भारतीय कहावत कि, हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे, को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चरितार्थ करते जैसे दिख रहे हैं. ‘अमेरिका फर्स्ट’ नारे के साथ ह्वाइट हाउस में घुसे ट्रंप अब ‘ओनली अमेरिका’ का नारा लगाते प्रतीत हो रहे हैं.

इन नारों के साथ डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अपने साथी देशों के साथ भी युद्ध सा लड़ रहा है और हर तरह की वार्त्ता में सिर्फ़ अपनी श्रेष्ठता की कोशिश में है. ऐसे में साथी देशों का अपने अगले कदम पर पुनर्विचार करना स्वाभाविक है.

इसी बीच, यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रभारी ने कहा है कि दुनिया पर अमेरिका के एकछत्र राज का अंत निकट आ गया है.

बता दें कि यूरोपीय संघ (यूरोपियन यूनियन) मुख्यतया यूरोप में स्थित 27 देशों का एक राजनीतिक एवं आर्थिक मंच है. इन देशों में आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है जो संघ के कई या सभी राष्ट्रों पर लागू होती है. यूरोपिय संघ सदस्य राष्ट्रों को एकल बाजार के रूप में मान्यता देता है एवं इसका कानून सभी सदस्य राष्ट्रों पर लागू होता है जो सदस्य राष्ट्र के नागरिकों की 4 तरह की स्वतंत्रताएं सुनिश्चित करता है – लोगो, सामान, सेवाएं और पूंजी का स्वतंत्र आदानप्रदान.

इंग्लिश डेली लास एंजिल्स टाइम्स में बर्लिन डेटलाइन से प्रकाशित रिपोर्ट में यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रमुख जोसेप बोरेल ने वीडियो-लिंक के जरिए ऐंबैसेडर्स की एक कौन्फ्रैस को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया पर अमेरिका के राज का समय समाप्त हो रहा है. उन्होंने आगे कहा कि अब चीन के संबंध में उचित व ठोस नीति अपनानी चाहिए. उनका कहना है कि कोरोना, शक्ति के नए काल का आरंभ है जिसमें एशिया विशेषकर चीन, अमेरिका से आगे बढ़ जाएगा.

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गौरतलब है कि जनवरी 2017 में अमेरिका के नए राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही अमेरिका में एकपक्षवाद की नीति को बढ़ावा मिला. उन्होंने ‘अमेरिका फ़र्स्ट’ का नारा लगा कर और अमेरिका के हितों व लक्ष्यों को प्राथमिकता देने के साथ ही यह दावा किया कि वाशिंगटन की ओर से ज़ोरज़बरदस्ती की नीति के साथ सिर्फ़ अपने ही हितों के बारे में सोचने से अमेरिका की ताक़त बढ़ेगी और दुनिया के एकमात्र नेता के रूप में उसकी हैसियत और मज़बूत होगी. हालांकि, उनका यह दावा अब तक सिद्ध नहीं हो सका है. बल्कि, इस बारे में यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रभारी जोज़ेप बोरेल ने कहा कि अमेरिका की चौधराहट अब कांपने लगी है.

बोरेल ने कहा कि विश्लेषक काफ़ी पहले से अमेरिका के नेतृत्व वाली विश्वव्यवस्था की समाप्ति और एशिया की सदी शुरू होने की बात कर रहे थे और अब कोरोना वायरस के फैलाव ने अमेरिका की ताक़त की समाप्ति की रफ़्तार बढ़ा दी है.

सचाई यह है कि कोरोना का फैलाव, जिसकी वजह से दुनिया में काफ़ी अहम व गहरे बदलाव आए हैं, इस प्रक्रिया को गति प्रदान कर रहा है और इस वक़्त अमेरिका को अभूतपूर्व आर्थिक, सामाजिक व चिकित्सा संकटों से जूझना पड़ रहा है. इसी बात को नज़र में रख कर यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रभारी ने कोरोना वायरस के फैलाव को पश्चिम से पूरब की ओर ताक़त के झुकाव की राह में एक अहम मोड़ बताया है और कहा है कि यूरोपीय संघ पर यह तय करने के लिए दबाव बढ़ रहा है कि वह किस तरफ़ रहना चाहता है.

