जब पतिपत्नी दोनों ही कामकाजी हों और घरपरिवार भी न्यूकिलीयर साइज की हो तब घर के नन्हेमुन्नों की देखभाल की समस्या होती ही है. इसीलिए जरूरत होती है एक अदद आया की, जो बच्चे की देखभाल भी कर सके और घर को भी अपनत्व का एहसास दे सके. यहां प्रश्न यह उठता है कि ऐसी आया लाई कहां से जाए? इस के लिए कई प्लेसमेंट एजेंसियां हैं, जो फीस ले कर आप की जरूरत को पूरा करती हैं. आइए, जानते हैं कि ये एजेंसियां कैसे आयाएं मुहैया कराती हैं और इन एजेंसियों से कैसे सावधान रहें.
प्लेसमेंट एजेंसियां कैसीकैसी
किसी प्लेसमेंट एजेंसी से संपर्क करने से पूर्व उस के बारे में अच्छी तरह जानना जरूरी है. ये एजेंसियां आमतौर पर एक अच्छी फीस ले कर आया दिलवाती हैं. अगर एक आया पसंद न हो तो दूसरी और फिर तीसरी आया का इंतजाम भी ये करती हैं. 1 साल बाद फिर से कांटेक्ट को रिन्यू कर के ये एजेंसियां दोबारा से फीस लेती हैं. आया को रखने से पहले प्लेसमेंट एजेंसी की गुडविल को जरूर ध्यान में रखें.
कई एजेंसियां बेईमानी भी कर जाती हैं. रमोला के साथ ऐसा ही हुआ. उस ने एजेंसी से एक आया रखवाई. 2 दिन रहने के बाद वह चलती बनी और एजेंसी वाले आजकल करतेकरते कोई आया नहीं भेज पाए और फिर बाद में उन्होंने बताया कि हम पैसे वापस नहीं करते. बहुत कुछ कहनेसुनने के बाद उन्होंने एक चैक दिया, जो बाउंस हो गया. पुलिस से कहनेसुनने के बाद भी वे थोड़े से पैसे दे कर चलते बने. अगर आप कोर्ट के आंकड़े देखें तो प्लेसमेंट एजेंसियों की ठगी के ढेरों केस विचाराधीन मिलेंगे. फिर भी जरूरत होने पर इन्हीं के द्वारा आया का इंतजाम करना पड़ता है. धोखा खा कर पछताने से बेहतर होगा कि इन से डील करते समय इन के बारे में जानकारी हासिल अवश्य कर लें और सब कुछ देख कर ही आया का इंतजाम करें.
कैसीकैसी आयाएं
आया को घर में रखने से पहले इन के कुछ नेगेटिव पहलू भी समझ लें. वैशाली की बेटी करीब 1 साल की थी. उस ने बेटी के लिए आया का इंतजाम किया. आया युवा थी. वह घर में बच्ची को देखती. शाम को जब वैशाली और रवि लौटते तो उन्हें लगता कि आया बहुत अच्छी तरह बच्ची को रख रही है. एक दिन वैशाली की तबीयत ठीक नहीं थी. वह छुट्टी ले कर अचानक घर लौटी तो देख कर हतप्रभ रह गई. आया अपने बौयफेंड के साथ आपत्तिजनक अवस्था में थी और बच्ची गहरी नींद में सो रही थी. वैशाली के तो पैरों तले जमीन ही निकल गई. बाद में पता चला कि वह रोज बच्ची को नींद की दवा दे देती थी. वह जानती थी कि कुछ दवा से नींद भी आ जाती है और बाद का समय अपने प्रेमी के साथ गुजारती थी. बच्ची दवा के असर से उनींदी सी रहती थी. बमुश्किल उस आया को घर से निकाला.
