पूनम मेटकर  

ब्यूटीशियन व मेकअप आर्टिस्ट

कभी दीवारों पर अपने हाथ से एक पेपर पर लिख कर अपने पार्लर का ऐड करने वाली पूनम मेटकर से जब इस इंटरव्यू को करने के लिए समय मांगा तो उन्होंने खुशीखुशी अपने बेहद व्यस्त रूटीन को मैनेज कर ठाणे स्थित अपने खूबसूरत बड़े से पार्लर ‘चार्मी हेयर ऐंड ब्यूटी सैलून’ में आने के लिए कहा.

पेश हैं, उन से हुए कुछ सवालजवाब:

सब से पहले अपनी पढ़ाईलिखाई और परिवार के बारे में बताएं?

मैं मालेगांव, महाराष्ट्र से हूं, मायके में मम्मीपापा और हम 2 भाई, 3 बहनें हैं, मैं दूसरे नंबर की संतान हूं, पापा की ग्रौसरी की शौप थी. खाने वाले ज्यादा, कमाने वाले एक पापा. आर्थिक स्थिति ऊपरनीचे होती रहती थी. मुझे हर चीज को सजानेसंवारने का बचपन से ही बहुत शौक था. मैं पेंटिंग्स बनाती थी. पेंटिंग्स बेचने पर कुछ आमदनी हो जाती. मुझे यह धुन बचपन से थी कि मुझे कुछ करना है, कोई बिजनैस करना है. घर में खाली नहीं बैठूंगी. मैं ने इंग्लिश में एमए किया है. मेरी स्पोर्ट्स में भी बहुत रुचि थी. मैं अपनी यूनिवर्सिटी की फुटबाल टीम की कप्तान रही हूं. पापा ने कभी रोका नहीं, जो करना चाहा करने दिया.

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शादी कैसे हुई, पति क्या करते हैं और ससुराल से कैसा सपोर्ट मिला?

अरैंज्ड मैरिज थी. पति जीएसटी में असिस्टैंट कमिश्नर हैं. एमए करते ही शादी हो गई थी. मुझे कुछ करना ही था, मैं ने एयर होस्टेस बनने के लिए 1 साल का कोर्स भी किया, पर मैं प्रैंगनैंट हो गई तो इस काम के बारे में मुझे सोचना बंद करना पड़ा. फिर मैं ने मेकअप का 6 महीने का बेसिक कोर्स किया. 9 महीने के बच्चे के साथ 6 महीने का कोर्स करने में मुझे डेढ़ साल लग गया. पति ने हमेशा मुझे बहुत सपोर्ट किया.

फिर मैं ने घर में ही अपने बैडरूम में ही 1 साल ब्यूटीपार्लर का काम किया. बहुत लेडीज आने लगीं. किसीकिसी को मैं ने फ्री सर्विस भी दी. मैं चाहती थी कि एक बार लोग आएं और मेरा काम देखें. मुझे पता था कि कोई लेडी एक बार मुझ से अपना फेशियल करवा लेगी तो वह जरूर दोबारा मेरे पास आएगी.

मुझे अपने काम करने के ढंग पर पूरा भरोसा था. वही हुआ, जो एक बार आई वह दोबारा अपनेआप आई. उन दिनों की मेरी क्लाइंट्स आज भी मुझ से ही फेशियल करवाती हैं. मैं कितनी भी बिजी रहूं, वे मेरा इंतजार करती हैं. 20 साल हो गए वे मेरे पास ही आती हैं.

ससुराल में जौइंट फैमिली है. ससुर डाक्टर हैं. आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी है. मैं 7 बहुओं में छठे नंबर पर हूं. जब मैं ने अपने पार्लर की इच्छा बताई तो किसी ने सपोर्ट नहीं किया, सब का कहना था कि क्या जरूरत है, आराम से रहो. मुझ पर तो अपने पैरों पर खड़े होने की धुन सवार थी. मैं नहीं रुकी. पति ने बहुत साथ दिया. बहुत काम किया, खूब कोर्स किए, बहुत काम सीखा. जावेद हबीब के हेयर कट का कोर्स किया.

