निरंतर धर्म प्रचार का नतीजा यह है कि देशभर में हिंदू रिलिजयर्स टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है और चारधाम, काशी कौरीडोर, तिरुपति, वैष्णो देवी के साथ छोटेछोटे देवीदेवताओं के आगे भी भीड़ बढ़ रही हैं. झारखंड के देवधर व ट्रौली की दुर्घटना ऐसी ही एक भीड़ का मामला है जिस में रोपवे ट्रौली का इतिहास तो जम कर हुआ पर भक्तों की लगातार ताता लगा रहने के कारण उस की मरम्मत का काम पूरा नहीं हो सका और अप्रैल में रोपवे की रोप टूटने की वजह से कई की मौत हो गई.
धर्म प्रचार की वजह से पर्यटन का मतलब तीर्थ हो गया है. हिंदू भक्तों के प्रवचनों, पंड़ों, टेलीविजन वे भक्ति चैनलों ही नहीं न्यूज चैनलों पर भी बारबार कहा जा रहा कि फलां देवी की बड़ी आस्थता है, फलां बहुत महान है, फलां जगह जाने से सारे काम सिद्ध हो जाते हैं, फलां दानपुण्य या उपवास करने से व्यापार में मंदी या घर का क्लेश दूर हो जाता है.
औरतों को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है और अच्छी पढ़ीलिखी औरतों को भी या तो पकवान बनाने के लिए रसोई में धकेला जा रहा है या फिर वर्तमान व भविष्य सुधारने के लिए घर के या बाहर के पूजा घर में हर तीर्थ स्थल पर जहां पहले सन्नाटा रहता था आज हजारों की भीड़ उमडऩे लगी है क्योंकि सरकारी और गैरसरकारी प्रचार इतना जम कर के है कि आम व्यक्ति सोचता है कि जब सब कर रहे हैं तो वह भी कर ले.
ईसाई प्रचारक संडे को काम नहीं करने देते ताकि लोग चर्च में आ कर पादरी का भाषण सुनते जाए और चलते समय दान देते जाएं. अमेरिका आज अगर पिछडऩे लगा है, वहां कालागोरा, अमीरगरीब भेद बढ़ रहा है और चीन कोरिया जैसे देश वहां की अर्थव्यवस्था पर कब्जा कर रहे हैं तो इसीलिए कि पादरियों का प्रचारतंत्र पिछले दशकों में तेज हुआ. रूस में भी कम्युनिज्म के बाद बढ़ा और आज रूस यूक्रेन युद्ध के पीदे और्थोडोक्स चर्च है जिस की शिकार हजारों रूसी औरतें हो रही हैं जिन के पति या बेटे मरे और अर्थव्यवस्था डांवाडोल हो गई.
अफगानिस्तान में इस्लामी प्रचारतंत्र का बोझा औरतें ही ढो रही है. श्रीलंका में बौद्धिसहली बनाम हिंदू तमिल झगड़े से पहले तो गृहयुद्ध हुआ फिर अब आर्थिक धमाका. ये सब धर्म प्रचार का नुकसान है जो हमारी औरतें भी झेल रही हैं.
नवरात्रों में खास खाना ही खाना बनाना होगा होगा यह औरतों के लिए आफत है. पंडोपुजारियों ने तो फतवा जारी कर दिया पर 9 दिन तक चिकन में बेमतलब का खाना बनाना धर्म का रसोई में घुसना वैसा ही है जैसे छुट्टी में किसी देवीदेवता के दर्शन करने के लिए लंबी लाइन में लगना और मीलो पैदल चलना.
यह कहना कि यह एडवेंचर है, काम से अलग है, हिंदू संस्कृति बनाए रखने का जतन है तब माना जाता जब अंत में चढ़ावा न होता. हर रिलीजिमर्स टूरिज्म का अंत चढ़ावे से होता है जो औरतें अपने घरेलू बजट स काट कर देती है.