विश्व बैंक का कहना है कि फ्रांस को पीछे छोड़ कर भारत अब विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. आंकड़ों में दावा किया गया है कि 2017 के अंत में भारत का सकल घरेलू उत्पाद फ्रांस के 2.582 ट्रिलियन डौलर की तुलना में 2.597 ट्रिलियन डौलर पहुंच गया था.

भारत से ऊपर अमेरिका, चीन, जापान, जरमनी और ब्रिटेन हैं. अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद 19.390, चीन का 12.237, जापान का 4.872, जरमनी का 3.677 ट्रिलियन डौलर है. 8वें स्थान पर ब्राजील, 9वें पर इटली और फिर कनाडा है.

इस से पहले ईज औफ डूइंग यानी कारोबार करने की सहूलियत के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ बताया गया. इस सूची में भारत 190 देशों में 100वें स्थान पर आ गया. विश्व बैंक ने भारत को कारोबार करने के माहौल में सुधार करने वाले शीर्ष 10 देशों में रखा है.

जनवरी में भारत को उभरती हुई अर्थव्यवस्था में 62वें स्थान पर बताया गया था. वर्ल्ड इकोनौमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, भारत तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था वाला देश है. समावेशी विकास सूचकांक पर उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में चीन, पाकिस्तान, नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका को भारत से आगे दिखाया गया है. नेपाल 22वें, चीन 26वें, बंगलादेश 34वें, श्रीलंका 40वें और पाकिस्तान 47वें स्थान पर हैं.

फोरम कुछ मानकों के आधार पर यह रिपोर्ट जारी करता है. मानकों में देश के लोगों के रहने का तरीका, पर्यावरण में ठहराव और भविष्य में पीढि़यों के आगे कर्ज से संरक्षण जैसी बातें शामिल होती हैं.

ट्रांसपैरेंसी इंटरनैशनल की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक में 180 देशों में भारत 81वें नंबर पर शोभायमान है. पहले स्थान पर न्यूजीलैंड, दूसरे पर डेनमार्क और तीसरे पर स्वीडन है.

वैश्विक लिंग गैप रिपोर्ट 2017-18 में 108 देशों की सूची में भारत 144वें स्थान पर है. वर्ल्ड इकोनौमिक फोरम की इस रिपोर्ट में नार्वे पहले, फिनलैंड दूसरे और रवांडा तीसरे स्थान पर है.

वैश्विक आतंकवाद सूचकांक में 163 देशों की सूची में भारत 8वें नंबर पर है. एक नंबर पर इराक, दूसरे पर अफगानिस्तान और तीसरे पर नाइजीरिया है.

वैश्विक युवा विकास सूचकांक में 183 देशों में हम 133वें नंबर पर हैं. एक नंबर पर जरमनी, दूसरे पर डेनमार्क और तीसरे पर आस्टे्रलिया है.

ग्लोबल पीस इंडैक्स 2018 में 163 देशों की सूची में भारत 137वें स्थान पर है. सीरिया सब से आखिर में है.

ग्लोबल डैमोक्रेसी इंडैक्स में भारत 42वें स्थान पर है. मानव विकास सूचकांक में भारत 140 देशों में 131वें स्थान पर है. प्रथम स्थान पर नार्वे, दूसरे पर आस्टे्रलिया, तीसरे पर स्विट्जरलैंड को दर्शाया गया है.

स्वास्थ्य की देखभाल के मामले में 195 देशों की सूची में 145वें स्थान पर भारत, पाकिस्तान 154, बंगलादेश 132, अफगानिस्तान 191, श्रीलंका 71, नेपाल 149 और भूटान 134वें स्थान पर है. स्विट्जरलैंड पहले, स्वीडन दूसरे, नार्वे तीसरे स्थान पर शीर्ष पर हैं.

प्रैस फ्रीडम इंडैक्स में 180 देशों की सूची में हमारा 138वां स्थान है. पाकिस्तान 139वें और बंगलादेश 146वें स्थान पर है.

वर्ल्ड हैप्पीनैस सूचकांक 2018 की 156 देशों की सूची में भारत को 133वें नंबर पर दिखाया गया है. एक नंबर पर फिनलैंड, दूसरे पर नार्वे जबकि तीसरे पर डेनमार्क है.