आज भी जहां भी कोई कोर्स, वर्कशौप होती है, मैं अटैंड करने की पूरी कोशिश करती हूं. बौलीवुड के मेकअप आर्टिस्ट पंडरी दादा जुकर से मैं ने बहुत कुछ सीखा है. सिम्मी मकवाना के साथ काम किया है. कुछ अरसा पहले अहमदाबाद में इंडिया की टौप मेकअप आर्टिस्ट ऋ चा दवे से 10 दिन की ट्रेनिंग ली. यह फील्ड ऐसी है जहां पढ़ाई कभी खत्म नहीं होती, रोज कुछ न कुछ नया आता रहता है, बहुत कुछ सीखने के लिए रहता है.’’

लौकडाउन में कैसा समय बीता?

औनलाइन क्लासेज कीं. घर में ही प्रैक्टिस की. वर्कहोलिक हूं, खाली नहीं बैठ सकती. मेकअप करने का तो इतना शौक है कि कोई रात में नींद से उठा कर भी कहे कि मेकअप कर दो तो भी खुशीखुशी करूंगी. बहुत ऐंजौय करती हूं मेकअप फील्ड का.

कितना स्टाफ है?

पहले 7-8 लड़कियां थीं, अब लौकडाउन के बाद 4 ही हैं. मेरे यहां जो मेड्स हैं, मैं उन की लड़कियों को भी पार्लर में बुला कर कोई न कोई काम सिखाती हूं ताकि वे जब चाहें अपना कोई काम कर सकें. वे घरघर बरतन धोने जाएं, उस से अच्छा मैं उन्हें छोटीछोटी चीजें सिखा दूं. उन्हें साफसुथरी जगह रह कर पैसे मिल जाते हैं और मुझे यह संतोष रहता है कि मैं ने किसी गरीब लड़की को कोई चीज सिखा दी. लौकडाउन के टाइम पूरे स्टाफ के घर राशनपानी भेजती रही.

मुझे लड़कियों, महिलाओं को आगे बढ़ते हुए देख बड़ी खुशी होती है. मैं चाहती हूं कि सब कुछ न कुछ करें, खाली बैठ कर अपना टाइम खराब न करें.

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टाइम के साथ इतना सब सीखते हुए, इतनी मेहनत से आगे बढ़ते हुए, इतने खूबसूरत पार्लर में व्यस्त रह कर लाइफ में कितना चेंज आया है?

एक टाइम था जब ठाणे से मुंबई की कितनी ही जगहों पर अपने पार्लर का सामान लेने लोकल ट्रेन में आयाजाया करती थी. मेरे 2 बेटे हैं. एक बार तो प्रैगनैंसी टाइम में मैं लोकल ट्रेन से दोनों हाथों में सामान भर कर वापस आ रही थी. इतनी भीड़ थी कि मैं ठाणे स्टेशन पर उतर ही नहीं पाई. डोंबिवली चली गई. उस दिन की परेशानी नहीं भूलती. आज जब अपनी कार और ड्राइवर ले कर बाहर निकलती हूं तो कई बार वे दिन भी याद आ ही जाते हैं. ऐसा लगता है जैसे अपने बैडरूम से एक पार्लर तक का लंबा सफर तय किया है. अभी यहां रुकना थोड़े ही है. अभी बहुत कुछ है जिसे सीख कर आगे बढ़ती रहूंगी.

ससुराल के जिन लोगों ने उस समय सपोर्ट नहीं किया, वे आज क्या कहते हैं?

अब वे घर की बाकी बहुओं से कहते हैं कि देखो पूनम को. ऐसे अपना शौक पूरा करना चाहिए. देखो कितनी मेहनत से आज भी अपने काम में व्यस्त है, उस से सीखो कुछ. सब बहुत तारीफ करते हैं. मेरे बारे में सब को गर्व से बताते हैं.

आप अपने फ्यूचर को कहां देखती हैं?

बहुत आगे, अभी अपने पार्लर की ब्रांचेज खोलूंगी, अभी तो मुझे यही सब जानते हैं, एक दिन ऐसा होगा कि मेरे सेमीनार हो रहे होंगे और 100-200 लोग सीखने के लिए आएंगे. मैं रातदिन एक कर रही हूं,        -पूनम अहमद द

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