7 Tips: कहीं यह वजह इमोशनल Immaturity तो नहीं

रिश्ता कोई भी हो, जब तक उसमें इमोशनली मेच्योरिटी नहीं होगी तब तक रिश्ते का लम्बे समय तक टिक पाना मुश्किल होता है. ऐसे कई रिश्ते होते हैं, जो कुछ महीने में ही खत्म हो जाते हैं. रिश्ते में इमोशनली मेच्योरिटी काफी महत्व रखती है, जो बाद में घर बसाने के साथ प्रतिबद्धता को अच्छे से समझ सके. रिश्ते का आधार विश्वास होता है इस बारे में आपने सुना ही होगा. लेकिन रिश्ते में जो सबसे महत्वपूर्ण बात होती है, उसे हम सब अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं और वो है इमोशनली मेच्योरिटी. जो लम्बे और मजबूत रिश्ते के लिए बेहद जरूरी है. अगर आपको भी लगता है कि आपके और आपके पार्टनर के बीच में इमोशनली मेच्योरिटी नहीं है तो ये लेख आपके बहुत काम आने वाला है.

1. कहीं आपको भी तो नहीं होती जलन-

जब भी आपका पार्टनर किसी हॉट लड़की या लड़के से बात करता है तो आपके मन में जलन होना जायज है. लेकिन असल मायनों में जलन की भावना तब पनपती है, जब आपका पार्टनर आपसे ज्यादा दूसरों को प्राथमिकता देता है और आपसे ज्यादा अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ समय बिताता है.

2. अगर मतभेद ज्यादा है-

हर पार्टनर में लड़ाई झगड़े होने आम बात है. हर रिश्ते में कभी न कभी उतार चढ़ाव आता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप आपसी मतभेद को पनपने दें. अगर आपका पार्टनर अपनी गलती के लिए आपसे माफ़ी मांगता है तो सब कुछ भुलाकर आगे बढ़ें और गिले शिकवे भुला दें. अगर आप मतभेद रखेंगे तो इससे आपका रिश्ता बर्बाद हो जाएगा.

3. अगर नहीं मांगते माफ़ी

अगर आपको अपनी गलती का एहसास नहीं है और आप माफ़ी भी नहीं मांगना चाहतीं तो ये रिश्ते में सबसे बड़ी इमोशनली इमेच्योरिटी होती है. अगर आपको लगता है कि माफ़ी ना मांगने से रिश्ता मजबूत होगा तो आप गलत हैं. इससे रिश्ता खराब होगा.

4. अगर नहीं है पेशेंस-

रिश्ता कोई भी हो उसमें पेशेंस यानि की धैर्य बनाए रखने की भी जरूरत होती है. अपने रिश्ते की हर छोटी बात पर बेचैन होना इस बात को दर्शाता है कि, आप उस रिश्ते के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं हैं. आप इस बात का ख्याल रखें कि जितना आप चीजों को लेकर पेशेंस रखेंगी आपका रिश्ता उतना ही अच्छा रहेगा. क्योंकि हर रिश्ते को समझने और उसे निभाने के लिए खुद को तैयार रखने में समय लगता है.

5. पार्टनर को करें बदलने की कोशिश-

अपने पार्टनर की पर्सनैलिटी को बदलना आसान नहीं है और ये मेच्योरिटी भी नहीं है. क्योंकि उनकी इसी पर्सनैलिटी की वजह से ही आप उनके साथ रिश्ते में बंधे हैं. आप बात करने का तरीका जरुर बदल सकते हैं. लेकिन उन्हें बदलने की कोशिश न करें.

6. अगर आप सेल्फिश हैं-

आप जब भी किसी से प्यार के रिश्ते में बंधते हैं जो आप अपने पार्टनर की जरूरतों को लेकर कभी कोई ओब्जेक्शन नहीं करते. लेकिन रिश्ते में अपरिपक्वता तब दिखती है जब आप उनकी जरूरतों से पहले खुद की जरूरतों को ऊपर रखते हैं. आप सेल्फिश होने से पीछे नहीं हटते. आप का रिश्ता इस मुकाम में आकर खराब हो सकता है. बेहतर होगा कि, आप अपनी जरूरतों से पहले उनके बारे में भी सोचें.

7. अगर नहीं करते भविष्य की बात-

आपका रिश्ता कैसा चल रह है, सिर्फ इतना ही काफी नहीं है. आपका रिश्ता किस तरफ जा रहा है आपको इसका अंदाजा भी होना चाहिए. जब आप ही अपने रिश्ते को लेकर गम्भीर नहीं होंगे तो आपके पार्टनर से भी गम्भीर होने की उम्मीद ना करें. ऐसे में आपको अपने भावनात्मक अपरिपक्व बिहेवियर पर कंट्रोल करने की जरूरत है.

अगर आप भी अपने रिश्ते में कुछ ऐसे संकेतों को देखते हैं तो आपके रिश्ते में बिलकुल भी इमोशनली मेच्योरिटी नहीं है. आप कोशिश करें कि इसे कम करें, क्योंकि इमोशनल मेच्योरिटी किसी भी रिश्ते का आधार होती है.

और वे जुदा हो गए

माइक्रोसौफ्ट के कोफाउंडर और दुनिया की सब से अमीर शख्सियतों में शुमार बिल गेट्स ने हाल ही में अपनी पत्नी मेलिंडा गेट्स से अलग होने का फैसला ले कर सब को अचरज में डाल दिया. अपनी शादी के करीब 27 सालों के बाद अलग होने के फैसले की जानकारी ट्विटर पर देते हुए उन्होंने एक बयान जारी किया.

उन्होंने लिखा, ‘‘काफी सोचनेसम झने और अपने रिश्ते पर काम करने के बाद हम ने अपनी शादी को खत्म करने का फैसला लिया है. हम नया जीवन शुरू करने जा रहे हैं इसलिए लोगों से हमारे परिवार के लिए स्पेस और प्राइवेसी बनाए रखने की उम्मीद है.’’

जीवन के करीब 3 दशक साथ निभाने के बाद कपल द्वारा लिए गए इस फैसले ने कई लोगों को चौंका दिया है. बिल और मेलिंडा को हमेशा एक सौलिड कपल के रूप में देखा जाता था. उन की शादीशुदा जिंदगी से कितने ही जोड़े प्रेरणा लिया करते थे. उन की खूबसूरत शादीशुदा जिंदगी के सफर में ऐसा मोड़ भी आएगा यह कल्पना किसी ने भी नहीं की थी.

नंबर वन का खिताब

28 अक्तूबर, 1955 में सिएटल में जन्मे बिल गेट्स का पूरा नाम विलियम हेनरी गेट्स है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान पौल जी. एलन के साथ दोस्ती हुई और दोनों के विचारों ने ‘माइक्रोसौफ्ट’ को जन्म दिया. 1990 के दशक में ‘माइक्रोसौफ्ट’ ने दुनियाभर में पीसी इंडस्ट्री में नंबर वन का खिताब हासिल किया.

1987 में काम के सिलसिले में बिल गेट्स और मेलिंडा पहली बार मिले. उस वक्त मेलिंडा के बहुत से बौयफ्रैंड थे. एक दिन अचानक ही मजाक में बिल ने मिरांडा को ‘आई लव यू’ कह दिया. धीरेधीरे नजदीकियां बढ़ती गई. आखिर 1994 में दोनों ने शादी कर ली. उस वक्त बिल 38 साल के थे और मेलिंडा की उम्र 29 साल की. उन के 3 बच्चे हुए. 1996 में बेटी जेनिफर, 1999 में बेटा रोरी और 2002 में बेटी फोएब का जन्म हुआ. बेटे को जन्म देने के 9 साल बाद मेलिंडा ने माइक्रोसौफ्ट में काम करना बंद कर दिया था.

प्रोफैशनल और मैरिड लाइफ के साथसाथ बिल गेट्स और मेलिंडा ने समाज के लिए भी बहुत कुछ किया. लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास में अपना योगदान देने के लिए 1994 में दोनों ने मिल कर ‘बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ की स्थापना की. जून, 2008 में गेट्स माइक्रोसौफ्ट से अलग हो गए और पूरा वक्त इस फाउंडेशन को देने लगे. कोरोनाकाल में भी उन्होंने समाज के लिए काफी कुछ किया.

सबसे अमीर शख्स

बिल गेट्स पूर्व में दुनिया के सब से अमीर शख्स रह चुके हैं और उन की संपत्ति 124 अरब डौलर यानी करीब 10.87 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक होने का अनुमान है. डेढ़ एकड़ के उन के बंगले में 7 बैडरूम, जिम, स्विमिंग पूल, थिएटर आदि हैं.

कुछ महीने पहले जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार बिल गेट्स की हर सैकंड की कमाई  12 हजार, 54 रुपए है यानी 1 दिन की कमाई 102 करोड़ रुपए है. इस के अनुसार अगर वे रोज साढ़े 6 करोड़ रुपए खर्च करें तो पूरे रुपए खर्च करने में उन्हें 218 साल लग जाएंगे.

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फिलहाल मेलिंडा की दौलत तलाक के बाद 2 अरब डौलर से ज्यादा बढ़ गई है. मेलिंडा गेट्स अभी तक बिल गेट्स के साथ कंबाइंड नैटवर्थ में अरबपति थीं, लेकिन अब अकेले उन के पास 2 अरब डौलर से ज्यादा की संपत्ति है. बिल गेट्स द्वारा क्रिएट की गई कंपनी ‘कैस्केड इन्वैस्टमैंट’ ने मैक्सिको की सब से बड़ी कंपनियों में से 2 में, शेयरों को मैलिंडा को ट्रांसफर किया है.

हालांकि अब तक दोनों ने स्पष्ट तौर पर तलाक की वजहों को उजागर नहीं किया है. मगर खबरों के मुताबिक बिल गेट्स की ऐक्स गर्लफ्रैंड उन की पत्नी मेलिंडा के साथ तलाक की मुख्य वजह बताई जा रही है. ऐसा माना जा रहा है कि बिल गेट्स ने अपनी ऐक्स गर्लफ्रैंड की वजह से मेलिंडा से रिश्ता तोड़ा है.

कब आया सुर्खियों में

बिल गेट्स ने ऐक्स गर्लफ्रैंड एन विनब्लैड को ले कर काफी पहले ही मेलिंडा से एक सम झौता किया था, जिस के मुताबिक उन्हें हर साल अपनी ऐक्स गर्लफ्रैंड एन विनब्लैड के साथ एक वीकैंड मनाने की मंजूरी मिली हुई थी. यही नहीं मेलिंडा से शादी करने से पहले बिल गेट्स ने दोनों से इस की इजाजत ली थी.

