूद यह आज भी सही हालत में है. चर्च के नजदीक ही वायसराय लॉर्ड इलगिन जेम्स ब्रूस का स्मारक भी बना है. चर्च में विंडो ग्लास पेंटिंग लगाई गई है, जिसे इटालियन आर्टिस्ट ने बनाया था. मैकलॉडगंज बस स्टेशन से 20 मिनट वॉक करके यहां पहुंचा जा सकता है. यह सिर्फ रविवार को ही प्रार्थना के समय (सुबह 10 -12) ही खोला जाता है. हालांकि, टूरिस्ट बाहर से चर्च आर्किटेक्चर को देख सकते हैं.
नामग्याल मोनेस्ट्री
यहां 14वें दलाई लामा के घर के अलावा मॉनेस्ट्री और तांत्रिक कॉलेज है. 1959 में चीन के तिब्बत पर कब्जा करने के बाद लामा समेत हजारों तिब्बती भारत आ गए थे. इनमें 55 भिक्षु भी शामिल थे, जो तिब्बत की पवित्र जगह नामग्याल मॉनेस्ट्री से थे. दलाई लामा को भारत में राजनीतिक शरण मिलने के बाद इन्हीं भिक्षुओं ने मैकलॉडगंज में नामग्याल मोनेस्ट्री की स्थापना की. बीते 50 सालों से यहां बड़ी संख्या में तिब्बती माइग्रेंट्स रह रहे हैं, जिस कारण इसे अब ‘लिटिल ल्हासा’ कहा जाने लगा है.
भागसूनाग मंदिर और फॉल
शिव का यह प्राचीन मंदिर मैक्लॉडगंज से करीब तीन किलोमीटर ऊपर है. राजा भागसू ने नाग देवता को मनाने के लिए यह मंदिर बनवाया था. कहा जाता है कि राजा ने पवित्र नाग झील से पानी चुरा लिया था, जिसके बाद नाग देवता नाराज हो गए थे. बाद भागसू ने नाग देवता से क्षमा मांगने के लिए इसे बनवाया. यह सुबह 5 से दोपहर 12 और शाम 4 से रात 9 बजे तक खुलता है
नौरोजी एंड संस
ये हिमाचल प्रदेश की सबसे पुरानी दुकान है. पारसी फैमिली नौरोजी इसे ब्रिटिश टाइम में खोला था. अब इसे दलाई लामा के दोस्त नौजेर नौरोजी इसे चलाते हैं. ब्रिटिश टाइम में यहां बेकरी आइटम, टोबैको, शराब और हथियार तक बेचे जाते थे. लेकिन अब यहां सिर्फ न्यूजपेपर, मैगजीन और कन्फेक्शनरी आइटम बेचे जाते हैं. 156 साल पहले शुरू हुई इस दुकान में आज चल रही है. यहां का इन्फ्रास्टक्चर लकड़ी से बना है.
धर्मशाला स्टेडियम
धौलाधार पहाड़ियों से घिरा ये शानदार स्टेडियम धर्मशाला से है. ये कांगड़ा के गागल एयरपोर्ट से 12 किलोमीटर दूर है. स्टेडियम 2003 में बनकर तैयार हो गया था, जबकि यहां पर पहला वनडे इंटरनेशनल मुकाबला 2013 में खेला गया. यह भारत का इकलौता स्टेडियम है, जहां रेग्रास का यूज किया जाता है. इसकी खासियत है कि ये -10 डिग्री सेल्सियस में भी खराब नहीं होती.
कैसे पहुंचे
By Air: मैकलॉडगंज से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गग्गल है, जो 19 किलोमीटर दूर है. इसके अलावा कुल्लू का भुंतर एयरपोर्ट करीब 200 किलोमीटर दूर है. दिल्ली से इन दोनों एयरपोर्ट के लिए सीधी फ्लाइट्स हैं.
By Train: मैकलॉडगंज में कोई रेलवे स्टेशन नहीं हैं, हालाँकि नजदीकी स्टेशन कांगड़ा और नगरौटा है जो छोटी लाइन पर है. इन स्टेशन्स के लिए पठानकोट से हर रोज सुबह 10 बजे ट्रेन चलती है. कांगड़ा रेलवे स्टेशन से मैकलॉडगंज की दूरी करीब 30 किमी है.
By Road: दिल्ली आईएसबीटी और हिमाचल भवन से हिमाचल टूरिज्म, हरियाणा रोडवेज, पंजाब रोडवेज और हिमाचल रोडवेज की फ्रीक्वेंट बस सर्विस है. इसके अलावा चंडीगढ़, जालंधर और अंबाला से भी यहां के लिए सीधी बस सर्विस अवेलेबल है.