Sonam Garg : मैडिकल लिंकर्स की सह संस्थापक सोनम गर्ग का मानना है कि सही समय पर सही इलाज तक पहुंच किसी की भी जिंदगी बदल सकती है. मैडिकल लिंकर्स की शुरुआत उन के एक सपने से हुई थी. मरीजों और बेहतरीन इलाज के बीच की दूरी को खत्म करने का सपना. आज मैडिकल लिंकर्स दुनियाभर में सब से भरोसेमंद मैडिकल टूरिज्म प्लेटफौर्म्स में से एक है जो लोगों की उचित डाक्टरों, अस्पतालों और इलाज तक पहुंचने में मदद करता है.
मैडिकल लिंकर्स की स्थापना की कहानी बताते हुए सोनम गर्ग कहती हैं कि उन के पिताजी का अचानक निधन हो गया था. उस दुख के समय में उन्होंने देखा कि सही इलाज तक पहुंचना कितना मुश्किल और उलझन भरा हो सकता है खासकर जब उस की सब से ज्यादा जरूरत हो. यह प्रक्रिया थकाने वाली थी, व्यवस्था बिखरी हुई थी और उस ने पहले से ही चल रहे मुश्किल वक्त को और कठिन बना दिया. कुछ महीनों बाद उन की एक करीबी दोस्त ने उन्हें फोन किया. वह भी कुछ ऐसी ही स्थिति से गुजर रही थी. उस पल सोनम के लिए सबकुछ बदल गया. उन्हें एहसास हुआ कि अगर लोगों को सही समय पर सही मार्गदर्शन मिले तो जिंदगियां बचाई जा सकती हैं. अच्छे इलाज तक पहुंच एक विशेषाधिकार नहीं बल्कि हर किसी का हक होना चाहिए और वह इस के लिए कुछ करना चाहती थी.
2015 में सोनम ने इस सोच को हकीकत में बदला और मैडिकल लिंकर्स की नींव रखी. आज भी वे सुनिश्चित करती हैं कि उन के पास आने वाला कोई भी मरीज खुद को खोया हुआ या अकेला न महसूस करे. उन की पहली कौल से ले कर इलाज पूरा होने तक वे मरीजों के साथ रहती हैं. उन की जरूरतों को समझती हैं, हर कदम पर उन का मार्गदर्शन करती हैं और उन्हें सहारा देती हैं.
सोनम को फोर्टिस से बैस्ट इनोवेटर अवार्ड मिला है, बंगलादेश सैंट्रल पुलिस हौस्पिटल से ऐप्रिसिएशन अवार्ड और स्टेलर स्टार अवार्ड फोर्टिस मिला है.
पेश हैं, उन से की गई बातचीत के कुछ अंश:
मैडिकल लिंकर्स के बारे में और बताएं?
मैडिकल लिंकर्स मरीजों के लिए एक जीवनरेखा है. हम लोगों को भारत और विदेश के सब से अच्छे अस्पतालों और डाक्टरों से जोड़ते हैं. यह सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें सब से प्रभावी और किफायती इलाज मिले. मगर हम सिर्र्फ यहीं नहीं रुकते. बाकी मैडिकल टूरिज्म प्लेटफौर्म्स से अलग हम व्यक्तिगत रूप से जुड़े रहते हैं. मैं अपने मरीजों की स्थितियां जानती हूं, उन से खुद संपर्क रखती हूं और यह सुनिश्चित करती हूं कि उन्हें वह देखभाल मिले जिस के वे हकदार हैं. हम अपने कई मरीजों के साथ आज भी संपर्क में हैं. हम उन की खैरियत पूछते रहते हैं क्योंकि वे हमारे लिए माने रखते हैं. इलाज के दौरान जो रिश्ता बनता है वह हमारे लिए माने रखता है. हम हर चीज का ध्यान रखते हैं ताकि मरीज और उन के परिवार सिर्फ ठीक होने पर ध्यान दे सकें.
आप का सब से बड़ा सपोर्ट सिस्टम कौन है?
बिना किसी शक के मेरे पति. वे मेरे लिए हर चीज एक आधार हैं और हमेशा मुझे बेहतर करने में मदद करते हैं. जब मैं ने पहली बार अपना खुद का काम शुरू करने की बात की तो मेरे सासससुर इसे ले कर उलझन में थे. वे चाहते थे कि मैं एक सुरक्षित नौकरी करूं. लेकिन मेरे पति ने मुझ पर भरोसा किया. उन्होंने मुझे याद दिलाया कि मेरे सपने माने रखते हैं और मुझे हिम्मत दी कि मैं यह कदम उठाऊं.
उन के अलावा मेरी मां, मेरा भाई और मेरी टीम मेरे साथ हर कदम पर खड़ी रही. इस क्षेत्र में कई लोगों को मेरी काबिलीयत पर शक था क्योंकि यह पुरुषों का दबदबा वाला क्षेत्र है. लेकिन मेरे अपनों का अटूट विश्वास मुझे आगे बढ़ाता रहा. कुछ भी शुरू से बनाना आसान नहीं होता लेकिन एक सहारा देने वाला परिवार सबकुछ संभव कर देता है.