इस का जिक्र बिल गेट्स ने 1997 में  टाइम मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में किया था. अलगअलग शहर में रहने की वजह से बिल  और विनब्लैड की मुलाकात वर्चुअल हुआ  करती थी. वे दोनों वर्चुअल डेट भी अरैंज किया करते थे.

कुछ ऐसा ही एक और हाई प्रोफाइल तलाक हाल ही में सुर्खियों में आया था. जनवरी, 2019 में अमेजन के संस्थापक, सीईओ और दुनिया के सब से धनी व्यक्ति जेफ बेजोस और उन की पत्नी मैकेंजी बेजोस ने भी शादी के 25 साल बाद तलाक ले लिया था. कपल ने ट्विटर पर इस की जानकारी दी थी.

54 साल के जेफ बेजोस और उन की पत्नी ने ट्विटर पर लिखा था, ‘‘हम अपने जीवन में होने वाले बदलाव के बारे में लोगों को बताना चाहते हैं. हमारा परिवार और हमारे घनिष्ठ मित्र जानते हैं, एक लंबे ट्रायल के बाद हम ने तलाक का फैसला लिया है. हालांकि हम अपनी जिंदगी में दोस्त बने रहेंगे. हम ने शानदार जिंदगी जी और हम अपने उज्ज्वल भविष्य को ले कर आशान्वित हैं. आगे भी हम एक परिवार और दोस्त की तरह रहेंगे.’’

मैकेंजी बेजोस अमेजन की पहली कर्मचारी थी. जेफ और मैकेंजी की मुलाकात डी.ई शो  में हुई थी. यह मुलाकात अमेजन की स्थापना  से पहले हुई थी. शादी के अगले साल यानी  1994 में जेफ बेजोस ने अमेजन की शुरुआत  की. अमेजन के पहले कौंट्रैक्ट के लिए मैकेंजी ने ही डील की थी.

गैराज से शुरू हुई अमेजन आज दुनिया की टौप 3 कंपनियों में शामिल है. जून, 2018 में जेफ बेजोस के दुनिया के सब से धनी व्यक्ति बनने की खबर आई थी. उस समय उन की संपत्ति 141.9 अरब डौलर थी.

तलाक की वजह

जेफ बेजोस पूर्व टीवी ऐंकर लौरेन सांचेज  के साथ रिश्ते में थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक लौरेन को लिखा गया उन का एक खत इस तलाक की वजह थी, जिस में जेफ ने लिखा था कि मैं तुम  को महसूस करना चाहता हूं, मैं तुम्हें अपनी धड़कन बनाना चाहता हूं. मैं तुम से प्यार करता हूं… इसी के बाद मैकेंजी और बेजोस अलग  हो गए.

बाद में जेफ बेजोस ने पत्नी से सब  से महंगा तलाक लिया. मैकेंजी को 2.52 लाख करोड़ के शेयर मिले. इस प्रक्रिया के पूरा होने  के बाद मैकेंजी विश्व की चौथी सब से  अमीर महिला बन गई. मैकेंजी ने फिर से  विवाह कर लिया और वह अमेजन में  4% हिस्सेदारी (करीब 36 अरब डौलर से अधिक) मिलने के बाद समाजसेवा पर ध्यान केंद्रित कर रही है.

शादी के इतने सालों बाद क्यों होता है तलाक

सोचने वाली बात है कि जो पत्नी 2-3 साल पहले तक बिल गेट्स की पूरी दुनिया थी उसे ही अब खुद से अलग करने का फैसला कितना कठिन रहा होगा. मेलिंडा के लिए भी इतने रईस, हुनरमंद और ख्यातिलब्ध जीवनसाथी जिस के साथ ढाई दशक से ज्यादा समय गुजारा, जीवन की खुशियां और जिम्मेदारियां आपस में बांटीं, उसी से जीवन के आधे रास्ते में अलग हो जाने का फैसला लेना क्या सहज रहा होगा?

वैसे भी शादी के सालों बाद प्रौढ़ावस्था या वृद्धावस्था में तलाक होना ज्यादा दुखद है. शादी के 2-3 साल के अंदर तलाक की बात सम झ आती है. 2 लोग जब आपस में तालमेल नहीं बैठा पाते तो वे अलग होने का फैसला ले लेते हैं. मगर शादी के 25-30 साल बाद तलाक का मतलब है उन के बीच तालमेल अच्छी तरह बैठ चुका था.

इतने सालों में तो इंसान 2 शरीर एक प्राण बन जाते हैं. एकदूसरे की आदत कुछ इस तरह हो जाती है जैसे दिल का सांसों से रिश्ता. आखिर फिर इस उम्र में तलाक होने की क्या वजह हो सकती है?

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दरअसल, व्यक्ति के जीवन में कुछ चीजें सब से ज्यादा अहमियत रखती हैं और वे हैं- पैसा, वफा और सुकून. शादी के कई साल बाद तलाक होने की वजह पैसों की किचकिच तो कतई नहीं हो सकती, क्योंकि जब दुनिया के सब से रईस इंसान और दुनिया के चौथे सब से दौलतमंद इंसान को शादी के 2-3 दशक बाद तलाक की त्रासदी से गुजरना पड़ा तो फिर पैसों का फलसफा तो सिरे से खारिज होता है.

बात तलाक तक पहुंची

जहां तक बात वफा की है तो यह काफी महत्त्वपूर्ण है. बहुत से मामलों में पाया गया है कि शादी के कई साल बाद भी यदि जीवनसाथी को यह पता चलता है कि उस के पति या पत्नी के जीवन में कोई और आ गया है या पहले से मौजूद है तो वह इस बात को स्वीकार नहीं कर पाता. आपसी  झगड़े और मतभेद बढ़ते जाते हैं और फिर बात तलाक तक पहुंच जाती है.

कई दफा इंसान सिर्फ इस वजह से अपने जीवनसाथी से अलग होने का फैसला ले लेता है, क्योंकि उसे वह अहमियत नहीं मिलती जिस की वह अपेक्षा करता है. दरअसल, जब आप सालों किसी के हमदर्द और हमसफर का दायित्व निभाते आ रहे हैं तो आप की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं. आप के बीच कोई परदा नहीं रह जाता.

आप हर काम एकदूसरे की सलाह ले कर ही करना चाहते हैं. मगर जब आप को महसूस होता है कि आप का जीवनसाथी आप को बताए बगैर ही अपने जीवन से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण फैसले ले रहा है या बहुत सी बातें आप से छिपा रहा है तो आप का विश्वास और सुकून दोनों ही खो जाते हैं. अंत में आप तलाक का फैसला ले लेते हैं ताकि खोया हुआ सुकून वापस मिल पाए.

कई बार जीवनसाथी से मिलने वाला छोटा सा आंसू सैलाब बन जाता है. कभी बेवफाई का दर्द तो कभी इतने सालों में भी न पहचान पाने की कसक दिल का सुकून छीन लेती है.

करीब आधी जिंदगी साथ बिताने के बाद हमसफर से उम्मीदें भी अधिक हो जाती हैं. पतिपत्नी का रिश्ता वैसे भी बहुत नाजुक होता है. एकदूसरे के लिए परवाह करने वाले और एकदूसरे पर जान देने को तैयार रहने वाले पतिपत्नी कभीकभी छोटा सा धोखा या छोटा सा अपमान भी नहीं सह पाते और अलग हो जाते हैं.

दर्द देता है तलाक

जब कोई जोड़ा अलग होता है तो लोग इस की वजह जानने में ज्यादा रुचि लेते हैं. लेकिन इस से गुजरने वाले जोड़े को कैसा लगता है इसे कोई नहीं सम झ पाता. सिर्फ इमोशनल ही नहीं, बल्कि तलाक फिजिकली भी लोगों को तोड़ देता है. फैसला लेने की शुरुआत से ले कर इस के अंत तक इतनी चीजें होती हैं कि व्यक्ति खुद को ड्रेन आउट महसूस करता है.

वकील, कोर्ट सैशन, परिवार और ऐक्स के साथ इस मुद्दे पर लगातार चर्चा, चीजों का बंटवारा, कस्टडी बैटल और इस सब के बीच उस साथी को ही अपने अपोजिट खड़ा पाना जो कभी हर स्थिति में आप के साथ खड़ा रहता था. इस सब से ऊपर जीवनसाथी से अलग होने का दुख तो होता ही है. ये तमाम बातें इंसान को गहरी भावनात्मक पीड़ा पहुंचाती हैं.

  बौलीवुड के महंगे तलाक

बौलीवुड में ये कुछ तलाक न सिर्फ चर्चा में रहे, बल्कि महंगे तलाक भी कहलाए:

रितिक रोशन-सुजैन खान

अभिनेता रितिक रोशन और सुजैन खान के अलग होने की खबरों से हरकोई हैरान था. दोनों की शादी 2000 में हुई थी. दोनों के ही अफेयर की खबरें आईं, लेकिन अंत तक कुछ साफ नहीं हो पाया कि दोनों ने तलाक क्यों लिया. सुजैन खान ने ऐलिमनी के रूप में रितिक से 400 करोड़ रुपए मांगे थे. बाद में रितिक ने सुजैन को करीब 380 करोड़ रुपए दिए थे.

सैफ अली खान-अमृता सिंह

अभिनेता सैफ अली खान और अमृता सिंह का तलाक बौलीवुड के सब से महंगे तलाकों में से एक था. दोनों ने 1991 में शादी की थी. उम्र में अमृता सैफ से लगभग 13 साल बड़ी हैं. शादी के लगभग 13 साल बाद दोनों अलग हो गए. सैफ ने अमृता को काफी जायदाद दी थी.

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मलाइका-अरबाज

ऐसा ही कुछ प्यार और दोस्ती भरा रिश्ता कई और सैलिब्रिटीज कपल्स का भी है, जो तलाक के बाद भी एकदूसरे से जुड़े हुए हैं. उदाहरण के लिए मलाइका और अरबाज साथ में अपने बेटे के साथ काफी समय बिताते हैं. इस के अलावा सभी पार्टियों में भी साथ दिखते हैं. तलाक के बाद भी इन के रिश्ते पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. इसी तरह आमिर खान और रीना भी साथ में समय बिताते हुए देखे जा सकते हैं. फरहान अख्तर और अधुना भंबानी 16 साल की शादी के बाद एकदूसरे से अलग हुए थे. दोनों आज भी एकदूसरे की इज्जत करते हैं और कभी एकदूसरे के बारे में बुरा बोलते नहीं सुने गए.

