दुनियाभर के देशों की उन गर्भवती महिलाओं के लिए एक अच्छी खबर है जो अपने होने वाले बच्चे को अमेरिकी नागरिक बनाने का सपना देख रही हैं. प्रजनन के अंतिम हफ्तों में प्रशांत महासागर के पश्चिमी छोर पर सैपनटापूसमूह (नौर्दर्न मैरीना आइलैंड्स) पर पर्यटन के नाम पर घूमनेफिरने आएं और अपने नवजात शिशु के साथसाथ उस के अमेरिकी नागरिक होने का सर्टिफिकेट भी लेते जाएं. यह आईलैंड अमेरिकी जमीन है.

यह स्थान इन दिनों चीनी लोगों के लिए बर्थ टूरिज्म का केंद्र बनता जा रहा है. चीनी महानगर शंघाई या गोंजेओ से मात्र 4-5 घंटे की फ्लाइट है और 45 दिन के लिए तो वीजा की भी दरकार नहीं है. यहां बड़े आकर्षक और मनोहारी समुद्रतट हैं, खरीदारी के लिए मौल, कैसिनो और अस्पताल हैं. स्थानीय चामोरो समुदाय के लोगों की अपनी मेलजोल वाली संस्कृति है. वर्ष 2009 में पहली बार अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में जब बदलाव हुआ था तब नियमादोष के चलते साल के अंत तक मात्र 9 चीनी पर्यटक गर्भवती महिलाएं आई थीं, जिन की संख्या अब बढ़ कर 472 हो गई है. इस का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब एक लास एंजिल्स से गई गायनीकोलौजिस्ट ने अवैध इमिग्रेशन और करों की चोरी में संशय होने की शिकायत पर एफबीआई से शिकायत कर दी थी. एफबीआई कुछ मामलों में जांच कर रही है, पर धंधा बदस्तूर जारी है. एंकर बेबी के नाम से इस बहुचर्चित कारोबार में पड़ोसी देश कनाडा के बाद चीनी समुदाय ने लास एंजिल्स और इस के आसपास के छोटे नगरों में गहरी जड़ें जमा ली हैं. इस कारोबार में चीनी समुदाय के एक गिरोह ने एक वैबसाइट भी तैयार की है, जिस के जरिए गर्भवती महिलाओं को प्रजनन के अंतिम सप्ताहों में बर्थ टूरिज्म के लिए कैलिफोर्निया लाया जाता है. हालांकि एंकर बेबी के लिए भारत से भी गर्भवती महिलाएं आती हैं पर उन की संख्या बहुत कम है.

पियु रिसर्च सैंटर के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाले 12 बच्चों में से 1 बच्चा एंकर बेबी होता है. इन में साल 2013 में कुल 36 हजार बच्चे एंकर बेबी थे, जो वैध रूप से बर्थ टूरिज्म के कारण हुए थे. लेकिन अमेरिका में ऐसे लाखों हिस्पैनिक पेरैंट्स हैं जो पंजीकृत नहीं हैं और उन के प्रतिवर्ष 3 लाख बच्चे पैदा होते हैं. इन का अमेरिकी नागरिक के रूप में पंजीकरण होता है. टैक्सास प्रशासन ने वर्ष 2015 में नवजात शिशुओं को सर्टिफिकेट देने में असमर्थता जताई थी, लेकिन यह फैसला अवैधानिक करार दिया गया. कनैडियन नागरिक अमेरिकी महिलाओं को सरोगेसी मदर के रूप में अपना रहे हैं. इस का खर्च बड़ा है. इस धंधे में मोटी कमाई करने वाले चीनी बिचौलिए ट्रांसलेटर कहे जाते हैं. ये गर्भवती महिला से बतौर पैकेज 50 हजार से 80 हजार डौलर लेते हैं. इस पैकेज में एक महिला के चीन के किसी नगर से अमेरिका आनेजाने, अस्पताल में शिशु के जन्म आदि पर व्यय और समीप में किसी अपार्टमैंट में ठहरने के लिए आधी धनराशि पेशगी ले ली जाती है. यही ट्रांसलेटर नवजात शिशु के लिए पासपोर्ट की भी व्यवस्था करता है. अमूमन एक सामान्य अस्पताल में नौर्मल डिलीवरी के लिए 7,500 डौलर तथा सिजैरियन के लिए 10, 500 डौलर फीस चुकानी पड़ती है, जबकि दवाओं का व्यय अलग है.

पियू रिसर्च सैंटर की रिपोर्ट पर भरोसा करें, तो वर्ष 2013 में 2 लाख 75 हजार महिलाएं पर्यटक के रूप में अमेरिका आई थीं. इन में हजारों गर्भवती थीं. यूएस इमिग्रेशन ऐंड कस्टम एनफोर्समैंट ने लास एंजिल्स, अरवाईंन, सेंटा क्लारा आदि नगरों में 40 स्थानों पर छापे मारे थे. इन छापों के दौरान इस धंधे में लिप्त कौंट्रैक्टर के रूप में काम करने वाले ट्रांसलेटर अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों और टैक्स में अनियमितता तथा वीजा अवधि के बिना अनुमति समयावधि से अधिक ठहरने आदि के आरोपी पाए गए थे. इन में कुछ पर केस भी चल रहे हैं.

यह आश्चर्य की बात है कि जो चीन अमेरिका सा लगने लगा है और लगातार तेजी से अपने नागरिकों की दशा सुधार रहा है, वहां भी लोग अमेरिकी नागरिकता पाने के लिए बेचैन रहते हैं. ध्यान रहे, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान एंकर बेबी कारोबार में अनियमितता के सवाल पर संविधान के 14वें संशोधन में बदलाव किए जाने का आश्वासन दिया था. यही नहीं, ट्रंप ने चुनाव अभियान में मैक्सिको सीमा पर दीवार खड़ी करने का भी आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक दोनों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी है.

संविधान के अनुसार, अमेरिकी जमीन पर जन्म लेने वाले बच्चे को अमेरिकी नागरिकता प्रदान की जाती है. इस के लिए जन्म प्रमाणपत्र दिया जाता है. यही बच्चा आगे चल कर 18 साल की उम्र के बाद अपने माता और पिता को वैधानिक तौर पर ग्रीनकार्ड के रूप में अमेरिका का स्थायी निवासी बना कर अमेरिका ले आता है.

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