आप के सफर का कोई भावुक करने वाला पल?
मेरे सफर का एक बहुत भावुक पल एक मरीज के लिवर ट्रांसप्लांट के दौरान का है. उस के परिवार ने उसे इलाज के बीच में ही छोड़ दिया था और वह बिलकुल अकेला था. मैं खुद आईसीयू में उस से मिलने जाती थी और हर बार मुझे देख कर उस का चेहरा खिल उठता था. वह कहता कि बाजी आ गई. उस साधारण से अभिवादन में भरोसा और गरमजोशी थी जिस ने मुझे एहसास कराया कि हम मरीजों की जिंदगी में सिर्फ इलाज से कहीं ज्यादा असर डाल सकते हैं.
एक और ऐसा ही पल कोविड-19 महामारी के दौरान आया जब हम एक बहुत नाजुक ट्रांसप्लांट केस को संभाल रहे थे. पति को ट्रांसप्लांट चाहिए था और उन की पत्नी डोनर थीं. वे भारत से नहीं थे तो हमें ढेर सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा जैसे यात्रा प्रतिबंध, औक्सीजन की कमी. लेकिन हम ने सबकुछ संभाला और ट्रांसप्लांट करवाया. लगा कि सब से मुश्किल दौर पार हो गया लेकिन तभी एक दुखद घटना हो गई. डिस्चार्ज के दिन पति को गंभीर इन्फैक्शन हो गया और उन की मृत्यु हो गई.
यह दिल तोड़ने वाला पल था. उन के 5 बच्चे थे और उस दुख के पल में उन के समुदाय के 8-10 लोग मुझ पर और मैडिकल टीम पर इलजाम लगाने लगे. लेकिन उन की पत्नी आगे आईं और बोलीं कि मुझे सोनम पर भरोसा है. मुझे पता है कि उस ने हमारे परिवार के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ किया. उन के शब्द मेरे लिए सबकुछ थे. यह उस गहरे भरोसे को दिखाता है जो हम अपने मरीजों और उन के परिवारों के साथ बनाते हैं.
सिर्फ इलाज से आगे बढ़ कर हम ने उस परिवार को उस मुश्किल वक्त में सहारा दिया. हम ने बच्चों की देखभाल की, अंतिम संस्कार का इंतजाम किया और उन के अपने देश वापस जाने की व्यवस्था की. ये पल मुझे याद दिलाते हैं कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ इलाज नहीं बल्कि इंसानियत, करुणा और लोगों के सब से मुश्किल वक्त में उन के साथ खड़े होने के बारे में है.
अपने परिवार के बारे में बताएं?
मेरे पति भी एक उद्यमी हैं और हमारी एक प्यारी बेटी है. वह भारत में सब से कम उम्र की मेन्सा सदस्यों में से एक है. वह अभी स्कूल में है और उस की ऊर्जा, जिज्ञासा और उस का सकारात्मक नजरिया मुझे हर दिन प्रेरित करता है. वह मुझे याद दिलाती है कि मैं यह सब क्यों करती हूं क्योंकि हर मातापिता को अपने बच्चों को स्वस्थ और खुशहाल देखने का हक है.
आप को महिलाओं की सब से बड़ी ताकत क्या लगती है?
महिलाओं की सब से बड़ी ताकत है उन की सहनशक्ति. वे इतने सारे किरदार निभाती हैं जैसे बेटी, पत्नी, मां व पेशेवर और यह सब वे एक अद्भुत ताकत के साथ करती हैं. जब एक महिला कुछ ठान लेती है तो उसे कोई नहीं रोक सकता. मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से एक महिला उद्यमी होना आसान नहीं रहा. मेरे सामने सामाजिक अपेक्षाएं, व्यक्तिगत बलिदान, काम, परिवार के बीच संतुलन की चुनौती हमेशा बनी रही. लेकिन मुझे हमेशा यकीन रहा कि हम जो चाहें हासिल कर सकती हैं.
एक महिला को बिजनैस में सफल होने के लिए क्या चाहिए?
आत्मविश्वास, धैर्य और कभी हार न मानने का जज्बा. आप को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जैसे सामाजिक रूढि़यां, आत्मसंदेह, आर्थिक परेशानियां आएंगी लेकिन जो आगे बढ़ते हैं, हालात के हिसाब से ढलते हैं और सीखते रहते हैं वही कामयाब होते हैं. मैं यह भी कहना चाहूंगी कि एक सहारा देने वाला परिवार बहुत जरूरी है. व्यापार किसी के लिए भी आसान नहीं खासकर महिलाओं के लिए क्योंकि उन्हें हमेशा रूढि़वादी भूमिकाओं में बांधा जाता है.