तलाक के बाद जरूरी नहीं कि रिश्ता खत्म हो अकसर ऐसा देखा जाता है कि तलाक के बाद लोग अपने पूर्व जीवनसाथी पर कई तरह के इलजाम लगाते हैं. यहां तक कि सैलिब्रिटीज भी जानेअनजाने अपने ऐक्स के विरुद्ध काफी बयानबाजी कर जाते हैं. वे इस बात को भूल जाते हैं कि उन्होंने जिन के साथ जिंदगी के बहुत सारे खूबसूरत पल शेयर किए हैं उन्हीं को नीचा दिखा रहे हैं. लेकिन रितिक और सुजैन के साथ ऐसा बिलकुल नहीं हुआ था. उन्होंने तलाक तो ले लिया, मगर एक बात जो नहीं बदली वह थी दोनों में दोस्ती और एकदूसरे को सम्मान देने की आदत.

पिछले साल यानी 2020 में लौकडाउन के दौरान सुजैन बच्चों के साथ रितिक के घर रहने चली गई थी. दरअसल, यह फैसला सुजैन को बच्चों के कारण लेना पड़ा था. दोनों के पास बच्चों की जौइंट कस्टडी है. ऐसे में बच्चों को लौकडाउन में मिलाना दोनों के लिए मुश्किल होता. रितिक ने इस के लिए सुजैन को रिक्वैस्ट की थी कि वह बच्चों से इतना दूर नहीं रह सकते हैं. ऐसे में सुजैन रितिक की भावनाओं का सम्मान करते हुए बेटों के साथ उन के घर रहने चली गई.

सौतेले रिश्ते बेकार नहीं होते

मनोज के मन में आक्रोश दिनोंदिन बढ़ता जा रहा था. बीते 10 वर्ष उस ने अपने ननिहाल में बिताए थे. यहां आ कर अपने पिता को सौतेली मां के प्रति स्नेह लुटाते और अपने सौतेले 2 छोटे भाइयों के प्रति दुलार करते देखना उस के लिए बहुत कठिन हो रहा था. वह 16 वर्षीय किशोर है. बीते दिनों नानी के गुजर जाने के बाद वह अपने घर वर्षों बाद लौट कर आया है.

मगर घर पर दूसरी स्त्री और उस के बच्चों का अधिकार उसे बरदाश्त नहीं हुआ. उस के ननिहाल में सभी उसे चेताया करते थे कि उसे अपनी सौतेली मां से संभल कर रहना होगा. बेचारा बिन मां का बच्चा. सौतेली मां तो सौतेली ही रहेगी. यही बातें उस के जेहन में घर कर गईं. नतीजतन उसे अपनी मां की हर बात उलटी लगती, छोटे भाई बिना बात पिट जाते.

एक दिन पिताजी ने उसे पलट कर डपटा तो उस ने अपने पिता के बिस्तरे पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी. तो कोई हताहत नहीं हुआ, मगर सब अवाक रह गए.

40 वर्षीय अविवाहित अलका ने जिस विधुर से विवाह किया उस की पत्नी 4 बच्चों को छोड़ कर कैंसर पीडि़त हो इस दुनिया से चली गई. घर में 10, 12 और 14 वर्षीय पुत्रियों और  5 वर्षीय पुत्र के अतिरिक्त बूढ़े मातापिता भी मौजूद थे. अलका से सभी को बहुत अपेक्षाएं थीं. मगर 2 बड़ी पुत्रियां अपनी सौतेली मां के हर काम में मीनमेख निकालतीं.

अलका को सम झ ही नहीं आता कि उस ने विवाह के लिए हामी क्यों भर दी, सिवा उस पल के जब छोटा बेटा उस की गोद में आ दुबकता.

न पालें पूर्वाग्रह

सौतेली मां पर लिखी कहानियों के सिंड्रेला या राखी जैसे पात्र अकसर हमारे बालमन में अवचेतन रूप से मौजूद रहते हैं. उसे ही चंद रिश्तेदार या पड़ोसी अपनी सलाह दे कर मानो आग में घी का काम कर देते हैं.

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‘अब तो सौतेली मां का राज चलेगा,’ ‘पहली बीवी तो सेवा के लिए, दूसरी मेवा खाने के लिए होती है,’ ‘अब तो पिता भी पराया हो जाएगा’ इस प्रकार की नकारात्मक बातों से अपने मन में कोई पूर्वाग्रह न पालें.

सम झें नए रिश्तों की अहमियत

अपनी मां या पिता की दूसरी शादी की अहमियत को सम झें. इस नए रिश्ते से प्राप्त सुविधाओं पर ध्यान दें. जैसे नई मां के आने से घर की चाकचौबंद व्यवस्था, घर के छोटे बच्चे का उचित पालनपोषण, घर के बुजुर्गों की सेहत का खयाल जैसे कार्य बेहद सुगम रूप से होने लगते हैं. घर की आर्थिक व्यवस्था, सुरक्षा जैसे पहलू नजरअंदाज नहीं किए जा सकते.

संबंध सामान्य बनाने को दें समय

किसी भी रिश्ते को पारस्परिक रूप से मजबूत होने के लिए थोड़ा समय अवश्य लगता है.

यदि हम आपसी गलतफहमी को न पाल कर आपस में खुल कर बात करें. अपनी पसंदनापसंद एकदूसरे को बता दें तो रिश्ते बहुत जल्दी बेहतर बन जाएंगे. रिश्ते बेहतर बनाने के लिए स्वयं भी पहल करें. नए सदस्य से पहल की उम्मीद न करें.

अपने मातापिता के बीच वक्तबेवक्त न बैठें. उन्हें भी साथ बैठ कर बातचीत करने का मौका दें.

बड़ों के नजरिए को सम झें

अपने को बड़ों की जगह पर रख कर सोचें कि यह रिश्ता उन के लिए कितनी अहमियत रखता है. कल को आप भी अपने लक्ष्य के पीछे घर से दूर निकल जाओगे या फिर इसी घर में अपनी गृहस्थी में मग्न हो जाओगे. उस समय आज का निर्णय उचित प्रतीत होगा.

भावुकता से काम न लें

घर में अपनी मां से जुड़ी वस्तुओं को किसी अन्य महिला को इस्तेमाल करते देख या पिता को नए रिश्तों में ढलते देख कर भावुक न हों. यह सोचें कि घर का नया सदस्य अपना पुराना घर छोड़ कर आप के बीच आप सभी की उपस्थिति को स्वीकार कर अपने को ढालने में लगा है तो उसे भी सहज होने का मौका दें.

वर्तमान को स्वीकारें

जो सामने है, वही सच है. मातापिता भी अपने नए रिश्ते को ही अहमियत देंगे, गुजरे वक्त को कौन पकड़ पाया है.

पहले संयुक्त परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने से विधवा, विधुर या आजीवन कुंआरे व्यक्ति की सुखसुविधाओं में कमी नहीं आती थी. वे आराम से अपना जीवनयापन कर लेते थे. उन्हें किसी भी प्रकार की सुविधा जैसे आर्थिक, सामाजिक अथवा समय से भोजन, बीमार होने पर सेवा का लाभ मिल जाता था.

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अब एकल परिवारों के कारण अपनी अधूरी गृहस्थी संभालना जब कठिन हो जाता है तभी व्यक्ति पुनर्विवाह का निर्णय लेता है. ऐसे में बच्चों से भी यह उम्मीद की जाती है कि वे रिश्तों की अहमियत को सम झें और उन्हें मन से स्वीकार करें.

दूरदराज बैठे रिश्तेदार अपनी गृहस्थी छोड़ कर हमेशा के लिए नहीं आ सकते हैं. ऐसी परिस्थितियों में बच्चों को भी सच को स्वीकार कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए.

बच्चों के आपसी झगड़े को कंट्रोल करने के 7 टिप्स

रश्मि अपने बच्चों के परस्पर होने वाले झगड़े से हरदम इतनी परेशान रहती है कि कभी कभी वह गुस्से में कहने लगती है कि उसने दो बच्चे पैदा करके ही जीवन की बहुत बड़ी गल्ती की है. रश्मि ही नही प्रत्येक घर में आजकल अभिभावक बच्चों के रोज रोज होने वाले झगड़ों से परेशान हैं. एक तो वैसे भी कोरोना के कारण सभी स्कूल लंबे समय से बंद हैं ऊपर से लॉक डाउन के कारण बच्चे भी घरों में कैद रहने को मजबूर हैं. वास्तव में देखा जाए तो बच्चों का परस्पर झगड़ना उनके समुचित विकास की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. परन्तु अक्सर घर के कामकाज में उलझी रहने वाली माताएं परेशान होकर अपना भी आपा खो देतीं हैं जिससे समस्या गम्भीर रूप धारण कर लेती है. यहां पर प्रस्तुत हैं कुछ टिप्स जिनका प्रयोग करके आप बच्चों के झगड़े को आराम से निबटा सकतीं हैं-

1-बच्चों के कार्य, व्यवहार और पढ़ाई की बाहरी या घर के ही दूसरे बच्चे से कभी तुलना न करें क्योंकि प्रत्येक बच्चे का अपना पृथक व्यक्तित्व होता है.

2-बच्चे किसी भी उम्र के क्यों न हों आप उनसे उनकी उम्र के अनुसार घर के कार्य अवश्य करवाएं इससे वे व्यस्त भी रहेंगे और कार्य करना भी सीखेंगे.

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3-बच्चा यदि आपसे कुछ कहे तो उसे ध्यान से सुनें फिर समझाएं बीच में टोककर उसे शान्त कराने का प्रयास न करें.

4-टी. वी और खिलौने बच्चों में झगड़े का प्रमुख कारण होते हैं, इसलिए उनके बीच में  खिलौनों का बंटवारा कर दें और टी वी देखने का समय निर्धारित कर दें.

5-वे चाहे जितना भी लड़ें झगड़ें परन्तु आप अपना आपा खोकर हाथ उठाने या चीखने चिल्लाने की गल्ती न करें अन्यथा आपको देखकर वे भी परस्पर वैसा ही व्यवहार करेंगे.

6-किसी अतिथि अथवा दूसरे बच्चों के सामने  अपने बच्चे को डांटने से बचें….बाद में उसे प्यार से समझाने का प्रयास करें.

7-आप स्वयम भी आपसे में न झगड़कर बच्चों के सामने आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करें क्योंकि अनेकों रिसर्च में यह सिद्ध हो चुका है कि बच्चे अपने माता पिता का अनुकरण करते हैं.

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शादी पर भारी कोरोना महामारी

विभा की शादी इस वर्ष अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह में होने वाली थी. यह शादी 6 महीने पहले तय हुई थी. विवाह से संबंधित सारी बुकिंग अग्रिम हो चुकी थी. सभी आवश्यक तैयारियां अंतिम दौर में चल रही थीं कि अचानक विभा के पिता की तबीयत खराब हो गई.

जांच में पता चला कि उन्हें कोरोना हुआ है. अगले 2 ही दिनों में परिवार के 3 अन्य सदस्य भी पौजिटिव हो गए. समधियों से बातचीत कर के विवाह स्थगित करने का निर्णय लिया गया. अब यह विवाह 6 माह बाद या स्थिति सामान्य होने पर होगा. नतीजतन, आननफानन में सभी परिचितों को सूचित करने के साथसाथ सभी अग्रिम बुकिंग भी निरस्त करनी पड़ीं.

