किसी नौकरी के लिए दिए जाने वाले इंटरव्यू में जब एंप्लौयर जौब चाहने वाले से पूछता है कि सैलरी को ले कर आप की क्या रिक्वायरमैंट है, तो यह पल ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए बहुत तनावपूर्ण होता है. लेकिन याद रखिए कामयाबी के लिहाज से यह बहुत महत्त्वपूर्ण पल होता है, क्योंकि आप की सैलरी एक तो आप कितने काम के हैं यह बताती है, साथ ही यह भी इशारा करती है कि आप भविष्य में कहां तक जा सकते हैं. यही वजह है कि कोई और चाहे आप खुद भी अपनेआप से यही उम्मीद करते हैं कि इंटरव्यू के दौरान सैलरी पर डिस्कशन को अच्छे से हैंडल करें. मगर सवाल है कैसे करें? कौर्पोरेट जगत में इस संबंध में कई ऐसे सटीक फौर्मूले हैं जिन से आप बेहतर स्थिति में रह सकते हैं, आइए इन्हें जानें.
1. आत्मविश्वास से रहें भरपूर
इंटरव्यू भी एक किस्म की जंग ही होती है. इसलिए जंग के बेसिक नियम इस पर भी लागू होते हैं जिस में से पहला यह है कि
जब भी आप अपनी सैलरी की बात करें आत्मविश्वास से भरपूर दिखें. आप की जबान स्पष्ट हो. हावभाव में सकारात्मकता टपक रही हो. सामने वाले को लगे कि आप इस से कम में शायद काम न करें. इसलिए वह आकर्षक फिगर खुद ही अपनी तरफ से कोट कर दे.
यह सब तभी संभव है जब आप वाकई आत्मविश्वास से भरपूर दिखेंगे. अगर आप की जबान मिमियाती हुई होगी, कंधे ढुलके होंगे और आंखों से चमक गायब होगी तो आप को आप की पसंद की सैलरी भला कौन देगा.
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2. घर से होमवर्क कर के जाएं
जब फाइनल इंटरव्यू के लिए जा रहे हों तो सैलरी कितनी मांगनी है और क्यों मांगनी है, इन दोनों सवालों की तैयारी कर के जाएं. क्योंकि मान कर चलिए कि फाइनल इंटरव्यू के दौरान इन सवालों से टकराना ही पड़ेगा भले चाहे नौकरी मिले या न मिले.
रिसर्च से मतलब यह है कि जिस जौब के लिए अप्लाई किया है, उस के लिए इंडस्ट्री में कितनी सैलरी दी जा रही है इस का आप के पास एक ठोस आकलन हो. चाहे तो कुछ दोस्तों व परिजनों की मदद ले सकते हैं. अगर ऐसी मदद देने वाला कोई संपर्क में न हो तो इन दिनों तमाम वैबसाइटें यह काम करती हैं. उन की भी मदद ले सकते हैं. इन वैबसाइटों में कुछ चुनिंदा कंपनियों का सैलरी चार्ट होता है. सैलरी डौट कौम, पेस्केल डौट कौम ऐसी ही कुछ वैबसाइटें हैं. वास्तव में वेतन संबंधी आप की कोई मांग तभी विश्वसनीय लगती है जब वह मार्केट के अनुरूप हो.
3. लचीले भी रहें
यह तो तय है कि अपनी सैलरी के लिए आप के पास एक न्यूनतम सीमा होनी चाहिए. एक फिगर होनी चाहिए जिस के नीचे आप न जाएं. लेकिन सैलरी के मामले में कोट की गई पहली ही फिगर को पत्थर की इमारत न बनाएं. थोड़े लचीले तो रहें ही. इसलिए जो पहला अमाउंट कोट करें उसे अपनी वास्तविक उम्मीद से थोड़ा ज्यादा करें. क्योंकि यह आम मनोविज्ञान है कि आप की पहली डिमांड पर एम्प्लौयर राजी नहीं होता. इसलिए मन में तय रखें कि इस सैलरी में आप कंफर्टेबल रह सकते हैं.
