औफिस वह जगह है जहां व्यक्ति अपना पूरा समय बेहद व्यस्तता से गुजारता है. घर के वातावरण से एकदम उलट वहां का माहौल औपचारिक होता है और आप को भी औपचारिकता निभा कर औफिस के शिष्टाचार के अनुसार काम करना पड़ता है. ऐसे माहौल में काम करते समय व्यक्ति अकसर तनाव में आ जाता है और दिनभर में दोचार मौके ऐसे भी आते हैं जब हम अपना धैर्य खो देते हैं.

धैर्य खोने में केवल खोना ही होता है, पाना कुछ नहीं होता. इंसान जैसे ही धैर्य खोता है, गुस्सा और नाखुशी उस की जगह ले लेते हैं, जो आप के औफिस में बने रिश्तों को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसी मानसिकता का व्यक्ति जो भी कहता या करता है उस का उसे बाद में पछतावा होता है. औफिस में ऐसा होने पर व्यक्ति आपसी रिश्ते तो खोता ही है साथ में उस के प्रमोशन के अवसर भी समाप्त हो जाते हैं. अच्छा होगा कि आप अपने बौस, सहकर्मियों और औफिस के दूसरे स्टाफ या कस्टमर के साथ धैर्यपूर्वक बरताव करें. यही बरताव दूसरों से आप के रिश्ते बेहतर बनाता है और लोग आप को तवज्जुह देंगे व आप को काम करने में और आनंद आएगा.

अब यह जानना आवश्यक है कि आप किस तरह और कैसे अपने को अधीर होने से बचा सकते हैं. आप को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा.

रोजाना गहरी नींद लें : आप ने कभी नोटिस किया है कि जिस दिन आप भरपूर नींद ले कर उठते हैं उस दिन खुद को तरोताजा और यदि रात में नींद पूरी न हो तब आप खीझ और झल्लाहट महसूस करते हैं और आप का सारा दिन बोरिंग गुजरता है. मनोवैज्ञानिक अध्ययनों से साबित हो चुका है कि 6 से 8 घंटे की नींद बहुत जरूरी है और यदि नींद पूरी न हो तो दिनभर आलस्य रहेगा. ऐसे में औफिस या कार्यस्थल पर धैर्य धारण करना थोड़ा कठिन हो सकता है.

रोजाना ऐक्सरसाइज करें : नियमित ऐक्सरसाइज आप को दिनभर तरोताजा रखेगी. केवल 10 मिनट भी आप ने यदि नियमित व्यायाम कर लिया तो निश्चित रूप से आप को मानसिक शांति मिलेगी जो धैर्य धारण करने के लिए बेहद जरूरी है.

ब्रैकफास्ट रोजाना लें : रोजाना ब्रैकफास्ट लेना जरूरी है. इस से आप खुद को ऊर्जावान पाएंगे और खुशी का अनुभव करेंगे. स्टडीज बताती हैं कि ब्रैकफास्ट का याद्दाश्त और एकाग्रता से सीधा संबंध है. दिनभर मूड भी ठीक रहता है और स्ट्रैस का स्तर भी कम रहता है. ये सारी बातें धैर्य के लिए जरूरी हैं. आप खुद सोचें कि भूखे रहने पर आप को कुछ भी नहीं सूझेगा.

धैर्यवान होने के फायदे पर विचार  करें : घर से काम पर निकलने से पहले सोचें कि औफिस में धैर्य रखने के क्या फायदे हैं और यह दिनभर आप के काम को कैसे प्रभावित कर सकता है. आप जब इस बात को मानसिकरूप से बारबार दोहराएंगे तो आप औफिस में जरूर अधीर होने से खुद को रोक सकेंगे.

सब से हैलोहाय अवश्य करें : अपने साथ काम करने वालों से रोज हायहैलो अवश्य करें, चाहे वे आप को नापसंद ही क्यों न हों. सब के साथ सहयोग करें और उन के प्रति विनम्र रहें. इस का प्रभाव उन पर जरूर पड़ेगा और वे भी आप के साथ वैसा ही व्यवहार करना शुरू कर देंगे. इस से औफिस का वातावरण अधिक सुखद और खुशनुमा हो जाएगा, जो काम करने के लिए जरूरी है. यह सब बातें आप के धैर्य को चैलेंच नहीं करेंगी.

लोगों को हम नहीं बदल सकते : हम लोगों को नहीं बदल सकते पर उन के प्रति अपना रवैया जरूर बदल सकते हैं और यह सीख सकते हैं कि उन के व्यवहार पर हम किस तरह प्रतिक्रिया दे सकते हैं. यदि ऐसा करना जरूरी हो तो कुछ पल अवश्य रुकें और सोचें कि क्या वास्तव में प्रतिक्रिया देनी जरूरी है या नहीं?  यह पहली बार तो संभव नहीं होगा, क्योंकि इंसान का स्वभाव किसी बात पर तुरंत अपनी प्रतिक्रिया देने का होता है. इस के लिए आप को कोशिश करनी होगी. कुछ समय बाद आप अपनी प्रतिक्रिया देने पर नियंत्रण करना सीख जाएंगे.

अपना धैर्य परखें : आप चाहें तो खुद को उन परिस्थितियों पर विचार कर सकते हैं जो आप को अधीर बनाती हैं. इस तरह खुद को शांत और धैर्यवान बनाने की कोशिश करें. यह ऐक्सरसाइज आप के धैर्य धारण करने की क्षमता को बढ़ाएगी.

आत्मानुशासित बनें : धैर्यवान बनने का यह सब से जरूरी गुण है. खुद पर अपना कंट्रोल ही हमें हर बुराई को करने से रोकता है. इसी से हम किसी भी परिस्थिति में खुद को अधीर होने से बचा सकते हैं. क्योंकि एक बार धीरज खोया तो उस के बाद हमें भी पता नहीं चलता कि हम ने क्या कर दिया.

औफिस या काम की जगह पर कैसे धैर्यवान रहा जाए, यह सीखना जरूरी है, क्योंकि गुस्सा आने पर यदि हम एक पल के लिए ठहर जाएं तो उस के कारण उपजने वाले दुख से हम बच सकते हैं. इतना जान लें कि रोम एक दिन में नहीं बनता. आप को अपने इन सतत प्रयासों को अपनी आदत बनाना होगा, तभी औफिस आप को दूसरा घर लगेगा, जहां आप अपनी आजादी से काम करने का आनंद उठा सकेंगे.

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