यह विभा के परिवार के लिए बहुत परेशानी की घड़ी थी, क्योंकि उन के अग्रिम भुगतान के डूबने के आसार थे. यहां उन्हें राहत इस बात की थी कि यदि अगली तिथि पर इन्हीं व्यवसायियों के साथ बुकिंग यथावत रखी जाती है तो यह सारा अग्रिम भुगतान शादी की अगली तारीख वाली बुकिंग में समायोजित कर लिया जाएगा, लेकिन इस विवाह आयोजन से जुड़े विभिन्न व्यवसायों के लिए यह और भी अधिक मुश्किल घड़ी थी, क्योंकि उन्हें एक पूरी की पूरी बुकिंग का नुकसान हो चुका था. जिस अगली तारीख पर विभा की शादी तय होगी, उस तारीख पर किसी अन्य समारोह की बुकिंग हो सकती थी.

व्यवसायों पर गाज

भारत में अप्रैलमई को शादियों का सीजन माना जाता है. इस के बाद यह सीजन सर्दियों के मौसम में ही आता है. इस वर्ष सीजन में कर्फ्यू लगने और कोरोना की सख्त गाइड लाइन के कारण न केवल शादी करने वाले युवा निराश हुए हैं, बल्कि यह समय अनेक व्यवसायों पर भी गाज बन कर गिरा है. भारत में शादियों के जश्न कईकई दिनों तक चलते हैं. इस के इर्दगिर्द एक लंबीचौड़ी अर्थव्यवस्था काम करती है. लाखों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस अर्थव्यवस्था से जुड़े हुए हैं.

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शादी समारोहों से जुड़े सभी व्यवसाय जैसे घोड़ीबाजा, फूल और सज्जा व्यवसाय, टैंट हाउस, मैरिज पैलेस, होटल, बसटैक्सी आदि सभी इस महामारी का शिकार हुए हैं. सब की अलगअलग परिस्थितियां हो सकती हैं, लेकिन जो सा  झा समस्या है वह यह कि नुकसान सभी को हुआ है. किसी को कम तो किसी को अधिक.

भारत की ‘बिग इंडियन फैट वैडिंग्स’ पूरी दुनिया में मशहूर हैं. एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल लगभग 1 करोड़ शादियां होती हैं और कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो इन पर प्रति शादी 5 लाख से ले कर 5 करोड़ तक का खर्च आता है.

बड़ा झटका

विभिन्न मुद्दों पर दुनियाभर में शोध कराने वाली कंपनी केपीएमजी की 2017 में की गई एक स्टडी के अनुसार, भारत में शादियों का सालाना कारोबार 36 अरब रुपयों का है. अमेरिका के बाद यह दूसरे नंबर पर आता है. ऐसे में यदि इस कारोबार पर कोरोना का साया मंडराएगा तो निश्चित रूप से इस कारोबार से जुड़े व्यवसायियों के लिए एक बड़ा   झटका होगा.

सौरभ का सूरत में इवेंट्स का कारोबार है. वह छोटीमोटी जन्मदिन की पार्टियों से ले कर शादीब्याह तक के बड़े आयोजन कराता है उस के अनुसार, कोरोना काल में उस के व्यवसाय में 25-30% तक का नुकसान हुआ है.

शादीब्याह में घोड़ी उपलब्ध करवाने वाले मुमताज अली से बात करने पर उस ने रोआंसे स्वर में बताया, ‘‘पूरा साल सीजन का इंतजार रहता है. सीजन अच्छा निकल जाए तो सालभर का खर्चा निकल आता है. हमारी मुख्य कमाई तो बरातियों के नाच और दूल्हे के ऊपर दोस्त, रिश्तेदारों द्वारा लुटाए जाने वाले रुपए होते हैं. इस सीजन एक तो बुकिंग ही कम हुई दूसरे शादी में लोगों के कम आने के कारण हमारी कमाई भी सिर्फ बुकिंग के पैसों तक ही सिमट गई. इस बार तो घोड़ी का खर्चा भी लगता है घर से ही करना पड़ेगा.’’

भारी नुकसान

इसी सिलसिले में आशियाना मैरिज पैलेस के संचालक कैलाश तिवारी से फोन पर बात हुई. उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण बहुत सी बुकिंग कैंसिल हो गई हैं. इन में सामान्य बुकिंग भी शामिल हैं. पिछले वर्ष जैसे ही कोरोना का असर कुछ कम होने लगा था तब खूब बुकिंग होने लगी थी. लगा था कि पिछले नुकसान की भरपाई हो जाएगी.

उन्हीं के मद्देनजर हम ने विभिन्न थीम के अनुसार मंडप और अन्य सैट्स आदि पर बहुत इन्वैस्ट कर दिया था. बुकिंग कैंसिल होने के कारण हमें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

स्वर्ण व्यवसायी रमेश सोनी की अपनी अलग पीड़ा है. उन का कहना है कि वैवाहिक जेवर आदि नाममात्र के अग्रिम भुगतान पर और्डर किए जाते हैं. लेकिन हमें तो पूरा सोना खरीदना पड़ता है न. अब यदि शादियां खिसक जाती हैं तो हमें तो डबल नुकसान हुआ न. एक तो हमारा पैसा ब्लौक हो गया दूसरे चाहे सोने के भाव घटें या बढे़ं, हमें तो उसी कीमत पर जेवर देने होंगे, जिस भाव पर बुकिंग हुई थी.

सुनसान हैं वैवाहिक स्थल

शहर का मशहूर वैवाहिक स्थल गंगा महल मैरिज गार्डन इन दिनों सुनसान हैं. पूरे शहर के लिए यह विवाह स्थल इतना उपयुक्त है कि लोग वर्ष भर पहले ही इसे शादी समारोह के लिए बुक करवा लेते हैं. यहां शादी होना शहर में स्टेटस सिंबल माना जाता है.

यहां के संचालक ने अपनी परेशानी सा  झा करते हुए कुछ इस तरह बताया, ‘‘इस सीजन यहां कोई बड़ी बुकिंग नही हुई. कारण, शादी में मेहमानों की सीमित संख्या की कोरोना गाइड लाइन. अब जब कुल जमा 50 से भी कम मेहमान बुलाने हैं तो फिर लोग इतना बड़ा गार्डन क्यों बुक करवाएंगे? दूसरे यह भी कि कोरोनाकाल से पहले शादीब्याह से जुड़े हर बड़े समारोह यथा तिलक, सगाई या संगीत आदि के लिए एक अलग दिन निश्चित होता था और उसी के अनुसार अलगअलग थीम पर अलगअलग दिन समारोह स्थल की साजसज्जा की जाती थी.

‘‘उसी के अनुसार एक विवाह समारोह में इन समारोह स्थलों की बुकिंग भी कम से कम 3-4 दिन के लिए की जाती थी. अब यदि पूरा विवाह समारोह ही एक दिन में समेट दिया जाएगा तो आप सम  झ सकते हैं कि हमारा कितना नुकसान हुआ होगा.’’

ऐसा ही दर्द कई होटल संचालक और टूर्स ऐंड ट्रैवल्स वालों का भी है, जो इस वैवाहिक सीजन में हनीमून के लिए आने वाले जोड़ों का इंतजार कर रहे थे. सीजन के समय इन्हें अतिरिक्त स्टाफ भी रखना पड़ता है और किचन में अतिरिक्त सामान भी.

दिल्ली की मशहूर वैडिंग प्लानर कंपनी ‘राशि एंटरटेनमैंट’ के डाइरैक्टर राजीव के अनुसार, इस व्यवसाय में लगी लगभग 50% कंपनियां बंद हो गई हैं.

कार्ड आदि के प्रिंटिंग से जुड़े ‘शील प्रिंटर्स’ के मालिक योगेंद्र भाटी के अनुसार, पहले जहां शादियों में हजारों की संख्या में कार्ड छपते थे वहीं अब यह संख्या सिमट कर 40-50 पर आ गई है. लोग सिर्फ फौर्मैलिटी के लिए ही कार्ड छपवाते हैं. इस कारण कई छोटे कारोबारियों ने या तो अपनी दुकानें बंद कर दीं या बेच दी हैं.

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आशंका सच साबित हो रही

संयुक्त राष्ट्र के श्रम निकाय, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने गत वर्ष अप्रैल माह में जारी एक रिपोर्ट में यह आशंका जताई थी कि कोरोना वायरस संकट के कारण भारत में अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 40 करोड़ लोग गरीबी के कुचक्रमें फंस सकते हैं. चूंकि शादी व्यवसाय भी ऐसा ही क्षेत्र है जहां अधिकतर लोग अनौपचारिक होते हैं. ऐसे में यह आशंका सच साबित होती दिखाई दे रही है.

शादी समारोहों के आगे खिसकने के कारण लाखों श्रमिकों के सामने परिवार पालने का संकट पैदा हो गया. सरकार का ध्यान इस तरफ भी जाना चाहिए.

सरकार की प्राथमिकता जीवन बचाना है, लेकिन जीविका को बचाना भी तो आवश्यक है. सरकार को कोरोना गाइड लाइन की पालना करते हुए विवाह समारोहों के आयोजनकर्ताओं को आवश्यक छूट देनी चाहिए ताकि इस व्यवसाय पर छाए मंदी के बादल कुछ हट सकें.

तलाक के बाद करने जा रही हैं डेटिंग तो काम आ सकते हैं ये 25 टिप्स

रेखा के तलाक को 1 साल हो गया था. तलाक की इस पीड़ा से वह बड़ी मुश्किल से संभली थी. अब उस ने जीवन में आगे नए रिश्ते में बंधने का फैसला भी कर लिया. एक पार्टी में मिले अपनी जैसी ही स्थिति से गुजरे विकास से दोस्ती होने पर दोनों फर्स्ट डेट पर गए. रेखा ने उसे अपने बुरे अनुभव के बारे में बताते हुए जो पूर्व पति को कोसना शुरू कर किया उसे देख विकास सचेत हो गया. उसे रेखा का फर्स्ट डेट पर इतना नैगेटिव, गुस्सैल स्वभाव अच्छा नहीं लगा. परिणामस्वरूप बात आगे नहीं बढ़ पाई.

एक डेटिंग ऐप के जरिए मिले तलाकशुदा मीनू और राकेश जब फर्स्ट डेट पर गए तो पहली डेट पर ही उन्होंने अपनी रुचियों, दोस्तों के बारे में, एकदूसरे को जानने की इतनी कोशिश की कि दोनों ने मन ही मन तय कर लिया कि इस रिश्ते को आगे बढ़ाया जा सकता है.

