भारतीय मूल के और भारतीय ससुर के दामाम होने के बावजूद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रिषी सुनक भी भारतीयों के इंग्लैंड में प्रवेश पर पाबंदियां लगाने लगे हैं. इंग्लैंड के कट्टरपंथी अब रेस रिलिज्य व कलर को लेकर उसी तरह बेचैन होने लगे हैं जैसे भारतीय प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से ले कर आप की गली के नुक्कड़ के मंदिर के पुरोहित हैं. उन्हें लगता है कि ग्रेट ब्रिटेन में जल्दी ही गोरे मूल निवासी बन रह जाएंगे. उन्हें भी गोरों की कम जन्मदर और भूरों, कालों की जन्मदर के बारे में व्हाट्सएप ज्ञान उसी तरह बांटा जा रहा है जैसा भारत में बांटा जा रहा है.

भारतीय प्रधानमंत्री इस बार में बात करने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते. अमेरिका की भारतीय रक्त वाली कमला हैरिस और गृह ब्रिटेन के पूरे भारतीय रक्त वाले रिषी सुनक को ले कर भारतीय जनता पार्टी ने न तो देश भर में घी के दिए जला कर न देश में ढोल में पीटे कि यह कारनामा पार्टी की उपलब्धि है क्योंकि इन दोनों विश्व नेताओं ने भारत के प्रधानमंत्री से कोई ज्यादा लाड नहीं जताया.

भारतीयों का वीसा ले कर ग्रेट ब्रिटेन में प्रवेश करने के लिए कतारों में खड़ा रहना तो चालू है ही, हजारों जोखिम भरी इंग्लिश चैनल छोटीछोटी बातों में यूरोपीय मेनलैंड से चल कर प्यार पा रहे हैं ताकि वहां जा कर कह सकें कि उन्हें अपने देश की सरकार से खतरा है. दुनिया भर में जो भारतीय गैरकानूनी ढंग से फैले हुए हैं उन में से बहुतों ने यही कहा है कि वे अपने मूल देश में भेदभाव, जुल्मों सरकारी तानाशाही के शिकार हैं और उन्हें राजनीतिक शरणार्थी के तौर पर शरण दी जाए. इस तरह वे कानून बहुत से यूरोपीय देश में हैं कि वे किसी भी शरण मांगने वाले को बिना सुनवाई के भगाएंगे नहीं. इस सुनवाई के दौरान भारतीय शरण मांगने वाले अपने घर हो रहे जुल्मों की झूठी अच्छी कहानियां अदालत को सुनाते हैं.

यह अफसोस है कि ङ्क्षहदू होते हुए भी रिषी सुनक ने अपने धर्म भाईयों की नहीं सुनी. उन्हें धर्म भाईयों और रक्त भाइयों की नहीं, अपने नए देश के नागरिकों की वोटों की ङ्क्षचता है. रिषी सुनक जैसे भारतीय मूल के लोग ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका में ही नहीं और बहुत से देशों में हैं जो अपने देश को एक बुरा सपना मान कर त्याग चुके हैं. वे भारतीय मूल के हो कर भी भारत सरकार की हां में हां नहीं मिलाते.

उस से अच्छे थे तो पिछले एक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनेल्ड ट्रंप थे जो दिल्ली, मुंबई में टं्रप टौवर बनवाने के लिए अमेरिका के हाउसटन में नरेंद्र मोदी की भारतीय मूल के लोगों की सभा में खड़े हुए थे और फिर भारत भी ऐन कोविड से पहले आए थे जब अहमदाबाद में वे नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ‘एक बार फिर ट्रंप सरकार’ के नारे से गदगद हुए थे. रिषी सुनक और कमला हैरिस जो यहाकदा पूजापाठ करने भारत आते हैं को धर्म विद्रोही क्यों नहीं घोषित किया जाए.

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