सारी दुनिया में कोरोना वायरस आज बहस और शोध का मुख्य विषय है.  इससे जुड़ी बहुत सी जानकारियां लगातार सामने आ रही हैं. इस वायरस के संबंध में पांच बिंदु ऐसे हैं जो अब तक सामने नहीं आ सके हैं.

1. अलग-अलग लोगों पर इस वायरस के असर में इतना अंतर क्यों है?

वैज्ञानिक इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं कि वायरस की चपेट में आने वाले लगभग 80 प्रतिशत लोगों में इसके लक्षण दिखाई तक नहीं देते जबकि शेष लोगों पर वायरस का गहरा असर होता है, बल्कि लोग इसका मुक़ाबला करते करते दम तोड़ देते हैं.

हांगकांग के मेडिकल कालेज के प्रोफ़ेसर लियोबोन का कहना है कि कोरोना वायरस की शिद्दत अलग अलग लोगों में बिल्कुल अलग अलग हो सकती है. चीन में देखा गया कि कुछ लोग वायरस की चपेट में आए मगर इस वायरस ने उन पर कोई असर नहीं दिखाया और कुछ लोगों की जान ले ली.

ये भी पढ़ें- #lockdown: ऐसा देश जिसे कोरोनावायरस की चिंता नहीं

2. क्या कोरोना वायरस हवा में भी फैल जाता है?

यह तो सब जानते हैं कि कोरोना वायरस छींक या खांसी के समय निकलने वाली बूंदों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाता है मगर क्या वह वायरस मौसमी इनफ़्लुएंज़ा की तरह हवा में भी फैल सकता है, इस सवाल का अभी निश्चित उत्तर नहीं मिल सका है.

न्यू इंगलैंड मेडिकल मैगज़ीन में छपे शोध के अनुसार, प्रयोगशाला में देखा गया कि वायरस तीन घंटे तक हवा में रह सकता है मगर यह नहीं पता चल सका कि हवा में बाक़ी रहने वाले पार्टिकल्स बीमारी को भी ट्रांस्फ़र करने की क्षमता रखते हैं या नहीं. पैरिस के सेंट अंतवान अस्पताल में संक्रामक रोग इकाई की प्रोफ़ेसर कारीन लाकोम्ब का कहना है कि हमें यह तो पता है कि हवा में मौजूद इस वायरस के टच में हम आते हैं लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि हवा में मौजूद यह वायरस संक्रामक होता है या नहीं?

3. किसी देश में संक्रमित लोगों की असली संख्या क्या है?

जिस समय ब्रिटेन ने अपने यहां संक्रमितों की सरकारी संख्या 2000 से कम बताई थी उस समय पूरे देश में 55 हज़ार से अधिक संक्रमित मौजूद थे. इसलिए किसी भी देश के लिए सही आंकड़ा निर्धारित कर पाना कि कितने लोग संक्रमित हैं, बहुत कठिन काम है. इसके लिए शोध के नए चरण का इंतेज़ार करना होगा.

4. क्या गर्मी का मौसम कोरोना वायरस को ख़त्म कर देता है?

क्या तेज़ धूप से कोरोना वायरस बेअसर हो जाता है, इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी संभावना से इंकार तो नहीं किया जा सकता लेकिन यक़ीन के साथ कुछ कह पाना भी संभव नहीं है. इंफ़्लुएंज़ा के दूसरे वायरस तो सर्द मौसम में ज़्यादा समय तक जीवित रहते हैं और फैलते हैं. मगर हारवर्ड युनिवर्सिटी के शोध में पता चला कि केवल तापमान बढ़ने से कोरोना वायरस नहीं मिटता.

5. क्या वजह है कि बच्चे बहुत कम ही वायरस की चपेट में आते हैं?

नेचर मैगज़ीन ने चीन में किया गया शोध प्रकाशित किया है जिसके अनुसार दस बच्चों का निरीक्षण किया गया जो कोरोना से संक्रमित थे ताकि यह देखा जाए कि उन पर वायरस का क्या असर होता है? नतीजा यह निकला कि कोरोना से केवल उन्हें हल्का सा गले का इंफ़ेक्शन हुआ, हल्की खांसी और हल्के बुख़ार के बाद वायरस ख़त्म हो गया.

ये भी पढ़ें- #lockdown: आग से निकले कढ़ाई में गिरे, गांव पहुंचे लोग हो रहे भेदभाव का शिकार

शोधकर्ताओं का कहना है कि हमें यह नहीं पता चल सका कि बच्चों में कोरोना का असर इतना हल्का क्यों होता है? उम्मीद की जानी चाहिए कि वैज्ञानिक इन बिंदुओं का भी जवाब ढूंढ़ लेंगे.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...