Childbirth : अच्छीभली बात का बतंगड़ बनाना बड़ा आसान है. साउथ कोरिया की औरतों ने बच्चे पैदा करने वाली मशीन बनने से इनकार कर दिया है तो दुनियाभर में रोना रोया जाने लगा है कि फोर बी की समर्थक ये औरतें दक्षिणी कोरिया का नामोनिशान मिटा देंगी क्योंकि वहां आबादी घटती चली जाएगी.

यह हल्ला मचाने वाले यह तो बता रहे हैं कि टोटल फर्टिलिटी रेट के .79 पर गिर जाने से 2100 तक 2 करोड़ आज के 6 करोड़ के मुकाबले रह जाएगा, पर वे यह नहीं बताते कि आज दक्षिणी कोरिया में पर स्क्वेयर किलोमीटर में 515 लोग रहते हैं और दुनिया की सब से बड़ी आबादी वाले देश भारत में 431 रहते हैं.

मजेदार बात यह है कि दुनिया के सब से अमीर देश स्विट्जरलैंड में पर स्क्वेयर किलोमीटर में सिर्फ 203 लोग रहते हैं और वहां कोई हायहाय नहीं हो रही है कि लोग कम क्यों हैं.

असल में इस हायहाय के पीछे वे मर्द हैं जो चाहते हैं कि औरतें सिर्फ बच्चे पैदा करने वाली मशीनें बनी रहें और इस तरह घरों में उन को खाना पका कर देने वाली, सैक्स सुख देने वाली, उन के बच्चे पालने वाली, घर को साफसुथरा रखने वाली, कपड़े धो कर रखने वाली बनी रहें. साउथ कोरिया की औरतों ने बिना आंदोलन किए, बिना जुलूस निकाले, बिना कानूनों के चुपचाप फैसले लिए और आज वे वहां पुरुषों के बराबर खड़ी होने लगी हैं. हालांकि अभी भी साउथ कोरिया की औरतों को पुरुषों के मुकाबले 33% कम सैलरी मिलती है पर धीरेधीरे यह गैप घट रहा है क्योंकि अभी तो पुरानी परंपराएं वहां जिंदा हैं. 1992 में कोरियाई औरतों को पुरुषों के मुकाबले आधा वेतन ही मिलता था.

चाइल्ड बर्थ औरतों की आय और कैरियर में सब से बड़ी रुकावट है और इसे नकार कर कोरियाई औरतें एक आदर्श स्थिति खड़ी कर रही हैं. हैट्स औफ टू साउथ कोरियाई वूमन कि उन्होंने पुरुषों की दासी बनने से इनकार कर दिया है.

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