4. जल्दबाजी न करें
यह तो तय है कि फाइनल इंटरव्यू में कहीं न कहीं सैलरी डिस्कशन होना ही है. लेकिन इस का मतलब यह नहीं है कि आप इंटरव्यू शुरू होते ही असल मुद्दे पर आ जाएं. यहीं नहीं, अगर एम्प्लौयर भी शुरूआत में ही सैलरी का मुद्दा ले आए तो कोशिश करिए कि थोड़ी देर तक टालें. इस के लिए पहले एक ठोस माहौल बना लीजिए. यह भी कोशिश करें कि सैलरी टौपिक को खुद ही न छेड़ें. पहले इंटरव्यूअर से अपने काम और जिम्मेदारी की ठोस जानकारी पाने की कोशिश करें. अपनी पोजीशन को भी स्पष्ट कर लें. लेकिन इन जानकारियों का मतलब यह भी नहीं है कि एम्प्लौयर का इंटरव्यू ही लेने लगें.
5. प्राथमिकता स्पष्ट हो
किसी और से नहीं बल्कि खुद से इंटरव्यू में जाने से पहले एक बार एक सवाल करें कि आप की प्राथमिकता ज्यादा सैलरी होनी चाहिए या ज्यादा बेहतर ओहदा. कुछ लोग पोजीशन और काम करने के माहौल को तरजीह देते हैं तो कुछ लोग सैलरी को. आप को अपनी प्राथमिकता खुद तय करनी है.
6. भूल कर भी यह बातें न करें
अगर सैलरी नैगोसिएशन में कुछ बातें आप की पोजीशन को बेहतर करती हैं तो कुछ बिगाड़ती हैं, विशेषकर एम्प्लौयर से सहानुभूति या दया की चाह. इसलिए जिस तरह सैलरी डिस्कशन के समय जहां कुछ बातें कहनी जरूरी होती हैं, वहीं कुछ बातें न कहनी भी जरूरी होती हैं, मसलन-
7. मम्मीपापा बीमार रहते हैं
याद रखिए आप के मम्मीपापा, आप के एम्प्लौयर के मम्मीपापा नहीं हैं, इसलिए उन की बीमारी से उन्हें कोई सहानुभूति नहीं हो सकती. तो, सैलरी ज्यादा मांगने की कभी यह वजह न गिनाना वरना ज्यादा तो छोडि़ए आप को ड्रौप भी किया जा सकता है कि यह श्रवण कुमार तो अपने मम्मीपापा में ही उल झा रहेगा.
8. मेरी शादी होने वाली है
तो एम्प्लौयर क्या करे? इस बात को गांठ बांध लीजिए कि आप के परेशान होने से किसी को कुछ फर्क नहीं पड़ता. उलटे अगर आप परेशान फैलो लगेंगे तो आप को नौकरी देने के बारे में ही कई बार सोचा जाएगा. इसलिए सैलरी डिस्कशन के दौरान पर्सनल परेशानियां न सुनाएं, उन से किसी को लेनादेना नहीं है. आप की दुखभरी कहानी सुन कर इंटरव्यू लेने वाले का दिल पसीज जाएगा, ऐसे परसैप्शन से जितना बचें उतना बेहतर है. सब से अच्छा है कि इंटरव्यू के दौरान पर्सनल बातें करने से बचें.
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9. बारबार सौरी की जरूरत नहीं
सैलरी डिस्कशन कोई गुनाह नहीं है, इसलिए इस में सौरी शब्द को कतई बीच में न लाएं. आप अपने पैसों के बारे में बात कर रहे हैं और यह आप का अधिकार है.
10. ये बातें भी नहीं
कभी भी इंटरव्यूअर से यह न कहिए कि मेरे पास ज्यादा सैलरी का दूसरा औफर भी है. एक पल में गच्चा खा सकते हैं. अरे, जब है तो यहां क्यों मगजमारी कर रहे हो? ऐसे झूठे दावों से सामने वाले को गुस्सा भी आ सकता है. वह मन बना रहा हो तो भी मना कर सकता है. यह भी किसी से मत कहिए कि बहुत दिनों से मु झे सैलरी हाइक नहीं मिली. नहीं मिली तो कहीं ऐसा तो नहीं कि आप इस के लायक ही न हों? याद रखिए, एम्प्लौयर इस तरह से भी सोच सकता है.