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अगर तलाक के बाद किसी को डेट करने के लिए आप इमोशनली तैयार हैं, तो घर से बाहर निकलें, मन न भी हो तो भी बाहर निकलें. नए लोगों से मिलें. आर्ट, डांस, कुकिंग, कौमेडी, टैनिस, गोल्फ, पार्टी, कहीं भी जाएं, अपनी रुचि के अनुसार ही इन जगहों पर आप का नए लोगों से मिलना होगा. जब कोई अपनी रुचि, स्वभाव का मिल जाए तो उस के साथ डेट पर जाते हुए इन बातों का ध्यान अवश्य रखें:

1 छोटी-छोटी हल्की-फुल्की बातें करना शुरू करें. इस से आगे की बातचीत आसान हो जाती है. थोड़ी बहुत आम विषयों पर बात कर के आगे की बातचीत का आधार बन जाता है.

2 बौडी लैंग्वेज बहुत महत्त्वपूर्ण है. मुसकराएं पर स्वाभाविक रूप से. ऐसा कुछ न करें कि उसे लगे कि आप तो फर्स्ट डेट में ही गले पड़ रही हैं और फिर वह कभी आप से मिलना न चाहे.

3 यदि आप हंसमुख स्वभाव की हैं, तो आप के लिए कई हल्की-फुल्की बातें करना आसान होगा. अगर आप को जोक्स सुनाना पसंद है, तो सुनाएं पर अश्लील न हों, सिचुएशन में फिट बैठते हों.

4 सच लगते कौंप्लिमैंट्स दें, जैसे आप की आंखें सुंदर है, आप हंसते हैं, तो बहुत अच्छे लगते हैं.

5 आप की पर्सनैलिटी इंट्रैस्टिंग होनी चाहिए. टीवी से बाहर निकलें, शारीरिक एक्टिविटीज करें, कुछ अच्छी बुक्स पढ़ें ताकि दिमाग के सोए सैल्स जागें और आप के पास रोचक बातें हों. म्यूचुअल टौपिक पर छोटी-छोटी बातें करना शुरू करें जैसे बुक्स, मूवीज, म्यूजिक आदि पर.

6 राजनीति, धर्म और अपने पूर्व पति की बातें करने से बचें. अपने रिश्ते के बिगड़ने पर लंबी बातें बिलकुल न करें.

7 फर्स्ट डेट पर इतनी ही जानकारी दें कि आप का तलाक कब हुआ है, यह फ्रैंडली डिवोर्स था और आप अपने एक्स को आगे के जीवन के लिए शुभकामनाएं देती हूं. बस, इस से आप की डेट को पता चल जाएगा कि आप पिछले रिश्ते से आगे बढ़ चुकी हैं और आप के साथ रिश्ता रखने में उसे कोई ड्रामा देखने को नहीं मिलेगा.

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8 अपनी डेट की किसी बात पर भाषण न दें, ज्यादा सवाल न पूछें. ऐसा महसूस न कराएं कि जैसे आप उस का इंटरव्यू ले रही हों.

9 डौमिनेटिंग न हों, जितना बोल रही हों उतना सुनें भी.

10 आंखें मिला कर बात करें. आप ने दूसरी डेटिंग वैबसाइट्स पर भी कुछ किया हो तो उस की बात न करें.

11 जब तक इमरजैंसी न हो फोन यूज न करें.

12 आप का उद्देश्य एक-दूसरे को जानना होना चाहिए, अगले पति का इंटरव्यू नहीं.

13 यह धारणा न बना लें कि सब पुरुष एक जैसे ही होते हैं. यह न सोचें कि आप का तलाक हुआ है तो आप में ही कोई कमी है. अपना आत्मविश्वास कम न होने दें. तलाक जीवन का दुखद अनुभव होता है, पर प्यार के बारे में सकारात्मक ही सोचें.

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14 डेटिंग से पहले स्वयं को इस रिश्ते के लिए मानसिक रूप से तैयार कर लें. पिछले रिश्ते में हुए दुखद अनुभवों का कारण समझ लें, गुस्से से डेटिंग शुरू न करें. काउंसलिंग सैशंस ले रहा हों तो बीच में न छोड़े ताकि फिर गलत लोगों को न चुन लें. पहले अपनी पसंद की चीजों की लिस्ट बनाएं और फिर उन्हें करना शुरू करें जो आप को खुश रखेंगी.

15 तलाक के बाद डेटिंग आसान नहीं है. अपने आसपास अच्छे लोगों का ग्रुप रखें जो आप को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहे.

16 आगे बढ़ने से पहले 5-6 बार डेट पर जाएं. कैमिस्ट्री समझ आने के बाद बाहरी लुक के अलावा करुणा, विश्वसनीयता, पारदर्शिता, ईमानदारी और इंटैलिजैंस भी देख लें.

17 औनलाइन पोस्ट किए आप के फोटो अच्छे, मुस्कराते हुए हों और सिर्फ आप के ही हों. बच्चों, पालतू जानवरों, दोस्तों के नहीं.

18 मैसेज करना ठीक है पर इतना ही कि पहुंच रही हूं या लेट हो रही हूं. सारी बातचीत मैसेज में ही न हो, क्योंकि इस से इंटिमेसी खत्म हो सकती है. यदि कोई आप को बहुत मैसेज करता हो तो सुझाव दें कि इस के बजाय बात ही कर लें. किसी से बात करना और उस के साथ समय बिताना ही उसे जानने का सर्वोत्तम तरीका है.

19 नए रिश्ते में सैक्स अच्छा लग सकता है पर बहुत जल्दी इस के लिए तैयार न हों, क्योंकि औक्सीटोसिन ऐस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरौन और डोपामाइन अपना प्रभाव दिखा रहे होते हैं. अपनी फर्स्ट डेट पर किसी के साथ सोएं नहीं.

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20 डेटिंग एक प्रक्रिया है. सबकुछ बहुत तेज स्पीड में होने की आशा न रखें. धैर्य और सकारात्मकता से काम लें.

21 चाहे आप को औस्कर या नोबेल प्राइज ही क्यों न मिला हो, डींगे न हांकें. डींगे हांकने में असुरक्षा दिखती है.

22 इस बात से डरें नहीं कि वह आप को रिजैक्ट कर सकता है. सामान्य रहें. अपने स्वाभिमान को आहत न होने दें.

23 चूंकि एक महिला अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेट पर समय बिताने के लिए कई बार दुविधा में रहती है तो उस की डेट पर उसे यह महसूस करवाना चाहिए कि आप उस के साथ सेफ हैं, अपने बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए जैसे कहां काम करती हैं, दोस्त कौन-कौन हैं, खाली समय में क्या करना पसंद करती हैं.

24 फर्स्ट डेट पर ऐसे सवाल पूछ सकते हैं. क्या आप ने किसी और देश की यात्रा अकेले की है? क्या आप का मन करता है कि सब छोड़ कर घूमने निकल जाएं? क्या आपको हौरर मूवीज पसंद हैं? विशेषज्ञों की राय है कि यदि कोई इन 3 सवालों के जवाब वैसे ही देता है जैसे आप देते, तो यह आप का सही मैच हो सकता है.

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25 सुस्ती, देरी डेट के प्रति असम्मान दिखाती है. इसलिए समय पर पहुंचें.

ननद भाभी बन जाएं सहेलियां

ननदभाभी का संबंध बेहद संवेदनशील होता है. कहीं न कहीं दोनों के मन में एकदूसरे के प्रति ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा की भावना रहती है. लेकिन आपसी समझदारी से न केवल आप अपने रिश्ते को प्रगाढ़ बना सकती हैं वरन एकदूसरे की अच्छी सहेलियां भी बन सकती हैं.

मैथिली शादी कर के ससुराल आई, तो सब ने हाथोंहाथ लिया, लेकिन उस की छोटी ननद नैना हर बात में नुक्ताचीनी करती थी. अगर वह अपने पति के लिए कुछ बनाने जाती, तो तुरंत मना कर देती कि रहने दीजिए भाभी आप का बनाया भैया को पसंद नहीं आएगा.

मैथिली बहुत परेशान थी. उसे ननद के व्यवहार से बहुत कोफ्त होती थी. लेकिन चाह कर भी कुछ कह नहीं पाती. यहां तक कि मैथिली जब अपने पति अरुण के साथ अकेले कहीं जाना चाहती, तो भी नैना उस के साथ चलने को तैयार हो जाती.

एक दिन मैथिली ने नैना से कह ही दिया कि लगता है आप के भैया को मेरी जरूरत नहीं है. आप तो हैं ही उन के सारे काम करने के लिए, फिर मैं यहां रह कर क्या करूंगी. मैं अपने मायके चली जाती हूं.

मैथिली की बात सुन कर नैना ने पूरे घर में हंगामा मचा दिया. मैथिली अपने मायके चली गई. फिर बहुत समझाने पर वह इस शर्त पर ससुराल आने को तैयार हुई कि अब नैना उस के और अरुण के बीच न आए.

आमतौर पर जब तक भाई की शादी नहीं होती है घर पर बेटी का एकछत्र राज होता है. मातापिता और भाई उस की हर जायजनाजायज बात मानते हैं. पर जैसे ही भाई की शादी होती है, उस का ध्यान अपनी बीवी की ओर चला जाता है. वह बहन को उतना समय नहीं दे पाता है, जितना पहले देता था. यह बात बहन को बर्दाश्त नहीं हो पाती और वह यह सोच कर कुंठित हो जाती कि अब भाई मेरी नहीं भाभी की बात को ज्यादा अहमियत देता है. यह सोच उसे नईनवेली भाभी का प्रतिद्वंद्वी बना देती है. इस वजह से न चाहते हुए भी ननदभाभी के बीच कटुता आ जाती है.

अगर ननद शादीशुदा हैं तो आमतौर पर उन के संबंध मधुर ही होते हैं, लेकिन अविवाहित ननद और भाभी के बीच संबंधों की डोर को मजबूत होने में समय लगता है. विवाहित ननद भी अगर मायके में ज्यादा दखलंदाजी करती है, तो यह बात ननदभाभी के रिश्ते को सहज नहीं बनने देती.

प्रतियोगी नहीं दोस्त बनें

आप के भाई की शादी हुई है. आप के घर में प्यारी सी भाभी आई है. थोड़ी सी समझदारी से आप उसे अपनी सब से अच्छी सहेली बना सकती हैं. इस के लिए आप को ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है. अपने मन में यह बात बैठाने की है कि वह आप की भाभी है आप की प्रतियोगी नहीं. भाभी तो नईनई आई है. ननद होने के नाते अब यह आप की जिम्मेदारी है कि आप उसे अपने घर के वातावरण से अवगत कराएं, उसे बताएं कि परिवार के सदस्यों को क्या अच्छा लगता है और कौन सी चीज नापसंद है. आप की इस पहल से भाभी के मन में आप के प्रति प्यार और आदर की भावना पनपेगी.

