आजकल देर से शादी करने का चलन बहुत बढ़ गया है. पहले लड़की 18-20 साल की हुई नहीं कि उस की गृहस्थी बस जाती थी. लेकिन अब स्थिति बदल गई है. आजकल लड़कियां कैरियर माइंडेड हो गई हैं. वे अब विवाह के बजाय अपने कैरियर को ज्यादा महत्त्व देती हैं. ठीक है, कैरियर बनाना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन प्रकृति ने हर काम के लिए समय निर्धारित किया है. अगर वह उस समयसीमा में हो जाए तो बेहतर वरना सामाजिक असंतुलन होने लगता है.32 वर्षीय मीना से उस की दादी ने पूछा कि अरे मीना शादी कब करेगी, तो वह हंसते हुए बोली कि दादी कर लूंगी. शादी की इतनी भी क्या जल्दी है. शादी तो कभी भी हो जाएगी. लेकिन यह कैरियर बनाने का समय है. प्लीज, दादी अभी मुझे इसी पर फोकस करने दो. बारबार शादी की बातें न किया करो.

मीना का जवाब सुन कर दादी को बहुत गुस्सा आया, लेकिन अपने गुस्से पर नियंत्रण करते हुए वे इतना ही बोलीं कि बेटा तेरी सोच ठीक है, तू पढ़ीलिखी है, लेकिन मेरी एक बात ध्यान से सुन अपनी गांठ बांध ले कि जैसेजैसे तेरी उम्र बढ़ेगी और तू अपनी सहेलियों को अपने बालबच्चों के साथ देखेगी तो तेरे मन में कुंठा भर जाएगी क्योंकि शादी की एक उम्र होती है. कैरियर बनाने के लिए तो पूरी उम्र पड़ी है. मीना ने दादी की बात को एक कान से सुना और दूसरे से निकाल दिया. आज उस की उम्र 45 साल हो गई है. वह शादी करना चाहती है, लेकिन अब उसे अपने मैच का साथी नहीं मिलता. 3 सालों से वह डिप्रैशन की शिकार है. अब उसे दादी की कही बातें याद आती हैं, लेकिन अब वह कर भी क्या सकती है.

विवाह को टालना ठीक नहीं

मीना की तरह बहुत सारी ऐसी लड़कियां हैं, जो कैरियर में आगे बढ़ने के लिए शादी जैसे महत्त्वपूर्ण मसले को टालती रहती हैं. आज आप को अपने आसपास ऐसी बहुत लड़कियां मिल जाएंगी, जिन्होंने अपने कैरियर में आगे बढ़ने के चक्कर में शादी नहीं की और जब शादी करने का मन बनाया तो कोई बेहतर साथी नहीं मिला. ऐसे में या तो तलाकशुदा मिलते हैं या फिर विधुर. सच तो यह है कि कैरियर में कहां तक पहुंचना है, इस की कोई सीमा नहीं है. किसी के लिए जौब करना महत्त्वपूर्ण है, तो किसी के लिए टौप पोजिशन तक जाना. इस बात को कोई नकार नहीं सकता कि किसी भी कंपनी में टौप पोजिशन तक पहुंचने के लिए ऐजुकेशन और काम के प्रति डैडिकेशन के साथसाथ उम्र और अनुभव की भी जरूरत होती है. लेकिन जब तक आप टौप पोजिशन तक पहुंचती हैं तब तक आप की शादी की उम्र निकल चुकी होती है.