इसी प्रकार एक और आया बड़े बच्चे को तंबाकू खिला देती थी पर उस का भांडा जल्दी फूट गया और बाद में पुलिस ने उस की अच्छी खबर ली. आयाओं के बुरे व्यवहार की कहानियां अकसर सुनने में आती हैं. एक आया बच्चे को बहुत पीटती थी और डरा कर रखती थी कि किसी को न बताएं. कुछ साल पहले यह खबर अखबारों की सुर्खियां भी बनी थीं. इन सब चर्चाओं का मकसद यही है कि आया रखते समय आप सावधानी बरतें और कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें :
आया से जुड़ी आप की जिम्मेदारियां
सब से पहले आया का पुलिस वैरिफिकेशन कराएं. इलाके के थाने में उस का फोटो, पता और जानकारी रजिस्टर कराएं. इस से एक तो आया को भी डर रहेगा, दूसरे, आप की सुरक्षा भी रहेगी. आजकल सब जानते ही हैं कि किसी नौकर या आया को रखने से पूर्व उस का आईडैंटिटीफिकेशन जरूरी होता है. आप बेहिचक यह कराएं.
आया का मेडिकल चैकअप भी अवश्य करा लें. यह ध्यान जरूर रखें कि उसे कोई छूत की बीमारी तो नहीं है. छोटे बच्चे बड़े कोमल होते हैं, उन के साथ रहने वाली आया रोगमुक्त होनी चाहिए.
आया की हाईजीन का पूरा ध्यान रखना भी जरूरी है. वह रोज नहा कर साफ कपड़े पहने और अपने हाथ धो कर साफ रखे. तभी वह बच्चे को गोद में ले या उसे खिलाए.
उस को यह भी समझा कर रखें कि जब बच्चा सो रहा हो तभी वह कुछ समय के लिए आराम कर ले पर बच्चे का ध्यान भी रखे. कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चा सो रहा है तो आया भी सो जाती है और बच्चा बेड से गिर जाता है. इन सब बातों का विशेष ध्यान रखें. बच्चा बहुत छोटा है तो सोने के बाद उस के चारों ओर कुशन या तकिए लगा कर वह अपने अन्य काम निबटा सकती है.
आया को हिदायत दें कि वह 1-2 बार फोन कर के स्वयं बच्चे के बारे में बताए कि वह क्या कर रहा है. बीचबीच में आप भी फोन करती रहें. इस से आया को ध्यान रहेगा कि आप कभी भी उस के बारे में पूछ सकती हैं.
अकसर आया की निगाहें बच्चे के दूध आदि पर होती है. उस का सब से अच्छा तरीका यही है कि स्वयं ही आया से कह दीजिए कि बच्चे को दूध उबाल कर दे. जो बचेगा उस से वह अपनी चाय बना ले. थोड़ा ज्यादा दूध दें, जिस से उस की नीयत भी नहीं बिगड़ेगी और वह बच्चे को आराम से दूध भी पिला देगी. बचे हुए दूध को तो उसे ही लेना है, वह चाय बनाए या खुद ले, उसे एक स्वतंत्रता तो मिलेगी ही. थोड़ा विश्वास तो आप को उस पर करना ही होगा.
आया थोड़ी ज्यादा उम्र की ही रखें. छोटी उम्र की आयाओं से डर रहता है कि उन के प्रेमी बन जाएंगे या घर में भी उन का रहना ठीक नहीं है. बड़ी परिपक्व आयु की आया ज्यादा मैच्योरिटी से काम करेगी.
समयसमय पर आया का मेडिकल चेकअप कराती रहें.
आया को बिना बात सब के बीच डांटें भी नहीं, यह उसे बुरा लग सकता है. आखिर उस का भी स्वाभिमान होता है. अलग से जा कर उसे जो कहना है, आराम से कह दें. मान लीजिए उस की कोई बात आप पसंद नहीं कर रहीं तो गंभीर शब्दों में उसे समझा जिए कि यह आप को पसंद नहीं है.
बातों का ध्यान रखें तो आया एक अच्छी मददगार साबित हो सकती हैं.