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एक दूसरे से सीखें

आप दोनों अलग परिवार की हैं. आप दोनों की परवरिश भी अलग परिवेश में हुई है. इस नाते आप दोनों के पास एकदूसरे से सीखनेसिखाने के लिए ढेरों चीजें होंगी. मसलन, अगर आप को कोई अच्छी रैसिपी आती है, तो एकदूसरे से सीखेसिखाएं. इस से आप दोनों को फायदा होगा. इसी तरह सिलाईकढ़ाई, होम डैकोरेशन जैसी बहुत सारी चीजें हैं, जो आप एकदूसरे से सीख कर अपनी पर्सनैलिटी को ऐनहांस कर सकती हैं. अगर आप की भाभी का पहननेओढ़ने, बातचीत करने का तरीका अच्छा है, तो उस से जलनेकुढ़ने के बजाय यह गुर सीखने में कोई हरज नहीं है. इस से जब आप ससुराल जाएंगी, तो आप को सब की चेहती बनते देर नहीं लगेगी.

आप को भी जाना है ससुराल

अगर आप किसी की ननद हैं और अविवाहित हैं, तो इस बात का हमेशा खयाल रखें कि आप को भी एक दिन विवाह कर के ससुराल जाना है, इसलिए आप के लिए यही बेहतर होगा कि आप अपने व्यवहार और बातचीत पर नियंत्रण रखने की कला सीखें. अगर आप अपनी भाभी के साथ बुरा बरताव करेंगी, तो इस का नुकसान आप को ही होगा. अगर भाभी के साथ आप का रिलेशन अच्छा है, तो विवाह के बाद भी आप को मायके में उतना ही प्यार और सम्मान मिलेगा, जितना पहले मिलता था. लेकिन अगर आप दोनों के संबंध अच्छे नहीं हैं, तो आप की शादी के बाद भाभी की यह इच्छा नहीं होगी कि आप मायके में ज्यादा आएं. यह सोचिए कि अगर आपसी कटुता की वजह से वह आप के पति के सामने आप से अच्छा व्यवहार न करे, तो आप को कितना बुरा लगेगा. आप जिस जगह शादी कर के जाएंगी, वहां आप की भी ननद होगी, अगर वह आप के साथ बुरा बरताव करेगी, तो आप को कैसा महसूस होगा, यह सब सोच कर अपनी भाभी के साथ मधुर संबंध बना कर रखें ताकि वह आप के सुखदुख में आप की भागीदार बन सके.

अगर ननद है विवाहित

अगर आप शादीशुदा ननद हैं और भाई की शादी से पहले आप घर के हर छोटेबड़े निर्णय में दखलंदाजी करती थीं, तो भाई के विवाह के बाद आप के लिए बेहतर यही होगा कि आप अपने मायके के मामले में दखल देना बंद कर दें. मायके में उतना ही बोलें जितना जरू री हो. एक महत्त्वपूर्ण बात और भी है कि भाभी के आने के बाद न तो मायके में बिना बुलाए जाएं और न बिनमांगी सलाह दें, क्योंकि अगर किसी ने आप की बात को काट दिया, तो यह बात आप को चुभेगी.

इस बात का खास खयाल रखें कि ससुराल में आप की बात को तभी महत्त्व दिया जाएगा जब आप को अपने मायके में उचित सम्मान मिलेगा. अगर आप की ससुराल वालों को यह पता चल गया कि आप के मायके में आप की बात को महत्त्व नहीं दिया जाता है, तो वहां पर आप को इस के लिए उलाहना भी सुनना पड़ सकता है.  आप की जरा सी असमझदारी से आप के पति का आप के मायके वालों से संबंध खराब भी हो सकता है, इसलिए बेहतर यही होगा कि भाई के विवाह के बाद आप अपनेआप को मायके के मामलों से दूर रखें.

भाभी भी दिखाए समझदारी

ऐसा नहीं है कि हर जगह ननदें ही गलत होती हैं. कभीकभी ऐसा भी होता है कि भाभी ननद को अपनी आंखों का कांटा समझती है और उस के साथ बुरा व्यवहार करती है. अगर आप किसी घर में विवाह कर के गई हैं, तो आप को यह बात समझनी होगी कि अब आप उस घर की बहू हैं. अपने पति का भरपूर प्यार और सम्मान पाने के लिए आप को अपने पति के साथसाथ उस के पूरे परिवार को भी प्यार और सम्मान देना होगा. अगर आप शुरूशुरू में अपनी ननद की थोड़ीबहुत बात बरदाश्त भी कर लेंगी, तो आप को घाटा नहीं होगी. अपने व्यवहार से आप अपनी नखरीली ननद को भी अपनी सहेली बना सकती हैं. लेकिन अपनी छोटी सी गलती से आप अपनी अच्छी ननद की दोस्ती को भी खो सकती हैं.

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फुरसत में क्या करें

– एकदूसरे से अपने अनुभव बांटें. आप को जो भी चीजें अच्छी तरह से आती हैं एकदूसरे को सिखाएं और सीखें. इस का फायदा यह होगा कि आप दोनों एकदूसरे के साथ अच्छा समय बिताने के साथसाथ अपनी जानकारी में बढ़ोतरी भी कर पाएंगी.

– ननद भाभी से अपने दिल की बात शेयर करे और भाभी ननद से परिवार के सदस्यों की पसंदनापसंद के बारे में जाने. आप के पति को क्या अच्छा लगता है, इस बात की जानकारी आप की ननद से बेहतर आप को कोई नहीं दे सकता.

– ननद से अपनी सास के बारे में पूरी बातें जानें और हमेशा न सही कभीकभार ही सही उन की पसंद का काम कर के उन्हें हैरान कर दें. इस से सास के साथ आप के संबंध बेहतर बनेंगे और ससुराल में आप की पकड़ मजबूत होगी.

– कभीकभी मूवी देखने और शौपिंग पर भी साथसाथ जाएं.

अलग हो जाना समस्या का हल नहीं है

सुनीता और रंजन और उन के 2 बच्चे- एकदम परफैक्ट फैमिली. संयुक्त परिवार का कोई झंझट नहीं, पर पुनीता और रंजन की फिर भी अकसर लड़ाई हो जाती है. रंजन इस बात को ले कर नाराज रहता है कि वह दिन भर खटता है और पुनीता का पैसे खर्चने पर कोई अंकुश नहीं है. वह चाहता है कि पुनीता भी नौकरी करे, पर बच्चों को कौन संभालेगा, यह सवाल उछाल कर वह चुप हो जाती है. वैसे भी वह नौकरी के झंझट में नहीं पड़ना चाहती है.

पैसा कहां और किस तरह खर्चा जाए, इस बात पर जब भी उन की लड़ाई होती है, वह अपने मायके चली जाती है. बच्चों पर, घर पर और अपने शौक पूरे करने में खर्च होने वाले पैसे को ले कर झगड़ा होना उन के जीवन में आम बात हो गई है. वह कई बार रंजन से अलग हो जाने के बारे में सोच चुकी है. रंजन उसे बहुत हिसाब से पैसे देता है और 1-1 पैसे का हिसाब भी लेता है. पुनीता को लगता है इस तरह तो उस का दम घुट जाएगा. रंजन की कंजूसी की आदत उसे खलती है.

सीमा हाउसवाइफ है और उस के पति मेहुल की अच्छी नौकरी और कमाई है, इसलिए पैसे को ले कर उन के जीवन में कोई किचकिच नहीं है. लेकिन उन के बीच इस बात को ले कर लड़ाई होती है कि मेहुल उसे समय नहीं देता है. वह अकसर टूर पर रहता है और जब शहर में होता है तो भी घर लेट आता है. छुट्टी वाले दिन भी वह अपना लैपटौप लिए बैठा रहता है. उस का कहना है कि उस की कंपनी उसे काम के ही पैसे देती है और जैसी शान की जिंदगी वे जी रहे हैं, उस के लिए 24 घंटे भी काम करें तो कम हैं.

सीमा मेहुल के घर आते ही उस से समय न देने के लिए लड़ना शुरू कर देती है. वह तो उसे धमकी भी देती है कि वह उसे छोड़ कर चली जाएगी. इस बात को मेहुल हंसी में उड़ा देता है कि उसे कोई परवाह नहीं है.

सोनिया को अपने पति से कोई शिकायत नहीं है, न ही संयुक्त परिवार में रहने पर उसे कोई आपत्ति है. विवाह को 6 वर्ष हो गए हैं, 2 बच्चे भी हैं. लेकिन इन दिनों वह महसूस कर रही है कि उस के और उस के पति के बीच बेवजह लड़ाई होने लगी है और उस की वजह हैं उन के रिश्तेदार, जो उन के बीच के संबंधों को बिगाड़ने में लगे हैं. कभी उस की ननद आ कर कोई कड़वी बात कह जाती है, तो कभी बूआसास उस के पति को उस के खिलाफ भड़काने लगती हैं.

रिश्तेदारों की वजह से बिगड़ते उन के संबंध धीरेधीरे टूटने के कगार तक पहुंच चुके हैं. वह कई बार अपने पति को समझा चुकी है कि इन फुजूल की बातों पर ध्यान न दें, पर वह सोनिया की कमियां गिनाने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ता है.

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नमिता और समीर के झगड़े की वजह है समीर की फ्लर्ट करने की आदत. वह नमिता के रिश्ते की बहनों और भाभियों से तो फ्लर्ट करता ही है, उस की सहेलियों पर भी लाइन मारता है. इस बात को ले कर उन का अकसर झगड़ा हो जाता है. नमिता उस की इस आदत से इतनी तंग आ चुकी है कि वह उस से अलग होना चाहती है.

गलत आप भी हो सकती हैं

इन चारों उदाहरणों में आपसी झगड़े की वजहें बेशक अलगअलग हैं, पर पति की ज्यादतियों की वजह से पत्नियां पति से अलग हो जाने की बात सोचती हैं. उन की नजरों में उन के पति सब से बड़े खलनायक हैं, जिन से अलग हो कर ही उन को सुकून मिलेगा. लेकिन अलग हो जाना, मायके चले जाना या फिर तलाक लेना परेशानी का सही हल हो सकता है? कहना आसान है कि आपस में नहीं बनती, इसलिए अलग होना चाहती हूं, पर उस से क्या होगा? पति से अलग हो कर आजादी की सांस लेने से क्या सारी मुसीबतों से छुटकारा मिल जाएगा?

एक बार अपने भीतर झांक कर तो देखिए कि क्या आप के पति ही इन झगड़ों के लिए दोषी हैं या आप भी उस में बराबर की दोषी हैं. सीधी सी बात है कि ताली एक हाथ से नहीं बजती. फिर रिश्ता तोड़ कर क्या हासिल हो जाएगा? आप तो जैसी हैं, वैसी रहेंगी. इस तरह तो किसी के साथ भी ऐडजस्ट करने में आप को दिक्कत आ सकती है.

