अक़्सर देखा जाता है कि बच्चे अपने दिल की बात जितना खुलकर अपने दोस्तों के साथ कर लेते हैं, उतना खुलकर वह अपने माता पिता से नहीं कह पाते. कई बार तो बच्चे अपने माता-पिता के सामने इतना संकोच करते हैं कि वह अपनी बात तक नहीं रख पाते. आजकल इसीलिए ये जरूरी हो गया है कि पेरेंट्स अपने बच्चों के दोस्त बनकर रहें. जब दोनों के बीच दोस्ती का रिश्ता होता है तो संवाद भी काफी आसान हो जाता है. इस से माहौल सहज होने से दोनों एक दूसरे की बात को समझने का प्रयास करते हैं. लेकिन बड़ा प्रश्न ये है कि बच्चों से दोस्ती की किस तरह जाए. यदि आप भी चाहते हैं बच्चों के दोस्त बनना तो जरूरत है बस कुछ कदम बढ़ाने की उसके बाद बच्चों से दोस्ती का रिश्ता कायम करना मुश्किल नहीं है तो चलिए जानते हैं कुछ आसान तरीके जिनसे ये करना आसान हो जाएगा.
अधिक नियंत्रण से बचें
कई माता पिता अपने बच्चों को कड़े अनुशासन के नाम पर कठोर नियंत्रण में रखते हैं जिस से वो गलत राह पर न जाएँ पर इसके परिणाम ठीक उलट हो जाते हैं. बच्चे बहुत जिद्दी और गुस्से वाले बन जाते हैं.इसलिए धैर्य रखें और उन्हें अपना जीवन अपने अनुरूप जीने दें. कोई गलती हो जाने पर उन्हें डांटने की बजाय प्यार से समझाएँ. उन्हें उस गलती से होने वाले नुकसान बता कर अगली बार उस गलती को न करने सलाह दें.उन्हें यकीन दिलाएं कि आपको उन पर पूरा विश्वास है कि अब वो ये ग़लती नहीं दोहरायेंगे .
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करें जीवन भर का वादा
अगर आप सच में बच्चों के नजदीक जाना चाहते हैं तो पहल आपको ही करनी होगी इसकी शुरूआत कुछ ऐसे करें कि उन्हें ये अहसास कराएँ कि जीवन के किसी भी वक़्त में आप उनके साथ होंगे. मसलन आप उन्हें कहें कि जीवन में चाहे कोई भी परिस्थिति हो वो अपनी हर छोटी बड़ी परेशानी या खुशी आपसे बाँट सकते हैं और यदि उनसे कोई छोटी या बड़ी ग़लती भी होती है तो आपके प्यार में कमी नहीं आएगी बल्कि आप उस से बाहर निकलने में उनकी मदद करेंगे . वैसे तो माता-पिता का प्यार बिना शर्त और जीवन भर के लिए ही होता है, लेकिन बच्चे को ये जताना भी जरूरी होता है इससे आपसी बॉन्ड मजबूत होता है. इसी तरह आप उन्हें कह सकते हैं कि एक दोस्त की तरह वो आपसे गंदी बात भी बांट सकते हैं आप उसे सुनकर उन्हें समझने का प्रयास करेंगे और उनके प्रति जजमेन्टल नहीं होंगे.
साथ समय बिताएँ
आज के इस भागमभाग वाले समय में पेरेंट्स बच्चों से दोस्ती तो करना चाहते हैं पर समय की कमी उनकी राह का रोड़ा होती है. हम यह नहीं कहते कि आप अपना सारा काम छोड़कर बच्चों के पास सारा दिन बैठे रहें पर दिन भर में कम से कम एक घंटा सिर्फ और सिर्फ उन्हीं के लिए सुरक्षित रखें, फिर भले ही वह आपका डिनर टाइम ही क्यों ना हो.इस तरह पूरे साल में आप अपने बच्चों के साथ पूरे 365 घंटे बिता पाएँगे जो कि आपके बीच दोस्ती विकसित करने में बेहद मददगार होगा. ध्यान रखें कि दोस्ती का रिश्ता एक दिन में नहीं बनता इसको पक्का बनाने के लिए लगातार प्रयास करने होते हैं.
बच्चों के लिए हमेशा उपलब्ध रहें
दिन में एक घंटा बच्चों के लिए निकल लेने भर से आपकी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. आपको बच्चों में ये भरोसा जगाना होगा कि आप हमेशा उनके लिए मौजूद हैं. आपने कभी महसूस किया है की आपके दोस्तों से भले ही कई दिनों तक बात ना करें, लेकिन अगर आप किसी मुश्किल में हैं तो आपको यकीन होता है कि वह आपके लिए उपलब्ध होंगे, ठीक उसी तरह, बच्चों को भी यह विश्वास होना चाहिए कि अगर वह किसी तरह की मुश्किल में हैं या फिर उन्हें कोई बात आपसे शेयर करनी है तो आप उनके लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे.
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प्यार भरा स्पर्श
बच्चों के साथ एक प्यार भरे और दोस्ती के रिश्ते के लिए आपका स्पर्श भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जब आप अपने बच्चे को प्यार से स्पर्श करते हैं तो इससे उसके मस्तिष्क में कई सन्देश जाते हैं. आपने अक्सर देखा होगा कि जब बच्चा गुस्से में होता है या फिर रो रहा होता है, ऐसे में अगर आप उसे प्यार से गले लगा लें तो वह एकदम से शांत हो जाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि जो माता-पिता अपने बच्चों को दिन में कम से कम पांच या छह बार प्यार से गले लगाते हैं या स्पर्श करते हैं उनका जीवन काल पांच या छह साल बढ़ जाता है. आज के दौर में बच्चों में कई भावनात्मक समस्याओं से जूझना पड़ता है जिसका मुख्य कारण सिर्फ स्पर्श, स्नेह भरे स्पर्श की कमी और प्यार को महसूस न कर पाना है. जब आप उन्हें प्यार से गले लगाते हैं तो इससे आपका बच्चा न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि भावनात्मक रूप से भी लाभान्वित होता है.
इन कुछ बातों का ध्यान रखने से आपके बच्चे न सिर्फ आपके अच्छे दोस्त बन जायेंगे बल्कि वो आपका अधिक सम्मान करने लगेंगे.