शहरों को सुंदर बनाने में भी अब राजनीतिक दलों की रुचि होने लगी है. लखनऊ में गोमती के किनारे रिवर फ्रंट को ले कर अखिलेश यादव अपनी पीठ थपथपाते हैं तो नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में साबरमती के रिवर फ्रंट को ले कर. नरेंद्र मोदी आजकल अपना बहुत समय दिल्ली के राजपथ के दोनों ओर सैंट्रल विस्टा और नया संसद भवन बनवाने में बिता रहे हैं और उन की रुचि राममंदिर में फिलहाल न के बराबर है जिस पर वैसे भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कब्जा है.

शहरी आबादी निरंतर बढ़ रही है और आमतौर पर सिर्फ बहुत महंगे इलाकों को छोड़ कर शहरों में रहने वाले खुली हवा व हरियाली को तरस रहे हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि राज्य सरकार व नगर निकाय अपने बजट का बड़ा हिस्सा आम जनता के लिए बड़ेबड़े बाग बनवाने व आसपास के खुले इलाकों को विकसित करने में खर्च करें. आजकल सरकारी 20-30 मंजिले सचिवालयों और कार्यालयों, अदालतों को बनवाने की जो होड़ लगी है वह असल में जनता पर शासकों का भय दर्शाने के लिए है.

जहां बाग और रिवर फ्रंट में आम आदमी और उस का परिवार राहत महसूस करता है, वहीं विशाल अदालत भवन, पुलिस मुख्यालय या दूसरी सरकारी इमारतें उस का दम घोंटती हैं. राजपथ के दोनों ओर पिछले 70 सालों से हराभरा मैदान एक राहत देने वाला स्थान रहा है, जहां दिल्ली की घनी बस्तियों वाले कभीकभार आ कर चैन महसूस करते थे. धीरेधीरे कर के इसे जनता से छीन कर सरकारी कब्जे में लिया जा रहा है. सी हैक्सागन पहले ही सैनिक स्मारक की तरह विकसित कर दिया गया है और उस में आम जनता नहीं जा सकती, केवल जनता के प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी ही जा सकते हैं.

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नरेंद्र मोदी अपने लिए विशाल मकान और संसद भवन बनवा रहे हैं. सैंट्रल विस्टा आम जनता के लिए खुला रहेगा, इस में संदेह है. इस के विपरीत दिल्ली सरकार, जिस के पास आधेअधूरे हक हैं, कई जगह सड़कों को सुंदर कर रही है और यमुना के किनारे को विकसित करना चाह रही है पर केंद्र सरकार की एजेंसी, दिल्ली विकास प्राधिकरण, उस जमीन पर कुंडली मारे बैठी है. इस का श्रेय अरविंद केजरीवाल को न चला जाए, केवल इसलिए वह वहां कुछ नहीं होने दे रही. ऐसा ही कुछ हर राज्य, हर शहर में हो रहा है.

बढ़ती शहरी आबादी को जो ठंडी हवा चाहिए वह मौलिक अधिकार होने के साथसाथ उस की आवश्यकता भी है. शहरी आबादी अपने अधिकांश घंटे बंद दफ्तरों, कारखानों या घरों में बिताती है और उसे सप्ताह में मुश्किल से 3-4 घंटे मिलते हैं जब कहीं राहत की सांस ले सके. साफ हवा और पार्क वगैरह को विकसित करने को अब शासन का अहम हिस्सा मानना चाहिए. पेड़, बाग, झरने, खेलकूद के लिए स्थान, साफसुंदर सड़कें, पटरियां आज हिंदूमुसलिम विवादों, चीनपाकिस्तान, राममंदिर, काशी कौरिडोर, चारधाम यात्रा से ज्यादा महत्त्व की हैं. समाजवादी पार्टी और मायावती का चुनावों में गोमती रिवर फ्रंट का मुद्दा उठाना एक अच्छा संकेत है. यह अयोध्या के घाटों से कहीं ज्यादा जरूरी है जहां पंडों की बरात जमा हो जाएगी और भिखारियों का जमावड़ा हो जाएगा.

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