तलाक का अर्थ ही है बदलाव और यह समझ लें कि किसी भी तरह के बदलाव का सामना करना आसान नहीं होता है. कई बार मन पीछे की तरफ भी देखता है. नई जिंदगी की शुरुआत करते समय जब दिक्कतें आती हैं तो मन कई बार बीती जिंदगी को याद कर एक गिल्ट से भी भर जाता है. पति की गल्तियां निकालने से पहले यह तो सोचें कि क्या आप अपने को बदल सकती हैं? अगर नहीं तो पति से इस तरह की उम्मीद क्यों रखती हैं? उस के लिए भी तो बदलना आसान नहीं है, फिर झगड़े से क्या फायदा?

कोई साथ नहीं देता

झगड़े से तंग आ कर तलाक लेने का फैसला अकसर हम गुस्से में या दूसरों के भड़काने पर करते हैं, पर उस के दूरगामी परिणामों से पूरी तरह बेखबर होते हैं. मायके वाले या रिश्तेदार कुछ समय तो साथ देते हैं, फिर यह कह कर पीछे हट जाते हैं कि अब आगे जो होगा उसे स्वयं भुगतने के लिए तैयार रहो.

अंजना की ही बात लें. उस का पति से विवाह के बाद से किसी न किसी बात पर झगड़ा होता रहता था. वह उस की किसी बात को सुनती ही नहीं थी, क्योंकि उसे इस बात पर घमंड था कि उस के मायके वाले बहुत पैसे वाले हैं और जब वह चाहे वहां जा कर रह सकती है. एक बार बात बहुत बढ़ जाने पर भाई ने उस के पति को घर से निकल जाने को कहा तो वह अड़ गया कि बिना कोर्ट के फैसले के वह यहां से नहीं जाएगा. जब भाई जाने लगे तो अंजना ने पूछा कि अगर रात को उस के पति ने उसे मारापीटा तो वह क्या करेगी? इस पर भाई बोला कि 100 नंबर पर फोन कर के पुलिस को बुला लेना.

उस के बाद कुछ दिन तो भाई उसे फोन पर अदालत में केस फाइल करने की सलाह देते रहे. पर जब उस ने कहा कि वह अकेली अदालत नहीं जा सकती है तो भाई व्यस्तता का रोना ले कर बैठ गया. अंजना ने 1-2 बार अदालत के चक्कर अकेले काटे, पर उसे जल्द ही एहसास हो गया कि तलाक लेना आसान नहीं है. आज वह अपने पति के साथ ही रह रही है और समझ चुकी है कि जिन मायके वालों के सिर पर वह नाचती थी, वे दूर तक उस का साथ नहीं देंगे. न ही वह अकेले अदालत के चक्कर लगा सकती है.

ऐडजस्ट कर लें

तलाक की प्रक्रिया कितनी कठिन है, यह वही जान सकते हैं, जो इस से गुजरते हैं. अखबारों में पढ़ें तो पता चल जाएगा कि तलाक के मुकदमे कितनेकितने साल चलते हैं. मैंटेनैंस पाने के लिए क्याक्या करना पड़ता है. फिर बच्चों की कस्टडी का सवाल आता है. बच्चे आप को मिल भी जाते हैं तो उन की परवरिश कैसे करेंगी? जहां एक ओर वकीलों की जिरहें परेशान करती हैं, वहीं दूसरी ओर अदालतों के चक्कर लगाते हुए बरसों निकल जाते हैं. अलग हो जाने के बाद भय सब से ज्यादा घेर लेता है. बदलाव का डर, पैसा कमाने का डर, मानसिक स्थिरता का डर, समाज की सोच और सुरक्षा का डर, ये भय हर तरह से आप को कमजोर बना सकते हैं.

कोई भी कदम उठाने से पहले यह अच्छी तरह सोच लें कि क्या आप आने वाली जिंदगी अकेली काट सकती हैं. नातेरिश्तेदार कुछ दिन या महीनों तक आप का साथ देंगे, फिर कोई आगे बढ़ कर आप की मुश्किलों का समाधान करने नहीं आएगा.

आप का मनोबल बनाए रखने के लिए हर समय कोई भी आप के साथ नहीं होगा. कोई भी फैसला लेने से पहले जिस से आप की जिंदगी पूरी तरह से बदल सकती हो, ठंडे दिमाग से आने वाली दिक्कतों के बारे में हर कोण से सोचें. बच्चे अगर आप के साथ हैं तो भी वे आप को कभी माफ नहीं कर पाएंगे. वे आप को हमेशा अपने पिता से दूर करने के लिए जिम्मेदार मानते रहेंगे. हो सकता है कि बड़े हो कर वे आप को छोड़ पिता का पास चले जाएं.

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मान लेते हैं कि आप दूसरा विवाह कर लेती हैं तब क्या वहां आप को ऐडजस्ट नहीं करना पड़ेगा? बदलना तो तब भी आप को पड़ेगा और हो सकता है पहले से ज्यादा, क्योंकि हर बार तो तलाक नहीं लिया जा सकता. फिर पहले ही क्यों न ऐडजस्ट कर लिया जाए. पहले ही थोड़ा दब कर रह लें तो नौबत यहां तक क्यों पहुंचेगी. पति जैसा भी है उसे अपनाने में ही समझदारी है, वरना बाकी जिंदगी जीना आसान नहीं होगा.

झगड़ा होता भी है तो होने दें, चाहें तो आपस में एकदूसरे को लाख भलाबुरा कह लें, पर अलग होने की बात अपने मन में न लाएं. घर तोड़ना आसान है पर दोबारा बसाना बहुत मुश्किल है. जिंदगी में तब हर चीज को नए सिरे से ढालना होता है. जब आप तब ढलने के लिए तैयार है, तो पहले ही यह कदम क्यों न उठा लें.

अगर रिश्तों में हो जलन की भावना

आप जिसे मानते हैं, अगर वो किसी और को भी आपके जितना चाहता है. तो जलन होना स्वाभाविक है. पर अगर जलन जरुरत से ज्यादा हो जाए तो आपके रिश्ते के लिए मुसीबत बन सकता है. इसलिये अगर आप भी उनमें से है जो अपने साथी को लेकर बहुत जलन महसूस करते हैं तो इस भावना से बचने के लिए ये तरीके आजमा सकती हैं.

1. हदों का रखें ध्यान 

अगर आप दिन-रात जलन की भावना से परेशान हो रहे हैं तो आपको थोड़े ब्रेक की जरुरत है. अगर आपका साथी आपको आश्वासन देने के लिए तैयार नहीं हैं या आप इस विषय पर खुलकर बात नहीं कर सकती हैं तो बहुत ज्यादा परेशान ना करें. खुद की सीमा को तय करें कि आप किस हद तक इस भावना को झेल सकती हैं.

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2. तनाव को मैनेज करें

आपके अंदर पल रही जलन की भावना तनाव का एक कारण हो सकती है. अगर आप पहले से ही चिंतित और परेशान है तो आप इस स्थिति में और अधिक तनाव महसूस करेंगी. इसलिए बेहतर होगा कि आप खुद से ही चिंता को काबू करने की कोशिश करें. इसके लिए आप व्यायाम, पोषक आहार, योगा और ध्यान का सहारा ले सकती हैं. कभी-कभी जलन की भावना को दूर करने के लिए अपना अच्छे से ख्याल रखना भी काफी होता है.

3. सीधे बात करें

रिश्तों मे बढ़ रही जलन को रोकने के लिए जरुरी है कि आप अपने साथी से सीधे इसके बारे में बात करें. यदि आप इस बारे में बात नहीं करेंगी तो आप अपनी जलन को उन पर जाहिर करने लगेंगे जिससे स्थिति और खराब हो जाएगी. सीधे से बात करने से आप उन्हें समझा पाएंगी कि आप कैसा महसूस कर रही हैं.

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4. बात करते वक्त रखें संयम

जब आप अपने साथी से बात कर रही हैं तो अपने स्वभाव को सामान्य रखें और शांत रहकर बात करें. साथी पर जरुरत से ज्यादा दबाव ना डालें. अगर वह इस विषय पर बात करने के लिए तैयार नहीं है तो इंतजार करें. अगर आप उनके बारे में बार-बार उनके दोस्तो और साथियों से जानकारी लेते रहेंगे तो हो सकता है इस बात से आपके पार्टनर को बुरा लग जाए. इसलिये किसी भी बात को बार-बार पूछने से परहेज करें और थोड़ा संयम रखें.

Mother’s Day Special: मां बनना औरत की मजबूरी नहीं

मातृत्व का एहसास औरत के लिए कुदरत से मिला सब से बड़ा वरदान है. औरत का सृजनकर्ता का रूप ही उसे पुरुषप्रधान समाज में महत्त्वपूर्ण स्थान देता है. मां वह गरिमामय शब्द है जो औरत को पूर्णता का एहसास दिलाता है व जिस की व्याख्या नहीं की जा सकती. यह एहसास ऐसा भावनात्मक व खूबसूरत है जो किसी भी स्त्री के लिए शब्दों में व्यक्त करना शायद असंभव है.

वह सृजनकर्ता है, इसीलिए अधिकतर बच्चे पिता से भी अधिक मां के करीब होते हैं. जब पहली बार उस के अपने ही शरीर का एक अंश गोद में आ कर अपने नन्हेनन्हे हाथों से उसे छूता है और जब वह उस फूल से कोमल, जादुई एहसास को अपने सीने से लगाती है, तब वह उस को पैदा करते समय हुए भयंकर दर्द की प्रक्रिया को भूल जाती है.

लेकिन भारतीय समाज में मातृत्व धारण न कर पाने के चलते महिला को बांझ, अपशकुनी आदि शब्दों से संबोधित कर उस का तिरस्कार किया जाता है, उस का शुभ कार्यों में सम्मिलित होना वर्जित माना जाता है. पितृसत्तात्मक इस समाज में यदि किसी महिला की पहचान है तो केवल उस की मातृत्व क्षमता के कारण. हालांकि कुदरत ने महिलाओं को मां बनने की नायाब क्षमता दी है, लेकिन इस का यह मतलब कतई नहीं है कि उस पर मातृत्व थोपा जाए जैसा कि अधिकांश महिलाओं के साथ होता है.

विवाह होते ही ‘दूधो नहाओ, पूतो फलो’ के आशीर्वाद से महिला पर मां बनने के लिए समाज व परिवार का दबाव पड़ने लगता है. विवाह के सालभर होतेहोते वह ‘कब खबर सुना रही है’ जैसे प्रश्नचिह्नों के घेरे में घिरने लगती है. इस संदर्भ में उस का व्यक्तिगत निर्णय न हो कर परिवार या समाज का निर्णय ही सर्वोपरि होता है, जैसे कि वह हाड़मांस की बनी न हो कर, बच्चे पैदा करने की मशीन है.

