“अनिक 10 साल का लड़का था . वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान  था . अनिक के पापा काफी व्यस्त बिजनेसमैन थे, जो अपने बेटे के साथ समय नहीं बिता पाते थे. वे अनिक के सोने के बाद घर आते और सुबह अनिक के जागने से पहले ऑफिस चले जाते . अनिक अपने पापा का ध्यान पाने के लिए तरस जाता . वह पार्क जाकर अपने दोस्तों की तरह ही अपने पापा के साथ खेलना था.

एकदिन अनिक अपने पापा को शाम को घर पर देखकर बहुत हैरान था.

“पापा, आपको घर पर देखकर बहुत अच्छा लगा ,” अनिक ने कहा.

“हाँ बेटा, मेरी मीटिंग कैंसिल हो गयी है. इसलिए मैं घर पर हूं लेकिन दो घंटे बाद मुझे एक फ्लाइट पकड़नी है , ”उसके पापा  ने जवाब दिया.

“आप वापिस कब आओगे?”

“कल दोपहर”

अनिक कुछ समय के लिए गहरी सोच में था.  फिर उसने पूछा, “पापा, एक साल में आप कितना कमाते हैं?”

उन्होंने कहा, “मेरे प्यारे बेटे, यह एक बहुत  बड़ी राशि है और आप इसे समझ नहीं पाएंगे.”

“ठीक है पापा , क्या आप जो कमाते हैं उससे खुश हैं?”

“हाँ मेरे बेटे मैं बहुत खुश हूं, और वास्तव में मैं कुछ महीनों में अपनी नई ब्रांच और एक नया बिज़नेस शुरू करने की योजना बना रहा हूं.

यह बहुत अच्छा है पापा मैं यह सुनकर खुश हूँ.

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क्या मैं आपसे एक सवाल पूछ सकता हूं? ”

“हाँ बेटा”

“पापा, क्या आप मुझे बता सकते हैं कि आप 1 घंटे में कितना कमाते हैं?”

“अनिक, आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हो?” अनिक के पापा  हैरान थे.

लेकिन अनिक लगातार पूछ रहा था , “PLEASE मुझे जवाब दो. क्या आप मुझे बता सकते हैं कि आप एक घंटे में कितना कमाते हैं? ”

अनिक के पापा ने जवाब दिया, ” यह लगभग 4000 रुपये/- प्रति घंटे होगा. ”

अनिक अपने कमरे में ऊपर चला गया और अपने गुल्लक के साथ नीचे आया जिसमें उसकी बचत थी.

“पापा , मेरे गुल्लक में 500 रुपए हैं.क्या आप इतने पैसो में ही मेरे लिए दो घंटे का समय दे सकते हैं? मैं आपके साथ बहार घूमने जाना चाहता हूं और शाम को आपके साथ खाना खाना चाहता हूँ.क्या आप मेरे लिए थोड़ा टाइम निकाल सकते है.

अनिक के पापा अवाक थे!”

दोस्तों ये सिर्फ एक घर की ही कहानी नहीं है. आजकल ये लगभग सभी घरों की कहानी बन चुकी है .एक तो हम दिनभर अपने कामों में व्यस्त रहते है और अगर हमारे पास टाइम रहता भी है तो हम अपने  स्मार्टफोन में लगे रहते  है . हम अपने बच्चे से कायदे से बैठ कर बात भी नहीं कर पाते और न ही ये जानने की कोशिश करते है की उनके मन में क्या चल रहा है या वो हमारे बारे में क्या सोचते है .

शायद कल को ऐसा दिन आएगा की हर बच्चा ये सोचेगा कि “काश मै एक SMARTPHONE होता “ .

“वो सोचेगा कि अगर मैं smartphone बन जाऊ तो घर में मेरी एक ख़ास जगह होगी और सारा परिवार मेरे आस पास रहेगा. जब मैं बोलूँगा तो सारे लोग मुझे ध्यान से सुनेंगे.पापा ऑफिस से आने के बाद थके होने के बावजूद भी मेरे साथ बैठेंगे. मम्मी को जब तनाव होगा तो वो मुझे डाटेंगी नहीं बल्कि मेरे साथ रहना चाहेंगी. मेरे बड़े भाई-बहन  मुझे अपने पास रखने के लिए झगडा करेंगे, और हाँ phone के रूप में मैं सबको ख़ुशी भी दे पाऊँगा.”

कहीं ये किस्सा आपके बच्चे की भी तो नहीं ?

दोस्तों आज की भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में हमें वैसे ही एक दूसरे के लिए बहुत कम टाइम मिल पाता है और अगर हम ये भी सिर्फ tv देखने, mobile पर खेलने और facebook में गंवा देंगे तो हम कभी अपने रिश्तों की अहमियत और उससे मिलने वाले प्यार को नहीं समझ पाएंगे

पैसा सब कुछ नहीं खरीद सकता है. एक स्वस्थ्य भविष्य की शुरूआत एक स्वस्थ्य मन से होती है .एक अभिभावक अपने बच्चे को जो सबसे बड़ा उपहार दे सकता है वह है ‘समय’.

मेरी आपसे गुज़ारिश है कि जिस जिसने भी इस लेख को पढ़ा है वो केवल इसे पढ़े  नहीं बल्कि  इस पर अमल भी करें.

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