एक अहम बात, जिसकी ओर जोज़ेप बोरेल ने यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रभारी की हैसियत से इशारा किया है, वह वही विषय है जिसके बारे में अंतर्राष्ट्रीय मैदान में अमेरिका के विरोधी व समर्थक बात कर चुके हैं और जो इस समय विश्वमंच पर चर्चा का मुद्दा बन गया है. और वह विषय अमेरिका के पतन का है जिसके आंतरिक व बाहरी कई कारण हैं.

यह सच है कि विदेश नीति के मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत ही व्यवस्थित ढंग से बहुपक्षवाद के सभी आदर्शों व साधनों को तबाह कर दिया है और एकपक्षवाद को बढ़ावा दिया है. वे सिर्फ़ अमेरिका के हितों को ही अहमियत देने पर बल दे रहे हैं जिससे अमेरिका की हैसियत और उसका वैश्विक प्रभाव बजाय बढ़ने के घट गया है. उन्होंने अहम अंतर्राष्ट्रीय समझौतों व संधियों से निकल कर बहुपक्षवाद को रौंदने की कोशिश की है.

ट्रंप की सरकार शुरू में पेरिस के जलवायु समझौते से और फिर ईरान से हुए वैश्विक परमाणु समझौते से निकल गई. ट्रंप की सरकार ने हथियारों पर नियंत्रण के समझौतों से निकलने को भी अपनी कार्यसूची में शामिल कर लिया और साथ ही वह मध्यम दूरी के परमाणु हथियारों के समझौते और इसी तरह ओपन स्काई संधि से निकल चुकी है. वहीं, वह नए स्टार्ट समझौते की समयसीमा न बढ़ाने की कोशिश में है.

इतना ही नहीं, ट्रंप ने अमेरिका को यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार परिषद से भी निकाल लिया है. ट्रंप अमेरिका व यूरोप और अमेरिका व चीन के बीच आर्थिक युद्ध का भी कारण बने हैं. उन्होंने नाटो में अमेरिका के रोल पर भी सवाल उठाए हैं. ट्रंप के इस रवैये से अमेरिका व यूरोप के बीच मतभेद काफ़ी गहरे हो गए हैं. फ़्रांस के विदेश मंत्री लोद्रियान के शब्दों में, “ट्रंप, ‘अमेरिका फ़र्स्ट’ के नारे के साथ ह्वाइट हाउस पहुंचे थे लेकिन अब उन्होंने अपने पैर ज़्यादा ही पसार लिए हैं और ‘ओनली अमेरिका’ का नारा लगा रहे हैं. इसका मतलब यह है कि अमेरिका, सभी के साथ सत्ता की जंग लड़ रहा है और हर तरह की बातचीत में सिर्फ़ अपनी श्रेष्ठता की कोशिश में है.”

इन हालात में राजनीतिक व सामरिक मोरचे पर रूस और व्यापारिक व आर्थिक मोरचे पर चीन ने ट्रंप के राष्ट्रपतिकाल में विश्वमंच पर अमेरिका के रुख़ की कड़ी आलोचनाएं की हैं. रूस व चीन दोनों अमेरिका के मुख्य प्रतिस्पर्धी हैं. एकपक्षवाद पर जोर देते ट्रंप के अमेरिका, जो अब भी अपनेआप को श्रेष्ठशक्ति और दुनिया का अकेला सुपर पावर समझता है और इसी भ्रम के चलते वैश्विक मामलों में दूसरों के लिए दायित्वों का निर्धारण करता है, के ख़िलाफ़ रूस की आलोचना का सबसे अहम विषय एकपक्षवाद ही है. चीन का भी मानना है कि ट्रंप का एकपक्षवाद आज दुनिया में व्यापारिक युद्ध, आर्थिक प्रगति में कमी और विभिन्न देशों में आर्थिक अराजकता का कारण बना है.

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लब्बोलुआब यह है कि अमेरिका को दुनिया के देश आज सुपरपावर की तरह ट्रीट नहीं कर रहे, वहीं, उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खब्ती व सनकी की संज्ञाएं दी जा रही हैं. इस सबके जिम्मेदार ट्रंप ही हैं जिन्होंने मनमानी-दर-मनमानी कर अपने मुल्क को तकरीबन दयनीय हालत में पहुंचा दिया है, यानी, हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे वाली स्थिति है.

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