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समाज का दबाव

महिला के शरीर पर समाज का अधिकार जमाना नई बात नहीं है. हमेशा से ही स्त्री की कोख का फैसला उस का पति और उस के घर वाले करते रहे हैं. लड़की कब मां बन सकती है और कब नहीं, लड़का होना चाहिए या लड़की, ये सभी निर्णय समाज स्त्री पर थोपता आया है. वह क्या चाहती है, यह कोई न तो जानना चाहता है और न ही मानना चाहता है, जबकि सबकुछ उस के हाथ में नहीं होता है, फिर भी ऐसा न होने पर उस को प्रताडि़त किया जाता है.

यह दबाव उसे शारीरिक रूप से मां तो बना देता है परंतु मानसिक रूप से वह इतनी जल्दी इन जिम्मेदारियों के लिए तैयार नहीं हो पाती है. यही कारण है कि कभीकभी उस का मातृत्व उस के भीतर छिपी प्रतिभा को मार देता है और उस का मन भीतर से उसे कचोटने लगता है.

कैरियर को तिलांजलि

परिवार को उत्तराधिकारी देने की कवायद में उस के अपने कैरियर को ले कर देखे गए सारे सपने कई वर्षों के लिए ममता की धुंध में खो जाते हैं. यह अनचाहा मातृत्व उस की शोखी, चंचलता सभी को खो कर उसे एक आजाद लड़की से एक गंभीर महिला बना देता है.

लेकिन अब बदलते समय के अनुसार, महिलाएं जागरूक हो ई हैं. आज कई ऐसे सवाल हैं जो घर की चारदीवारी में कैद हर उस औरत के जेहन में उठते हैं, जिस की आजादी व स्वर्णिम क्षमता पर मातृत्व का चोला पहन कर उसे बाहर की दुनिया से महरूम कर दिया गया है.

आखिर क्यों औरत की ख्वाहिशों को ममता के खूंटे से बांध कर बाहर की दुनिया से अनभिज्ञ रखा जाता है? जैसे कि अब उस का काम नौकरी या उन्मुक्त जिंदगी जीना नहीं, बल्कि अपने बच्चे की परवरिश में अपना अस्तित्व ही दांव पर लगा देना मात्र रह गया हो.

बच्चे को अपने रिश्ते का जामा पहना कर उस पर अपना अधिकार तो सभी जमाते हैं, लेकिन जो बच्चे के पालनपोषण से संबंधित कर्तव्य होते हैं, उन का निर्वाह करने के लिए तो पूरी तरह से मां से ही अपेक्षा की जाती है. क्या परिवार में अन्य कोई बच्चे का पालनपोषण नहीं कर सकता. यदि हां, तो फिर इस की जिम्मेदारी अकेली औरत ही क्यों ढोती है?

निर्णय की स्वतंत्रता

दबाव में लिया गया कोई भी निर्णय इंसान पर जिम्मेदारियां तो लाद देता है परंतु उन का वह बेमन से वहन करता है. जब हम सभी एक शिक्षित व सभ्य समाज का हिस्सा हैं तो क्यों न हर निर्णय को समझदारी से लें तथा जिम्मेदारियों के मामले में स्त्रीपुरुष का भेद मिटा कर मिल कर सभी कार्य करें. ऐसे वक्त में यदि उस का जीवनसाथी उसे हर निर्णय की आजादी दे व उस का साथ निभाए तो शायद वह मां बनने के अपने निर्णय को स्वतंत्रतापूर्वक ले पाएगी.

एक पक्ष यह भी

कानून ने भी औरत के मां बनने पर उस की अपनी एकमात्र स्वीकृति या अस्वीकृति को मान्यता प्रदान करने पर अपनी मुहर लगा दी है.

मातृत्व नारी का अभिन्न अंश है, लेकिन यही मातृत्व अगर उस के लिए अभिशाप बन जाए तो? वर्ष 2015 में गुजरात में एक 14 साल की बलात्कार पीडि़ता ने बलात्कार से उपजे अनचाहे गर्भ को समाप्त करने के लिए उच्च न्यायालय से अनुमति मांगी थी, लेकिन उसे अनुमति नहीं दी गई. एक और मामले में गुजरात की ही एक सामूहिक बलात्कार पीडि़ता के साथ भी ऐसा हुआ. बरेली, उत्तर प्रदेश की 16 वर्षीय बलात्कार पीडि़ता को भी ऐसा ही फैसला सुनाया गया. ऐसी और भी अन्य दुर्घटनाएं सुनने में आई हैं.

बलात्कार पीडि़ता के लिए यह समाज कितना असंवेदनशील है, यह जगजाहिर है. बलात्कारी के बजाय पीडि़ता को ही शर्म और तिरस्कार का सामना करना पड़ता है. ऐसे में अगर कानून भी उस की मदद न करे और बलात्कार से उपजे गर्भ को उस के ऊपर थोप दिया जाए तो उस की स्थिति की कल्पना कीजिए, वह कानून और समाज की चक्की के 2 पाटों के बीच पिस कर रह जाती है. लड़की के पास इस घृणित घटना से उबरने के सारे रास्ते खत्म हो जाते हैं और ऐसे बच्चे का भी कोई भविष्य नहीं रह जाता जिसे समाज और उस की मां स्वीकार नहीं करती.

पिछले साल तक आए इस तरह के कई फैसलों ने इस मान्यता को बढ़ावा दिया था कि किस तरह से महिला के शरीर से जुड़े फैसलों का अधिकार समाज और कानून ने अपने हाथ में ले रखा है. वह अपनी कोख का फैसला लेने को आजाद नहीं है. अनचाहा और थोपा हुआ मातृत्व ढोना उस की मजबूरी है.

लेकिन 1 अगस्त, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार की शिकार एक नाबालिग लड़की के गर्भ में पल रहे 24 हफ्ते के असामान्य भू्रण को गिराने की इजाजत दे दी. कोर्ट ने यह आदेश इस आधार पर दिया कि अगर भू्रण गर्भ में पलता रहा तो महिला को शारीरिक व मानसिक रूप से गंभीर खतरा हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971 के प्रावधान के आधार पर यह आदेश दिया है. कानून के इस प्रावधान के मुताबिक, 20 हफ्ते के बाद गर्भपात की अनुमति उसी स्थिति में दी जा सकती है जब गर्भवती महिला की जान को गंभीर खतरा हो. 21 सितंबर, 2017 को आए मुंबई उच्च न्यायालय के फैसले ने स्थिति को पलट दिया.

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न्यायालय ने महिला के शरीर और कोख पर सिर्फ और सिर्फ महिला के अधिकार को सम्मान देते हुए यह फैसला दिया है कि यह समस्या सिर्फ अविवाहित स्त्री की नहीं है, विवाहित स्त्रियां भी कई बार जरूरी कारणों से गर्भ नहीं चाहतीं.

कोई भी महिला चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित, अवांछित गर्भ को समाप्त करने के लिए स्वतंत्र है, चाहे वजह कोई भी हो. इस अधिकार को गरिमापूर्ण जीवन जीने के मूल अधिकार के साथ सम्मिलित किया गया है. महिलाओं के अधिकारों और स्थिति के प्रति बढ़ती जागरूकता व समानता इस फैसले में दिखाई देती है. अविवाहित और विवाहित महिलाओं को समानरूप से यह अधिकार सौंपते हुए उच्च न्यायालय ने लिंग समानता और महिला अधिकारों के पक्ष में एक मिसाल पेश की है.

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

28 अक्तूबर, 2017 को गर्भपात को ले कर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक, अब किसी भी महिला को अबौर्शन यानी गर्भपात कराने के लिए अपने पति की सहमति लेनी जरूरी नहीं है. एक याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला लिया है. कोर्ट ने कहा कि किसी भी बालिग महिला को बच्चे को जन्म देने या गर्भपात कराने का अधिकार है. गर्भपात कराने के लिए महिला को पति से सहमति लेनी जरूरी नहीं है. बता दें कि पत्नी से अलग हो चुके एक पति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. पति ने अपनी याचिका में पूर्व पत्नी के साथ उस के मातापिता, भाई और 2 डाक्टरों पर अवैध गर्भपात का आरोप लगाया था. पति ने बिना उस की सहमति के गर्भपात कराए जाने पर आपत्ति दर्ज की थी.

इस से पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी याचिकाकर्ता की याचिका ठुकराते हुए कहा था कि गर्भपात का फैसला पूरी तरह महिला का हो सकता है. अब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ए एम खानविलकर की बैंच ने यह फैसला सुनाया है. फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गर्भपात का फैसला लेने वाली महिला वयस्क है, वह एक मां है, ऐसे में अगर वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती है तो उसे गर्भपात कराने का पूरा अधिकार है. यह कानून के दायरे में आता है.

हम यह स्वीकार करते हैं कि आज कानून की सक्रियता ने महिलाओं को काफी हद तक उन की पहचान व अधिकार दिलाए हैं परंतु आज भी हमारे देश की 40 प्रतिशत महिलाएं अपने इन अधिकारों से महरूम हैं, जिस के कारण आज उन की हंसतीखेलती जिंदगी पर ग्रहण सा लग गया है.

बच्चे के जन्म का मां और बच्चे दोनों के जीवन पर बहुत गहरा और दूरगामी प्रभाव पड़ता है. इसलिए मातृत्व किसी भी महिला के लिए एक सुखद एहसास होना चाहिए, दुखद और थोपा हुआ नहीं.

हर सिक्के के दो पहलू

बच्चा पैदा करना पूरी तरह से महिलाओं के निर्णय पर निर्भर होने से परिवार में कई विसंगतियां पैदा होंगी.

बच्चे की जरूरत पूरे परिवार को होती है, और उसे पैदा एक औरत ही कर सकती है. ऐसे में उस के नकारात्मक रवैए से पूरा परिवार प्रभावित होगा.

मातृत्व का खूबसूरत एहसास मां बनने के बाद ही होता है. नकारात्मक निर्णय लेने से महिला इस एहसास से वंचित रह जाएगी.

सरोगेसी इस का विकल्प नहीं है, मजबूरी हो तो बात अलग है.

अपनी कोख से पैदा किए गए बच्चे से मां के जुड़ाव की तुलना, गोद लिए बच्चे या सरोगेसी द्वारा पैदा किए गए बच्चे से की ही नहीं जा सकती.

आज के दौर में महिलाएं मातृत्व से अधिक अपने कैरियर को महत्त्व देती हैं. उन की इस सोच पर कानून की मुहर लग जाने के बाद अब परिवार के विघटन का एक और मुद्दा बन जाएगा और तलाक की संख्या में बढ़ोतरी होनी अवश्यंभावी है.

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