हल ही में कोरोना वायरस के डर के कारण दूल्हा जोसेफ यू और दुलहन कांग टिंग ने फैसला किया कि वे शादी समारोह से दूर रहेंगे. उन्होंने वीडिया कौल के जरीए वैडिंगहौल में मौजूद मेहमानों के सामने अपनी शादी की स्पीच दी और वीडियो कौल पर ही सभी मेहमानों ने उन्हें मुबारकबाद दी.

कांग टिंग का घर हुनान प्रांत में है. लूनर न्यू ईयर के लिए दोनों 24 जनवरी को चीन गए थे. 30 जनवरी को वे सिंगापुर लौटे और 2 फरवरी को उन की शादी होनी थी. शादी समारोह के लिए सिंगापुर के एक होटल में खास बुकिंग की गई थी. वैसे तो जोसेफ और कांग की शादी बीते साल अक्तूबर माह में चीन में हो गई थी, लेकिन उस वक्त जो मेहमान शादी में मौजूद नहीं हो पाए थे उन के लिए खासतौर पर इस दूसरी शादी का इंतजाम किया गया था.

जब मेहमानों को पता चला कि जोसेफ और कांग चीन से लौटे हैं तो कईर् लोगों ने शादी में आने से इनकार दिया, क्योंकि चीन ही कोरोना का जन्मस्थल है और उस समय तक वहां काफी केस आ चुके थे.

जोसेफ ने होटल से शादी की तारीख आगे बढ़ाने को ले कर बात की, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया तब उन्होंने तय किया कि वे शादी तो करेंगे, लेकिन मेहमानों के सामने नहीं जाएंगे.

कोरोना के कारण लगे प्रतिबंधों की वजह से कांग के मातापिता भी उन की इस शादी में शामिल नहीं हो सके. शादी 2 फरवरी को हुई और इस में करीब 190 मेहमान मौजूद थे. जोसेफ और कांग ने होटल के अपने कमरे से वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरीए शादी की स्पीच दी और सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया.

खुद ही करना पड़ा आमंत्रण को खारिज

‘शादी की पार्टी में न आएं. कोरोना वायरस के खतरे से बचने के लिए मेरी बेटी की शादी में शरीक न हों. हम ने इस आयोजन को साधारण रखने का फैसला लिया है. हम ने रिसैप्शन कैंसिल कर दिया है, इसलिए खुद को जोखिम में डाल कर शादी में आने की जरूरत नहीं है.’

यह संदेश उस पिता का है, जिस ने अपनी बेटी की शादी में पहले अपने मेहमानों को आमंत्रित किया और बाद में खुद ही मना कर दिया.

कोल्हापुर के रहने वाले संजन शेलार की बेटी की शादी 18 मार्च को थी. लड़के और लड़की वालों ने मिल कर 3 हजार के करीब आमंत्रण पत्र बांटे थे. सब को जोर दे कर कहा था कि वे शादी में जरूर आएं. लेकिन अब सरकार ने आदेश जारी किया है कि कहीं भी लोग बड़ी संख्या में न इकट्ठा हों. तब खतरे को देखते हुए सारे आयोजन स्थगित करने का फैसला लिया गया.

ये भी पढे़ं- अफवाहों का बाजार गरम रहेगा

किसी भी लड़के या लड़की के लिए शादी जीवन का बेहद खास मौका होता है. वे महीनों पहले से शादी की तैयारियां करते हैं. ऐसे ही ऋतुजा और किरण भी अपनी शादी को ले कर खासे उत्साहित थे.

दोनों ही कोल्हापुर के रहने वाले हैं. जब से शादी तय हुई थी तब से दोनों बेसब्री से अपनी शादी के दिन का इंतजार कर रहे थे. कपड़ों और गहनों की शौपिंग हो या शादी और अरेंजमैंट, मेहमानों की लिस्ट तैयार करनी हो या मैचिंग ड्रैस का और्डर देना हो हर चीज दोनों बहुत उत्साह से कर रहे थे.

