अगर एक जगह कोई महिला घरेलू हिंसा का शिकार होती है तो वहीं दूसरी ओर कुछ महिलाएं ऐसी होती हैं जो घरेलू हिंसा का शिकार तो नहीं होती लेकिन अपने ही ससुरास वालों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देती हैं और पति के साथ-साथ पूरे परिवार को अपने काबू में रखना चाहतीं हैं. लेकिन जब वो ऐसा नहीं कर पातीं तो घरवालों को धमकी तक दे देती हैं.इतना ही नहीं उस लड़की के अपने माता-पिता भी बेटी के इन कामों में उसका साथ देते हैं.

अक्सर ऐसा होता है कि जब सास चाहती है कि बहु घर के कामों में हाथ बंटाए लेकिन जब बहु कुछ नहीं करती तो सास बेटे से शिकायत कर बैठती है कि तेरी पत्नी घर के काम नहीं करती मैं अकेले कितना करूं.जब यही बात पति कहता तो पत्नी से उसकी कहा-सुनी होती है साथ ही उसकी नजरों में सास गलत हो जाती है. बस बहु सास को अपना दुश्मन मान बैठती है जो सही नहीं है. भले ही कुछ सासें अच्छी नहीं होती हैं लेकिन हर जगह ऐसी नहीं होती है सास बहु को बेटी मानती है लेकिन मामला तब बिगड़ जाता है जब बहु ही सास को अपना नहीं मानती….

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इनके रिश्तों में खटास इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि बहुएं कभी-कभी तो पति को ही उसके मां के खिलाफ भड़काना शुरू कर देंती हैं…मामला इस हद तक आगे आ चुका होता है यदि सास-ससुर कमजोर पड़ते हैं तो बहुएं उन्हें वृध्दाश्रम तक भेज देती हैं…..पति के सामने खुद में और मां-बाप में से किसी एक को चुनने पर मजबूर कर देती हैं. इस बात का उदाहरण आपर अमिताभ बच्चन के बागबान फिल्म या राजेश खन्ना और गोविंदा की फिल्म स्वर्ग से बखूबी समझ सकते हैं.

हमेशा सास ही गलत नहीं होत है…जरा आप सोचिए भला कौन सी सास ये नहीं चाहती कि उसकी बहु उसकी सेवा न करें…जिस तरह बहु अपने माता-पिता की सेवा करती है वैसे ही अगर थोड़ा अपने सास-ससुर की सेवा कर ले तो भला क्यों हो तकरार.बहुएं हमेशा अपना हक मांगती हैं लेकिन क्या वो अपना फर्ज निभाती हैं जो उनके ससुराल के प्रति है? अगर नहीं तो फिर अपने हक की उम्मीद कैसे कर सकती हैं. अक्सर ही घरों में सास-बहु में 36 का आंकड़ा होता है,लेकिन इसमें हमेशा सास ही गलत हो ये जरूरी नहीं हैं.

हम हमेशा ये देखते हैं कि बहुएं दहेज मांगने का आरोप लगाती हैं शिकायत करती हैं…तो पहली बात तो ये आज भी बहुत सी लड़कियों की फैमिली ऐसी होती है जो खुद ही दहेज देती है,इसमें उसकी खुद की मर्जी होती है तो क्या वो दोषी नहीं हैं?क्या उनकों सजा नहीं होनी चाहिए? एक रिपोर्ट पढ़ने पर पता चला कि महिलाएं खुद की मां के द्वार भी हिंसा का शिकार होती हैं पर वे इस पर ध्यान नहीं देती हैं और तो और उन्हें बचपन से ही सास से घृणा करना सिखा दिया जाता है इसलिए वो सास को अपना दुश्मन समझने लगती हैं.  एक सास अपनी बहु को अपना बेटा देती हैं हमेशा के लिए और अगर वही लड़का अपनी बीवी के कहने पर मां को गलत समझे तो क्या ये सही है नहीं बिल्कुल भी नहीं,मेरी नजर में ये कहीं से भी सही नही है इसलिए बहुओं को अपना नजरिया बदला होगा.

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बहु अगर सच में एक अच्छी बहु बनना चाहती है अपने सास की बेटी बनना चाहती है तो उसको कुछ अपनी जिम्मदारियों को निभाना होगा जिससे सास और बहु के रिश्ते को अच्छा बनाया जा सकता है..जैसे..

  • सास को सास नहीं मां समझे
  • सास की मां की तरह सेवा करें
  • ससुराल को सिर्फ ससुराल नहीं अपना घर समझें
  • घर के कामों में हांथ बटाएं
  • अपने मायके में ससुराल की बुराई न करें
  • पति से सास की बुराई न करें

Edited by Rosy

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