भारत में एसिड अटैक का शिकार होने वाली लड़कियों और महिलाओं की कमी नहीं. लड़कियों के साथ इस तरह का व्यवहार करने वाले सामान्यतया सिरफिरे आशिक या गहरे दुश्मन होते हैं. मगर मुंबई में रहने वाली अनमोल रोड्रिगेज के साथ कुछ और ही हुआ.
उस समय वह केवल 2 महीने की थी. मां ने उसे अपनी गोद में लिटा रखा था. तभी उस के पिता ने एसिड फेंका. पिता का निशाना भले ही मां थी मगर अनमोल भी इस से बच नहीं सकी. उस की एक आंख चली गई और चेहरे के साथ शरीर के कुछ हिस्से भी झुलस गए. मां ने उसी वक्त दम तोड़ दिया मगर अनमोल का काफी समय तक अस्पताल में इलाज चला. ननिहाल वालों ने कुछ समय तो उस की जिम्मेदारी उठाई मगर फिर उसे लावारिस छोड़ दिया ऐसे में उसे एक अनाथालय में शरण मिली. अनाथालय में रहते हुए इलाज के साथ उस की पढ़ाई भी होने लगी.
18 साल के बाद अनाथालय में रहने की अनुमति नहीं थी तब अनमोल को अपनी जिम्मेदारी खुद उठानी पड़ी.
फिलहाल 22 साल की अनमोल रोड्रिगेज मुंबई में रहती है. वह बीगो लाइव के जरिए सोशल इंन्फ्लुएंसर, मोटिवेटर और फैशन एजुकेटर का काम करती है. उसे शौर्टफिल्म ‘आंटी जी’ में शबाना जी के साथ काम करने का मौका भी मिला.
मुंबई में रेंट के मकान में एक रूममेट के साथ रहने वाली अनमोल के जीवन का सफर इतना आसान नहीं है. जिंदगी के रास्ते में उसे अपनों के दिए जख्म, लोगों की नफरत और भेदभाव के दर्द का भी सामना करना पड़ा.
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पेश है उस से की गई बातचीत के मुख्य हिस्से
1. बचपन से अब तक आप को किस तरह के संघर्षों का सामना करना पड़ा?
बचपन में 5 साल तक मैं हॉस्पिटल में रही जहां मेरा इलाज चलता रहा. उस के बाद में एक अनाथालय में आ गई जहां मैं ने पढ़ाई पूरी की साथ में इलाज भी होता था. मुझे यहां अलग ट्रीट नहीं किया गया. अन्य बच्चों की तरह ही नॉर्मल रूप से रखा गया. मगर बड़ी होने और कालेज जाने पर मैं ने महसूस किया कि समाज की नजरों में मैं अलग हूं. लोगों का रवैया मेरे प्रति सही नहीं है. मुझे ले कर एक्सेप्टेंस नहीं है. ओवरऑल सोसाइटी में मेरी तरफ संवेदनशीलता नहीं है. कोई मेरा दोस्त बनना या हग करना नहीं चाहता. मैं जैसी हूं उस रूप में स्वीकार करने को कोई तैयार नहीं.
जब मुझे पहली दफा जॉब लगी तो मेरे खराब चेहरे की वजह से मुझे निकाल दिया गया. मेरे लिए इन बातों को समझना और बाहर आना आसान नहीं था. मानसिक स्तर पर मैं बहुत समय तक काफी परेशान भी रही.
2. जिंदगी में आगे क्या करना चाहती हैं?
मैं ने बहुत सी चीजें प्लान कर के रखी हैं. वैसे बचपन से ही मुझे थिएटर और एक्टिंग का शौक रहा है. जब मुझे शौर्टफिल्म ‘आंटी जी’ में काम करने का मौका मिला तो मेरी एक्टिंग में रुचि और बढ़ गई. पहले मैं खुद को अंडरस्टीमेट करती थी मगर अब मुझे लगता है कि मैं इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हूं. यही नहीं मैं सोशल मीडिया में भी एक्टिव रही हूं और इस क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहती हूं.
3. आप को आंटी जी फिल्म में मौका कैसे मिला?
दरअसल मुझे एक ईमेल आया. डायरेक्टर ने मेल के साथ मुझे स्क्रिप्ट भी भेजा था. मुझे शबाना जी के साथ काम करने का मौका दिया जा रहा था. पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि वाकई यह सच है. मैं ने तुरंत हामी भर दी. इस तरह शबाना के जी के साथ मुझे फिल्म करने का मौका मिला. मेरा रोल इस फिल्म में एक एसिड सर्वाइवर का ही था.
4. फैशन में रुचि कैसे हुई ?