दोनों के घर के लोग भी शादी की तैयारी में दिनरात लगे हुए थे. ऋतुजा और किरण ने आमंत्रण पत्र भी खुद पसंद किए थे. दोनों परिवारों ने अपने मेहमानों को आमंत्रण भेज दिया था. ऋतुजा और किरण ने व्हाट्सऐप पर भी शादी का आमंत्रण लोगों को भेजा था. शादी का लगभग सारा बंदोबस्त हो चुका था.

ऐसे समय में जब कोरोना के फैलने की खबर आनी शुरू हुई और सरकार ने सभी मौल, थिएटर, स्कूलकालेज और सार्वजनिक स्थलों को 31 मार्च तक बंद करने का आदेश जारी किया तब दोनों ही परिवारों के सामने यह सवाल खड़ा हुआ कि शादी के आयोजन का क्या किया जाए. अंत में शादी के कार्यक्रम को साधारण रखने का फैसला लिया गया और रिसेप्शन के कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया.

बदल गया माहौल

इसी तरह मुंबई के रहने वाले रिजवान शेख की शादी पहली अप्रैल को होने वाली थी. शादी और रिसैप्शन दोनों ही पहली अप्रैल को तय थी. वलीमा 3 अप्रैल को होना था. लेकिन फिर कोरोना के कारण बहुत कम लोगों की मौजूदगी में शादी हुई. रिसैप्शन और वलीमा का आयोजन रद्द कर दिया गया. हनीमून के लिए कराई गई बुकिंग भी रद्द कर दी गई.

कुछ ऐसा ही निकिता के साथ भी हुआ. मुंबई के नजदीक डोम्बीवली में रहने वाली निकिता पाडावे की शादी 18 मई को होने वाली थी. निकिता के लिए शादी की तारीख कैंसिल करना मुमकिन नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने हनीमून के टिकट कैंसिल करा दिए.

उन का हनीमून के लिए वाली जाना तय था. 19 मई की फ्लाइट बुक की हुई थी. लेकिन कोरोना वायरस के जोखिम को देखते हुए क्व62 हजार की फ्लाइट का खर्च बेकार गया.

शादी समारोह में हौल लोगों से भरा होता है. हमें नहीं पता होता कि कौन कहां से आया है, कौन हमारे संपर्क में आ रहा है और इन में से कौन कोरोना पौजिटिव है. किसी शादी के कार्यक्रम में यह पता लगाना संभव नहीं है कि किस में कोरोना के लक्षण हैं. ऐसी स्थितियों में बेहतर है कि कार्यक्रम बेहद संक्षेप में हो और सोशल डिस्टैंसिंग का पूरापूरा खयाल रखा जाए. मेहमानों के लिए शादी में शामिल होने से बेहतर है कि वे वीडियो संदेश द्वारा अपनी शुभकामनाएं नवलदंपती तक पहुंचाएं.

दरअसल, कोरोना के दौर ने जीवन और इस से जुड़ी घटनाओं को पूरी तरह से बदल दिया है. शादियां भी इस से अछूती नहीं रहीं. अब शादी को शानदार नहीं, बल्कि समझदारी से यादगार बनाने का समय है.

केवल शादी पर खर्च ही नहीं, अब शादी का मतलब है एकदूसरे को बिना घूमेफिरे झेलना. सासससुर देवरननद साथ हैं तो निभाना. नो छुट्टी. नो मायका. हर समय कोरोना की तलवार सिर पर.

कोरोना काल ने हमें कई सबक सिखा दिए हैं.