इन में कुछ तथाकथित उपलब्धियों वाली सूचियों पर सत्ताधारी दल द्वारा तालियां पीटी जा रही हैं पर भारत में अभी भी करोड़ों लोग भुखमरी के शिकार हैं. करोड़ों लोग छत से वंचित हैं. प्रतिवर्ष बदतर होती स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते लाखों लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं.

अर्थव्यवस्था में छठे स्थान पर आने से खुश होने वालों को यह नहीं दिखता कि भारत की आबादी 134 करोड़ के लगभग है जबकि फ्रांस की केवल 6.7 करोड़ ही है. चीन दूसरे नंबर पर क्यों है? आबादी ज्यादा है तो क्या सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि नहीं होनी चाहिए? अधिक आबादी क्या संसाधन का अधिक होना नहीं है? इसी आबादी यानी श्रमशक्ति के बूते चीन अपने उद्योगों व उत्पादन का विस्तार करते हुए उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में वैश्विक बाजार में सब से बड़े उत्पादक और निर्यातक देशों में शुमार हो सका है.

भारत फ्रांस जैसे देशों से प्रतिव्यक्ति आय (लगभग 7.060 हजार डौलर) के मामले में भी बहुत पीछे है. चीन की आबादी भारत से ज्यादा है, फिर भी उस की प्रतिव्यक्ति आय 16.760 डौलर है. तुलनात्मक रूप से विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था अमेरिका की प्रतिव्यक्ति आय 60.200 डौलर है.

बदहाली की रिपोर्टें भी समयसमय पर आती रहती हैं. सितंबर 2017 में विश्व बैंक ने घटिया शिक्षा देने वाले देशों की सूची जारी की थी. बदतर शिक्षा देने वाले देशों में भारत दूसरे स्थान पर विराजमान है. पहले स्थान पर मलाया है. यह सूची इस आधार पर तैयार की गई कि जहां दूसरी कक्षा के बच्चे एक छोटे से अध्याय का एक शब्द तक नहीं पढ़ सकते. विश्व बैंक दुनिया के 12 देशों की सूची जारी करता है जहां की शिक्षा व्यवस्था सब से बदतर है.

विश्व बैंक की वर्ल्ड डैवलपमैंट रिपोर्ट 2018 ‘लर्निंग टू रियलाइज एजुकेशन प्रौमिस’ में कहा गया है कि ग्रामीण भारत में कक्षा 3 के छात्र मामूली सवाल भी हल नहीं कर सकते. रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना ज्ञान की शिक्षा से गरीबी को मिटाने और समाज में समृद्धि लाने के सपने को पूरा नहीं किया जा सकता. ज्ञान का यह संकट सामाजिक खाईर् को और बढ़ा रहा है. अगर लोगों को अच्छी शिक्षा दी जाती है तो वे बेहतर नौकरी, आय और स्वास्थ्य लाभ हासिल करते हैं वरना गरीबी में जीवनयापन करते हैं.

ईज औफ डूइंग में भारत की रैंक सुधरी है, ऐसा कहा जा रहा है. सवाल है कि कारोबार करने में सुगमता आईर् है तो विदेशी पूंजी निवेश घट क्यों रहा है? रिपोर्ट बताती है कि देश में पिछले कुछ समय से एफडीआई में कमी आई है.

इसी तरह एक सूची में भारत की फैली भुखमरी की पोल खुलती है. 2017 में जारी अंतर्राष्ट्रीय भुखमरी सूचकांक में भारत 119 देशों की सूची में 100वें नंबर पर था. उस से पिछले साल भारत 97वें स्थान पर रहा यानी 3 नंबर और ऊपर चला गया. अर्जेंटीना पहले, बेलारूस दूसरे, बोस्निया और हर्जेगोविना तीसरे स्थान पर हैं.

सरकारें केवल आंकड़ों के सहारे विकास दिखाना चाहती हैं जबकि हकीकत में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, बिजली, पीने का पानी जैसे बुनियादी मामलों में देश की हालत बदतर है. आज भी देश में कितने ही देशवासी भूखे पेट सोने को मजबूर हैं, कितने ही इलाज की सुविधा मुहैया न होने के चलते मर जाते हैं और कितने ही छत न होने की वजह से खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजार रहे हैं.

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