जैसा की डर था, अफगानिस्तान में तालिबानियों के लौटते ही औरतों की आजादी छिनने लगी है. अफगान औरतों का दफ्तरों में प्रवेश बंद किया जा रहा है और जिन औरतों ने 20 सालों की ‘आजादी’ में पढ़लिख कर सरकारी व निजी सेक्टर में जगह बनाई थीं, उन्हें अब घरों में बैठने को कहा जा रहा है. महिलाओं का मंत्रालय अब इबादल और सही रास्ता दिखाने वाला दफ्तर बन गया है जहां सिर्फ मर्द है.
तालिबानी ऐसा क्यों कर रहे हैं? इसलिए कि उन का धर्म यह कहता है. पर दुनिया का कौन सा धर्म है जो औरतों को आजादी देता है? ईसाई धर्म मानने वाले आज अफगान औरतों के लिए आंसू बहा रहे हैं पर अभी 200 साल पहले तक वे बाइबल से औरतों को पाठ पढ़ाकर कमरों और घरों में बंद ही कर रहे थे.
हिंदू धर्म की हालत कौन सी अच्छी रही है. राजाराम मोहन राय जैसों के आंदोलन आखिर क्यों हुए थीं. शिव पुराण के पूर्वाद्र्ध में प्रथम खंड का पहला ही अध्याय लें. उस में कुछ मुनियों की सूतजी से भेंट का जिक्र है. ये मुनि शिकायत करते हैं. पुराने धर्म का नाश होने वाला है, उन के भविष्य के वर्णन के अनुसार क्षत्रिय सत्यधर्म से विमुख हो कर स्त्रियों के आधीन हो जाएंगे. स्त्रियां पति से सेवा विमुख हो जाएंगी, अन्य पुरुषों से हंसने बोलने लगेंगी. यह भाव क्या आज छिपे तौर पर मौजूद नहीं है.’
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इस्लामी सिरफरे अगर कट्टर शरिया कानून को थोप पा रहे हैं तो इसलिए कि इन कट्टरों को अपने घरों में अपनी मांओं, पत्नियों या बेटियों से विरोध नहीं सहना पड़ता. धर्म का डर सभी औरतों में गहरे बैठा है. काबुल व कुछ शहरों की औरतों को छोड़ दें तो आम अफगान औरतें दुनिया के अन्य हिस्सों की औरतों की तरह धर्म भीरू हैं. अमेरिका में डोनेल्ड ट्रंप की पार्टी अगर औरतों को गर्भपात का अधिकार नहीं देना चाहती तो इसीलिए कि बाइबल में इस का निषेध है. वहां के रिपब्लिक पार्टी के बहुमत वाले कैलिफोॢनया राज्य ने कानून बनाया है कि गर्भपात पहले 6 सप्ताह में ही कराया जा सकता है और इस कानून पर देश की सुप्रीम कोर्ट ने भी मोहर लगा दी है. यह कौन से तालिबानी फैसले से कम है?
दुनियाभर में धर्मों के नाम पर औरतों पर अत्याचार आज भी हो रहे हैं और जिस पर अत्याचार होता है उस से हमदर्दी तो दूसरी औरतें जताती हैं पर उस के साथ बचाव में साथ खड़ी नहीं होतीं, वे धर्म के ईशारे पर मूक समर्थन करती हैं.
जब तक धर्म को छूट मिलती रहेगी, औरतों को धर्म 100 नहीं 1000 साल पहले के माहौल में ले जाने की कोशिश करता रहेगा. यह डर सब देशों में है. सभी देशों में तालिबानी सोच वालों की कमी नहीं है. अफगानिस्तान में शासक धर्म की नाव पर चढक़र आए है पर कहां धर्म का बोलबाला नहीं है, कहां चर्च, मंदिर, मसजिद, मठ चमचमा नहीं रहे. जहां धर्म की चमक होगी वहां औरतों की आजादी की राख पड़ी होगी.