खोता है बहुत कुछ

एक समाचारपत्र में चीफ कौपी ऐडिटर के पद पर कार्यरत 48 वर्षीय वैभवी कभी बेहद खूबसूरत होती थीं. शादी के लिए उन के पास कई औफर आए, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. उन का कहना था कि शादी की जिम्मेदारियों की वजह से मैं अपने कैरियर में आगे नहीं बढ़ पाऊंगी. शादी कुछ सालों बाद कर लूंगी. लेकिन अब उन्हें कोई ऐसा नहीं मिल रहा है, जिस से वे शादी कर सकें. विवाह न होने के चलते उन के व्यवहार में बहुत बदलाव आ गया है. हमेशा खुश रहने वाली वैभवी अब बेहद चिड़चिड़ी हो गई हैं. उन के कपड़े पहनने के तरीके में भी काफी बदलाव आ गया है. पहले वे सलवारसूट पहनती थीं, लेकिन अब खुद को कमउम्र दिखाने के लिए अजीबोगरीब कपड़े पहनती हैं, जिन्हें पहने देख कर उन के सहकर्मी पीठपीछे उन का मजाक उड़ाते हैं. अब तो वे डिप्रैशन में भी रहने लगी हैं.

सही उम्र में विवाह न हो पाने के कारण यौन बीमारियों के साथसाथ मां बनने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है. एक एमएनसी में मैनेजर के पद पर कार्यरत अरुणा अपने परिवार वालों की बातों को दरकिनार कर विवाह को टालती रहीं. कैरियर में आगे बढ़ने के चक्कर में उन की उम्र निकलती रही. जब शादी का खयाल आया तो उम्र 40 की हो चुकी थी.उन के एक कलीग की पत्नी की डैथ हो गई, तो कुछ समय के बाद दोनों ने एकदूसरे से विवाह कर लिया. बच्चे के लिए बहुत कोशिश की मगर बच्चा नहीं हुआ, क्योंकि उम्र जो नहीं रह गई थी. मातृत्वसुख से वंचित अरुणा ने अब घर में कुत्ते पाल रखे हैं. अब वे उन्हीं में बच्चों को देखती हैं.

शारीरिक संबंध भी मायने रखते हैं

जैसे ही आप युवा होती हैं मन में किसी साथी की चाह होती है. चाहे कैरियर कितना भी महत्त्वपूर्ण क्यों न हो, लेकिन जवान होने के बाद शारीरिक जरूरतों को नकारा नहीं जा सकता. स्वस्थ और संतुष्ट रहने के लिए भावनात्मक जुड़ाव के साथसाथ शरीरिक जुड़ाव भी जरूरी होता है. अन्यथा आप यौन रोगों और मानसिक कुंठा का शिकार हो जाएंगी. हौस्पिटैलिटी व्यवसाय से जुड़ी प्रीति बेहद महत्त्वाकांक्षी थीं. वे कुछ बड़ा करना चाहती थीं, इसलिए हमेशा अपने विवाह को टालती रहीं. प्रीति का कालेज के जमाने से ही पवन से अफेयर था. पढ़ाई पूरी करने के बाद पवन ने उन से विवाह का जिक्र किया तो वे बोलीं कि इतनी भी क्या जल्दी है कर लेंगे शादी, न तुम कहीं जा रहे हो और न मैं. पवन ने प्रीति की बात मान ली. धीरेधीरे दोनों के बीच भावनात्मक संबंधों के साथसाथ शारीरिक संबंध भी बनने लगे. दोनों एकदूसरे के साथ खुश थे. लेकिन प्रीति की विवाह जल्दी न करने की जिद के चलते पवन ने किसी और से विवाह कर लिया. प्रीति भी पवन को भूल कर जीवन में आगे बढ़ती गईं. इस क्रम में उन के कइयों के साथ संबंध बने और टूटे. अंतत: प्रीति ने अपने एक क्लाइंट से शादी कर ली. लेकिन उन के कइयों के साथ शारीरिक संबंध थे, इस बात का जिक्र उन्होंने कभी अपने पति से नहीं किया.

