विपक्षी पार्टियों द्वारा जीएसटी पर जोरदार हमले का नतीजा यह हुआ है कि अविश्वास प्रस्ताव के अगले ही दिन सरकार ने बहुत सी चीजों पर जीएसटी की दरें कम कर दीं. रैफ्रीजरेटर, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, मिक्सर ग्राइंडर, हेयर ड्रायर, छोटे टीवी आदि

28% से घट कर 18% पर आ गए. हैंडबैग, पर्स, फोटो फ्रेम, जिप आदि 18% से घट कर 12% हो गए. हैंडलूम, दरी, सस्ते कारपेट पर दरें 12% से कम कर के 5% कर दी गईं. सैनेटरी नैपकिन, फूल झाड़ू, राखी तो जीएसटी से बाहर ही हो गए.

ये सब घरेलू इस्तेमाल की चीजें हैं. अरुण जेटली इन पर शुरू से टैक्स घटाने को तैयार नहीं थे पर अब जब चौतरफा हमला होने लगा और विपक्षी पार्टियां एकसाथ बैठने लगीं तो भाजपा को एहसास हुआ कि फूट डालो और राज करो की नीति के अनुसार वह भारीभरकम टैक्सों को थोप नहीं सकती. औरतों को राहत देना जरूरी समझा गया और अब आमराय कर रहे वित्तमंत्री अरुण जेटली के अब तक के विरोध के बावजूद टैक्स छूट दे दी गई.

बात साफ है, सरकार सही फैसले तभी लेती है जब उसे लगता है कि उस की जान पर बात आ गई है. व्यापारी और घर इस टैक्स के खिलाफ शुरू से ही थे पर सरकार सुन ही नहीं रही थी. सरकार औरतों के बलात्कारों पर भी नहीं सुन रही, देश में डर के माहौल के बारे में नहीं सुन रही, जिस में भगवा दुपट्टा डाले 8-10 लोग सैकड़ों को हड़काने की हिम्मत रखते हैं क्योंकि उन्हें हर राज्य में सरकार से अभयदान मिला हुआ है.

देश में बाबाओं का राज चल रहा है. पाखंड फलफूल रहा है. बात नई तकनीक की की जाती है पर असल में दिल तो पूजापाठ में लगा है, क्योंकि प्रधानमंत्री से ले कर महल्ले तक की सरकारी पार्टी, नेता यज्ञहवन ही करा रहे हैं. उस में पिसती औरतें हैं. उन्हें ही ठेला जाता है कि सोलह शृंगार कर के लंबी लाइनों में लग कर कल्याण के लिए धूर्तों से आशीर्वाद मांगो. जो न करेगा उस की खैर नहीं.

औरतों के लिए विपक्षी पार्टियां कुछ खास चाहे नहीं कर रही हैं पर सरकारी पार्टी पर अब उन का हौआ बैठने लगा है. इस से औरतों को लाभ हो सकता है. जैसे मुसलिम औरतों को 3 तलाक से राहत मिली है शायद हिंदू औरतों को सप्ताह में 3-4 व्रतों, महीने में 3-4 हवनों के सामने बैठने और साल में 3-4 उबाऊ तीर्थयात्राओं से भी मुक्ति मिल जाए.

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