बचपन से ही मुझे फैशन में रुचि थी. रिसोर्सेज अधिक नहीं थे मगर फैशन करना पसंद था. लोगों से मेरे फैशन सेंस के लिए कंपलीमेंट्स मिलते थे. फिर जब सोशल मीडिया पर एक्टिव हुई तो पता चला कि इस के जरिए भी आगे बढ़ा जा सकता है.
5. आप अपना आत्मविश्वास कैसे कायम रखती हैं?
शुरू में लोगों का व्यवहार मेरी तरफ अलग था. वैसे कुछ लोग सपोर्टिव भी होते थे. पर मैं यह मानती हूं कि अपनी परिस्थितियों को आप कैसे स्वीकार करते हैं, इस बात पर बहुत चीजें निर्भर होती हैं. कई लोग खुद को स्वीकार करते हैं तो कुछ नहीं करते.
मैं जानती थी कि मेरा चेहरा तो अब ऐसे ही रहना है. ऐसे में लोग क्या सोचेंगे या क्या कमेंट कर रहे हैं इस डर से मैं घर से नहीं निकलती तो कहीं नहीं पहुंच सकती.
मैं ने खुद को मानसिक तौर पर मजबूत बनाया. खुद को स्वीकार किया और सोसाइटी को भी समय दिया कि लोग मुझे स्वीकार करें. अब तो सब मेरी तारीफ करते नहीं थकते. खुद ही आत्मविश्वास आ जाता है. अब तो इतना विश्वास है कि कोई भी चुनौती आ जाए मैं उस का सामना कर लूंगी. कोई भी ऐसी चुनौती नहीं है जो मेरे आत्मविश्वास को हिला सके.
6. सफलता के लिए क्या जरूरी है?
सफलता के लिए डेडीकेशन, कठिन परिश्रम, 100% सही दिशा में प्रयास, निश्चित मकसद, सकारात्मक उर्जा और कभी भी गिवअप न करने का रवैया होना जरूरी है.
6. फैशन से जुड़े कुछ टिप्स?
हर किसी का अपना टेस्ट होता है. सब के पास महंगे कपड़े होने जरूरी नहीं. साधारण कपड़ों में भी वाउ फैक्टर लाया जा सकता है. अपनी स्टाइलिंग पर ध्यान दें. जो भी पहनें उसे कैरी करने का तरीका आकर्षक होना चाहिए. किसी को कॉपी करने की जरूरत नहीं. अपना अलग स्टाइल रखें .
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7. क्या एसिड अटैक का कोई असर अभी तक है?
तकलीफ तो अभी भी है. मैं एक ही आंख से देख पाती हूं. ज्यादा देर कंप्यूटर पर काम करती हूं तो आंखों पर दबाव पड़ता है और सर दर्द होने लगता है. धूप में ज्यादा रहने से आंखों में से पानी आने लगता है. त्वचा पर भी जलन होती है.
8. सरकार द्वारा एसिड सर्वाइवर्स के लिए जो कदम उठाए गए हैं क्या उस से संतुष्ट हैं?
एसिड अटैक को ले कर लोगों में जागरूकता बढ़ी है और सरकार भी कई मेजर ला रही है मगर ये काफी नहीं हैं. सरकार एसिड सर्वाइवर्स को ₹3 लाख वनटाइम कंपनसेशन के तौर पर देती है. जबकि बहुत से सर्वाइवर्स हैं जिन्हें अपना कंपनसेशन नहीं मिल पाता. जिन में से एक मैं भी हूं. क्योंकि यह एक लंबी प्रक्रिया है. बहुत सारे डाक्यूमेंट्स, रिपोर्ट्स और एफआईआर की कॉपी आदि जमा करनी पड़ती है. जिस के पास पैरंट्स हैं वे तो एफआईआर वगैरह ले आते हैं मगर मेरे जैसे केस में यह सब कठिन है.
यही नहीं ₹ 3 लाख वैसे भी काफी नहीं हैं. एक छोटी सर्जरी का कॉस्ट ₹ 3 लाख से ज्यादा ही आता है.
एक नए कानून के मुताबिक इस की सर्जरी हॉस्पिटल में फ्री होगी. मगर जब आप अप्रोच करो तो कई बार यह संभव नहीं हो पाता. हॉस्पिटल वाले कहते हैं कि इस कानून के आने के बाद वालों की सर्जरी फ्री करेंगे लेकिन कानून से पहले जिन पर एसिड हमला हुआ उन को रुपए देने पड़ेंगे. यही नहीं कुछ हॉस्पिटल वाले बहुत से डॉक्यूमेंट मांगते हैं जो सब के पास नहीं होते. सरकार को इन बातों पर गौर करना चाहिए और कंपनसेशन की रकम भी बढ़ानी चाहिए.