चाहे लड़का हो या लड़की उन की शारीरिक जरूरतें एकसमान होती हैं. सही समय पर विवाह न कर पाने की वजह से इच्छा की पूर्ति नहीं हो पाती है. कुछ लड़कियां तो परिवार की इज्जत के नाम पर अपनी यौनाकांक्षा को कुछ समय तक तो दबा लेती हैं, लेकिन अपनी विवाहित सहेलियों से शारीरिक सुख की बातें सुन कर उन के मन में भी इच्छा जोर पकड़ने लगती है कि उन का भी किसी के साथ भावनात्मक और शारीरिक संबंध हो. फिर इस इच्छा की पूर्ति के लिए वे अपने बौयफ्रैंड या फिर अपने पुरुष मित्र के भटकावे में आ कर फिजिकल रिलेशन बना लेती हैं. एक बार इस तरह का संबंध बना लेने के बाद उन के मन से झिझक खत्म हो जाती है और वे 1 से ज्यादा लोगों से भी शारीरिक संबंध बना लेती हैं. इस तरह का संबंध विवाह की तरह  वादों और रस्मों से तो जुड़ा नहीं होता है कि इस में ठहराव की उम्मीद की जाए. सच तो यह है कि लड़के चाहे कितने भी मौर्डन क्यों न हों, लेकिन जब विवाह की बात आती है, तो वे ऐसी लड़की से कतई नहीं जुड़ना चाहते, जिस का किसी से फिजिकल संबंध रहा हो. इसलिए बेहतर यही होगा कि भरपूर पारिवारिक, भावनात्मक और शारीरिक सुख के लिए समय पर विवाह कर लें.

जीवन में भर जाती है कुंठा

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. नितिन शुक्ला का कहना है कि जिन लड़कियों की शादी सही उम्र में नहीं हो पाती है वे भले अपने कार्यक्षेत्र में कितनी भी टौप पोजिशन पर क्यों न हों, लेकिन सच तो यह है कि अंदर उन के मन में एक सुखद परिवार और बच्चे की इच्छा छिपी होती है, जिस की वजह से धीरेधीरे उन के अंदर की पौजिटिविटी खत्म होने लगती है, उन के मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं. ऐसी लड़कियां न केवल शारीरिक रूप से बीमार होती जाती हैं वरन मानसिक विकार से भी ग्रस्त होती जाती हैं. सच तो यह है कि शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रहने के लिए यह बेहद जरूरी है कि सही उम्र में शादी हो और जीवनसाथी का प्यार मिले. जो लड़कियां इस बात को नहीं समझती हैं वे या तो स्वच्छंद संबंध बना कर यौनरोगों को निमंत्रण देती हैं या फिर अपनी इच्छाओं को दबा कर कुंठा का शिकार बनती हैं. विवाह के बाद भी कैरियर बन जाता है, लेकिन अगर आप ने कैरियर के लिए विवाह को परे कर दिया तो फिर न केवल शारीरिक तौर पर अस्वस्थ रहेंगी वरन मानसिक तौर पर भी बीमार होंगी और समाज से कटती चली जाएंगी. जिंदगी को खुशनुमा बनाने के लिए समाज और परिवार का महत्त्वपूर्ण योगदान है.

आजकल की हीरोइनें पहले की हीरोइनों की तरह अपने कैरियर के ढलने का इंतजार नहीं करती हैं. वे समय पर विवाह कर के परिवार और मातृत्वसुख का आनंद लेती हैं. सच कहें तो इस से उन के कैरियर पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा. अभिनेत्री काजोल ने उस समय विवाह किया जब वे अपने फिल्मी कैरियर के टौप पर थीें. आज उन के 2 बच्चे हैं और वे अपने परिवार के साथ बेहद खुश हैं. विवाह और बच्चे होने के बाद भी काजोल ने ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘फना’ जैसी हिट फिल्में दी हैं. काजोल की ही तरह माधुरी दीक्षित, ऐश्वर्या राय, शिल्पा शेट्टी, रवीना टंडन आदि हीरोइनों ने समय रहते विवाह कर लिया और आज भी वे अपने कार्यक्षेत्र में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं.

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