कम खर्च में शादी

क्या आप ने पहले कभी सोचा था कि केवल 50 लोगों को शामिल कर आप शादी का कार्यक्रम पूरा कर लेंगे? लोगों के दिलों में हमेशा से यह चाहत रहती आई है कि वे अपने या अपने बच्चों की शादी में अधिक लोगों को बुलाएं और बेहतर से बेहतर प्रबंध करें. अपनी शान दिखाएं. बात शादी के दावत की हो या सजावट की, रिसैप्शन की हो या दूसरे कार्यक्रमों की, लोग दूसरों के आगे जितना हो सके उतना दिखावा करते हैं. वे शादी की दावत में बढ़चढ़ कर व्यंजनों और फूड आइटम्स का अरेंजमैंट करते हैं ताकि लोग लंबे समय तक उन की दी गई पार्टी याद रखें.

मगर आप ने कभी सोचा है कि खाने में हम कितना भी खर्च कर लें पर कोई न कोई कमी निकल ही आती है. वैसे भी लोग आप की दावत का स्वाद 2 दिन में भूल जाते हैं. फिर किसी और की दावत खाते हैं और वहां की तारीफों के पुल बांधने शुरू कर देते हैं. जरा सोचिए अनापशनाप खर्च कर के मेजबान को क्या मिलता है? महज 2-4 दिन की तारीफ. इस के लिए रुपए पानी की तरह बहाना जरूरी है क्या?

ये भी पढ़ें- यह कैसा लोकतंत्र

चूक न हो जाए

सजावट के मामलों में भी यही देखा जाता है. घर को दुलहन की तरह सजाने की कोशिश में हम अपना बजट ही नहीं देखते, उस पर पंडितों की जेबें भरने का अलग कार्यक्रम संपन्न किया जाता है?.हम पंडितों के चेहरे पर एक भी शिकन नहीं देखना चाहते. उन का आशीर्वाद अपने ऊपर लेने की कोशिश में बढ़चढ़ कर दान करते हैं, उन की जेबें भरते हैं, हर तरह के धार्मिक रीतिरिवाजों को बिना कोई सवाल किए निभाते हैं. बस एक ही तमन्ना रहती है कि हम से कहीं जरा भी चूक न हो जाए. सबकुछ विधिविधान के अनुसार निबट जाए. बस पंडितों का आशीर्वाद मिल जाए ताकि दूल्हादुलहन की भावी जिंदगी में कोई तनाव न आए.

पर जरा सोचिए क्या सच में ऐसा हो पाता है? शादी कितने भी धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुई हो, 1-1 कदम पर पंडित के निर्देशों का अनुसरण किया गया हो पर जो जीवन में होना होता है वही होता है.

कितने भी ग्रहनक्षत्रों, कुंडलियों और रीतिरिवाजों का खयाल रखा जाए, शादी कई दिनों के धार्मिक ढकोसलों के बाद संपन्न हुई हो फिर भी रिश्ता टूटना/बेवफाई/तलाक की भागदौड़/लड़ाईझगड़े जैसी बातें होती रहती हैं. तो फिर क्या आप को नहीं लगता कि फुजूल में इन सब चीजों में इतने रुपए बरबाद कर के भी जब हमें कुछ खास हासिल नहीं होने वाला है तो क्यों न समझदारी से पैसे खर्च किए जाएं, सादगी से सारे काम निबटाए जाएं. दिखावे के बजाय केवल मन की खुशियों का खयाल रखें. सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटाने के बजाय खास और अपनों को बुला कर बिना ज्यादा तामझाम किए शांतिपूर्वक शादी का कार्यक्रम निबटा लें.

इस से भविष्य के लिए पैसे बचा कर आप निश्चिंत भी रहेंगे और बेमतलब की भागदौड़ और मानसिक तनाव से भी बचेंगे. वैसे भी कोरोनाकाल में लंबे समय तक आप को ऐसा ही करना पड़ेगा. 50 लोगों के साथ बहुत प्यार से अपनी शादी का कार्यक्रम संपन्न कराना होगा.

घूमनाफिरना बंद

कोरोनाकाल में वही शादियां सफल होंगी, जिस में पार्टनर से बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाने के बजाय पार्टनर के साथ तालमेल बैठाने को प्राथमिकता दी जाएगी. फिलहाल आप उन दिनों को भूल जाइए जब शादी के बाद हनीमून के नाम पर लंबाचौड़ा खर्च किया जाता था. अपने ड्रीम प्लेस में जा कर रोमानी पलों का आनंद लिया जाता था. अब शादी के बाद घर में पति, ननद, देवर और सासससुर के साथ बना कर रखने की कला ही आप को जीवन की खुशियां देगी. यह कला सीख कर आप दीर्घकाल तक सफल, सुखद जीवन का आनंद उठा सकेंगी. ननददेवर को भाईबहन मान कर यदि आप थोड़ा गम खाना सीख लें और उन की खुशी को तवज्जो देना शुरू करें तो आप को जीवन में कभी तनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा. आप उन के साथ समय बिताएंगी, उन के लिए कुछ करेंगी तो निश्चित तौर पर आप का रिश्ता परिवार के सभी सदस्यों के साथ खूबसूरत बनेगा.

नो औफिस नो मायका

अब शादी का मतलब है 24 घंटे घर को संभालने की जिम्मेदारी, क्योंकि कोरोना ने आप को औफिस से दूर कर रखा है. ज्यादातर मामलों में या तो आप को वर्क फ्रौम होम कर रही होंगी या फिर नौकरी छूट गई होगी. ऐसे में शादी के बाद दिनभर घर में ही रहना होगा. हो सकता है आप के लिए पहले की तरह एक ही शहर में मायका होने पर भी रोजरोज वहां जाना मुमकीन न हो पाए, क्योंकि कोरोना में हरकोई आप को कम से कम बाहर निकलने की सलाह देगा. मायके वाले भी नहीं चाहेंगे कि आप कोरोना में ज्यादा आनाजाना करें. ऐसे में ससुराल में रह कर इरिटेट होने और लड़नेझगड़ने के बजाय अपनी कार्यकुशलता और व्यवहारकुशलता दिखा कर घरवालों का दिल जीतें.

इस समय को अपने लिए अवसर की तरह देखें. आप को अवसर मिला है घर में अपनी जगह मजबूत करने और दूसरों के दिलों में अपनी सुंदर छवि बनाने का. एक बार ऐसा हो गया तो फिर जीवन में हमेशा आप को इस का लाभ मिलेगा.

कोरोना की तलवार

आजकल शादी के बाद कोरोना की लटकती तलवार से सब परेशान हैं. जरा सोचिए शादी के बाद आप को गिफ्ट्स खोलने हैं तो कोरोना, कहीं घूमने जाना है तो कोराना, रिश्तेदारों को बुलाना है तो कोराना और कहीं जा कर मनपसंद खाना है तो भी कोरोना की तलवार लटकती मिलेगी. शादी के बाद अकसर रिश्तेदार नवविवाहित कपल्स को अपने यहां खाने पर बुलाते हैं. इस से परिचय के साथ प्यार भी बढ़ता है. मगर अब इन बातों को भूल जाइए. शादी के बाद भी अब आप को अपने हाथों से बना कर भोजन खाना और खिलाना है. रोजरोज शौपिंग या तीजत्योहारों पर पहले की तरह मस्ती भी भूल जाइए.

अब हर वक्त कोरोना की तलवार आप को सिर पर लटकती मिलेगी. ऐसे में आप रिश्तेदारों के साथ व्हाट्सऐप/फोन/जूम मीटिंग्स से जुड़ सकती हैं. शौपिंग का औप्शन खुला हुआ है. खानेपीने का शौक अपने हाथों का जलवा दिखा कर ही पूरा करना होगा. इस का भी अपना मजा है. इसलिए घबराएं नहीं. कोरोनाकाल में शादी के नए मानों को समझें और सबक लें.

ये भी पढे़ं- एक सुखद संदेश

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...